कोरोनावायरस प्रश्नोत्तरी

एनएचके के विशेषज्ञ नये कोरोनावायरस के संबंध में श्रोताओं से मिले प्रश्नों के उत्तर देंगे।

प्रश्न.503. ओमिक्रोन के नये उप-प्रकार / अंक 5 – संक्रमण के मौजूदा प्रसार पर उनका प्रभाव

उत्तर.503. ओमिक्रोन के नये उप-प्रकार जैसे बीक्यू.1.1 और एक्सबीबी की ख़बरें सामने आ रही हैं। इस शृंखला की अंतिम कड़ी में संक्रामक रोग विशेषज्ञों के विचारों के माध्यम से, जानते हैं जापान में संक्रमण की संभावित अगली लहर पर नये उप-प्रकारों के संभावित असर।

जापान के राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान के शोधकर्ताओं का कहना है कि फ़िलहाल ऐसे कोई प्रमाण नहीं हैं जिनके आधार पर कहा जा सके कि बीक्यू.1.1 या एक्सबीबी से कोविड-19 के गंभीर मामले सामने आ सकते हैं। फिर भी, उनका कहना है कि कुछ अध्ययन हैं जो उप-प्रकारों का शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को चकमा देने की ओर इशारा करते हैं। उनका कहना है कि वे उन पर पैनी नज़र रखना जारी रखेंगे।

जापान में 11 अक्तूबर को नये मामलों का साप्ताहिक औसत लगभग 26,000 था और यह आँकड़ा धीरे-धीरे बढ़कर 22 नवंबर को क़रीब 88,000 तक पहुँच गया।

तोक्यो चिकित्सा विश्वविद्यालय अस्पताल के प्राध्यापक हामादा आत्सुओ का कहना है कि बीक्यू.1 उप-प्रकार को बीए.5 की तुलना में प्रतिरक्षा से अधिक बचने वाला कहा गया है। यहाँ तक कि अगर आप पहले से संक्रमित हो चुके हैं या आपने टीका लगवाया हुआ है, तब भी आपके पुनः संक्रमित होने की संभावना है। अतः यदि सर्दियों में उप-प्रकार फैलता है, तो संभावना है कि संक्रमण मामलों की संख्या बढ़ जाएगी। हामादा का कहना है कि ओमिक्रोन उप-प्रकारों को लक्षित करने वाले टीके अब उपलब्ध हैं, इसलिए लोगों को टीका लगवा लेना चाहिए। उनका कहना है कि चूँकि बीए.5, बीक्यू.1 और एक्सबीबी सभी ओमिक्रोन के उप-प्रकार हैं, इसलिए ओमिक्रोन को लक्षित करने वाले टीके लगवाने से आप उनके विरुद्ध सुरक्षा हासिल कर सकते हैं। वे कहते हैं कि इससे इन सर्दियों में गंभीर मामलों को कम करने में मदद मिलेगी।

उपरोक्त जानकारी 24 नवंबर तक की है।

प्रश्न.502. ओमिक्रोन के नये उप-प्रकार / अंक 4 – क्या नये उप-प्रकारों का आना जारी रहेगा?

उत्तर.502. ओमिक्रोन के बीक्यू.1, बीक्यू.1.1 और एक्सबीबी जैसे नये प्रकार बनने की ख़बरें आ रही हैं तो प्रश्न उठता है कि एक के बाद एक नये उप-प्रकार बनते रहेंगे? इस अंक में जानते हैं इससे संबंधित कुछ जानकारी और विशेषज्ञ की राय।

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ ने 26 अक्तूबर को इन नये उप-प्रकारों में दिखे एक दिलचस्प पहलू का उल्लेख करते हुए बताया कि इनके उभरने के स्थान और समय में विविधता के बावजूद इनमें उत्परिवर्तन समान है। इसे “अभिसारी विकास” कहा जाता है जिसमें अलग-अलग विकसित होने वाले अलग-अलग जीव एक जैसी विशेषताओं के साथ बनते हैं। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि नये उप-प्रकारों में उत्परिवर्तन उस हिस्से में होता है जो मनुष्यों के लिए आवश्यक माने जाते हैं और आगे भी उत्परिवर्तन हो सकता है।

नागासाकि विश्वविद्यालय के विषाणु विज्ञान या वायरोलोजी के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर फ़ुरुसे युकि का कहना है कि दुनिया की आधी आबादी के बारे में कहा जा रहा है कि वह अब ओमिक्रोन से संक्रमित हो चुकी है और इस तरह से अलग-अलग बने उप-प्रकारों ने व्यापक रूप से रोग प्रतिरोधक क्षमता से बचने के लिए सामान्य उत्परिवर्तन प्राप्त कर लिया होगा। उनका कहना है कि कोरोनावायरस पहले ही कई बार उत्परिवर्तित हो चुका है और अब तक यह पता नहीं चल पाया है कि यह मनुष्यों के लिए अनुकूल होगा या फिर उत्परिवर्तित होता चला जाएगा।

उपरोक्त जानकारी 23 नवंबर तक की है।

प्रश्न.501. ओमिक्रोन के नये उप-प्रकार / अंक 3 – नवीनतम उप-प्रकार एक्सबीबी क्या है?

उत्तर.501. विश्व में ओमिक्रोन के नये उप-प्रकारों का संक्रमण फैलने लगा है। इस अंक में जानते हैं कि सिंगापुर और अन्य जगहों पर फैल रहा उप-प्रकार एक्सबीबी के बारे में।

सिंगापुर और भारत में एक्सबीबी उप-प्रकार के कारण कोरोनावायरस के मामले बढ़ रहे हैं।

सिंगापुर के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 9 अक्तूबर तक बीते सप्ताह में पाये गए कोरोनावायरस के मामलों में 54 प्रतिशत में एक्सबीबी संक्रमण था। एक सप्ताह पहले की तुलना में यह संख्या 22 प्रतिशत अधिक हो गयी जिससे स्पष्ट होता है कि एक्सबीबी उप-प्रकार संक्रमण का मुख्य कारण बन गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि अक्तूबर के अंत तक 35 देशों में एक्सबीबी से संक्रमण की पहचान की गयी है।

डब्ल्यूएचओ के एक विशेषज्ञ समूह ने बताया कि हालाँकि एक्सबीबी से संक्रमण का ख़तरा अधिक है लेकिन यह नहीं कह सकते कि ओमिक्रोन के अन्य प्रकारों की तुलना में इस नये उप-प्रकार के कारण रोग की गंभीरता या प्रतिरक्षी तंत्र से बचने का अनुपात अधिक है।

इस विशेषज्ञ समूह ने यह भी कहा कि पुनःसंक्रमण मुख्य रूप से उन्हीं लोगों तक सीमित रहा जिन्हें ओमिक्रोन से पूर्व के दौर में संक्रमण हुआ था। वहीं ऐसे कोई आँकड़े नहीं हैं जो यह पुष्ट कर सकें कि यह उप-प्रकार ओमिक्रोन के अन्य उप-प्रकारों से लड़ने के लिए उत्पन्न प्रतिरक्षी तंत्र से बच सके थे।

सिंगापुर में अक्तूबर-मध्य तक एक्सबीबी मामलों की संख्या उफान पर पहुँचने के बाद घटने लगी है।

तोक्यो चिकित्सा विश्वविद्यालय अस्पताल में प्राध्यापक हामादा आत्सुओ कहते हैं कि सिंगापुर से उसके पड़ोसी देशों में एक्सबीबी संक्रमण का इतना अधिक प्रसार नहीं हुआ है। वह कहते हैं कि जापान में भी इस उप-प्रकार की पहचान हुई है, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है इसलिए इसके प्रसार को लेकर पहले की तुलना में चिन्ता कम है।

उपरोक्त जानकारी 22 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.500. ओमिक्रोन के नये उप-प्रकार / अंक 2 - ओमिक्रोन उप-प्रकार बीक्यू.1 और बीक्यू.1.1

उत्तर.500. ओमिक्रोन के नये उप-प्रकार विश्व में तेज़ी से फैल रहे हैं। इस कड़ी में अमरीका और अन्य जगहों पर फैल रहे ओमिक्रोन के बीक्यू.1 और बीक्यू.1.1 उप-प्रकारों पर एक नज़र।

जापान में इस वर्ष ग्रीष्म ऋतु के दौरान, कोरोनावायरस संक्रमण मामलों की संख्या बढ़ गयी थी, जिनमें से अधिकांश के लिए बीए.5 उप-प्रकार ज़िम्मेदार था। बीक्यू.1, बीए.5 की सतह पर उत्परिवर्तन होने पर बना उप-प्रकार है, और बीक्यू.1.1 की सतह पर एक अतिरिक्त उत्परिवर्तन हुआ है। अमरीका में, 29 अक्तूबर तक एक सप्ताह में सामने आये लगभग 14 प्रतिशत नये मामले बीक्यू.1 उप-प्रकार के थे, जबकि बीक्यू.1.1 उप-प्रकार के 13.1 प्रतिशत नये मामले थे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ का कहना है कि बीक्यू.1.1 और इसके उप-प्रकार अक्तूबर की शुरुआत में 65 देशों में सामने आये थे।

डब्ल्यूएचओ के एक विशेषज्ञ समूह का कहना है कि नये उप-प्रकारों का अनुपात बढ़ रहा है और संभवतः उनके अतिरिक्त उत्परिवर्तनों से ओमिक्रोन के अन्य प्रचलित उप-प्रकार हमारे प्रतिरक्षण तंत्र को चकमा देने में बेहतर हो गये हैं। लेकिन समूह के अनुसार वर्तमान में रोग की गंभीरता में वृद्धि या प्रतिरक्षा तंत्र को चकमा देने में उनका बेहतर होना दर्शाते आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य तौर पर प्रतिरक्षण तंत्र को चकमा देने का मतलब टीकाकरण के बाद संक्रमण की संभावना या पुनः संक्रमण का उच्च जोख़िम है, लेकिन इस बारे में और अधिक जाँच की आवश्यकता है। उनके अनुसार मूल प्रकार और ओमिक्रोन उप-प्रकारों के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करते टीकों की प्रभावकारिता संक्रमण के ख़िलाफ़ कम हो सकती है, लेकिन गंभीर बीमारी से सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

उपरोक्त जानकारी 21 नवंबर तक की है।

प्रश्न.499. ओमिक्रोन के नये उप-प्रकार / अंक 1 – नये उप-प्रकारों का प्रकोप बढ़ा

उत्तर.499. ओमिक्रोन के नये उप-प्रकार विश्व में तेज़ी से फैल रहे हैं। इन शृंखला में हम नये उप-प्रकारों से गंभीर लक्षण विकसित होने के जोखिम और मौजूदा टीकों की प्रभावकारिता के बारे में जानेंगे।

गर्मियों में ओमिक्रोन के बीए.5 उप-प्रकार के कारण जापान में कोविड संक्रमण की सातवीं लहर आयी थी। बीए.5 कुछ समय से विश्व में ओमिक्रोन का मुख्य उप-प्रकार बना हुआ है लेकिन संक्रमण मामलों में उसकी हिस्सेदारी में धीरे-धीरे कमी आ रही है। इस बीच बीक्यू.1, बीक्यू.1.2 और एक्सबीबी जैसे ओमिक्रोन के अन्य उप-प्रकारों से जुड़े संक्रमण मामलों में विश्व में वृद्धि हो रही है।

संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ और तोक्यो चिकित्सा विश्वविद्यालय अस्पताल के प्राध्यापक, हामादा आत्सुओ के अनुसार यह अस्पष्ट है कि नये उप-प्रकारों में से भावी प्रमुख उप-प्रकार कौन होगा। मानव कोशिकाओं के जुड़ने की इन सभी की क्षमता एक जैसी है और वे हमारे प्रतिरोधक तंत्र को चकमा देने में बेहतर हो गये हैं। हामादा का कहना है कि नये उप-प्रकारों के उभरने पर इस बात की सावधानीपूर्वक निगरानी की जानी आवश्यक है कि वे हमारे प्रतिरक्षण तंत्र को चकमा दे सकते हैं या नहीं, साथ ही वे कितने संक्रामक तथा रोगजनक हैं।

उपरोक्त जानकारी 18 नवंबर तक की है।

प्रश्न.498. चार वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण / भाग 8 – विशेषज्ञों के विचार

उत्तर.498. छोटे बच्चों के टीकाकरण की शृंखला की अंतिम कड़ी में आज हम विशेषज्ञों के विचारों पर रोशनी डालेंगे।

हमने दो विशेषज्ञों से छोटे बच्चों के टीकाकरण पर उनके विचार जाने।

नीगाता विश्वविद्यालय के प्राध्यापक साइतो आकिहिको का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए चेहरे का मास्क पहनने और हाथ धोने जैसे निवारक उपाय करना मुश्किल है। उनके अनुसार इस आयु वर्ग के लिए कोविड-19 की शुरुआत को सक्रिय रूप से रोकने और गंभीर बीमारी की संभावना से बचने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र साधन है।

कितासातो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक नाकायामा तेत्सुओ का कहना है कि टीकाकरण के कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं। लेकिन उनके अनुसार टीका न लगवाने से ऐसी जटिल स्थिति पैदा हो सकती है जिससे मृत्यु भी संभव है। उदाहरण के तौर पर, बच्चों को एक्यूट एन्सीफ़ैलोपैथी नामक मस्तिष्क ज्वर और मायोकार्डाइटिस यानि हृदय की पेशियों की सूजन हो सकती है।

नाकायमा का कहना है कि लोगों को टीकाकरण के लाभों और जोख़िमों की तुलना कर वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।

जापान बाल-रोग संस्था भी 6 महीने से 4 साल की उम्र के बच्चों के टीकाकरण की सलाह देता है। संस्था का कहना है कि संक्रमण को रोकने के लाभ, दुष्प्रभावों के जोख़िम से अधिक हैं।

उपरोक्त जानकारी 14 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.497. चार वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण / भाग 7 – संक्रमित हो चुके बच्चों का टीकाकरण और अन्य प्रकार के टीके

उत्तर.497. इस अंक में उन बच्चों के टीकाकरण पर चर्चा होगी जो एक बार संक्रमित हो चुके हैं। इसके अलावा हम विभिन्न प्रकार के टीकाकरण से संबंधित सुरक्षा पहलुओं पर भी नज़र डालेंगे।

विशेषज्ञ पहले संक्रमित हो चुके बच्चों का भी टीकाकरण करने की अनुशंसा करते हैं।

नीगाता विश्वविद्यालय के प्राध्यापक साइतो आकिहिको का कहना है कि हल्के लक्षण होने की स्थिति में संक्रमित हो जाने मात्र से पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं होती। उन्होंने कहा कि यह तथ्य अच्छी तरह से ज्ञात है कि नये कोरोनावायरस के ख़िलाफ़ एंटीबॉडी की मात्रा समय के साथ घट जाती है। साइतो का कहना है कि संक्रमित होने के बाद टीका लगाने से शरीर में पर्याप्त प्रतिरोधक क्षमता सुनिश्चित की जा सकती है। जहाँ तक टीका लगाने के समय का प्रश्न है, उसे लक्षण कम होने के बाद बच्चे का स्वास्थ्य सामान्य होने पर लगाया जा सकता है।

बच्चों का कोविड टीकाकरण, अन्य प्रकार के टीकों के साथ भी किया जा सकता है। एक ही दिन में कोविड और ज़ुकाम का टीका लगवाया जा सकता है। अन्य टीकों और कोविड टीकाकरण में सैद्धांतिक रूप से कम से कम दो सप्ताह की दूरी पर रखी जानी चाहिए।

टीके को प्राथमिकता दी जाए, इस प्रश्न पर प्राध्यापक साइतो ने कहा कि नियमित टीकाकरण का समय पहले से ही तय है। माता-पिता को उस समयावधि का पालन करते हुए कोविड टीकाकरण उसके दो सप्ताह पहले या बाद में करवाना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 11 नवंबर तक की है।

प्रश्न.496. चार वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण / भाग 6 – बच्चों में गंभीर लक्षण

उत्तर.496. जापान में छोटे बच्चों के कोरोनावायरस टीकाकरण के संबंध में चर्चा उन बच्चों की जिनमें कोरोनावायरस संक्रमण के बाद, गंभीर लक्षण पैदा हुए। छोटे बच्चों को टीकाकृत करने की आवश्यकता पर कोई निर्णय लेते समय, आप इस जानकारी का उपयोग कर सकते हैं।

जापान बाल चिकित्सक संगठन के अनुसार कोरोनावायरस से संक्रमित बच्चों में से 95 प्रतिशत से अधिक बच्चों में केवल हल्के लक्षण ही देखने को मिले। लेकिन ओमिक्रॉन प्रकार के प्रसार के बाद, जैसे जैसे संक्रमित होने वाले बच्चों की संख्या बढ़ी, उनमें मृत्यु तथा गंभीर लक्षण वाले मामलों की भी वृद्धि हुई।

राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान ने इस वर्ष जनवरी से अगस्त के बीच, 20 वर्ष से कम आयु के उन 41 लोगों पर अध्ययन किया जिनकी कोरोनावायरस संक्रमण पश्चात मृत्यु हो गयी, जब ओमिक्रॉन प्रकार के मामले सर्वाधिक थे। संस्थान इनमें से 29 मृतकों का विस्तार से अध्ययन कर सका और पाया कि 4 वर्ष और इससे कम आयु के जिन 14 बच्चों की मृत्यु हुई थी, उनमें से 6 को किसी भी प्रकार का कोई रोग नहीं था।

विशेष रूप से 6 महीने से 4 साल तक के बच्चों के गंभीर मामलों का कोई आँकड़ा उपलब्ध नहीं है। लेकिन जापान सघन चिकित्सा संगठन ने, आयु और लक्षण समेत, 20 से कम वर्ष के उन कोरोनावायरस मरीज़ों के आँकड़े एकत्र किये जिनका इस साल मार्च से अगस्त के बीच, जापान में बच्चों के लिए बिस्तर वाले अस्पतालों में इलाज हुआ।

संगठन के अनुसार मध्यम से गंभीर लक्षण वाले कुल 220 रोगियों की सूची थी, जिसका मतलब यह है कि उन्हें ऑक्सीजन पर रखने या कृत्रिम श्वसन यंत्र यानि वेंटीलेटर की ज़रूरत पड़ी। 6 वर्ष या इससे कम आयु के बच्चों का अनुपात 58.6 प्रतिशत था। संगठन का कहना है कि गंभीर लक्षण वाले बहुत से बच्चे गंभीर मस्तिष्क विकृति के शिकार हुए। यह ऐसी अवस्था है जिसमें मस्तिष्क में सूजन और चेतना की समस्या होती है। निमोनिया और शरीर में ऐंठन के मामले भी बहुत अधिक थे।

उपरोक्त जानकारी 10 नवंबर तक की है।

प्रश्न.495. चार वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण / भाग 5 – क्या बच्चों के टीकाकरण से उनकी प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है?

उत्तर.495. अमरीकी दवा कम्पनी फ़ाइज़र द्वारा विकसित टीके से जापान में बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है। टीके के इस नये प्रकार को एमआरएनए टीका कहा गया है। एमआरएनए प्रोटीन को संश्लेषित करने के लिए एक “ब्लू प्रिंट” यानि ख़ाके के रूप में काम करता है। जब किसी व्यक्ति को एमआरएनए टीके की एक ख़ुराक दी जाती है तो व्यक्ति के शरीर की कोशिकाओं के अंदर कोरोनावायरस प्रोटीन का एक हिस्सा बनता है और यही प्रोटीन एंटीबॉडी या रोग-प्रतिकारक बनाने के लिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के कार्य में तेज़ी ले आते हैं।

जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि एमआरएनए विघटित हो जाएगा और मानव शरीर से मिनटों में या कुछ दिनों में बाहर निकल जाएगा। मंत्रालय का यह भी कहना है कि टीके में एमआरएनए को अनुवंशिक गुण रखने वाले मानव डीएनए में नहीं जोड़ा जाएगा। मानव शरीर के डीएनए से स्वयं का एमआरएनए पैदा होता है लेकिन अनुवंशिक गुण तो दूर की बात हैं, एमआरएनए से तो डीएनए ही नहीं बन सकता।

इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी को एमआरएनए टीके की एक ख़ुराक दी जाती है तो ऐसा कोई ख़तरा नहीं है कि एमआरएनए के अनुवंशिक गुण लंबे समय तक शरीर में बने रहेंगे या ये गुण शुक्राणु या अंडाणु के अनुवंशिक कूट तक पहुँचेंगे।

उपरोक्त जानकारी 9 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.494. चार वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण / भाग 4 – इसके गंभीर दुष्परिणाम क्या हैं?

उत्तर.494. चिकित्सकों ने कोविड टीकों के दुर्लभ और गंभीर दुष्परिणाम के रूप में युवा पुरुष, विशेषकर किशोर उम्र से लेकर तीस वर्ष के पुरुषों के हृदय की माँसपेशियों में या हृदय के चारों तरफ़ की झिल्ली में सूजन की जानकारी दी है।

फ़िलहाल, 6 माह से लेकर 4 वर्ष की आयु के बच्चों में हृदय सम्बन्धी इस तरह के गंभीर ख़तरे के बारे में पर्याप्त आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं। हालाँकि, जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार अमरीका में पिछले साल अगस्त से 6 माह से 4 वर्ष की आयु के जिन 6,00,000 बच्चों को फ़ाइज़र का टीका लगा था, उनमें इस तरह की कोई समस्या नहीं देखी गयी।

जापान में 5 से 11 वर्ष के टीकाकृत बच्चों के आँकड़ों में प्रति 10 लाख में से 2 या 3 मामलों में हृदय संबंधी समस्या का संदेह माना जा रहा है।

कितासातो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक नाकायामा तेत्सुओ टीकों के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने बताया कि किशोर और 20 से 29 वर्ष की आयु के युवा पुरुषों की तुलना में छोटे बच्चों में टीकाकरण के बाद इस तरह की हृदय संबंधी समस्या होने का ख़तरा बहुत ही कम है। नाकायामा के अनुसार इस तरह की समस्या अगर कभी होती भी है तो अधिकांश बच्चों के हृदय में बहुत मामुली सूजन देखी जाती है और बच्चे शीघ्र ही पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं।

लेकिन नाकायामा का कहना है कि टीका लगने के कुछ ही दिन बाद अगर किसी बालक को साँस लेने में परेशानी या सीने में दर्द की शिकायत हो तो अभिभावक तुरंत ही उसे डॉक्टर के पास लेकर जाएँ। ये दोनों ही हृदय की माँसपेशियों और उसके चारों तरफ की झल्ली में सूजन के लक्षण माने जाते हैं।

उपरोक्त जानकारी 8 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.493. चार वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण / भाग 3 – टीकाकरण के दुष्प्रभाव क्या हैं?

उत्तर.493. जापान ने अक्तूबर में छः महीने से चार साल की उम्र के बच्चों का कोरोनावायरस टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया। जानते हैं टीकाकरण के दुष्प्रभावों के बारे में।

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश दुष्प्रभाव हल्के से मध्यम और अस्थायी होते हैं, और सुरक्षा संबंधी कोई गंभीर चिंता उत्पन्न नहीं होती।

फ़ाइज़र ने अपने नैदानिक परीक्षणों में टीकाकृत बच्चों में दुष्प्रभावों की जाँच हेतु एक सप्ताह से अधिक समय तक नज़र रखी। इसमें पाया गया कि 2 से 4 वर्ष की आयु के बच्चों में, 5.1 प्रतिशत को औसतन तीन ख़ुराक लगने पर 38 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक का बुखार हुआ। 26.6 प्रतिशत ने थकान, 2.7 प्रतिशत ने उल्टी और 6.5 प्रतिशत ने दस्त की शिकायत की। 6 माह से 1 वर्ष की आयु के बच्चों में, 7.1 प्रतिशत को 38 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक का बुखार हुआ। 21.5 प्रतिशत ने भूख में कमी और 47.4 प्रतिशत ने चिढ़चिढ़ेपन की शिकायत की।

नीगाता विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और टीका विशेषज्ञ, साइतो आकिहिको, का कहना है कि हालाँकि सटीक तुलना मुश्किल है, लेकिन 6 महीने से 4 साल की उम्र के बच्चों में वयस्कों की तुलना में दुष्प्रभाव कम होते हैं। उनका यह भी कहना है कि इस आयु वर्ग में दुष्प्रभावों की आवृत्ति, 5 से 11 वर्ष की आयु के बच्चों या 12 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों से कम या समान होती है।

उपरोक्त जानकारी 7 नवंबर तक की है।

प्रश्न.492. चार वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण / भाग 2 – टीकाकरण के प्रभाव

उत्तर.492. जापान ने अक्तूबर में छः महीने से चार साल की उम्र के बच्चों का कोरोनावायरस टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया। जानते हैं इस आयु वर्ग में टीकाकरण की प्रभावकारिता कितनी है।

माना जा रहा है कि छोटे बच्चों का टीकाकरण, लक्षणों को विकसित होने से रोकने में प्रभावी होगा। दवा कंपनी फ़ाइजर ने 6 महीने से 4 साल की उम्र के बच्चों पर नैदानिक परीक्षण किया। उसमें पाया गया कि जिन बच्चों को टीके की तीन ख़ुराकें दी गयी थीं उनके एंटीबॉडी का स्तर बड़े बच्चों और वयस्कों के नैदानिक परीक्षण के दौरान पाये स्तरों के बराबर था।

ओमिक्रोन प्रकार के प्रकोप के चरम पर कंपनी ने अमरीका और यूरोप में 6 महीने से 4 साल की उम्र के 1,100 से अधिक बच्चों पर भी परीक्षण किया था। बच्चों को आभासी दवा के तौर पर हानिरहित घोल का टीका या फिर वास्तविक टीकों में से कोई एक दिया गया।

संक्रमण की स्थिति की तुलना करने पर पाया गया कि 17 जून 2022 तक, जिन 794 बच्चों को टीका लगाया गया था उनमें से 13 संक्रमित हुए, जबकि आभासी टीका प्राप्त करने वाले 351 बच्चों में से 21 संक्रमित हुए थे। उसके मुताबिक़ टीकों की तीन ख़ुराक़, लक्षणों को रोकने में 73.2 प्रतिशत प्रभावी पायी गई।

अधिकारियों का कहना है कि गंभीर बीमारी की रोकथाम में टीके की प्रभावकारिता का विश्लेषण करने के लिए संक्रमित बच्चों की पर्याप्त संख्या मौजूद नहीं थी।

कितासातो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और टीकों के विशेषज्ञ नाकायामा तेत्सुओ ने लक्षणों का विकास रोकने में टीकों की सफलता को देखते हुए उम्मीद जतायी कि गंभीर बीमारी की रोकथाम में टीके प्रभावी हो सकते हैं। उन्होंने अनुसंधान के आँकड़े में विविधता को स्वीकारते हुए कहा कि 5 से 11 वर्ष की आयुवर्ग के बच्चों में गंभीर बीमारी की रोकथाम हेतु टीके 40 से 80 प्रतिशत प्रभावी बताये गए हैं।

उपरोक्त जानकारी 4 नवंबर तक की है।

प्रश्न.491. चार वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण / भाग 1 – स्पष्टीकरण

उत्तर.491. छः महीने से चार वर्ष के बच्चों के लिए कोविड-19 का सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम अक्तूबर से आरम्भ हुआ है। इस श्रृंखला में जानेंगे कि इतने छोटे बच्चों के लिए टीकाकरण प्रभावी है या नहीं और इससे दुष्प्रभावों का कोई ख़तरा तो नहीं है। पहले टीकाकरण पर विस्तृत जानकारी।

बच्चों के टीकों की निर्माता है अमरीकी औषधि कंपनी फ़ाइज़र। टीके में प्रति ख़ुराक सक्रिय सामग्री की मात्रा वयस्कों के मुक़ाबले 1/10 है और 5 से 11 वर्ष के बच्चों के लिए लगभग एक-तिहाई है। यह पारंपरिक प्रकारों पर आधारित है और इसमें ओमिक्रोन प्रकार से प्राप्त घटक शामिल नहीं हैं।

टीकाकरण निःशुल्क है और पूर्ण रूप से सरकारी ख़र्च पर है।

पूर्ण रूप से टीकाकृत होने के लिए 3 ख़ुराकें लेना ज़रूरी है। पहली ख़ुराक के 3 सप्ताह बाद दूसरी ख़ुराक दी जाती है और उसके बाद कम से कम 8 सप्ताह बाद तीसरी ख़ुराक मिलती है।

सैद्धांतिक रूप से बच्चों का टीकाकरण टिकट नगरपालिका द्वारा मिलेगा, जिससे वे स्थानीय बाल चिकित्सक के क्लीनिक या कुछ स्थानीय सरकारों द्वारा स्थापित सामूहिक टीकाकरण केन्द्र में टीका लगवा सकते हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय भी 6 महीने से 4 वर्ष की आयु के बच्चों के टीकाकरण की सलाह दे रहा है क्योंकि संक्रमण मामलों की संख्या बढ़ रही है, बच्चों में भी गंभीर लक्षण पैदा हो रहे हैं और ओमिक्रोन प्रकार के प्रसार के बीच टीके की प्रभावकारिता तथा सुरक्षा की पुष्टि हो चुकी है। टीकाकरण की बाध्यता नहीं है और न ही कोई जुर्माना है। यह पूरी तरह बच्चों और उनके अभिभावकों पर निर्भर करता है कि वे टीका लगवाना चाहते हैं या नहीं।

यह जानकारी 3 नवंबर तक की है।

प्रश्न.490. कोविड के साथ फ़्लू का भी प्रसार / भाग 7 – संभावित दुहरे प्रकोप से कैसे बचें?

उत्तर.490. कोरोनावायरस और इंफ्लुएंज़ा दोनों ही संक्रामक रोग हैं जो मुख्य रूप से श्वसन प्रणाली को प्रभावित करते हैं। इन दोनों से संक्रमण फैलने का तरीका भी एक जैसा ही होता है इसलिए दोनों बीमारियों के लिए निवारक उपाय भी लगभग एक जैसे ही हैं।

निवारक उपायों में सबसे पहले सलाह दी जाती है कि सभी अपने हाथों और उंगलियों को कीटाणु मुक्त रखने का प्रयास करें। बंद कमरे में होने और किसी से नज़दीक से बात करने जैसी स्थिति में चेहरे को मास्क से ढकें। रेस्त्राँ और मदिरालय जैसे स्थानों को हवादार बनाये रखना भी बहुत महत्त्वपूर्ण है।

दूसरा निवारक उपाय है विद्यालय या काम पर जाने से बचना और साथ ही बुख़ार तथा कुछ अन्य लक्षण होने पर अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचने के प्रयास करना। ऐसी स्थिति में पर्याप्त विश्राम भी बहुत आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने आम लोगों से कोरोनावायरस और इंफ्लुएंज़ा के एक साथ फैलने की स्थिति में संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए ये अत्यावश्यक सावधानी बरतने का आह्वान किया है।

उपरोक्त जानकारी 2 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.489. कोविड के साथ फ़्लू का भी प्रसार / भाग 6 – टीकाकरण से इनसे कैसे बचाव हो सकता है?

उत्तर.489. टीकाकरण की मदद से संक्रमण की इस दुहरी मार से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।

यह सर्वविदित है कि कोरोनावायरस और इंफ़्लुएंज़ा, दोनों के ही टीके संक्रमण से बचाव में प्रभावकारी हैं। वहीं, टीके लगने के बावजूद भी संक्रमित होने पर टीकों के कारण लक्षण गंभीर बनने का ख़तरा बहुत कम हो जाता है।

तोहोकु विश्वविद्यालय के प्राध्यापक ओसाका केन स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि कोरोनावायरस और इंफ़्लुएंज़ा के टीके एकसाथ लगवाने में कोई समस्या नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ चिकित्सा केन्द्र दोनों टीके लगा भी रहे हैं। महत्त्वपूर्ण है कि सर्दियों के आगमन से पहले ही दोनों टीके लगवा लिए जायें।

प्राध्यापक ने सभी से कोरोनावायरस की तीसरी और चौथी ख़ुराक तथा फ़्लू का टीका लगवाने का आह्वान किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय की समिति के प्रमुख वाकिता ताकाजि ने कहा है कि इंफ़्लुएंज़ा तथा कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार को लक्षित टीकाकरण अभियान में तेजी लाना आवश्यक है। ऐसा करने से संक्रमण का प्रसार कम करने और गंभीर रूप से बीमार होनेवाले रोगियों की संख्या कम की जा सकेगी।

उपरोक्त जानकारी 1 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.488. कोविड के साथ फ़्लू का भी प्रसार / भाग 5 – तेज़ बुख़ार होने पर क्या करें?

उत्तर.488. संक्रामक रोग विशेषज्ञ इस साल सर्दियों के मौसम में जापान में कोरोनावायरस और इन्फ़्लुएन्ज़ा, दोनों के एक ही समय में संभावित प्रसार को लेकर चिंतित हैं। आज हम बात करेंगे कि दुहरे प्रकोप के समय बुख़ार आने पर क्या करें।

जापान सरकार ने 13 अक्तूबर को दिशानिर्देश जारी किये थे कि बुख़ार की स्थिति में आपको क्या करना चाहिए। 12 वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, पहले से बीमार व्यक्तियों और बुज़ुर्गों में गंभीर लक्षण विकसित होने का उच्च जोख़िम है। ऐसे लोगों को अस्पताल जाने या डॉक्टर से सम्पर्क करने की सलाह दी जाती है। उन्हें कोरोनावायरस और इन्फ़्लुएंज़ा की जाँच कराने और परिणाम के आधार पर आवश्यक उपचार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

लेकिन जिन लोगों में गंभीर लक्षण विकसित होने का जोख़िम कम है, जैसे कि युवा, उन्हें सरकार द्वारा अधिकृत रोगाणु जाँच किट का उपयोग कर यह पुष्टि करने की सलाह दी जाती है कि वे कोरोनावायरस से घर पर संक्रमित हुए या कहीं और। जाँच परिणाम नकारात्मक होने की स्थिति में उन्हें दूरभाष या ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से अपने पारिवारिक डॉक्टर से परामर्श लेने तथा आवश्यकतानुसार फ़्लू-रोधी दवा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है ।

जाँच परिणाम सकारात्मक होने की स्थिति में, आपको स्वास्थ्य केंद्र में इसकी सूचना दे कर घर पर स्वास्थ्य लाभ लेना चाहिए। लेकिन गंभीर लक्षण उत्पन्न होने पर आप चिकित्सक की सलाह ले सकते हैं।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जाँच किट और बुख़ार से राहत देने वाली दवाएँ अपने पास रखी जाएँ ताकि आप स्वयं बुख़ार का इलाज कर सकें।

उपरोक्त जानकारी 31 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.487. कोविड के साथ फ़्लू का भी प्रसार / भाग 4 – ऐसा होने पर किस तरह की स्थिति बन सकती है?

उत्तर.487. कोरोनावायरस और ज़ुकाम के एक साथ फैलने को लेकर चिंता बढ़ रही है। इस शृंखला की आज की कड़ी में हम जानेंगे कि ऐसा होने पर किस तरह की स्थिति बन सकती है।

इस साल जुलाई से सितंबर तक जापान में संक्रमण की सातवीं लहर का प्रकोप फैला था। लगभग 1.2 करोड़ रोगियों और लगभग 13,500 मौतों के साथ यह अब तक की सबसे बड़ी लहर थी। इस बीच, राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान के अनुमान के मुताबिक़ 2018 के पतझड़ से 2019 के वसंत तक ज़ुकाम रोगियों की संख्या लगभग 1.2 करोड़ थी।

कोरोनावायरस संक्रमण की सातवीं लहर के दौरान, बुखार से पीड़ित रोगियों को देखने वाले दवाखाने रोगियों से भर गये थे। इससे लोगों का चिकित्सा संस्थानों और जन स्वास्थ्य केंद्रों से संपर्क करना मुश्किल हो गया था। कई इलाक़ों में मरीज़ों का अस्पतालों में भर्ती होना मुश्किल हो गया था। यहाँ तक कि गंभीर रूप से बीमार होने के जोखिम वाले लोगों को भी अस्पतालों तक आपातकालीन परिवहन प्राप्त करने में कठिनाई हो रही थी।

विशेषज्ञों को चिंता है कि दुहरा प्रकोप होने पर स्थिति वैसी ही या उससे भी बदतर हो सकती है।

कोविड-19 और ज़ुकाम दोनों में तेज़ बुखार, खाँसी, गले में ख़राश और जोड़ों में दर्द जैसे समान लक्षण दिखते हैं। इसलिए कथित तौर पर, मरीज़ों की जाँच किये बिना यह बताना मुश्किल है कि रोगी कोरोनावायरस पीड़ित है या उसे ज़ुकाम हुआ है। बाह्य रोगी विभाग में ज़ुकाम पीड़ितों के बड़ी संख्या में जुटने से चिकित्सा सेवाओं पर बोझ पड़ सकता है।

तोहो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक तातेदा काज़ुहिरो, सरकार की कोरोनावायरस सलाहकार समिति के सदस्य हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों को यह मानते हुए कि बाह्य रोगी विभाग पर पड़ने वाला बोझ सातवीं लहर की तुलना में कहीं अधिक हो सकता है, सबसे बदतर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 28 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.486. कोविड के साथ फ़्लू का भी प्रसार / भाग 3 – दोनों के एक साथ फैलने की संभावना क्यों है?

उत्तर.486. कोरोनावायरस और ज़ुकाम के एक साथ फैलने को लेकर चिंता बढ़ रही है। आज हम इसकी संभावना पर चर्चा करेंगे।

जापान में 3 वर्षों में ज़ुकाम के पहले प्रकोप की भविष्यवाणी करने वाले संक्रामक रोग विशेषज्ञ निम्नलिखित कारणों का हवाला दे रहे हैं।

सबसे पहले, अमरीका, यूरोप और कई अन्य देशों ने 2022 में वसंत ऋतु से ग्रीष्म ऋतु के बीच कोविड-19 लॉकडाउन ख़त्म करते हुए प्रतिबंधों में ढील देना शुरू कर दी। परिणामस्वरूप, अंतरराष्ट्रीय यात्राओं की संख्या उत्तरोत्तर बढ़ रही है।

अब जापान भी अक्तूबर में प्रवेश प्रतिबंधों में काफ़ी ढील दे चुका है, और बढ़ती संख्या में लोगों के जापान आने से कोरोनावायरस और ज़ुकाम दोनों के प्रसार में आसानी होगी।

साथ ही, जापान में पिछले दो वर्षों में बड़े स्तर पर ज़ुकाम महामारी बन कर नहीं उभरा है। इसका मतलब यह है कि अधिकांश लोगों को वायरस के ख़िलाफ़ प्रतिरोधक क्षमता हासिल नहीं हुई है।

विशेषज्ञों द्वारा जारी एक दस्तावेज़ में चेतावनी दी गयी है कि लोगों में एंटीबॉडी के कम स्तर के कारण गंभीर ज़ुकाम का प्रकोप फैल सकता है।

इन कारणों से, कोविड-19 की संभावित आठवीं लहर के साथ ज़ुकाम इस शीतऋतु में देश में कहर ढा सकता है।

इस बीच, जापान में लोगों का प्रत्यक्ष रूप से मिलना-जुलना महामारी पूर्व स्तर पर पूरी तरह से नहीं लौटा है। इसलिए यह अब भी संभव है कि इस बार स्थिति विगत मौसमों जैसी न बिगड़े।

उपरोक्त जानकारी 27 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.485. कोविड के साथ फ़्लू का भी प्रसार / भाग 2 – पिछले 2 वर्षों में क्या स्थिति रही?

उत्तर.485. संक्रामक रोग विशेषज्ञ इस साल सर्दियों के मौसम में जापान में कोरोनावायरस और इन्फ़्लुएन्ज़ा, दोनों के एक ही समय में संभावित प्रसार को लेकर चिंतित हैं।

कोरोनावायरस महामारी के आरम्भ से, पिछली 2 सर्दियों में कोविड और इन्फ़्लुएन्ज़ा दोनों के एक ही समय में तेज़ी से फैलने की ख़बर सामने नहीं आयी। आइए जानते हैं इसके कारण।

कोरोनावायरस महामारी से पहले, जापान में हर साल सर्दी के मौसम में इनफ़्लुएन्ज़ा का मौसमी प्रसार होता था। स्वास्थ्य अधिकारियों का अनुमान है कि हर वर्ष एक से दो करोड़ लोग इन्फ़्लुएन्ज़ा से संक्रमित हुआ करते थे।

लेकिन कोरोनावायरस आने के बाद से इस आँकड़े में तीव्र गिरावट देखी गयी। जापान के राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान के अनुसार, देश-भर के क़रीब 5,000 चिकित्सा संस्थानों से प्राप्त जानकारी के आधार पर, वर्ष 2020 से 2021 के आरम्भ तक की सर्दियों में इन्फ़्लुएंज़ा से संक्रमित लोगों की संख्या लगभग 14,000 रही और उसके अगले वर्ष की सर्दियों में, लगभग 3,000।

जापान में इन्फ़्लुएंज़ा सर्दियों में फैलता है, लेकिन उष्णकटीबंधीय या उपोष्णकटीबंधीय दक्षिण-पूर्वी एशियाई और अफ़्रीकी देशों की घनी आबादी वाले इलाक़ों में इन्फ़्लुएंज़ा के मामले पूरे साल देखने को मिलते हैं।

माना जाता है कि इन्फ़्लुएंज़ा वायरस, लोगों के साथ सीमा पार कर, अन्य देशों में पहुँचता है। अमूमन जापान में सर्दियों की मौसमी परिस्थितियाँ वायरस के आसानी से फैलने के लिए अनुकूल होती हैं, इसलिए यह तेज़ी से फैलता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछली 2 सर्दियों में जापान में इन्फ़्लुएंज़ा का व्यापक प्रसार इसलिए नहीं देखा गया क्योंकि सीमा नियंत्रण और सामाजिक दूरी जैसे कोरोनावायरस संबंधी प्रतिबंध लागू थे।

उपरोक्त जानकारी 26 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.484. कोविड के साथ फ़्लू का भी प्रसार / भाग 1 – क्यों विशेषज्ञ दुहरी मार की चेतावनी दे रहे हैं?

उत्तर.484. इस वर्ष ग्रीष्म ऋतु के बाद से जापान में कोरोनावायरस संक्रमण के दैनिक नये मामले घट रहे हैं। वायरस संक्रमण का प्रसार रोकने के उद्देश्य से देश में लागू सीमा नियंत्रण भी 11 अक्तूबर से लगभग पूरी तरह से हटा दिये गए हैं। पर्यटन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने देशव्यापी स्तर पर यात्रा सब्सिडी अभियान भी आरंभ किया है। लेकिन संक्रामक रोग विशेषज्ञ इस वर्ष सर्दियों में कोरोनावायरस और इंफ़्लुएँज़ा संक्रमण एकसाथ फैलने की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। आइए जानते हैं संक्रमण के संभावित दुहरे उछाल, इससे निपटने के उपाय तथा सरकार द्वारा इस स्थिति को संभालने के लिए उठाये जा रहे क़दम।

जब से कोरोनावायरस वैश्विक महामारी शुरू हुई है, पिछली 2 सर्द ऋतुओं से कोविड और फ़्लू का संक्रमण एकसाथ नहीं फैला। तो फिर 2022 की सर्द ऋतु और पिछली 2 सर्दियों में क्या अंतर है? इस साल ऐसा क्या हो गया कि दो-दो संक्रमण एकसाथ फैलने की आशंका जतायी जा रही है।

महामारी से निपटने के प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले कुछ विशेषज्ञों ने संक्रमण के पूर्वानुमान के बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति को एक दस्तावेज़ दिया है। इसमें कहा गया है कि अक्तूबर 2022 से मार्च 2023 के दौरान 6 माह की अवधि में कोरोनावायरस और मौसमी फ़्लू के मामलों में एकसाथ उछाल आने की भारी संभावना है।

प्रत्युत्तर में विशेषज्ञ समिति ने कहा कि संक्रमण के इस दुहरे उछाल से निपटने के लिए उचित उपाय आवश्यक हैं।

सरकार की कोरोनावायरस सलाहकार समिति ने 13 अक्तूबर को कोरोनावायरस और फ़्लू की संभावित दुहरी लहर से निपटने की तैयारी के लिए कुछ उपाय तय किये हैं। ये बचाव उपाय इस अनुमान पर आधारित हैं कि कोरोनावायरस के दैनिक मामले 4,50,000 और इंफ़्लुएँज़ा से पीड़ित लोगों की संख्या 3,00,000 प्रतिदिन तक पहुँच जाएगी। इस दुहरी मार के चरम पर संक्रमण के मामले 7,50,000 प्रतिदिन तक पहुँच सकते हैं।

उपरोक्त जानकारी 25 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.483. कोरोनावायरस के ओमिक्रोन उपप्रकारों को लक्षित करते दो प्रकार के टीके / अंक 3 – टीकाकरण की समयसारणी क्या हो?

उत्तर.483. जापान ने अक्तूबर में ओमिक्रोन के बीए.5 उपप्रकार को लक्षित करते कोरोनावायरस टीकों को लगाना शुरू किया है। बीए.1 उपप्रकार को लक्षित करने टीके का इस्तेमाल भी जापान कर रहा है।

ओमिक्रोन के उपप्रकारों को लक्षित करने वाला टीका, 12 वर्ष से उससे अधिक उम्र के वे सभी लोग हासिल कर सकते हैं जिन्हें पारंपरिक टीके की दूसरी ख़ुराक हासिल किये कम से कम 3 महीने बीत चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय का अनुमान है कि इन नये प्रकार के टीकों की पात्रता इस वर्ष लगभग 10 करोड़ लोग हासिल कर लेंगे।

मंत्रालय ने नवंबर के अंत तक देश भर की नगर पालिकाओं को बीए.1 और बीए.5 उपप्रकारों को लक्षित करते फ़ाइज़र के टीके और बीए.1 को लक्षित करते मॉडर्ना टीके की कुल लगभग 9 करोड़ 90 लाख ख़ुराक देने की योजना बनायी है।

इसके अतिरिक्त, कार्यस्थलों पर टीकाकरण के लिए, बीए.1 को लक्षित करते मॉडर्ना टीके की 50 लाख खुराकें तैयार की गयी हैं। वर्षांत और नव वर्ष की छुट्टियों के दौरान संक्रमण की आठवीं लहर की संभावना से निपटने हेतु, मंत्रालय ने टीकाकरण के इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति को निश्चित तौर पर टीका लगाने की पुष्टि की है।

उपरोक्त जानकारी 24 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.482. कोरोनावायरस के ओमिक्रोन उपप्रकारों को लक्षित करते दो प्रकार के टीके / अंक 2 – इनमें से कौन सा टीका प्रभावी है?

उत्तर.482. जापान ने ओमिक्रोन बीए.5 उपप्रकार को लक्षित करते हुए कोरोनावायरस टीकाकरण अक्तूबर में शुरू किया। साथ-साथ वह ओमिक्रोन के बीए.1 उपप्रकार को लक्षित करते टीकों का इस्तेमाल भी कर रहा है।

आपको कौन सा टीका लगवाना चाहिए, बीए.5 के लिए बना टीका या बीए.1 के लिए बना टीका? स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दोनों टीकों में ओमिक्रोन उपप्रकार के घटक मौजूद हैं, और ये टीके पिछले टीकों की तुलना में इन उपप्रकारों के ख़िलाफ़ कहीं अधिक प्रभावी हैं। उसका मानना है कि नवीनतम टीके भावी उपप्रकारों के ख़िलाफ़ भी प्रभावी होंगे। मंत्रालय का कहना है कि क्योंकि दोनों टीकों की प्रभावकारिता की तुलना करने के लिए वर्तमान में आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए जो टीका शीघ्र उपलब्ध हो, जनता को वह लगवा लेना चाहिए।

कितासातो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और टीका विशेषज्ञ नाकायामा तेत्सुओ ने कहा, "सबसे हालिया टीके वर्तमान में प्रचलित वायरस, बीए.5 उपप्रकार से संक्रमण को रोकने में और साथ ही संक्रमित लोगों में लक्षण उभरने से रोकने में कहीं अधिक प्रभावी हैं। बीए.1 और बीए.2 उपप्रकारों के बीच का अंतर उतना बड़ा नहीं है जितना कि पारंपरिक वायरस और पिछले उपप्रकारों के बीच था। बीए.1 उपप्रकार को लक्षित करने वाला टीका गंभीर लक्षणों के विकास को रोकने में उतना ही प्रभावी रहेगा। अगर किसी को बीए.1 टीका लग रहा है तो उसे निश्चिंत होकर टीकाकरण करवा लेने चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 21 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.481. कोरोनावायरस के ओमिक्रोन उपप्रकारों को लक्षित करते दो प्रकार के टीके / अंक 1 – क्या हम टीके का चयन कर सकते हैं?

उत्तर.481. जापान ने ओमिक्रोन बीए.5 उपप्रकार को लक्षित करते हुए कोरोनावायरस टीकाकरण अक्तूबर में शुरू किया। इसके साथ-साथ वह ओमिक्रोन के बीए.1 उपप्रकार को लक्षित करते टीकों का इस्तेमाल भी कर रहा है।
इस शृंखला में हम आपके लिए इन दो प्रकार के टीकों के साथ टीकाकरण की जानकारी प्रदान करेंगे।

जापान का स्वास्थ्य मंत्रालय टीकाकरण की व्यवस्था करने वाली स्थानीय सरकारों से उन टीकों का इस्तेमाल पहले करने का आग्रह कर रहा है कि जिनकी समाप्ति तिथि नज़दीक है। इसका मतलब यह है कि टीकाकरण स्थल पर बीए.5 उपप्रकार को लक्षित करते टीके पहुँचने के बाद भी, बीए.1 उपप्रकार के पहले से मौजूद टीकों को उनकी समाप्ति तिथि के अनुरूप पहले इस्तेमाल किया जाएगा ताकि टीके बर्बाद न हो जाएँ। अब सवाल यह है कि क्या टीका लगवाने वाले लोग यह चुन सकते हैं कि उन्हें कौन सा टीका मिलेगा?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्थानीय सरकारों से कहा है कि टीकाकरण कराने वाले लोगों को टीके का प्रकार बताने या न बताने का निर्णय लेने के लिए वे स्वतंत्र हैं।

मंत्रालय, हालाँकि इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि टीकाकरण योजना के मुताबिक़ प्रत्येक स्थानीय सरकार को अपने निवासियों के टीकाकरण हेतु पर्याप्त टीके दिये जाएँगे। इन टीकों में ओमिक्रोन के बीए.1 और बीए.5, दोनों उपप्रकारों को लक्षित करते टीके शामिल हैं।

उपरोक्त जानकारी 20 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.480. सरलीकृत कोरोनावायरस संक्रमण रिपोर्टिंग प्रणाली / अंक 7 – नयी प्रणाली पर सरकार का रुख़

उत्तर.480. जापान में, कोरोनावायरस मामलों की रिपोर्टिंग के लिए सरलीकृत प्रणाली 26 सितंबर को पूरे देश में लागू हो गयी।

स्वास्थ्य मंत्री कातो कात्सुनोबु ने कोरोनावायरस मामलों की सरलीकृत रिपोर्टिंग प्रणाली के लाभ और हानि के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि "इस प्रणाली को लागू करने वाली नगरपालिकाओं ने अन्य की तुलना में अपनी चिकित्सा तंत्र पर बोझ कम होने की सूचना दी है। लेकिन दूसरी ओर, नयी प्रणाली में संक्रमित लोगों के स्वास्थ्य की स्थिति और संपर्क जानकारी दर्ज किये जाने की आवश्यकता समाप्त कर दी गयी है। रोगी की स्थिति बिगड़ने पर इन आँकड़ों के बिना उचित उपचार मुहैया कराने या अस्पताल में भर्ती होने की व्यवस्था करने में अधिक समय लग सकता है।" कातो ने कहा कि कोरोनावायरस के ख़िलाफ़ उपायों को सुचारू ढँग से लागू करने के लिए उनका मंत्रालय नगर सरकारों के साथ मिलकर काम करते हुए इस प्रणाली में आवश्यकतानुसार सुधार करेगा। .

कोरोनावायरस उपायों के प्रभारी मंत्री यामागिवा दाइशिरो ने कहा कि जापान में पतझड़ और शीतऋतु के दौरान संक्रमण की आठवीं लहर आ सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस दौरान कोरोनावायरस संक्रमण और ज़ुकाम का प्रकोप एक साथ फैल सकता है। उन्होंने ऐसी स्थिति में उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक तैयारी का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "इससे निपटने के तरीकों पर व्यापक चर्चा करते हुए ठोस योजना बनाना होगी।" साथ ही आश्वासन दिया कि वह समय के साथ विशेषज्ञों से सलाह लेते हुए इसके सामाजिक प्रभावों पर विचार करेंगे।

उपरोक्त जानकारी 8 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.479. सरलीकृत कोरोनावायरस संक्रमण रिपोर्टिंग प्रणाली / अंक(6) नयी प्रणाली से जुड़ी चिंताएँ

उत्तर.479. कोरोनावायरस रिपोर्टिंग प्रणाली में परिवर्तन से पहले, स्वास्थ्य मंत्रालय के हर-सिस डाटाबेस पर सभी संक्रमित लोगों की जानकारी दर्ज की जाती थी। इस जानकारी में उनका निवास स्थान, उनमें लक्षण विकसित होने का समय और संक्रमण के संभावित मार्गों का विवरण शामिल होता था। विशेषज्ञ इसका इस्तेमाल करते हुए संक्रमण की सर्वाधिक संख्या वाले स्थान, उसके सामान्य मार्ग और प्रत्येक क्षेत्र में संक्रमण के प्रकोप की गति जैसी जानकारी का विश्लेषण करते थे। सरकार अपने कोरोनावायरस उपायों को इस विश्लेषण के आधार पर ही तैयार करती आयी है।

लेकिन सरलीकृत रिपोर्टिंग प्रणाली के पूरे देश में लागू होने से पहले ही उसे लागू करने वाले प्रीफ़ैक्चरों में डाटाबेस में दर्ज संक्रमित लोगों की संख्या उनकी वास्तविक संख्या से काफ़ी कम हो गयी है।

क्योतो विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर निशिउरा हिरोशि कोरोनावायरस डाटा का विश्लेषण करते आये हैं। उनका कहना है कि नयी प्रणाली के तहत वायरस के प्रजनन दर का तुरंत पता लगाना असंभव हो जाएगा। प्रजनन दर इस बात का सूचक होती है कि एक व्यक्ति कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है। उनका कहना है कि वह अब संक्रमण-रोधी उपायों की प्रभावकारिता और लोगों की आवजाही में हुए परिवर्तन के संक्रमण की स्थिति पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण नहीं कर पाएँगे। निशिउरा ने यह भी कहा कि सरलीकृत प्रणाली के तहत संक्रमित लोगों की टीकाकरण स्थिति की जानकारी दर्ज नहीं की जाएगी जिसके चलते टीकों की प्रभावकारिता और वायरस के ख़िलाफ़ प्रतिरक्षी क्षमता वाले लोगों के अनुपात का अध्ययन करना असंभव हो जाएगा। उनका कहना है कि इस कारण टीकों की बूस्टर ख़ुराक का समय निर्धारित करना मुश्किल हो सकता है।

प्रोफ़ेसर निशिउरा का कहना है कि जानकारी का संग्रह कई स्तरों पर करते हुए यह चर्चा किया जाना आवश्यक है कि इस प्रणाली से किस तरह के जोखिमों का मूल्याँकन संभव है।

उपरोक्त जानकारी 6 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.478. सरलीकृत कोरोनावायरस संक्रमण रिपोर्टिंग प्रणाली / अंक(5) महामारी के प्रति सरकारी प्रतिक्रिया में बदलाव

उत्तर.478. 26 सितंबर से जापान में कोरोनावायरस मामलों की जानकारी देने की व्यवस्था की सरलीकृत प्रणाली देशभर में लागू की गयी। आइए जानते हैं कि महामारी के प्रति जापान सरकार की प्रतिक्रिया में क्या बदलाव आये हैं।

जापान सरकार ने वायरस के प्रमुख उप-प्रकारों और उनकी विशेषताओं में परिवर्तन सहित टीकाकरण में प्रगति को देखते हुए, कोरोनावायरस महामारी पर अपनी नीति परिवर्तित की है। उदाहरण के लिए सरकार ने अपनी नीति में एक बदलाव यह किया कि बिना लक्षण वाले रोगी घर पर ही स्वास्थ्य-लाभ ले सकते हैं। परिस्थितियाँ बदलने पर घर से बाहर जाने और व्यावसायिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबंधों की भी सरकार ने समीक्षा की।

जापान में प्रमुख रूप से जब ओमिक्रॉन उप-प्रकार फैला, तब सरकार ने नये प्रतिबंध न लगाने का फैसला किया। ऐसा इसलिए क्योंकि विशेषज्ञों ने पाया कि ओमिक्रोन प्रकार में, युवाओं में गंभीर लक्षण पैदा होने का जोखिम कम था और संक्रमण मुख्य रूप से घरों, स्कूलों और बुज़ुर्गों के देखभाल केंद्रों में फैल रहा था, न कि मदिरालयों और भोजनालयों में। सरकार ने सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को जारी रखते हुए, संक्रमण को फैलने से रोकने का लक्ष्य रखा।

तब से जापान ने ओमिक्रॉन प्रकार को लक्षित करने वाले टीकों को लगाना शुरू किया है और इस बीच दुनिया भर में कई देश धीरे-धीरे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को महामारी पूर्व स्तर पर ला रहे हैं। इन घटनाक्रमों ने सरकार को जानकारी देने की व्यवस्था को सरल बनाने, बुज़ुर्ग तथा अन्य उच्च-जोखिम वाले लोगों पर चिकित्सा संसाधन केंद्रित करने, रोगियों की संगरोध अवधि घटाने और विदेशी आगंतुकों के लिए प्रवेश प्रतिबंधों में ढील देने के लिए प्रेरित किया।

सरकार का कहना है कि संक्रमण का दुबारा प्रसार होने पर भी, वह देश के चिकित्सा तंत्र और जन स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन जारी रखते हुए, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों के वर्तमान स्तर को बनाये रखने की योजना बना रही है। विशेषज्ञों की राय और संक्रमण की वैश्विक स्थिति को देखते हुए, सरकार कोरोनावायरस के संग सह-अस्तित्व के लिए संक्रमण-रोधी नीति की समीक्षा करती रहेगी।

उपरोक्त जानकारी 5 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.477. सरलीकृत कोरोनावायरस संक्रमण रिपोर्टिंग प्रणाली / अंक(4) इससे जन स्वास्थ्य केन्द्रों पर बोझ कितना कम होगा?

उत्तर.477. तोक्यो स्थित एक जन स्वास्थ्य केन्द्र के प्रमुख बता रहे हैं कि इस नयी प्रणाली से चिकित्सा संस्थानों और जन स्वास्थ्य केन्द्रों पर काम का बोझ कम हुआ है या नहीं।

माएदा हिदेओ तोक्यो के किता वार्ड स्थित जन स्वास्थ्य केन्द्र के प्रमुख हैं। वह कोरानावायरस के लिए सरकार की विशेषज्ञ समिति के सदस्य भी हैं।

उन्होंने कहा कि संक्रमण की 7वीं लहर में इतनी बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हुए कि सभी लोग चिकित्सक के पास जाँच के लिए नहीं जा सके। उनके अनुसार रिपोर्टिंग प्रणाली के सरलीकरण से एक फ़ायदा यह हुआ कि अब बुज़ुर्ग और किसी अन्य रोग से पीड़ित लोग अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों में आसानी से जा सकते हैं।

जन स्वास्थ्य केन्द्रों पर अतिरिक्त काम का बोझ कम होने के विषय में माएदा कहते हैं कि इससे सरल काम बहुत ही कम हो जाएगा। हल्के लक्षण वाले रोगियों के पंजीकरण की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी, लेकिन किसी भी रोगी की स्थिति बिगड़ने और उसकी देखरेख की आवश्यकता होने पर केन्द्रों को उसकी संपूर्ण जानकारी ढूँढ़ने जैसे जटिल काम बढ़ जाएँगे। अतः वह नहीं कह सकते कि काम का बोझ वास्तव में कम हुआ है या नहीं।

सरलीकृत व्यवस्था के तहत जिन लोगों के संक्रमण की विस्तृत रिपोर्ट दर्ज नहीं है, वे ‘आगे की जाँच से सम्बद्ध स्वास्थ्य केन्द्रों’ में अपना नाम पंजीकृत करवा सकते हैं। घर में ही इलाज के दौरान उनकी स्थिति बिगड़ने पर वे केन्द्र से सम्पर्क कर, परामर्श ले सकते हैं, जहाँ उन्हें बताया जायेगा कि वे किस अस्पताल में जाएँ।

तोक्यो में 64 वर्ष या उससे कम आयु के संक्रमित लोग सहायता प्राप्त करने के लिए तोक्यो महानगर सरकार की व्यवस्था में ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं।

लेकिन किता वार्ड के माएदा कहते हैं कि जिन लोगों को ऑनलाइन पंजीकरण करवाने में समस्या होती है, वे बेझिझक स्वास्थ्य केन्द्रों से सम्पर्क कर सकते हैं और अस्पताल या किसी क्लिनिक में जाँच के लिए जा सकते हैं।

उपरोक्त जानकारी 4 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.476. सरलीकृत कोरोनावायरस संक्रमण रिपोर्टिंग प्रणाली / अंक(3) हल्के लक्षण वाले रोगियों का हिसाब रखना

उत्तर.476. कोरोनावायरस मामलों की सरलीकृत रिपोर्टिंग प्रणाली 26 सितंबर से प्रभावी हो चुकी है।

रिपोर्टिंग प्रणाली में बदलाव और इससे जुड़ी चिंताओं से जुड़ी शृंखला में जानते हैं कि हल्के या बिना लक्षण वाले रोगियों की जानकारी कैसे रखी जा रही है।

सरलीकृत प्रणाली के तहत स्व-परीक्षण में संक्रमित पाये जाने वाले हल्के या बिना लक्षण वाले रोगी “स्वास्थ्य सूचना केंद्रों” में पंजीकरण करवा सकेंगे और बिना किसी चिकित्सालय में परामर्श किये घर पर रहकर स्वास्थ्य लाभ ले सकेंगे।

ये लोग अपने घर से अलग रहवास या घर पर खाना पहुँचाने की सेवा के पात्र होंगे। घर पर रहकर स्वास्थ्य लाभ लेते हुए तबीयत बिगड़ने पर यह लोग स्वास्थ्य सूचना केंद्रों से संपर्क या परामर्श कर सकेंगे जिसके बाद उन्हें किसी चिकित्सालय में भेजा जाएगा।

जन स्वास्थ्य केंद्र अब पहले की तरह लोगों की स्थिति पर नज़र नहीं रख सकेंगे जिसको देखते हुए घर पर स्थिति बिगड़ने की स्थिति में रोगियों को तुरंत किसी चिकित्सा संस्थान से जोड़ने के लिए अधिकारी प्रयास तेज़ करेंगे।

अब अधिकारियों के सामने सूचना केंद्रों और अन्य सहायक सुविधाओं की संपर्क सूचनाएँ फैलाने और लोगों से स्व-संगरोध का आग्रह करने जैसे संक्रमण रोकथाम उपायों को प्रोत्साहन देने की चुनौती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि रिपोर्टिंग प्रणाली का सरलीकरण सामूहिक संक्रमण को पहचानना कठिन बनाएगा। मंत्रालय प्रीफ़ैक्चरों से आग्रह कर रहा है कि वे वृद्ध देखभाल सुविधाओं और अन्य उच्च-जोखिम संस्थानों में वायरस प्रसार को रोकने के उपाय जारी रखें।

उपरोक्त जानकारी 3 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.475. सरलीकृत कोरोनावायरस संक्रमण रिपोर्टिंग प्रणाली / अंक(2) रोगियों की संख्या का हिसाब कैसे रखें?

उत्तर.475. कोरोनावायरस मामलों की सरलीकृत रिपोर्टिंग प्रणाली 26 सितंबर से प्रभावी हो चुकी है। रिपोर्टिंग प्रणाली में हुए बदलावों और उनसे जुड़ी चिंताओं को जानने की शृंखला के इस अंक में नये संक्रमित लोगों की संख्या के आँकड़े रखने के तरीके पर चर्चा।

कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकोप के प्रसार के चलते, चिकित्सा संस्थानों पर बोझ को कम करने और बुज़ुर्गों तथा उच्च जोखिम वाले अन्य रोगियों के लिए चिकित्सा देखभाल सुलभ बनाने हेतु जापान सरकार ने कोरोनावायरस मामलों की सरलीकृत रिपोर्टिंग प्रणाली शुरू की है।

"हर-सिस" नामक सरकारी प्रणाली के माध्यम से चिकित्सा संस्थान, लोक स्वास्थ्य केंद्रों को सभी रोगियों के नाम और उनमें लक्षण विकसित होने का समय तथा उनकी संपर्क जानकारी जैसे अन्य विवरण मुहैया कराते हैं। इस नयी प्रणाली के तहत, संस्थानों को 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों तथा अस्पताल में भर्ती होने वाले रोगियों जैसे केवल उच्च जोखिम वाले रोगियों की जानकारी देना अनिवार्य होगा।

"हर-सिस" प्रणाली में आगे भी सभी आयु वर्ग के रोगियों की कुल संख्या की जानकारी मौजूद रहेगी भले ही वे उच्च जोखिम वाले रोगी हों या न हों।

साथ ही, लोगों को घर पर ही स्वस्थ होने में मदद करने के लिए कई कद़म उठाये गए हैं। उदाहरण के लिए, इंटरनेट पर कोरोनावायरस की एंटीजन जाँच किट की बिक्री पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया गया है। प्रिफ़ैक्चर सरकारों ने स्वास्थ्य सहायता केंद्र शुरू करते हुए ओमिक्रोन प्रकार को लक्षित टीकाकरण शुरू कर दिये हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि ये उपाय भविष्य में वायरस के प्रसार को रोकने में मदद करेंगे।

यह जानकारी 30 सितंबर तक की है।

प्रश्न.474. सरलीकृत कोरोनावायरस संक्रमण रिपोर्टिंग प्रणाली / अंक (1) किन पहलुओं का सरलीकरण हुआ है?

उत्तर.474. कोरोनावायरस मामलों की सरलीकृत रिपोर्टिंग प्रणाली 26 सितंबर से प्रभावी हो चुकी है। इसके तहत, देशभर के चिकित्सा संस्थानों को अब केवल गंभीर रूप से बीमार होने के उच्च जोखिम वाले रोगियों का ही विवरण सरकार को देना होगा।

इस शृंखला में जानेंगे रिपोर्टिंग प्रणाली में हुए बदलावों और उनसे जुड़ी चिंताओं को। पहले अंक में रिपोर्टिंग प्रणाली के सरलीकरण पर एक नज़र।

चिकित्सा संस्थानों पर बोझ कम करने के लिए, केंद्र सरकार ने अपनी रिपोर्टिंग आवश्यकता को निम्नलिखित श्रेणियों तक सीमित कर दिया है:
• 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोग।
• ऐसे व्यक्ति जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है।
• गर्भवती महिलाएँ और गंभीर बीमारी के उच्च जोखिम वाले अन्य लोग।

इन श्रेणियों से इतर संक्रमण मामलों में चिकित्सा संस्थानों को केवल उनकी कुल संख्या और आयु वर्ग का विवरण देना आवश्यक होगा।

पारंपरिक रिपोर्टिंग प्रणाली के तहत चिकित्सा संस्थानों को एक सरकारी कंप्यूटर तंत्र में सभी संक्रमित लोगों का विवरण दर्ज करना अनिवार्य था। सरलीकृत प्रणाली अपनाने वाले प्रिफ़ैक्चरों ने अपने चिकित्सा संस्थानों पर बोझ कम होने की पुष्टि की है।

लेकिन चिकित्सक और अन्य विशेषज्ञ ऐसी व्यवस्था क़ायम करने की आवश्यकता ज़ाहिर कर रहे हैं जिसके तहत हल्के रूप से बीमार रोगी अपनी स्थिति बिगड़ने पर जल्द चिकित्सकीय परामर्श ले सकें।

केंद्र सरकार ने प्रिफ़ैक्चर के अधिकारियों से इस तरह की व्यवस्था क़ायम करने और हल्के लक्षणों वाले रोगियों समेत सभी रोगियों से निश्चित समय के लिए आत्म-संगरोध का आह्वान करने के निर्देश दिये हैं।

उपरोक्त जानकारी 29 सितंबर तक की है।

प्रश्न.473. आत्म-संगरोध अवधि में कटौती - जोखिम और सतर्कता / भाग 5. संक्रमण के जोखिम घटाना

उत्तर.473. 7 सितंबर से जापान सरकार ने कोरोनावायरस रोगियों के लिए आत्म-संगरोध की अवधि 10 दिन से घटाकर 7 दिन कर दी है। जानते हैं संक्रमण फैलने का जोखिम कम करने के आवश्यक क़दम।

स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के प्रमुख वाकिता ताकाजि ने कहा कि स्वरोपित संगरोध की अवधि घटाये जाने के बाद, संक्रमण के जोखिम के बारे में जनता को आगाह करना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि हम सभी को वायरस-रोधी उपाय करने चाहिए और जोखिम कम करने की दिशा में क़दम उठाने चाहिए।

बैठक में भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने ज़ोर देकर कहा कि कोरोनावायरस से संक्रमित लोग 10वें दिन तक संक्रमण का प्रसार कर सकते हैं। उन्होंने बाहर जाते समय संक्रमण रोकथाम के उपाय करने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य कर्मियों और वृद्ध देखभाल केन्द्रों के कर्मचारियों सहित दैनिक आधार पर उच्च जोखिम वाले लोगों के संपर्क में आने वाले लोगों से अतिरिक्त सावधानी बरतने का आग्रह किया। विशेषज्ञों ने कहा कि इन लोगों को काम पर लौटने से पहले यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि वे ठीक हो चुके हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश भर की नगरपालिकाओं से भी आग्रह किया है कि वे वायरस से संक्रमित अपने निवासियों से कहें कि वे 10वें दिन तक एहतियात बरतना न छोड़ें। अपनाये जाने वाले उपायों में शरीर का तापमान मापने जैसी स्वास्थ्य संबंधी जाँच, उच्च जोखिम वाले लोगों जैसे बुज़ुर्गों के साथ संपर्क से बचना और ग़ैर-ज़रूरी कारणों से उनके केंद्रों में जाने से परहेज़, उच्च जोखिम वाले ऐसे स्थानों और सभाओं से दूर रहना जहाँ खाना-पीना हो, और मास्क पहनना शामिल है।

स्वरोपित संगरोध की अवधि घटा दी गयी है, लेकिन कोरोनावायरस की विशेषताओं से इसका कोई संबंध नहीं है।

इस बात को ध्यान में रखते हुए क़दम उठाने होंगे कि वायरस के प्रसार का ख़तरा 7वें दिन के बाद भी बना रहता है।

उपरोक्त जानकारी 28 सितंबर तक की है।

प्रश्न.472. आत्म-संगरोध अवधि में कटौती - जोखिम और सतर्कता / भाग 4. विशेषज्ञों की राय

उत्तर.472. 7 सितम्बर से जापान सरकार ने कोरोनावायरस रोगियों की आत्म-संगरोध की अवधि घटाकर 10 दिन के बजाय 7 दिन की कर दी है। इस निर्णय के वैज्ञानिक और सुरक्षा पहलुओं के अंतर्गत जानते हैं विशेषज्ञों की राय।

7 सितम्बर को हुई स्वास्थ्य मंत्रालय की बैठक में संगरोध की अवधि में कटौती को लेकर विशेषज्ञों की राय में मतभेद था।

इस निर्णय से सहमत विशेषज्ञों के अनुसार अब सर्वविदित है कि किसी रोगी में संक्रमण के लक्षण उभरने के बाद 7 दिन तक वायरस सबसे ज़्यादा संक्रामक रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चिकित्सीय और सामाजिक कार्यों के सुचारू रूप से चलते रहने के लिए यह क़दम लेना ज़रूरी है।

वहीं, इस कदम का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि इसके जोखिम के आकलन पर विचार-विमर्श नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि संगरोध अवधि ऐसे समय घटाई जा रही है जब संक्रमण का ख़तरा 10 प्रतिशत से अधिक है, ऐसे में, वैज्ञानिक स्तर पर इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों और वृद्धाश्रमों के लिए संगरोध अवधि नहीं घटानी चाहिए।

क्योतो विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर निशिउरा हिरोशि ने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि 8वें दिन के बाद वायरस-रोधी उपायों का पालन कितनी कड़ाई से किया जा रहा है उसके आधार पर प्रत्येक परिस्थिति में बहुत अंतर हो सकता है। ऐसे में संक्रमण की स्थिति के बारे में गणनात्मक आँकड़े देना कठिन है। लेकिन उन्होंने कहा कि वायरस की प्रजनन दर यानि एक रोगी कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है, वह बढ़ जाएगी। निशिउरा ने कहा कि फलस्वरूप, संक्रमण की अगली लहर आने पर रोगियों की संख्या पहले की तुलना में अधिक तेज़ी से बढ़ेगी जिससे चिकित्सा सेवा पर दबाव बढ़ेगा और एम्बुलेंस बुलाना अधिक मुश्किल हो जाएगा।

उपरोक्त जानकारी 27 सितम्बर तक की है।

प्रश्न.471. आत्म-संगरोध अवधि में कटौती - जोखिम और सतर्कता / भाग 3. 8वें दिन के बाद संक्रमण का जोखिम

उत्तर.471. जापान सरकार ने 7 सितंबर से कोरोनावायरस रोगियों की आत्म-संगरोध की अवधि 10 दिन से घटाकर 7 दिन कर दी है। इस शृंखला में हम बात कर रहे हैं उन आँकड़ों की, जो इस निर्णय का आधार हैं। जानते हैं 8वें दिन के बाद संक्रमण का जोखिम।

जापान के राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान द्वारा नवंबर 2021 से जनवरी 2022 के बीच करवाये गए एक सर्वेक्षण ने, जिसकी चर्चा पिछले अंक में भी हुई थी, इस बात का पता लगाया कि लक्षण विकसित होने वाले लोगों में कितनी अवधि तक वायरस की मौजूदगी की पुष्टि हुई। लक्षण आरंभ होने वाले दिन को दिवस 0 मानते हुए दिवस 1 पर 96.3 प्रतिशत, दिवस 4 पर 60.3 प्रतिशत, तथा दिवस 7 पर 23.9 प्रतिशत लोगों में वायरस की पुष्टि हुई। यह दिवस 8 पर गिरकर 16.0 प्रतिशत, दिवस 9 पर 10.2 प्रतिशत और दिवस 10 पर 6.2 प्रतिशत रह गया। इसके बाद यह इसी प्रकार गिरते हुए, दिवस 11,12,13 और 14 पर क्रमशः 3.6, 2.0, 1.1 और 0.6 प्रतिशत हो गया।

दूसरे शब्दों में कहें तो नये नियम के तहत आठवें दिन अपना आत्म-संगरोध समाप्त करने वाले 10 प्रतिशत से अधिक लोगों में वायरस की पुष्टि हुई।

क्योतो विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर निशिमुरा हिरोशि ने 7 सितंबर को विशेषज्ञों की एक बैठक में अमरीका के हावर्ड विश्वविद्यालय सहित एक समूह के अध्ययन के नतीजों को प्रस्तुत किया। नतीजे दर्शाते हैं कि दिवस 5 पर 50 प्रतिशत से अधिक तथा दिवस 8 पर 25 प्रतिशत लोगों में वायरस की पुष्टि हुई थी। निशिमुरा आगाह करते हैं कि लक्षण विकसित होने के कुछ दिनों बाद तक वायरस के संचरण का जोखिम रहता है।

उपरोक्त जानकारी 26 सितंबर तक की है।

प्रश्न.470. आत्म-संगरोध अवधि में कटौती - जोखिम और सतर्कता / भाग 2. वैज्ञानिक आधार

उत्तर.470. जापान सरकार ने 7 सितंबर से कोरानावायरस रोगियों के लिए आत्म-संगरोध अवधि घटा दी है। आइए जानते हैं उसका वैज्ञानिक और सुरक्षा आधार।

लक्षणों वाले लोगों के लिए आत्म-संगरोध अवधि को 10 दिनों से घटाकर 7 दिन कर दिया गया है। इस निर्णय के पीछे के आँकड़े जानते हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति की 7 सितंबर की बैठक में लक्षणों वाले 59 कोरोनावायरस रोगियों का वायरस डाटा पेश किया गया था।

लक्षण पैदा होने वाले दिन की गिनती शून्य से शुरू किये जाने पर, 7वें से 13वें दिन तक वायरस की मात्रा, तीसरे दिन की मात्रा की तुलना में लगभग छः गुणा कम पायी गई। यह आँकड़ा नवंबर 2021 और जनवरी 2022 के बीच जापान के राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान द्वारा किये गए एक अध्ययन पर आधारित है। ग़ौरतलब है कि उस दौरान देश में संक्रमण का बीए.2 उपप्रकार फैल रहा था।

शोधकर्ताओं का कहना है कि हालाँकि रोगियों में 7 दिन के बाद भी वायरस मौजूद रहता है लेकिन बीमारी को दूसरों तक पहुँचाने के जोखिम की संभावना कम हो जाती है।

उपरोक्त जानकारी 23 सितंबर तक की है।

प्रश्न.469. आत्म-संगरोध अवधि में कटौती - जोखिम और सतर्कता / भाग 1. पिछले नियमों में बदलाव

उत्तर.469. जापान सरकार ने 7 सितंबर से कोरोनावायरस रोगियों के लिए आत्म-संगरोध अवधि घटाने समेत अन्य प्रतिबंधों में ढील दी है। जो लोग संक्रमित पाये गए हैं उन्हें अब 10 दिनों की जगह 7 दिनों का संगरोध करना होगा।

इस शृंखला में हम नये नियमों के वैज्ञानिक आधार, सुरक्षा आधार और विशेषज्ञों के विचार जानेंगे।

7 सितंबर से आत्म-संगरोध के नये नियम निम्नलिखित हैं -

• लक्षण वाले लोग
लक्षण विकसित होने के 8 दिन बाद आत्म-संगरोध अवधि समाप्त हो जाएगी बशर्ते लक्षणों में सुधार के बाद से कम से कम 24 घंटे बीत चुके हों।

• लक्षणरहित लोग
प्रारंभिक जाँच के 6 दिन बाद आत्म-संगरोध अवधि समाप्त हो जाएगी बशर्ते 5वें दिन जाँच में संक्रमण न पाया जाए। हालाँकि, बुज़ुर्गों के संपर्क में आने वाले या दूसरों के साथ भोजन करने वाले लोगों को व्यापक संक्रमण-रोधी उपाय करने चाहिए। जिन लोगों में वायरस के लक्षण पाये गए हैं वे उनके विकसित होने के बाद 10 दिनों तक और लक्षणरहित लोग 7 दिनों तक अन्य लोगों में संक्रमण फैला सकते हैं।

• अस्पताल में भर्ती मरीज़ और देखभाल केंद्रों में रह रहे बुज़ुर्ग
उनके लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। लक्षण विकसित होने के 11 दिन बाद आत्म-संगरोध अवधि समाप्त हो जाएगी, बशर्ते लक्षणों में सुधार के बाद से कम से कम 72 घंटे बीत चुके हों।

उपरोक्त जानकारी 22 सितंबर तक की है।

प्रश्न.468. कोरोनावायरस-रोधी दवाओं पर नवीनतम जानकारी /भाग 4 - मूल रूप से अन्य रोगों के उपचार के लिए विकसित दवाएँ

उत्तर.468. इस शृंखला में हम कोविड-19 की दवाओं और उपचारों की नवीनतम जानकारी देते हुए उनकी प्रभावकारिता के बारे में भी बता रहे हैं। इस अंक में हम उन दवाओं पर चर्चा करेंगे जिनका विकास मूल रूप से अन्य बीमारियों के इलाज के लिए किया गया था।

वायरस-रोधी दवा रेमडेसिविर सबसे पहले इबोला के इलाज के लिए विकसित की गयी थी। मई 2020 में जापान में कोरोनावायरस रोगियों के आपातकालीन उपयोग के लिए स्वीकृत होने वाली यह पहली दवा थी। शुरुआत में इसका इस्तेमाल उन रोगियों के इलाज के लिए किया गया था जो मध्यम या गंभीर रूप से बीमार थे। मार्च 2022 में, स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसके उपयोग का दायरा बढ़ाते हुए इसका इस्तेमाल, हल्के या मध्यम लक्षणों वाले उन रोगियों के लिए भी करना शुरू किया जिनमें गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा है।

जुलाई 2020 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोनावायरस रोगियों के इलाज के लिए स्टेरॉयड दवा डेक्सामिथासोन को बढ़ावा दिया। तब तक, इस दवा का उपयोग मुख्य रूप से गंभीर निमोनिया या गठिया के रोगियों के लिए किया जाता रहा था। तत्पश्चात, इसका उपयोग उन रोगियों के लिए किया जाने लगा जिनमें निमोनिया होने के बाद कोविड के मध्यम या गंभीर लक्षण दिखायी देने लगे और ऑक्सीजन चढ़ाने की आवश्यकता पड़ने लगी।

अप्रैल 2021 में स्वीकृत सूजन-रोधी दवा बैरिसिटिनिब भी मध्यम या अधिक गंभीर लक्षणों वाले रोगियों को दी जा रही है। मूल रूप से यह गोली गठिया से पीड़ित लोगों के इलाज में इस्तेमाल होती है। जापान में इसका इस्तेमाल प्रतिबंधित है। इसे केवल रेमडेसिविर के साथ ही लिया जा सकता है।

टोसीलिज़ुमैब के नाम से प्रचलित गठिया-रोधी दवा एक्टेम्रा को जनवरी 2022 में कोरोनावायरस के उपचार के लिए अनुमोदित किया गया था। मध्यम या गंभीर रूप से बीमार कोविड रोगियों के उपचार के लिए स्टेरॉयड के साथ इसका उपयोग करना अनुशंसित है।

उपरोक्त जानकारी 2 सितंबर तक की है।

प्रश्न.467. कोरोनावायरस-रोधी दवाओं पर नवीनतम जानकारी / भाग 4 - एंटीबॉडी उपचार

उत्तर.467. कोविड-19 की दवाओं और उपचारों की नवीनतम जानकारी की शृंखला में आज हम एंटीबॉडी उपचार पर चर्चा करेंगे।

एंटीबॉडी दवाओं का काम मानव निर्मित एंटीबॉडी से कोरोनावायरस की सतह पर स्पाइक प्रोटीन के साथ जुड़कर वायरस को मानव कोशिकाओं में घुसने से रोकना है। जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय की समिति ने जुलाई 2021 में कोविड-19 के उपचार हेतु, रोनाप्रेव नामक एंटीबॉडी कॉकटेल को मंज़ूरी दी थी। हल्के लक्षणों वाले कोविड-19 रोगियों के लिए जापान में अनुमोदित यह पहली दवा थी। वायरस को निष्क्रिय करने वाले कैसिरिविमैब और इमदेविमैब नामक दो एंटीबॉडी के संयोजन से बनी यह दवा सुई या अंतः शिरा यानि ड्रिप द्वारा दी जाती है। सितंबर 2021 में, मंत्रालय की समिति ने सोट्रोविमैब के नाम से प्रचलित एक अन्य दवा, ज़ेवुडी को स्वीकृति दी थी। इस दवा में सिर्फ़ एक प्रकार की एंटीबॉडी मौजूद है और इसे ड्रिप के माध्यम से दिया जाता है।

दोनों दवाएँ, बुज़ुर्ग रोगियों अथवा स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त उन रोगियों को दी जाती है जिनमें फेफड़ों की सूजन यानि निमोनिया जैसे हल्के या मध्यम लक्षण मौजूद हैं और जिनमें गंभीर लक्षण विकसित होने का ख़तरा है। उन्हें कोविड-19 के लक्षण विकसित होने के 7 दिनों के भीतर यह दवा एक बार दी जाती है। समिति ने रोकथाम उपयोग हेतु भी इस दवा की स्वीकृति दी है और इसे निकट संपर्क वाले उन व्यक्तियों को दिया जा रहा है जो संक्रमित होने पर, अपनी कम़जोर प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण, गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं।

नैदानिक परीक्षण के परिणामों में पाया गया कि रोनाप्रेव लेने वाले रोगियों के अस्पताल में भर्ती होने या मरने का जोखिम लगभग 70 प्रतिशत कम रहा। परीक्षणों में ज़ेवुडी लेने वालों में यह जोखिम लगभग 85 प्रतिशत कम पाया गया।

लेकिन एंटीबॉडी दवाओं की खामियाँ भी हैं। उत्परिवर्तित वायरस के नये प्रकारों पर उनकी प्रभावकारिता अक्सर कम होती है। ख़बरों के मुताबिक़, मौजूदा एंटीबॉडी दवाएँ संक्रमण के हालिया उछाल के कारक बने ओमिक्रोन उप-प्रकारों के खिलाफ़ काफ़ी कम प्रभावी रही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के नवीमतम कोविड-19 उपचार दिशानिर्देशों में चिकित्सकों को सलाह दी गयी है कि वे उनका उपयोग केवल तभी करें जब कोई अन्य विकल्प मौजूद न हो।

30 अगस्त को, जापान ने एंटीबॉडी उपचार के लिए एवुशील्ड नामक एक नयी दवा को भी मंज़ूरी दी, जिसे ब्रिटेन की दवा निर्माता कंपनी एस्ट्राज़ेनेका ने विकसित किया है। इसका उपयोग मुख्य रूप से कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में गंभीर लक्षणों को रोकने या उनमें लक्षण विकसित नहीं होने देने के लिए किया जाता है।

उपरोक्त जानकारी 1 सितंबर तक की है।

प्रश्न.466. कोरोनावायरस-रोधी दवाओं पर नवीनतम जानकारी / भाग 3 - ज़ोकोवा

उत्तर.466. कोरोनावायरस-रोधी दवाओं पर जानकारी शृंखला के तीसरे अंक चर्चा करते हैं ज़ोकोवा दवा पर।

जापानी दवा निर्माता शिओनोगि ने अपनी दवा ज़ोकोवा की स्वीकृति के लिए सरकार से आवेदन किया है। यह दवा उन रोगियों को भी दी जा सकती है जिनमें कोविड-19 के हल्के लक्षण हैं, भले ही उनके गंभीर रूप से बीमार पड़ने का ख़तरा कम हो।

यह दवा वायरस के ब्लूप्रिंट की तरह काम करने वाले राइबोन्यूक्लिक अम्ल यानि आरएनए की अनुकृति के लिए ज़िम्मेदार एक एंज़ाइम की क्षमता को बाधित करती है।

कंपनी ने इस वर्ष अप्रैल में जनवरी से फ़रवरी तक किये एक नैदानिक परीक्षण के नतीजों को जारी किया। परीक्षण में 12 वर्ष से लेकर 70 वर्ष तक की आयु के 428 रोगियों ने हिस्सा लिया जिनमें कोरोनावायरस संक्रमण के हल्के से मध्यम लक्षण थे।

कंपनी का कहना है कि रोगियों को प्रतिदिन दवा की एक ख़ुराक दी गयी और तीसरे दिन के बाद, आभासी दवा यानि प्लेसिबो दिये जाने वाले समूह की तुलना में, कंपनी की दवा का सेवन करने वाले समूह में खाँसी, गले में दर्द, बहती नाक और हरारत समेत, 5 लक्षणों में सुधार देखा गया।

शिओनोगि का यह भी कहना है कि आभासी दवा वाले समूह के मुक़ाबले, शरीर में संक्रामक वायरस वाले रोगियों का अनुपात 90 प्रतिशत घटा।

लेकिन कंपनी का कहना है कि आभासी दवा वाले समूह की तुलना में दस्त और उल्टी सहित 12 लक्षणों में कोई बड़ा फ़र्क नहीं पाया गया।

स्वास्थ्य मंत्रालय की एक समिति ने जून और जुलाई में इस दवा की प्रभावकारिता और सुरक्षा पर बैठक की। कुछ समिति सदस्यों ने कहा कि गंभीर रूप से बीमार पड़ने की रोकथाम में दवा की प्रभावकारिता मानी जा सकती है, वहीं दूसरी ओर सवाल उठे कि ओमिक्रोन उप-प्रकार के लक्षणों के विरुद्ध यह दवा वास्तव में कारगर है या नहीं।

समिति ने दवा को स्वीकृति देने के अपने फ़ैसले को टाल दिया और इसकी और जाँच करते रहने पर सहमति जतायी।

शिओनोगि का कहना है कि वह सितंबर के अंत तक अंतिम चरण के नैदानिक परीक्षणों के आँकड़े जारी करेगी।

उपरोक्त जानकारी 31 अगस्त तक की है।

प्रश्न.465. कोरोनावायरस-रोधी दवाओं पर नवीनतम जानकारी / भाग 2 - पैक्सलोविड

उत्तर.465. जापान सरकार ने हल्के लक्षण समेत कोरोनावायरस से संक्रमित रोगियों के उपचार के लिए खाने वाली दो दवाओं को स्वीकृति दी है।

ये दोनों ही अमरीकी दवा निर्माताओं द्वारा विकसित दवाएँ हैं। इनमें से एक है अमरीका की प्रमुख दवा निर्माता कम्पनी मर्क की लैगेव्रिओ और दूसरी है फ़ाइज़र की पैक्सलोविड। दोनों दवाएँ उन रोगियों को दी जाएँगी जिनमें गंभीर लक्षण बनने की आशंका रहती है और दोनों ही वायरस को शरीर की कोशिकाओं में बढ़ने से रोकने में प्रभावकारी हैं।

फ़ाइज़र के अनुसार उसके नैदानिक परीक्षण के विश्लेषण में पाया गया कि लक्षण उभरना शुरू होने के 3 दिन के भीतर पैक्सलोविड दवा देने से रोगी को अस्पताल में भर्ती करने या उसकी मृत्यु का ख़तरा 89 प्रतिशत घट जाता है। वहीं लक्षण उभरने के 5 दिन के भीतर दवा देने पर ख़तरा 88 प्रतिशत कम हो जाता है।

कम्पनी ने बताया कि नैदानिक परीक्षण में पैक्सलोविड लेने वाले और आभासी दवा यानि प्लेसिबो लेने वाले समूह के बीच उपचार सम्बद्ध प्रतिकूल घटना तुलनात्मक थी और अधिकांश मामलों उनकी तीव्रता कम ही रही। दवा के साथ संलग्न निर्देशों में लिखा है कि यह दवा उन वयस्कों को दी जा सकती है जिनमें वायरस के हल्के से मध्यम लक्षण हैं तथा 12 वर्ष या उससे अधिक आयु के ऐसे बच्चे जिनमें बीमारी के लक्षण गंभीर बनने का ख़तरा रहता है। यह दवा 5 दिन तक दिन में 2 बार खाई जानी चाहिए।

लेकिन पैक्सलोविड का इतना व्यापक उपयोग नहीं है क्योंकि इसको लेने के दौरान 40 तरह की दवाओं का सख़्त परहेज ज़रूरी है। साथ ही, जिन रोगियों में मल-मूत्र सम्बन्धी कोई विकार है उनके लिए दवा की ख़ुराक में फेरबदल की आवश्यकता रहती है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि 20 लाख लोगों के लिए दवा की आवश्यक ख़ुराक उपलब्ध हैं लेकिन 26 जुलाई तक लगभग 17,600 लोगों को ही यह दवा दी गयी थी। माना जा रहा है कि लैगेव्रिओ की तरह पैक्सलोविड भी उत्परिवर्तित वायरस के उपचार में प्रभावशाली रहेगी।

उपरोक्त जानकारी 30 अगस्त तक की है।

प्रश्न.464. कोरोनावायरस-रोधी दवाओं पर नवीनतम जानकारी / भाग 1 - लैगेव्रिओ

उत्तर. 464. कोरोनावायरस-रोधी दवाओं पर नयी शृंखला की पहली कड़ी में, हम आपके लिए जापान में स्वीकृत दवाओं और उनकी प्रभावशीलता के बारे में नवीनतम जानकारी दे रहे हैं।

जापान सरकार ने कोरोनावायरस रोगियों के इलाज के लिए अब तक खाने वाली दो दवाओं को स्वीकृति दी है, जो हल्के लक्षण वाले लोगों को भी दी जा सकती हैं... ये दवाएँ हैं - प्रमुख अमरीकी दवा निर्माता मर्क द्वारा विकसित लैगेव्रिओ और अमरीका की ही फ़ाइज़र कंपनी की पैक्सलोविड। दोनों दवाओं का उपयोग गंभीर लक्षणों और जोखिम वाले रोगियों के लिए किया जाता है।

जेनेरिक रूप में मोल्नुपिराविर के नाम से जानी जाने वाली लैगेव्रिओ को 24 दिसंबर 2021, को जापान सरकार से विशेष आपातकालीन स्वीकृति प्राप्त हुई थी। दवा मानव शरीर के अंदर वायरस के ब्लूप्रिंट के रूप में कार्य करने वाले राइबोन्यूक्लिक अम्ल यानि आरएनए की अनुकृति के लिए ज़िम्मेदार एंज़ाइम की क्षमता बाधित करके वायरस को फैलने से रोकती है।

दवाई के पैकेट के साथ उपलब्ध सूचना और अन्य जानकारी के अनुसार, दवा का लक्ष्य 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हल्के से मध्यम लक्षणों वाले रोगी हैं जो गंभीर रूप से बीमार होने के जोखिम में हैं। इनमें बुज़ुर्ग तथा मोटापे या मधुमेह के रोगी शामिल हैं। लक्षण आरंभ होने के पाँच दिनों के भीतर दवा को पाँच दिनों तक प्रतिदिन दो बार लेने की सलाह दी जाती है। लेकिन भ्रूण पर संभावित प्रभावों के कारण यह उन महिलाओं को नहीं दिया जाना चाहिए जो गर्भवती हैं या गर्भवती हो सकती हैं। उच्च जोखिम वाले रोगियों को दिए जाने पर लैगेव्रिओ अस्पताल में भर्ती होने के या मृत्यु के जोखिम को 30 प्रतिशत तक कम कर देती है। दवा के दुष्प्रभावों की आवृत्ति प्लेसिबो समूह और दवा दिये गए समूह के बीच समान पायी गई।

जापान में अब तक 3,80,000 से अधिक लोगों को लैगेव्रिओ दवा दी जा चुकी है। दवा के निर्माता का कहना है कि एक उत्पादन प्रणाली स्थापित होने के बाद वह अब दवा की आपूर्ति स्थिर रूप से कर पायेगा। सरकार दवा की पूरी लागत का भुगतान करती है जिससे रोगियों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।

उपरोक्त जानकारी 29 अगस्त तक की है।

प्रश्न.463. कोरोनावायरस के उप-प्रकार ओमिक्रोन के लिए टीके / भाग-5 चौथी ख़ुराक कितनी प्रभावी है? (2)

उत्तर.463. जानते हैं चौथी ख़ुराक की प्रभावकारिता की जापान में गठित रिपोर्ट की जानकारी।

जुलाई में तोक्यो महानगर आयुर्विज्ञान संस्थान ने चौथी ख़ुराक प्राप्त कर चुके स्वास्थ्य कर्मियों से एकत्र किये रक्त के नमूनों में वायरस-नाशक एंटीबॉडी के स्तर के आँकड़े प्रकाशित किये।

उम्रे के छठे या सातवें दशक में मौजूद लोगों के आँकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि तीसरी ख़ुराक पाने के चार महीने बाद वायरस-नाशक एंटीबॉडी का औसत 855 था, लेकिन चौथी ख़ुराक के बाद वह बढ़कर 3,942 हो गया।

दूसरी ख़ुराक लेने के बाद के वायरस-नाशक एंटीबॉडी का स्तर तीसरी ख़ुराक के बाद के स्तर के औसत से अधिक रहा। लेकिन विभिन्न व्यक्तियों के बीच इस आँकड़े में काफ़ी अंतर पाया गया। हालाँकि, चौथी ख़ुराक के बाद सभी लोगों में वायरस-नाशक एंटीबॉडी का स्तर बढ़ा पाया गया।

महामारी पर सरकार की विशेषज्ञ समिति में शामिल तोहो विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर तातेदा काज़ुहिरो का कहना है कि ओमिक्रोन के अलावा कोई अन्य प्रकार, वायरस का अगला प्रमुख प्रकार बन सकता है। उनका कहना है कि वायरस के वर्तमान प्रसार को रोकने के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि जिन लोगों ने अभी तक अपनी तीसरी ख़ुराक हासिल नहीं की है और जिन लोगों को चौथी ख़ुराक का कूपन मिला चुका है, वे जितनी जल्दी हो सके टीकाकरण करवा लें।

ऐसा माना जाता है कि वर्तमान में उपलब्ध टीकों की कई ख़ुराकें लेना कोरोनावायरस रोगियों को गंभीर रूप से बीमार होने से रोकने और संक्रमण को कुछ हद तक रोकने में प्रभावी है। प्रतिरक्षा विज्ञान, विषाणु विज्ञान और संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि लोगों को सहज उपलब्ध ख़ुराक जल्द से जल्द प्राप्त करने पर विचार करना चाहिए और इस बारे में ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए कि टीके का प्रकार क्या है।

यह जानकारी 26 अगस्त तक की है।

प्रश्न.462. कोरोनावायरस के उप-प्रकार ओमिक्रोन के लिए टीके / भाग-4 चौथी ख़ुराक कितनी प्रभावी है? (1)

उत्तर.462. जानते हैं इज़रायल और अमरीका में गठित, चौथी ख़ुराक की प्रभावकारिता रिपोर्ट की जानकारी।

इज़रायल में शोधकर्ताओं के एक समूह ने 29,000 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों पर चौथी ख़ुराक की प्रभावकारिता का विश्लेषण किया। इसके परिणाम, 2 अगस्त को चिकित्सा क्षेत्र की शोध पत्रिका, जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित हुए। रिपोर्ट में बताया गया है कि ओमिक्रोन उप-प्रकारों के प्रकोप के दौरान जनवरी माह में चौथी ख़ुराक प्राप्त करने वाले 5,300 से अधिक चिकित्सा कर्मियों में से, 368 बाद में वायरस से संक्रमित हो गये। लेकिन तीन ख़ुराक पा चुके 24,000 से अधिक लोगों में से 4,802 लोग वायरस से संक्रमित हुए। संक्षेप में कहा जाये तो, तीन ख़ुराक पाने वालों में संक्रमण दर 19.8 प्रतिशत थी लेकिन चार ख़ुराक पाने वालों में यह दर उससे कम, 6.9 प्रतिशत थी।

अमरीका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र यानि सीडीसी ने बीए.2 सहित ओमिक्रोन उप-प्रकारों के प्रसार के मद्देनज़र 10 राज्यों में वयस्कों के बीच कोविड-19 के एमआरएनए टीकों की प्रभावकारिता का मूल्याँकन किया। जुलाई में जारी इसके निष्कर्ष बताते हैं कि 50 या उससे अधिक उम्र के लोगों में, अस्पताल में भर्ती होने से रोकने में टीके की प्रभावकारिता तीसरी ख़ुराक पाने के चार महीने बाद 55 प्रतिशत अधिक थी। लेकिन चौथी ख़ुराक पाने के बाद एक सप्ताह से कुछ अधिक समय में यह दर बढ़कर 80 प्रतिशत हो गयी। सीडीसी लोगों से आग्रह कर रहा है कि जैसे ही चौथी ख़ुराक लेने की अनुशंसा की जाती है, वैसे ही उन्हें बिना विलंब अतिरिक्त ख़ुराक ले लेना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 25 अगस्त तक की है।

प्रश्न.461. कोरोनावायरस के उप-प्रकार ओमिक्रोन के लिए टीके / भाग-3 कब लगवाएँ टीका?

उत्तर.461. ओमिक्रोन के उप-प्रकारों पर लक्षित इस शृंखला में जानते हैं कि अगला बूस्टर टीका कब लगवाना चाहिए।

समझा जा रहा है कि जापान सरकार जल्द से जल्द अक्तूबर-मध्य से कोरोनावायरस के ऐसे टीके उपलब्ध कराएगी जो ओमिक्रोन के उप-प्रकारों को लक्षित करते हैं। अब तक कोरोनावायरस के टीके की तीसरी या चौथी ख़ुराक न लेने वाले लोग शायद सोच रहे हों कि उन्हें नये टीके का इंतज़ार करना चाहिए या फिर जो टीका अभी उपलब्ध है, उसे लगवा लेना चाहिए।

प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट के अनुसार 22 अगस्त तक, लगभग 8 करोड़ 10 लाख 10 हज़ार लोग यानि 64 प्रतिशत आबादी ने टीके की 3 ख़ुराक ले ली है। इसके अनुसार बुज़ुर्गों, इत्यादि के लिए अनुमोदित चौथी ख़ुराक लेने वाले लोगों की संख्य़ा 2 करोड़ 15 लाख 40 हज़ार है।

राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान के महानिदेशक वाकिता ताकाजि टीकों पर स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष हैं। 10 अगस्त को उन्होंने संवाददाताओं को बताया कि अगर ओमिक्रोन के उप-प्रकारों को लक्षित करने वाले टीके अक्तूबर-मध्य से उपलब्ध होते हैं, तो स्पष्ट नहीं है कि इनकी मात्रा पूरी आबादी के लिए तुरंत लगवाने के लिए पर्याप्त होगी या नहीं। उन्होंने कहा कि मौजूदा टीके, ओमिक्रोन संक्रमण से होने वाले गंभीर लक्षणों की रोकथाम में प्रभावी हैं, इसलिए अगर संभव हो तो लोगों को जल्द ही तीसरा या चौथा टीका लगवाने पर विचार करना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 24 अगस्त तक की है।

प्रश्न.460. कोरोनावायरस के उप-प्रकार ओमिक्रोन के लिए टीके / भाग-2 नये टीके कितने कारगर हैं?

उत्तर.460. फ़ाइज़र ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 56 वर्ष और उससे अधिक आयु के 1,200 लोगों पर किये नैदानिक प्रयोगों में टीके की चौथी ख़ुराक को विशेषरूप से ओमिक्रोन प्रकार से लड़ने के लिए बनाया गया। इसे लगाने पर वर्तमान टीके की तुलना में उप-प्रकार बीए.1 से लड़ने में सक्षम प्रतिकारकों की प्रभावशीलता 56 गुणा बढ़ गयी। कम्पनी ने बताया कि नये टीके की सुरक्षा को लेकर किसी तरह का ख़तरा नहीं है।

मॉडर्ना कम्पनी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार अमरीका में किये गए नैदानिक प्रयोगों में ओमिक्रोन प्रकार को ध्यान में रखकर निर्मित टीकों से बीए.1 उपप्रकार के विरुद्ध रोगप्रतिकारक, वर्तमान टीकों की तुलना में 75 गुणा बढ़ गये।

मॉडर्ना ने कहा कि टीकों के ज़्यादातर दुष्प्रभाव बहुत ही हल्के से लेकर सामान्य थे। 77 प्रतिशत लोगों को टीका लगने के बाद उसके आसपास की माँसपेशियों में हल्का दर्द महसूस हुआ। 55 प्रतिशत को थकान और 44 प्रतिशत को सिरदर्द हुआ।

माना जा रहा है कि ये नये टीके मौजूदा संक्रमण की लहर के लिए ज़िम्मेदार, ओमिक्रोन के उप-प्रकार बीए.5 को नष्ट करने वाले प्रतिकारकों की मात्रा बढ़ा देती है।

उपरोक्त जानकारी 23 अगस्त तक की है।

प्रश्न.459. कोरोनावायरस के उप-प्रकार ओमिक्रोन के लिए टीके / भाग-1 नये टीके कैसे काम करते हैं?

उत्तर.459. जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जल्द से जल्द अक्तूबर मध्य से ओमिक्रोन उप-प्रकारों को लक्षित करते कोरोनावायरस के नये टीके लगाना आरंभ करने का निर्णय लिया है। इस शृंखला में हम इन नये टीकों की कार्य-प्रणाली, उनकी प्रभावशीलता, और पिछले टीकाकरण के बाद आवश्यक अंतराल के बारे में जानेंगे। आज हम देखेंगे कि नये टीके कैसे काम करते हैं।

यह टीके फ़ाइज़र और मॉडर्ना द्वारा विकसित किये जा रहे हैं। इन तथाकथित द्विसंयोजक टीकों में कोरोनावायरस के वर्तमान टीके तथा ओमिक्रोन के उप-प्रकार बीए.1 के लिए बने टीके की ख़ुराक मिश्रित होती हैं।

फ़ाइज़र और मॉडर्ना द्वारा विकसित तथा वर्तमान में लगाये जा रहे टीके शरीर में "स्पाइक प्रोटीन" बनाते हैं। इसके बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इन स्पाक प्रोटीन्स के विरुद्ध ढेर सारी एंटीबॉडी यानी प्रतिरक्षी प्रोटीन का निर्माण करती है जो वास्तविक वायरस के शरीर में प्रवेश करने पर उन पर आक्रमण करती हैं।

लेकिन कोरोनावायरस में लगातार उत्परिवर्तन होने के कारण स्पाइक प्रोटीन का आकार बदल गया है जिसके चलते ओमिक्रोन उप-प्रकार से संक्रमण रोकने तथा लक्षण विकसित होने से रोकने के प्रति टीकों की प्रभावशीलता घट गयी है।

माना जाता है कि ओमिक्रोन उप-प्रकारों के आनुवंशिक गुणों का उपयोग कर स्पाइक प्रोटीन के आकार को उसी के अनुसार बदलने से टीके को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

उपरोक्त जानकारी 22 अगस्त तक की है।

प्रश्न.458. कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति से निकट सम्पर्क / (9) फिर से फैल रहे संक्रमण से सावधानी बरतने के उपाय

उत्तर.458. कथित तौर पर ओमिक्रोन और कोरोनावायरस के अन्य उपप्रकारों का संक्रमण मार्ग एक समान है। ओमिक्रोन संक्रमण, द्रव्यों, एरोसोल या द्रव्यकणों के माध्यम से फैल सकता है। ऐसा होने की संभावना विशेष रूप से कम हवादार जगहों पर अधिक होती है।

हम व्यापक संक्रमण-रोधी उपाय अपनाकर उसे फैलने से रोक सकते हैं। माना जाता है कि ओमिक्रोन का प्रसार, परिजनों के बीच होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए घर पर भी बचाव के व्यापक उपाय करना ज़रूरी है। ओमिक्रोन के, संक्रमण का मुख्य प्रकार बन जाने के बाद, संक्रमित व्यक्तियों के निकट संपर्क वाले लोगों के लिए प्रतिबंधों में ढील दे दी गयी है। हालाँकि, हम में से प्रत्येक के लिए वायरस-रोधी उपाय अपनाना जारी रखना आवश्यक है। सरकार की कोरोनावायरस सलाहकार समिति के प्रमुख ओमि शिगेरु ने एनएचके को दिये साक्षात्कार में कहा कि संक्रमण के उच्च जोखिम वाली स्थितियों और परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं आया है। ओमिक्रोन के चलते लोगों से भीड़-भाड़ वाली जगहों या ऐसे स्थलों से बचने का प्रयास करने का आह्वान किया जा रहा है जहाँ पर लोग ऊँची आवाज़ में बात किया करते हैं। उन्होंने लोगों से यह अनुरोध भी किया कि वे बुज़ुर्ग लोगों से मिलने से पहले कोरोनावायरस जाँच करायें। उन्होंने जोड़ा कि प्रत्येक व्यक्ति को महामारी के अपने अनुभव से प्राप्त ज्ञान का उपयोग करते हुए संक्रमण को रोकने के उपाय करने चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 19 अगस्त तक की है।

प्रश्न.457. कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति से निकट सम्पर्क / (8) निकट संपर्क वाले व्यक्तियों से संपर्क

उत्तर.457. कोरोनावायरस रोगी के निकट संपर्क में अपने किसी परिजन के आने पर क्या क़दम उठाये जाने चाहिए? तोक्यो महानगर सरकार में संक्रामक रोग उपायों के प्रभारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि “निकट संपर्क वाले लोगों से निकट संपर्क में आये व्यक्तियों" के संबंध में कोई नियम तय नहीं है। उनका कहना है कि महानगर सरकार ने “निकट संपर्क" के रूप में नामित व्यक्ति के अलावा उसके किसी परिजन की आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया हुआ है।

लेकिन अधिकारियों का कहना है कि कुछ जगहों पर “निकट संपर्क" के विषय में अपने स्वयँ के नियम हैं इसलिए समुचित स्पष्टीकरण हेतु लोगों को अपने नियोक्ताओं और विद्यालयों से संपर्क करना चाहिए।

अधिकारियों का कहना है कि वे चाहते हैं कि “निकट संपर्क" के रूप में नामित व्यक्ति के लक्षणरहित रूप से संक्रमित होने की स्थिति में उनके परिजन निम्नलिखित सावधानी बरतें।

• तौलिये आपस में साझा करने से बचें और भोजन अलग-अलग करें तथा घर में एक-दूसरे से यथासंभव दूरी बनाये रखें।
• घर में मास्क पहनें और हाथों को सावधानी से धोते हुए उन्हें कीटाणुरहित करें।
• दरवाज़े के कुण्डे और विद्युत उपकरणों के रिमोट कंट्रोल जैसी जो सतहें कई बार छूने में आती हैं उन्हें कीटाणुरहित करें।
• कमरों को नियमित रूप से हवादार बनाये रखें।

ओमिक्रोन प्रकार से गंभीर रूप से बीमार पड़ने का ख़तरा वायरस के अन्य प्रकारों की तुलना में कम माना जाता है और इस वजह से हम संक्रमण-रोधी उपायों को अपनाने में ढील बरतने लगते हैं। लेकिन परिवार में बुज़ुर्ग या अन्य-रोगों से ग्रस्त सदस्यों के होने पर सावधानी बरतना आवश्यक है।

उपरोक्त जानकारी 18 अगस्त तक की है।

प्रश्न.456. कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति से निकट सम्पर्क / (7) संगरोध के दौरान क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए

उत्तर.456. निकट संपर्क वाले लोगों को जितना संभव हो सके ग़ैर-ज़रूरी कारणों से घर से बाहर जाने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना आवश्यक हो, तो संक्रमण रोधी उपाय करने चाहिए जैसे चेहरे पर मास्क लगाना व हाथ धोना, तथा अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचना। उन्हें संगरोध अवधि के दौरान काम या स्कूल नहीं जाना चाहिए।

तोक्यो महानगर सरकार के दिशानिर्देश हैं –
* ग़ैर-ज़रूरी कारणों से बाहर जाने से बचना चाहिए, काम पर और स्कूल नहीं जाना चाहिए, और घर पर रहना चाहिए।
*प्रतिदिन सुबह-शाम शरीर का तापमान मापना चाहिए।
*यदि उनमें बुखार और खाँसी जैसे लक्षण हैं, तो उन्हें अपने परिचित डॉक्टरों या ऐसे चिकित्सा संस्थानों से परामर्श करना चाहिए जो कोरोनावायरस की जाँच और चिकित्सा देखभाल उपलब्ध करा सकें।
*जितना संभव हो सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

तोक्यो के सेंट ल्यूक अंतरराष्ट्रीय अस्पताल में संक्रामक रोग विशेषज्ञ साकामोतो फ़ुमिए निम्नलिखित वस्तुओं को तैयार रखने की सलाह देती हैं। वे कहती हैं कि ये चीज़ें उपयोगी हैं क्योंकि संक्रमण मामलों में वृद्धि को देखते हुए, तुरंत डॉक्टर के पास जाना मुश्किल हो सकता है।

*दवाई की दुकानों पर प्रिस्क्रिप्शन के बिना मिलने वाली बुखार और दर्द निवारक दवाएँ।
*शरीर में तरलता क़ायम रखने के लिए ओआरएस पेय।
*आसान भोजन जैसे जेली वाले पेय।
*दैनिक ज़रूरत की चीज़ों की अतिरिक्त मात्रा।
*उपचार के लिए दवाओं की अतिरिक्त ख़ुराक, अगर वे पहले से किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या से पीड़ित हैं।

वे लोगों से टीका लगवाने और स्थानीय स्वास्थ्य केन्द्रों की संपर्क जानकारी भी अपने पास रखने का आह्वान कर रही हैं ताकि संगरोध के दौरान आवश्यकता पड़ने पर परामर्श लिया जा सके।

उपरोक्त जानकारी 17 अगस्त तक की है।

प्रश्न.455. कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति से निकट सम्पर्क / (6) कार्यस्थलों पर मामले

उत्तर.455. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कार्यस्थल पर किसी व्यक्ति के कोरोनावायरस से संक्रमित होने पर सैद्धन्तिक रूप से संक्रमित व्यक्ति के सहकर्मियों को अपने घर में या और कहीं संगरोध में रहने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन निकट सम्पर्क में आये लोगों से कहा गया है कि सम्पर्क में आने के अंतिम दिन से अगले 7 दिन तक संक्रमण का संकट बढ़ाने वाली गतिविधियों से बचें जैसे वृद्ध परिजनों से मिलने या वृद्धाश्रम नहीं जाएँ, बहुत सारे लोगों के साथ खाने-पीने या मौज मस्ती से बचें, और न ही किसी बड़े आयोजन में जाएँ।

मास्क पहनने जैसे कोरोनावायरस रोधी उपायों के बग़ैर कार्यस्थल पर संक्रमित व्यक्ति के साथ भोजन करने पर लोगों से कहा गया है कि वे अपनी स्वैच्छिक जाँच करवायें और संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए 5 दिन तक संगरोध में रहें।

वहीं, अस्पतालों और वृद्धजनों की देखभाल के केन्द्रों में जहाँ संक्रमण प्रसार का अत्यधिक ख़तरा है और लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका है, वहाँ विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। ऐसे मामलों में निकट सम्पर्क में आये लोगों से 5 दिन के लिए संगरोध में रहने के लिए कहा गया है। संक्रमित परिजन से सम्पर्क के दूसरे और तीसरे दिन जाँच रिपोर्ट के निगेटिव आने पर संगरोध खत्म किया जा सकता है। इन दिशानिर्देशों का पालन आवश्यक सेवा से जुड़े लोगों बल्कि सभी लोगों को करना पड़ेगा।

मंत्रालय ने कहा है कि चिकित्सा कर्मचारी या सेवा कर्मी वायरस के लिए प्रतिदिन अपनी जाँच करवाते हैं और उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आ रही है तो वे संक्रमित व्यक्ति के निकट सम्पर्क में आने के बावजूद काम पर जा सकते हैं।

उपरोक्त जानकारी 16 अगस्त तक की है।

प्रश्न.454. कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति से निकट सम्पर्क / (5) स्वरोपित संगरोध के पश्चात

उत्तर.454. “निकट संपर्क" के रूप में चिह्नित किये गए लोगों के लिए स्वरोपित संगरोध आवश्यक है। लेकिन इसके बाद इन लोगों को अपने कार्यस्थलों या स्कूलों में जाने की अनुमति होती है।

13 जनवरी को राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जब लोग ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमित होते हैं, तो तीन दिनों के भीतर लक्षण विकसित होने की संभावना 53.05 प्रतिशत, पाँच दिनों के भीतर 82.65 प्रतिशत और सात दिनों के भीतर 94.53 प्रतिशत होती है।

इसका अर्थ है कि पाँच दिनों की वर्तमान संगरोध अवधि यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती कि व्यक्ति संक्रमित है या नहीं।

इसलिए, यह सलाह दी जाती है कि "निकट संपर्क" के रूप में चिह्नित लोग अपने शरीर के तापमान और अन्य लक्षणों की सावधानीपूर्वक निगरानी करें और सात दिन बीतने तक उच्च जोखिम वाले स्थानों और समूह में भोजन करने से बचने जैसे संक्रमण-रोधी उपाय अपनाएँ। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि इस अवधि के बाद भी लोगों को संक्रमण रोधी उपाय करते रहना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 15 अगस्त तक की है।

प्रश्न.453. कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति से निकट सम्पर्क / (4) एक और परिजन के संक्रमित हो जाने पर क्या किया जाना चाहिए?

उत्तर.453. इस शृंखला में, हम “निकट संपर्क वाले लोगों” को परिभाषित कर रहे हैं। इस अंक में जानेंगे कि किसी एक परिजन के संक्रमित होने के बाद दूसरे के भी संक्रमित हो जाने पर क्या करना चाहिए?

सरकार के दिशानिर्देशों के मुताबिक़, परिवार में दूसरे संक्रमण का पता चलने पर परिजनों को स्व-संगरोध फिर से शुरू करना होगा। मान लीजिए कि कोई बच्चा संक्रमित पाया जाता है और हल्के लक्षणों के साथ घर पर स्वस्थ हो जाता है। आइए देखें कि इस स्थिति में दिशानिर्देश क्या कहते हैं –

• भले ही जाँच के परिणाम आना बाकी हों, जिस दिन बच्चे में लक्षण विकसित हुए, उसे दिन को 0 दिन के रूप में गिना जाएगा बशर्ते उस दिन से घर में संक्रमण-रोधी उपाय अपना लिये गए हों। बाकी परिजनों को दिन 5 तक स्व-संगरोध करना चाहिए।

• संक्रमण की पुष्टि होने तक अगर कोई संक्रमण-रोधी उपाय नहीं किये गए हैं, तो जिस दिन संक्रमित होने का पता लगा है, उसे दिन 0 के रूप में गिना जाता है। इस तिथि के बाद से बाकी परिजनों को दिन 5 तक स्व-संगरोध करना चाहिए।

• संक्रमित बच्चे में पहली बार लक्षण दिखने के अगले दिन से 10 दिनों बाद उसे स्वस्थ मान लिया जाएगा चाहे उसकी जाँच हुई हो या नहीं। लेकिन 10 दिनों की इस अवधि के समाप्त होने से कम से कम 72 घंटे पहले लक्षण ख़त्म हो जाने चाहिए। लक्षणों के गंभीर होने पर माता-पिता को स्वास्थ्य अधिकारियों से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है।

• यदि बच्चे में कोई लक्षण विकसित नहीं होता है, तो जिस दिन नमूने लिये गए थे, उसे दिन 0 के रूप में गिना जाता है और बच्चे के स्वस्थ होने की अवधि 7 दिन तक होगी। हालाँकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि संक्रमण की पुष्टि होने तक अगर संक्रमण-रोधी उपाय नहीं किये गए थे तो जिस दिन संक्रमण की पुष्टि हुई हो उसे दिन 0 माना जाएगा और परिजनों की स्व-संगरोध अवधि भी तभी से शुरू होगी।

उपरोक्त जानकारी 12 अगस्त तक की है।

प्रश्न.452. कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति से निकट सम्पर्क / (3) किसी परिजन के संक्रमित होने पर कितने समय तक स्व-संगरोध किया जाना चाहिए?

उत्तर.452. इस शृंखला में, हम “निकट संपर्क वाले लोगों” को परिभाषित कर रहे हैं। आज हम जानेंगे कि किसी परिजन के संक्रमित होने पर निकट संपर्क वाले लोगों को कितने दिनों तक स्व-संगरोध करना चाहिए।

घर के किसी सदस्य के कोरोनावायरस से संक्रमित पाये जाने पर निकट संपर्क वाले लोगों को घर पर संगरोध करने के लिए कहा जाता है।

ऐसे लोगों का संगरोध, सैद्धांतिक तौर पर पहले 7 दिनों में समाप्त होता था। लेकिन सामाजिक और आर्थिक गतिविधियाँ बरक़रार रखने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने 22 जुलाई से इस अवधि को कम करते हुए 5 दिन कर दिया है।

निम्नलिखित दिनों में से सबसे नवीनतम दिन को शून्य दिवस माना जाता है -
• जिस दिन व्यक्ति में लक्षण विकसित हुए
• जिस दिन लक्षणरहित संक्रमित व्यक्ति की कोरोनावायरस जाँच के लिए नमूने ले जाये गए
• संक्रमण की पुष्टि के बाद जिस दिन कोरोनावायरस-रोधी उपाय किये गए

निकट संपर्क वाले लोगों को पाँचवें दिन तक स्व-संगरोध में रहना अनिवार्य है। स्व-संगरोध को छठे दिन ख़त्म किया जा सकता है।

लेकिन अगर निकट संपर्क वाले लोगों को सरकार द्वारा स्वीकृत एंटीजन जाँच में दूसरे या तीसरे दिन संक्रमित नहीं पाया जाता है तो वे तीसरे दिन स्व-संगरोध समाप्त कर सकते हैं।

इस मामले में संक्रमण-रोधी उपायों में चेहरे के मास्क पहनना, हाथ धोना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि कमरा हवादार बना रहे। उदाहरण के तौर पर, घर के सदस्यों को अलग कमरे में ही रहते हुए संक्रमित व्यक्ति के साथ संपर्क पूरी तरह से तोड़ने की आवश्यकता नहीं है।

अगर छोटे बच्चों के लिए चेहरे के मास्क पहनना मुश्किल हो तो अन्य उपाय किये जाने चाहिए जिनमें हाथों को अच्छी तरह से धोना और तौलिये साझा करने से बचना शामिल है। इसके अलावा, बुनियादी संक्रमण-रोधी उपाय अपनाये जाने चाहिए, जिनमें कमरे हवादार बनाये रखना और संपर्क से यथासंभव बचना शामिल है।

उपरोक्त जानकारी 11 अगस्त तक की है।

प्रश्न.451. कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति से निकट सम्पर्क / (2) निकट संपर्क वाले लोगों का निर्धारण कैसे करते हैं?

उत्तर.451. लंबे समय तक जारी कोरोनावायरस महामारी के चलते, जापान सरकार ने हाल ही में संक्रमित लोगों के निकट संपर्क वाले लोगों पर दिशानिर्देशों में संशोधन किया है। इस शृंखला में, हम "निकट संपर्क वाले लोगों" को परिभाषित कर रहे हैं। आज हम ध्यान केंद्रित करेंगे कि इनका निर्धारण कैसे किया जाता है।

महामारी फैलने की स्थिति में, स्वास्थ्य मंत्रालय नगरपालिकाओं को यह तय करने की छूट देता है कि कोई व्यक्ति, संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आया था या नहीं। मंत्रालय के अनुसार, संक्रमण कहाँ से निकला है, इसके आधार पर प्रतिक्रियाएँ अलग-अलग होंगी।

यदि संक्रमित व्यक्ति परिवार के साथ रहता है, तो स्वास्थ्य अधिकारी तय करेंगे कि निकट संपर्क में कौन है और उन्हें अपनी गतिविधियों को सीमित करने के लिए कहा जाएगा क्योंकि घर के सदस्यों के संक्रमित होने का ख़तरा अधिक होता है। लेकिन स्वास्थ्य अधिकारी प्रत्येक व्यक्ति से बात नहीं करेंगे।

इस बीच, कार्यस्थलों पर संक्रमण का ख़तरा, घरों की तुलना में अपेक्षाकृत कम माना जाता है, इसलिए स्वास्थ्य अधिकारियों से कार्यस्थलों पर निकट संपर्क वाले सभी व्यक्तियों की पहचान करने की उम्मीद नहीं की जाती है। यदि कोई कार्यस्थल पर कोविड-19 से संक्रमित पाया जाता है, तो लोगों को अपने आप फ़ैसला लेना चाहिए कि वे निकट संपर्क में आये थे या नहीं।

दूसरी ओर, स्वास्थ्य अधिकारी चिकित्सा संस्थानों, तथा बुज़ुर्गों और दिव्यांगजन के लिए प्रतिष्ठानों में जल्द निकट संपर्क वाले व्यक्तियों की पहचान करेंगे, क्योंकि इनमें से कई लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा अधिक होता है।

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि नगर पालिकाओं और शिक्षा समितियों को बाल-देखभाल केन्द्रों, बालवाड़ियों, प्राथमिक विद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों के लिए नीतियाँ तय करनी चाहिए। विद्यालय न जाने वाले बच्चों और स्कूली छात्रों के लिए मास्क लगाने जैसे विषयों पर अलग-अलग उपाय हो सकते हैं।

उपरोक्त जानकारी 10 अगस्त तक की है।

प्रश्न.450. कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति से निकट सम्पर्क / (1) निकट संपर्क की परिभाषा क्या है?

उत्तर.450. कोरोनावायरस संक्रमण की प्रचंड लहर के दौरान सभी सावधानी बरतने पर भी संक्रमित हो जाने की संभावना रहती है। जापान के स्वास्थ्य अधिकारियों ने निकट सम्पर्क की परिभाषा में परिवर्तन किया है ताकि लोगों की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित नहीं हों। इस नयी शृंखला में जानेंगे निकट सम्पर्क के व्यक्ति कौन हैं और उनसे क्या अपेक्षाएँ हैं? आइए जानते हैं इसकी परिभाषा।

कोरोनावायरस से संक्रमित रोगी के पास रहने वाला या उसके साथ कुछ समय बिताने वाले व्यक्ति को निकट सम्पर्क का व्यक्ति परिभाषित किया गया है। माना जाता है कि ऐसे व्यक्ति वायरस के सम्पर्क में आने के कारण संक्रमित हो सकते हैं।

निकट सम्पर्क की परिभाषा के उपरोक्त बिन्दु हैं -

• अगर आप संक्रमित व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण उभरने के 2 दिन पहले और 10 दिन बाद में उसके निकट सम्पर्क में आये हैं। रोगोद्भवन के 7 दिन बाद भी लक्षण जारी रहने पर यह अवधि लक्षणों के खत्म होने के बाद के 3 दिन तक बढ़ा दी गयी है। किसी व्यक्ति के लक्षणहीन होने पर यह अवधि जाँच होने के 2 दिन पहले से आरंभ होकर 7 दिनों के अंत तक होती है।

• संक्रमित व्यक्ति को छूने के दौरान अगर मास्क नहीं पहनने या संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रव्य से लगे किसी सामान को छूने पर निकट सम्पर्क में आना माना जाएगा। 15 मिनट से अधिक समय तक संक्रमित व्यक्ति से एक हाथ की दूरी पर बने रहना भी निकट सम्पर्क की परिभाषा में शामिल है।

• घर में संक्रमित रोगी होने या उसकी देखभाल करने पर ज़रूरी नहीं है कि आप निकट सम्पर्क के व्यक्ति की परिभाषा में आएँ बशर्ते आपने चिकित्सा संस्थानों या देखभाल केन्द्र में ली जा रही संपूर्ण आवश्यक सावधानी बरती हों।

संक्रमित व्यक्ति के निकट 15 मिनट से अधिक समय तक रहने पर आवश्यक नहीं है कि आप निकट सम्पर्क की परिभाषा में आएँ। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि वहाँ पर बातचीत की जा रही थी या नहीं, कमरा हवादार था या नहीं और आपने मास्क पहने थे या नहीं।

उपरोक्त जानकारी 9 अगस्त तक की है।

प्रश्न.449. ओमिक्रोन का उप-प्रकार बीए.5 क्या है / (6) क्या उप-प्रकार चिंता के विषय हैं?

उत्तर.449. ओमिक्रोन उप-प्रकार बीए.5 पर हमारी शृंखला की छठी कड़ी में, एक नज़र ओमिक्रोन के ऐसे उप-प्रकारों पर जो चिंता के विषय हैं।

12 जुलाई को पश्चिमी जापान के कोबे शहर में, संगरोध में रह रहे लोगों के अतिरिक्त, ओमिक्रोन वायरस के बीए.2.75 उप-प्रकार के पहले घरेलू संक्रमण मामले की सूचना मिली। जून में भारत में पहली बार इस उप-प्रकार के संक्रमण मामले सामने आने के बाद, यह ब्रिटेन, जर्मनी और अमरीका में भी पाया गया है।

बीए.5 के समान ही, यह उप-प्रकार कथित तौर पर मानव प्रतिरक्षा प्रणाली से बचने की क्षमता रखता है। ख़बरों से पता चलता है कि यह भारत में बीए.5 की तुलना में तेज़ी से फैला।

तोक्यो चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक हामादा आत्सुओ का कहना है कि बीए.2.75 उप-प्रकार, बीए.2 की तुलना में मानव प्रतिरक्षा प्रणाली से बचने में अधिक सक्षम है। उनका कहना है कि इसका मतलब है कि जिन लोगों में प्रतिरक्षा आ गयी है, उनके भी संक्रमित होने का ख़तरा अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे चिंताजनक उप-प्रकारों की श्रेणी में डाला है जिस पर नज़र रखने की आवश्यकता है।

हामादा कहते हैं कि जापान में स्वास्थ्य अधिकारियों को इस नये उप-प्रकार की विशेषताओं पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 20 जुलाई तक की है।

प्रश्न.448. ओमिक्रोन का उप-प्रकार बीए.5 क्या है / (5) टीके इससे बचाव के लिए कितने कारगर हैं?

उत्तर.448. ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मई महीने में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों के आँकड़ों के आकलन पर 24 जून को एक रिपोर्ट जारी की जिसमें कोरोनावायरस के प्रकार बीए.5 और बीए.2 से संक्रमित लोगों पर टीकों की प्रभावशीलता में कुछ विशेष अंतर नहीं पाया गया।

इस बीच, अमरीका के खाद्य और औषधि विभाग यानि एफ़डीए ने 30 जून को घोषणा की कि उसने औषधि निर्माता कम्पनियों से बूस्टर ख़ुराक में अतिरिक्त स्पाइक प्रोटीन शामिल करने का सुझाव दिया है जो बीए.4 और बीए.5 से मुक़ाबला करने में सक्षम हो। हालाँकि, एफ़डीए ने फ़िलहाल मौजूदा टीकों में परिवर्तन करने का आग्रह नहीं किया है क्योंकि ये टीके संक्रमित व्यक्तियों में गंभीर लक्षण उत्पन्न होने से रोकने में प्रभावशाली हैं।

तोक्यो चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक हामादा आत्सुओ ने जापान में भी इस वर्ष शरद ऋतु में कोरोनावायरस संक्रमण में संभावित तेज़ उछाल की चेतावनी दी है। वह सरकार से शरद ऋतु में टीकाकरण अभियान की तैयारी और पर्याप्त मात्रा में टीकों की ख़ुराक सुनिश्चित करने के लिए पहले से मंत्रणा करने का आग्रह कर रहे हैं।

उपरोक्त जानकारी 19 जुलाई तक की है।

प्रश्न.447. ओमिक्रोन का उप-प्रकार बीए.5 क्या है / (4) क्या यह अधिक रोगजनक है?

उत्तर.447. ओमिक्रोन के उप-प्रकार बीए.5 पर इस शृंखला की चौथी कड़ी में हम जानेंगे कि क्या यह उप-प्रकार अधिक रोगजनक है या इससे रोग होने की संभावना अधिक है।

तोक्यो विश्वविद्यालय में चिकित्सा विज्ञान संस्थान के प्राध्यापक सातो केइ के नेतृत्व में G2P-जापान नामक एक दल ने ऑनलाइन जारी किये एक मुद्रण-पूर्व लेख में अपने निष्कर्षों के बारे में जानकारी दी।

शोधकर्ताओं ने क्रमशः बीए.5 उप-प्रकार तथा बीए.2 उप प्रकार के अभिलक्षणों वाले दो कृत्रिम वायरस बनाये।

फिर उन्होंने प्रत्येक उप-प्रकार के साथ संवर्धित कोशिकाओं को संक्रमित किया ताकि यह जाँचा जा सके कि वायरस कितनी वृद्धि करेगा।

उन्होंने पाया कि 24 घंटे बाद बीए.5 संक्रमित कोशिकाओं में वायरस का स्तर बीए.2 संक्रमित कोशिकाओं की तुलना में 34 गुणा अधिक था।

शोधकर्ता समूह के अनुसार चूहों पर किये प्रयोगों से पता चलता है कि बीए.2 उप-प्रकार से संक्रमित चूहों का वज़न थोड़ा कम हुआ, लेकिन बीए.5 उप-प्रकार से संक्रमित किये गए चूहों का वज़न लगभग 10 प्रतिशत कम हुआ।

समूह का कहना है कि बीए.5 संक्रमण में फेफड़ों में सूजन का स्तर बीए.2 संक्रमण की तुलना में काफ़ी अधिक था।

शोधकर्ताओं के अनुसार जहाँ मनुष्यों में लक्षणों पर और अधिक अध्ययन करना आवश्यक है, वहीं इन प्रयोगों से संकेत मिलते हैं कि बीए.5 बीए.2 की तुलना में अधिक रोगजनक है।

प्राध्यापक सातो का कहना है कि वायरस की रोगजनक शक्ति सदा कम ही नहीं होती। उनका कहना है कि सतर्क रहना आवश्यक है क्योंकि वायरस उत्परिवर्तित होते रहते हैं।

उपरोक्त जानकारी 18 जुलाई तक की है।

प्रश्न.446. ओमिक्रोन का उप-प्रकार बीए.5 क्या है / (3) बीए.5 के गंभीर लक्षण

उत्तर.446. ओमिक्रोन के उप-प्रकार बीए.5 पर इस नयी शृंखला की तीसरी कड़ी में हम गंभीर रूप से बीमार होने की संभावनाओं को जानेंगे।

इस सवाल पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 6 जुलाई को अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट में कहा कि बीए.2 की तुलना में बीए.5 में महत्त्वपूर्ण बदलाव आने के कोई साक्ष्य नहीं हैं। हालाँकि, संगठन ने जोड़ा कि कई देशों में संक्रमण मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है, और अस्पताल में भर्ती या गहन देखभाल इकाइयों में इलाज करा रहे लोगों की संख्या के साथ-साथ मौतों की संख्या भी बढ़ रही है।

इसके अलावा यूरोपीय रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र ने 13 जून की अपनी रिपोर्ट में कहा कि, सीमित आँकड़ों के कारण इस बात के साक्ष्य नहीं है कि उप-प्रकार के कारण अधिक लोगों में गंभीर लक्षण विकसित होते हैं। साथ ही, इसमें कहा गया है कि संक्रमण बढ़ने पर अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है और अधिक मौतों की आशंका है।

विदेशी संक्रमण के विशेषज्ञ और तोक्यो चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक हामादा आत्सुओ का कहना है कि बीए.5 पिछले उप-प्रकारों की तुलना में कुछ अधिक संक्रामक है और यह उन लोगों को भी संक्रमित कर सकता है जिनकी प्रतिरक्षण क्षमता मज़बूत है। बीए.2 की जगह कोई अन्य उप-प्रकार ले रहा है ऐसा नहीं है, लेकिन संक्रमित लोगों की संख्या में बढ़त होने को रोक नहीं सकते हैं। उन्होंने सर्तक रहने की आवश्यकता व्यक्त करते हुए कहा कि अधिक लोगों के संक्रमित होने पर गंभीर लक्षणों वाले रोगियों की संख्या बढ़ जाएगी।

उपरोक्त जानकारी 15 जुलाई तक की है।

प्रश्न.445. ओमिक्रोन का उप-प्रकार बीए.5 क्या है / (2) बीए.5 की विशेषताएँ

उत्तर.445. ओमिक्रोन के उप-प्रकार बीए.5 पर इस नयी शृंखला की दूसरी कड़ी में हम इसकी विशेषताओं पर नज़र डालेंगे।

बीए.5 में स्पाइक प्रोटीन में एल452R उत्परिवर्तन और अन्य रूपान्तरण पाये गए हैं। वायरस की सतह पर स्पाइक प्रोटीन, मेज़बान कोशिकाओं में संक्रमण को शुरू करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एल452R उत्परिवर्तन, वायरस को मनुष्य की रोग प्रतिरोधक प्रणाली से बचने में मदद करने के लिए जाना जाता है। जुलाई की शुरुआत में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी नवीनतम जानकारी से पता चलता है कि बीए.1 की तुलना में बीए.5, रोग-प्रतिरोधक क्षमता को सात गुणा से अधिक कम कर देता है।

विशेषज्ञों को यह आशंका भी है कि समय बीतने के साथ टीकाकरण से प्राप्त प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने से संक्रमण का हालिया प्रकोप फैलने में मदद मिली है।

जापान में, स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति की 30 जून की बैठक में क्योतो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक निशिउरा हिरोशि द्वारा प्रस्तुत आँकड़े इंगित करते हैं कि ओमिक्रोन संस्करण से प्रतिरक्षित लोगों का प्रतिशत घट रहा है। आँकड़ों से पता चलता है कि, जून के अंत तक, उम्र के तीसरे दशक में चल रहे 44.6 प्रतिशत प्रतिरक्षित थे। साथ ही, उम्र के आठवें दशक में चल रहे लोगों के लिए यह आँकड़ा 37.4 प्रतिशत था।

उपरोक्त जानकारी 14 जुलाई तक की है।

प्रश्न.444. ओमिक्रोन का उप-प्रकार बीए.5 क्या है / (1) बीए.5 का प्रसार

उत्तर.444. ओमिक्रोन के उप-प्रकार बीए.5 पर एक नयी शृंखला की पहली कड़ी में हम उत्परिवर्तित वायरस पर एक नज़र डालेंगे जो अमरीका और यूरोपीय देशों में तेज़ी से फैल रहा है। इसका प्रसार जापान में भी हो रहा है।

बीए.5, ओमिक्रोन का एक उप-प्रकार है और फ़रवरी 2022 में दक्षिण अफ़्रीका में पहली बार इसकी पुष्टि हुई थी। अमरीका और यूरोप में यह मुख्य रूप से मई से फैल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि जून के मध्य तक, दुनिया भर में पाये गए कोरोनावायरस के सभी नये मामलों के लगभग 40 प्रतिशत के लिए यह उप-प्रकार ज़िम्मेदार है।

अमरीका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र ने अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट में कहा कि देश भर में 2 जुलाई तक कोरोनावायरस के नये मामलों में बीए.5 का अनुपात 53.6 प्रतिशत था। माना जाता है कि संक्रमण मामलों की संख्या में हाल में हुई वृद्धि के लिए यह उप-प्रकार आंशिक रूप से ज़िम्मेदार है।

ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने 24 जून को घोषणा की कि बीए.5 उप-प्रकार, बीए.2 की तुलना में 35.1 प्रतिशत तेज़ी से फैल रहा था।

कोरोनावायरस स्थिति की समीक्षा करने वाली तोक्यो महानगर सरकार की विशेषज्ञ समिति का कहना है कि 27 जून तक के सप्ताह में राजधानी में 33.4 प्रतिशत संक्रमण मामले, बीए.5 उप-प्रकार के माने जा रहे हैं।

उपरोक्त जानकारी 13 जुलाई तक की है।

प्रश्न.443. दीर्घकालिक कोविड / (8) कोविड-19 के रोगी की उचित देखभाल का क्या महत्त्व है?

उत्तर.443. दीर्घकालिक कोविड की शृंखला के अंतिम अंक में जानते हैं कि कोविड संक्रमण के बाद दीर्घस्थायी लक्षण बने रहने पर रोगियों की समुचित देखभाल का क्या महत्त्व है।

दीर्घकालिक कोविड के दुष्प्रभावों के कारण लगातार बने रहने वाले लक्षणों और उनके कारणों को फ़िलहाल पूरी तरह से समझना बाकी है। दीर्घकालिक कोविड के रोगियों का उपचार कर रहे दो विशेषज्ञ ऐसे रोगियों की देखभाल के महत्त्व पर ज़ोर देते हैं।

कोचि विश्वविद्यालय के प्राध्यापक योकोयामा आकिहितो कहते हैं कि इन लक्षणों की चाहे जो भी वजह हो, लेकिन यह भी सच है कि वायरस से संक्रमित होने के बाद जो लोग इसके लक्षणों से दीर्घावधि तक पीड़ित रहते हैं उनकी देखभाल उनके लक्षणों के अनुसार करना आवश्यक है।

गिफ़ु विश्वविद्यालय के प्राध्यापक शिमोहाता ताकायोशि कहते हैं कि कुछ रोगियों के मस्तिष्क की कोशिकाओं में सूजन देखी जा सकती है। वहीं कुछ रोगियों में ये लक्षण लगातार बने रहने के कारण मानसिक असंतुलन हो सकता है, जिसकी वजह से लक्षण और बिगड़ सकते हैं। शिमोहाता कहते हैं कि लक्षणों की चाहे जो वजह रहे, इन रोगियों के डॉक्टरों को उनकी पूरी तरह से सहायता करनी चाहिए। उन्होंने रोगियों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाने और आमजन को स्थिति के बारे में जागृत करने के लिए सरकार को शोध कार्यों में निवेश करने और दीर्घकालिक कोविड उपचार के लिए चिकित्सा केन्द्र की स्थापना किये जाने की महत्ता पर ज़ोर दिया।

उपरोक्त जानकारी 12 जुलाई तक की है।

प्रश्न.442. दीर्घकालिक कोविड / (7) ओमिक्रोन प्रकार में कोविड के उत्तर प्रभावों की संभावना कम

उत्तर.442. यह शृंखला कोविड के मध्यम और दीर्घकालिक प्रभावों पर केंद्रित है जिन्हें कोविड-19 के उत्तर प्रभाव या "दीर्घकालिक कोविड" के नाम से जाना जाता है। आज हम ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमण के बाद दीर्घकालिक कोविड लक्षणों पर ध्यान देंगे। तोक्यो महानगर सरकार ने अप्रैल तक के 4 महीनों के दौरान ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमित 2,000 से अधिक रोगियों में विकसित दीर्घकालिक कोविड लक्षणों की एक सूची संकलित की है।

सूची में 38.6 प्रतिशत लोगों ने खाँसी, 34.6 प्रतिशत ने थकान, 10.6 प्रतिशत ने स्वाद और 9.5 प्रतिशत ने गंधानुभूति हीनता की शिकायत की।

आँकड़ों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि स्वाद और गंध अनुभूति नहीं होने तथा बालों के झड़ने जैसे प्रभाव डेल्टा और अन्य प्रकारों से संक्रमण की तुलना में उन्हें काफ़ी कम मिले हैं। जापान राष्ट्रीय वैश्विक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा केंद्र के शोधकर्ताओं के एक समूह ने भी अपने शोध आँकड़े जारी किये, जिसमें ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमित रोगियों और पूर्व में फैले अन्य प्रकारों से संक्रमित लोगों की तुलना आयु, लिंग तथा टीकाकरण स्थिति के आधार पर की गई थी।

परिणामों से पता चला कि ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमित रोगियों में अन्य प्रकारों से संक्रमित लोगों की तुलना में दीर्घकालिक कोविड के 10 प्रतिशत लक्षण ही विकसित हुए।

हालाँकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ओमिक्रोन प्रकार से होने वाले संक्रमणों की संख्या अन्य प्रकारों की तुलना में काफ़ी अधिक है, इसलिए दीर्घकालिक कोविड से पीड़ित रोगियों की संख्या बढ़ सकती है।

ब्रिटेन सरकार के आँकड़े इंगित करते हैं कि टीके की दो ख़ुराक लगवा चुके लोगों में, ओमिक्रोन संक्रमण के बाद उत्तर प्रभावों की शिकायत वाले लोगों की संख्या डेल्टा प्रकार के संक्रमण के उत्तर प्रभावों की तकलीफ़ वाले लोगों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत कम है।

आँकड़ों में अब तक ऐसे मामले शामिल नहीं हैं जिसमें ओमिक्रोन संक्रमण के बाद कोविड के उत्तर प्रभाव अधिक लंबी अवधि तक बने रहे हों।

उपरोक्त जानकारी 11 जुलाई तक की है।

प्रश्न.441. दीर्घकालिक कोविड / (6) “ब्रेन फ़ॉग” क्या है?

उत्तर.441. इस नवीनतम शृंखला में कोविड के मध्यम और दीर्घकालिक प्रभावों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जिन्हें कोविड के उत्तर-प्रभाव या “दीर्घकालिक कोविड” के नाम से जाना जाता है। आज हम “ब्रेन फ़ॉग” यानि मतिभ्रम के बारे में बात करेंगे।

दीर्घकालिक कोविड के सबसे विशिष्ट लक्षणों से में से एक, “ब्रेन फ़ॉग” में लोगों को महसूस होता है कि उनका मस्तिष्क ठीक से काम नहीं कर रहा जैसे कि वह कोहरे में ढँका हुआ हो। दीर्घकालिक कोविड पर स्वास्थ्य मंत्रालय की उपचार दिशानिर्देशिका के संकलन में शामिल, गिफ़ु विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और मस्तिष्क न्यूरोलॉजिस्ट, शिमोहाता ताकायोशि कहते हैं कि “ब्रेन फ़ॉग” का निदान करना इसलिये मुश्किल है क्योंकि अधिकतर एमआरआई या रक्त जाँच में कोई विषमता देखने को नहीं मिलती।

हालाँकि उनका कहना है कि इस स्थिति के कारकों के शोध में कुछ प्रगति हुई है। शिमोहाता का कहना है कि विदेश में जानवरों पर हुए परीक्षण इंगित करते हैं कि वायरस के संक्रमण से पूरे शरीर में सूजन पैदा होने से स्वप्रतिपिंड यानि ऑटोएंटिबॉडी या साइटोकाइनिन्स जैसे पदार्थ उत्पन्न होते हैं। स्वप्रतिपिंड स्वयं के शरीर पर हमला करते हैं जबकि साइटोकाइनिन्स से सूजन आती है। शिमोहाता के अनुसार यह आम धारणा है कि ऐसे पदार्थ रक्तप्रवाह के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँच जाते हैं और वहाँ सूजन के कारण बनते हैं।

उन्होंने कहा कि फ़िलहाल इस स्थिति का कोई ज्ञात इलाज नहीं है, जबकि चिकित्सक केवल लक्षणों का इलाज कर सकते हैं। वह स्थिति की उत्पत्ति का कारण जानने के महत्त्व पर ज़ोर देते हुए इलाज के बेहतर तरीके का पता लगाना चाहते हैं।

उपरोक्त जानकारी 8 जुलाई तक की है।

प्रश्न.440. दीर्घकालिक कोविड /(5) लक्षणरहित, हल्का संक्रमण होने के बाद भी दुष्प्रभावों का जोखिम संभव

उत्तर.440. इस नवीनतम शृंखला में कोविड के मध्यम और दीर्घकालिक प्रभावों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जिन्हें कोविड के उत्तर-प्रभाव या दीर्घकालिक कोविड के नाम से जाना जाता है। आज हम इस स्थिति से जुड़े जोखिमों के बारे में बात करेंगे।

अमरीका के येल विश्वविद्यालय में इम्यूनोबायोलॉजी यानि प्रतिरक्षा जीव-विज्ञान के प्राध्यापक इवासाकि आकिको ने चिंता व्यक्त की है कि कोरोनावायरस के विभिन्न उत्तर-प्रभाव सिर्फ़ उन लोगों तक सीमित नहीं हैं जिनके लक्षण गंभीर थे।

अमरीका में हुए अध्ययन से पता चलता है कि कोविड के उत्तर-प्रभावों से पीड़ित 75 प्रतिशत लोग, जब वायरस से संक्रमित हुए थे तब उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं पड़ी थी। शोधकर्ताओं का मानना है कि लक्षणरहित या बहुत हल्के लक्षणों वाले रोगी भी दीर्घकालिक कोविड से पीड़ित हो सकते हैं।

इवासाकि के मुताबिक़ इसका सबसे संभावित स्पष्टीकरण यह है कि कोरोनावायरस शरीर के भीतर कहीं छिपा रहता है और उससे पैदा सूजन, अन्य अंगों में लक्षण उत्पन्न करती है।

उनका कहना है कि लक्षणरहित लोगों के कुछ ऐसे मामले भी सामने आये हैं जिनमें संक्रमण के दो या तीन महीनों बाद तथाकथित दीर्घकालिक कोविड के संकेत मिलना शुरू हो गये थे। कुछ ख़बरों के मुताबिक़ टीकाकृत लोगों में दीर्घकालिक कोविड के मामले अपेक्षाकृत कम हैं लेकिन उनका प्रतिशत हर ख़बर के अनुसार बदलता रहता है। इवासाकि ने कहा कि टीकाकृत होने भर से सुरक्षित महसूस नहीं किया जा सकता है।

उपरोक्त जानकारी 7 जुलाई तक की है।

प्रश्न.439. दीर्घकालिक कोविड / (4) दीर्घकालिक कोविड के लक्षण कैसे उभरते हैं?

उत्तर. 439. इस नयी शृंखला में हम दीर्घकालिक कोविड पर चर्चा कर रहे हैं। आज के अंक में बात करेंगे कि कोविड-19 होने के बाद, किस प्रकार दीर्घकालिक कोविड के लक्षण पैदा होते हैं।

दीर्घकालिक कोविड-19 के लक्षण कैसे पैदा होते हैं, इसके बारे में हमें कितना पता है? अमरीका स्थित येल विश्वविद्यालय में प्रतिरक्षा जीव विज्ञान की प्राध्यापक इवासाकि आकिको 4 अवधारणाएँ पेश करती हैं।

1. खाँसी या तेज़ बुखार जैसे प्रारंभिक लक्षण ख़त्म हो जाने के बाद वायरस के अंश दीर्घावधि तक सूजनकारी होते हैं।
2. प्रतिरक्षा प्रणाली जिसे शरीर की रक्षा करनी चाहिए, वही शरीर पर हमला करती है।
3. संक्रमण से प्रभावित आंतरिक अंगों को स्वस्थ होने में समय लगता है।
4. कोविड-19 होने से भी पहले, शरीर में मौजूद वायरस जैसे हर्पीज़ वायरस फिर से सक्रिय हो जाते हैं।

इवासाकि का कहना है कि हो सकता है इन कारणों के मिले-जुले प्रभाव से दीर्घकालिक कोविड के विभिन्न लक्षण सामने आते हैं।

उपरोक्त जानकारी 6 जुलाई तक की है।

प्रश्न.438. दीर्घकालिक कोविड / (3) कोविड-19 से संक्रमित होने के पश्चात किस तरह के लक्षण रहते है?

उत्तर.438. इस नयी शृंखला में कोविड-19 संक्रमण के उत्तर-प्रभाव या दीर्घकालिक कोविड कहे जा रहे कोविड संक्रमण के मध्यम और दीर्घकालिक परिणामों के बारे में चर्चा की जा रही है। इस अंक में जानेंगे कोविड -19 के उत्तर-प्रभाव की स्थिति की परिभाषा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ की परिभाषा के अनुसार दीर्घकालिक कोविड ऐसी स्थिति है जिसमें कोविड -19 के संभावित संक्रमण या पुष्टि होने के तीन महीने के भीतर होने वाले लक्षणों या दुष्परिणाम कम से कम दो माह तक देखे जाते हैं। डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा है कि इन लक्षणों या दुष्परिणामों का अन्य कोई वैकल्पिक निदान समझ नहीं आता है।

डब्ल्यूएचओ की परिभाषा में विभिन्न तरह के लक्षणों को शामिल किया गया है, लेकिन विशेषज्ञ सवाल कर रहे हैं कि क्या वास्तव में इन सभी लक्षणों के लिए कोरोनावायरस संक्रमण को ज़िम्मेदार माना जा सकता है?

जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय के शोध दल का नेतृत्व करने वाले, कोचि विश्वविद्यालय के प्राध्यापक योकोयामा आकिहितो कहते हैं कि “हमारे सर्वेक्षण में यह पता लगाना बहुत ही कठिन रहा कि रोगी के लक्षण कोरोनावायरस संक्रमण के दुष्परिणाम हैं या नहीं, क्योंकि हमारे पास रोगी को पहले हुए संक्रमण के आँकड़े नहीं हैं, हालाँकि वे लोग इन लक्षणों की शिकायत कर रहे थे। लोगों के फेफड़ों के एक्सरे में किसी तरह की असामान्यता दिखने और साँस लेने में कठिनाई होने पर कह सकते हैं कि रोगी संक्रमण के दुष्परिणाम से पीड़ित है। लेकिन यह पहचान करना बहुत मुश्किल है कि अनिद्रा या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण कोरोनावायरस संक्रमण ही है। यह भी संभावना है कि इन लक्षणों का कोई अन्य कारण भी हो सकता है और रोग का उचित निदान न होने पर रोगी को परेशानी हो सकती है। जिन लक्षणों को कोविड-19 के उत्तर-प्रभाव माना जा रहा है, उनके अन्य कारण भी हो सकते हैं जिनका उपचार किया जा सकता है। मेरा मानना है कि भविष्य में दीर्घकालिक कोविड की समस्या को सही तरह से समझने के लिए आवश्यक है कि कोरोनावायरस संक्रमित व्यक्ति के लक्षणों को स्वस्थ्य व्यक्ति या उन लोगों के लक्षणो से तुलना करेंगे जो किसी अन्य कारण से निमोनिया से पीड़ित है।”

उपरोक्त जानकारी 5 जुलाई तक की है।

प्रश्न.437. दीर्घकालिक कोविड / (2) स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अनुसंधान - भाग 2

उत्तर.437. कोरोनावायरस की हमारी यह शृंखला तथाकथित दीर्घकालिक कोविड लक्षणों पर केंद्रित है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सर्वेक्षण पर आधारित यह हमारी दूसरी कड़ी है।

केइओ विश्वविद्यालय के प्राध्यापक फ़ुकुनागा कोइचि के नेतृत्व में स्वास्थ्य मंत्रालय के एक दल ने ऐसे 1,000 से अधिक लोगों का सर्वेक्षण किया जिनमें कोविड-19 के मध्यम या गंभीर लक्षण विकसित हुए थे। शोधकर्ताओं ने उनसे पूछा कि कोविड की पुष्टि होने के बाद एक वर्ष तक के समय में उनमें किस प्रकार के लक्षण विकसित हुए।

शोधर्ताओं ने पाया कि संक्रमण के 1 वर्ष पश्चात भी 12.8 प्रतिशत लोगों को थकान थी, 8.6 प्रतिशत को साँस लेने में तकलीफ़ महसूस हुई, 7.5 प्रतिशत ने माँसपेशियों में कमज़ोरी तथा एकाग्रता में कमी की शिकायत की, 7.2 प्रतिशत की स्मरण शक्ति क्षीण हुई, 7 प्रतिशत में नींद न आने के लक्षण पैदा हुए, 6.4 प्रतिशत को जोड़ों में दर्द रहा, 5.5 प्रतिशत ने माँसपेशियों में दर्द का उल्लेख किया, 5.4 प्रतिशत ने सूँघने की क्षमता में कमी के बारे में बताया, 5.2 प्रतिशत को बलगम था, 5.1 प्रतिशत ने बाल झड़ने का ज़िक्र किया, 5 प्रतिशत ने सिर दर्द की शिकायत की, 4.7 प्रतिशत ने स्वाद लेने की क्षमता कम होने की बात कही, 4.6 प्रतिशत को खाँसी रही, 3.9 प्रतिशत को अंगों में सुन्नता की शिकायत थी तथा 3.6 प्रतिशत को आँखों में समस्या हुई। इस प्रकार कुल 33 प्रतिशत लोगों ने किसी न किसी लक्षण की शिकायत की।

पिछले सर्वेक्षण की तरह ही शोधकर्ताओं ने संक्रमित न होने वाले लोगों का तुलनात्मक सर्वेक्षण नहीं किया। इसलिए उनका कहना है कि प्रत्येक लक्षण की कोविड के दीर्घ कालिक लक्षण के रूप में पुष्टि करना असंभव है। इन लक्षणों के लिए कई प्रकार के उपचार आज़माये गए हैं लेकिन यह सभी लक्षणात्मक उपचार हैं न कि कोई विशेष उपचार।

उपरोक्त जानकारी 4 जुलाई तक की है।

प्रश्न.436. दीर्घकालिक कोविड / (1) स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अनुसंधान - भाग 1

उत्तर.436. जून 2022 के अंत तक, जापान में कोरोनावायरस संक्रमण के 93 लाख से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है। कई मरीज़ ठीक होने के बाद भी ख़राब स्थिति से गुज़र रहे हैं। इन स्थितियों को विशेषज्ञ, कोरोनवायरस के परिणाम या दीर्घकालिक कोविड संक्रमण मानते हैं। आज के व आगामी अंकों में हम दीर्घकालिक कोविड के लक्षणों और उनके विकास के तरीके की जानकारी देंगे।

कोचि विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर योकोयामा आकिहितो के नेतृत्व में स्वास्थ्य मंत्रालय के शोधकर्ता दल ने देशभर में 1,000 से अधिक ऐसे रोगियों का सर्वेक्षण किया, जिन्हें सितंबर 2021 तक एक साल की अवधि के दौरान मध्यम या गंभीर लक्षणों के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के पूछताछ रिकॉर्ड और प्रश्नावली पर रोगियों के उत्तरों के आधार पर शोधकर्ताओं ने हर तीन महीने में उनके लक्षणों की जाँच की।

संक्रमण के तीन महीने बाद, सर्वेक्षण में शामिल लगभग 50 प्रतिशत रोगियों ने माँसपेशियों में कमज़ोरी की सूचना दी, 30 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें श्वसन में कठिनाई होती है, 25 प्रतिशत ने थकान और 20 प्रतिशत से अधिक ने नींद न आने की शिकायत की, और कुछ 18 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होने के अलावा माँसपेशियों में दर्द और खाँसी भी होती है। उनमें से कुछ ने एक से अधिक लक्षणों की सूचना दी।

ऐसे लक्षणों की शिकायत करने वाले लोगों की संख्या में समय के साथ गिरावट आयी है। संक्रमण के एक साल बाद, 10.1 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें सोने में कठिनाई होती है, 9.3 प्रतिशत ने माँसपेशियों में कमज़ोरी, 6 प्रतिशत ने श्वसन और 5.3 प्रतिशत ने ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई की शिकायत की, 5 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें खाँसी है, 4.9 प्रतिशत ने थकान, और 4.6 प्रतिशत ने माँसपेशियों में दर्द की सूचना दी।

कुल 13.6 प्रतिशत संक्रमित लोगों ने कम से कम एक प्रकार के लक्षण की सूचना दी थी।

शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन लोगों में श्वसन संबंधी गंभीर लक्षण थे, उनमें अन्य लोगों की तुलना में दीर्घकालिक कोविड के अधिक गंभीर लक्षण पाये गए।

उपरोक्त जानकारी 1 जुलाई तक की है।

प्रश्न.435. मास्क पहनने की आवश्यकता और तापघात से बचने के उपाय / (3) परिस्थिति अनुसार निर्णय लें

उत्तर.435. इस शृंखला में, बढ़ते तापमान से बचते हुए मास्क का उपयोग प्रभावी रूप से करने के तरीकों पर जानकारी प्रदान की जा रही है। इसकी तीसरी कड़ी में, हम आपको बतायेंगे कि मास्क पहनने या न पहनने का निर्णय लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

हमने इस बारे में नागोया प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफ़ेसर और विश्व स्वास्थ्य संगठन के तापघात जोख़िमों का अध्ययन करने वाले दल के सदस्य हिराता आकिमासा से पूछा। हिराता का कहना है कि हमें तापघात के ख़िलाफ़ लगातार सतर्क रहने की ज़रूरत है, ख़ासकर इस मौसम में जब तापमान और आर्द्रता दोनों अधिक होती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि लोग मास्क पहनते समय यह भूल जाते हैं कि उन्हें कितनी प्यास लगी है, जिससे तरल पदार्थ का सेवन कम हो सकता है। हिराता बताते हैं कि पानी की कमी और तापमान में वृद्धि के कारण तापघात होता है। वह लोगों को अधिक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह देते हैं, क्योंकि जब आप पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं लेते और शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो तापघात का ख़तरा बढ़ जाता है।

मास्क पहनने के बारे में हिराता का कहना है कि यदि आप दूसरों से पर्याप्त दूरी पर हैं, तो अपना मास्क उतार सकते हैं, परंतु ऐसी जगहों पर मास्क पहना जाना चाहिए जहाँ संक्रमण का ख़तरा अधिक हो। उनका कहना है कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात जगह और स्थिति के आधार पर निर्णय लेना है।

उपरोक्त जानकारी 14 जून तक की है।

प्रश्न.434. मास्क पहनने की आवश्यकता और तापघात से बचने के उपाय / (2) मास्क पहनने के जोखिम क्या हैं?

उत्तर.434. कोविड-19 संक्रमण को रोकने के लिए मास्क पहनने के गर्मियों के मौसम में कुछ नुक़सान हो सकते हैं। अपनी इस शृंखला में हम तापघात से बचते हुए प्रभावी ढंग से मास्क का उपयोग करने के तरीक़े के बारे में जानकारी प्रदान कर रहे हैं। इस अंक में जानेंगे कि मास्क पहनने से तापघात का ख़तरा बढ़ता है या नहीं।

नागोया प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफ़ेसर और तापघात जोखिमों का अध्ययन करने वाले विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक दल के सदस्य हिराता आकिमासा के अनुसार पिछले अध्ययनों से पता चलता है कि मास्क पहनने से मास्क से ढँके और उसके बिल्कुल निकट के हिस्सों के अतिरिक्त शरीर के तापमान पर कोई ख़ास प्रभाव नहीं पड़ता है। उनका कहना है कि एक मास्क पहनने वाले व्यक्ति के शरीर का भीतरी तापमान 0.06 से 0.08 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है जो कि तापघात के जोखिम के एक मोटे संकेत, 1 डिग्री से काफ़ी कम है।

हिराता का कहना है कि इससे पता चलता है कि मास्क पहनने से तापघात के जोखिम में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना नहीं होगी। हालाँकि, उन्होंने कहा कि अगर व्यक्ति मास्क पहनता है और कठिन व्यायाम करता है तो उसे तापघात होने का ख़तरा बढ़ जाता है।

वह यह भी कहते हैं कि छोटे बच्चों और नवजात शिशुओं के मास्क पहनने और तापघात के जोखिम के संबंध में बहुत कम आँकड़े उपलब्ध हैं। सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार अभिभावकों को तापघात के प्रति सावधानी बरतना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 13 जून तक की है।

प्रश्न.433. मास्क पहनने की आवश्यकता और तापघात से बचने के उपाय / (1) मास्क पहनने के उपाय का पालन कैसे करें?

उत्तर.433. कोरोनावायरस का प्रसार रोकने के उपायों के तहत चेहरे का मास्क पहनना आवश्यक है। लेकिन गर्मियों के मौसम में, मास्क पहनना गर्म और घुटन-भरा हो सकता है। हमारी इस नयी शृंखला में, बढ़ते तापमान के बीच तापघात से बचते हुए मास्क का इस्तेमाल प्रभावी रूप से करने के तरीक़ों के बारे में जानकारी प्रदान की जा रही है।

23 मई को जापान सरकार ने कोरोनावायरस से संबद्ध अपनी मूल प्रतिक्रिया नीति में बदलाव किये।

अधिकारियों का कहना है कि मास्क पहनना अब भी वायरस-रोधी उपायों का एक बेहद महत्त्वपूर्ण अंग है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में मास्क उतारा भी जा सकता है।

घर से बाहर, 2 मीटर या इससे अधिक दूरी बनाये रखने पर मास्क हटाया जा सकता है। इसके अलावा, यदि आप बातचीत नहीं कर रहे हैं, तो आपके आसपास लोग मौजूद होने पर भी, मास्क पहनना आवश्यक नहीं है। विशेष रूप से गर्मी के महीनों में तापघात से बचने के लिए सरकार ने मास्क न पहनने की सलाह दी है।

घर के भीतर, 2 मीटर या उससे अधिक दूरी होने और बातचीत लगभग न होने की स्थिति में मास्क हटाया जा सकता है।

स्कूलों में शारीरिक शिक्षा कक्षाओं के दौरान मास्क उतारे जा सकते हैं। यह दिशानिर्देश स्कूल-पश्चात की क्लब गतिविधियों पर भी लागू होता है। परस्पर संपर्क वाली खेल प्रतियोगिताओं में खेल संघों द्वारा तैयार दिशानिर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।

2 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए चेहरे के मास्क की अनुशंसा नहीं की गयी है। 2 वर्ष और उससे अधिक आयु के शिशु छात्रों के लिए, बालवाड़ी में मास्क पहनना आवश्यक नहीं है चाहे आपसी दूरी कितनी भी क्यों न हो।

यह जानकारी 10 जून तक की है।

प्रश्न.432. बच्चों का टीकाकरण / (9) क्या बच्चों का टीकाकरण होना चाहिए?

उत्तर.432. इस नवीनतम शृंखला में हम नये आँकड़ों के साथ जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं ताकि बच्चे और उनके अभिभावक मिलकर तय कर सकें कि बच्चों को टीका लगवाना है या नहीं। आज इस शृंखला की अंतिम कड़ी में जानेंगे बच्चों के टीकाकरण पर विशेषज्ञों की राय।

कितासातो विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर नाकायामा तेत्सुओ बाल चिकित्सक होने के साथ-साथ टीकाकरण विशेषज्ञ हैं और उन्होंने अपने विचार साझा किये हैं। वह कहते हैं कि गंभीर अस्थमा जैसी बीमारियों से ग्रसित बच्चों को वह टीका लगवाने की सलाह देते हैं, लेकिन साथ ही वह बिना किसी स्वास्थ्य समस्या वाले बच्चों के परिवारों को भी सलाह देते हैं कि बच्चे की जीवन-शैली और पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाए। नाकायामा उन बच्चों के टीकाकरण की सलाह देते हैं जो उन जगहों पर अक्सर जाते हैं जहाँ लोग इकट्ठा होते हैं, जैसे स्कूल से बाहर की गतिविधियाँ, स्कूल की क्लब गतिविधियाँ या खेलकूद इत्यादि। नाना-नानी या दादा-दादी के साथ रहने वाले बच्चों को भी वह टीका लगवाने की सलाह देते हैं ताकि अपने प्रियजनों की रक्षा की जा सके।

नाकायामा का कहना है कि साधारणतः टीके हमें स्वस्थ जीवन जीने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए खसरे की बात करें तो 1 हज़ार संक्रमित लोगों में से केवल 1 व्यक्ति में एन्सेफ़लाइटस यानि मस्तिष्ककोप सहित गंभीर लक्षण पैदा होते हैं। इसके बावजूद लोग इसका टीका लगवाते हैं और बहुत कम ही इस बीमारी से पीड़ित होते हैं।

उनका कहना है कि हमें कोरोनावायरस टीके को अन्य सभी प्रकार के टीकों की तरह ही देखना चाहिए। उन्होंने लोगों द्वारा टीकों और संक्रामक रोगों के बारे में ज्ञान हासिल करने की महत्ता पर बल दिया।

यह जानकारी 18 मई तक की है।

प्रश्न.431. बच्चों का टीकाकरण / (8) क्या हमें टीकों की नयी तकनीक के बारे में चिंतित होना चाहिए?

उत्तर.431. कोरोनावायरस टीकों में विश्व में पहली बार मैसेन्जर आरएनए यानि एमआरएनए तकनीक का प्रयोग किया गया है। बीमारियों के इलाज के लिए इस तकनीक के संभावित प्रयोग पर 30 से भी अधिक वर्षों तक अध्ययन किया गया है। एमआरएनए एक ऐसा पदार्थ है जो आसानी से विघटित हो जाता है। टीकाकरण के कुछ दिन बाद यह खंडित हो कर विलीन हो जाता है।

जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि एमआरएनए शरीर में नहीं रहता और इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। मंत्रालय के अनुसार टीकाकरण के कई वर्षों बाद इससे किसी बीमारी के उत्पन्न होने की आशंका नहीं है।

यह जानकारी 17 मई तक की है।

प्रश्न.430. बच्चों का टीकाकरण / (7) बच्चों में गंभीर दुष्प्रभाव होने की क्या संभावना है?

उत्तर.430. एनएचके, कोरोनावायरस के बारे में प्रश्नों के उत्तर दे रहा है। हमारी नवीनतम शृंखला में हम नये आँकड़ों के साथ जानकारी प्रदान कर रहे हैं ताकि बच्चों और उनके अभिभावकों को एक साथ यह तय करने में सहायता मिल सके कि टीका लगवाना है या नहीं। आज की कड़ी में हम टीकाकरण से होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों की संभावना पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि कुछ दुर्लभ मामलों में टीकाकरण के बाद हृदय की माँसपेशियों में सूजन पैदा होने के कारण हृदय की क्रियाएँ प्रभावित हुईं। अप्रैल तक जापान में 5 से 11 साल के बच्चों को 15,34,000 टीके दिये जा चुके हैं, जिनमें से केवल एक बच्चे में ऐसे लक्षण विकसित हुए।

अमरीका ने जापान से पहले बच्चों का टीकाकरण शुरू किया तथा उसने टीके के दुष्प्रभावों पर और अधिक शोध भी किया है। अमरीकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्रों के अनुसार लड़कों को दी गयी ख़ुराक के 10 लाख मामलों में पहले टीकाकरण के बाद हृदय संबंधी दुष्प्रभावों के मामले शून्य रहे। दूसरी ख़ुराक के बाद यह आँकड़ा 4.3 मामलों तक पहुँच गया।

लड़कियों के मामले में पहली ख़ुराक के बाद उपलब्ध आँकड़े अपर्याप्त थे। दूसरी ख़ुराक के बाद प्रति 10 लाख टीकाकरण पर इस तरह के दुष्प्रभाव के 2 मामले सामने आये। सभी मामलों में लक्षण हल्के थे और बच्चे ठीक हो गये।

अमरीकी रिपोर्टों के अनुसार टीका लगवाने के बाद 2 बच्चों की मौत हो गयी है। हालांकि दोनों बच्चों को अन्य बीमारियाँ थीं और वे ख़ुराक लेने से पहले ही अस्वस्थ थे तथा उनकी मृत्यु के कारण को टीके से जोड़ने के लिए कोई आँकड़ा उपलब्ध नहीं है।

यह जानकारी 16 मई तक की है।

प्रश्न.429. बच्चों का टीकाकरण / (6) टीके के दुष्प्रभाव क्या हैं?

उत्तर.429. जापान ने फ़रवरी माह में 5 से 11 साल के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया था। टीकाकरण संबंधी निर्णय, बच्चों और उनके अभिभावकों को मिलकर लेने में मदद करने हेतु हम नये आँकड़ों सहित जानकारी इस नयी शृंखला मे प्रदान करेंगे। इस अंक में हम टीकाकरण के दुष्प्रभावों पर नज़र डालेंगे।

टीकाकरण के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ख़ुराक लेने के बाद बुखार आ सकता है या शरीर के उस हिस्से में दर्द हो सकता है जहाँ टीका लगाया गया था। ऐसा टीके पर हमारे प्रतिरक्षी तंत्र की प्रतिक्रियास्वरूप होता है या कह सकते हैं कि हमारी प्रणाली कोरोनावायरस को पहचानना “सीखती” है।

अमरीकी दवा कंपनी फ़ाइज़र द्वारा टीकाकृत बच्चों पर किये गए अध्ययन के अनुसार, पहली ख़ुराक के बाद 74 प्रतिशत मामलों में और दूसरी ख़ुराक के बाद 71 प्रतिशत मामलों में सुई लगने के स्थान के आसपास दर्द होने का पता चला। वहीं, पहली ख़ुराक के बाद 34 प्रतिशत मामलों में और दूसरी के बाद 39 प्रतिशत मामलों में थकान का पता चला। साथ ही, पहली ख़ुराक के बाद 3 प्रतिशत मामलों में और दूसरी के बाद 7 प्रतिशत मामलों में 38 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक का बुखार दर्ज किया गया।

अध्ययन के नतीजे दर्शाते हैं कि वयस्कों की तुलना में 5 से 11 साल के बच्चों में दुष्प्रभाव विकसित होने की संभावना कम होती है। अधिकांश बच्चों में माँसपेशियों में दर्द या हाथ हिलाने में कठिनाई जैसे मामूली लक्षण ही प्रकट होते हैं लेकिन एक या दो दिन में उस कष्ट से निजात मिल जाना चाहिए।

यह जानकारी 13 मई तक की है।

प्रश्न.428. बच्चों का टीकाकरण / (5) टीकाकरण कितना प्रभावी है?

उत्तर.428. जापान ने फ़रवरी माह में 5 से 11 साल के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया था। टीकाकरण संबंधी निर्णय, बच्चों और उनके अभिभावकों को मिलकर लेने में मदद करने हेतु हम नये आँकड़ों सहित जानकारी इस नयी शृंखला मे प्रदान करेंगे। इस अंक में, हम बच्चों में संक्रमण रोकने हेतु टीकाकरण की प्रभावकारिता पर नज़र डालेंगे।

वर्ष 2021 में, अमरीकी दवा कंपनी फ़ाइज़र ने 5 से 11 वर्ष के बच्चों पर अपने टीके के नैदानिक परीक्षणों के नतीजे जारी किये थे। दवा कंपनी ने कहा कि नतीजे दर्शाते हैं कि टीके की दूसरी ख़ुराक पाने के 7 और उससे अधिक दिनों के बाद बच्चों में संक्रमण के लक्षणों की रोकथाम में टीके की प्रभावकारिता दर 90.7 प्रतिशत पायी गई। लेकिन यह विदित है कि टीका, जापान और शेष विश्व में वर्तमान में फैल रहे कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार से निपटने में उतना प्रभावी नहीं है।

इस साल 11 मार्च को जारी एक रिपोर्ट में, अमरीकी शोधकर्ताओं ने बताया कि उनके अध्ययन से पता चला है कि ने 5 से 11 साल के बच्चों को दी गयी टीके की दो ख़ुराकें ओमिक्रोन संक्रमण के जोखिम को 31 प्रतिशत तक कम कर देती हैं।

30 मार्च को जारी रिपोर्ट में, उन्होंने बताया कि ओमिक्रोन काल के दौरान 5 से 11 साल के बच्चों के अस्पताल में भर्ती होने के विरुद्ध टीकाकरण की प्रभावकारिता 60 प्रतिशत पायी गई। उन्होंने कहा कि गंभीर लक्षणों वाले लगभग सभी बच्चे, टीकाकृत नहीं थे।

इन आँकड़ों से पता चलता है कि हालाँकि टीकाकरण से संक्रमण से पूरी तरह से तो बचा नहीं जा सकता है लेकिन बच्चों को अस्पताल में भर्ती करने से बचाने के लिए गंभीर लक्षण विकसित होने से रोकने में टीका प्रभावी है।

यह जानकारी 12 मई तक की है।

प्रश्न.427. बच्चों का टीकाकरण / (4) बच्चों में कोरोनावायरस के लक्षण

उत्तर.427. जापान में फ़रवरी से 5 से 11 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण आरम्भ हो गया। इस शृंखला में हम बच्चों और उनके अभिभावकों को उपयोगी जानकारी व नया डेटा उपलब्ध का रहे हैं ताकि टीका लगवाना है या नहीं इसका निर्णय वे मिलकर ले सकें। इस अंक में बच्चों में कोविड-19 के लक्षणों पर जानकारी दे रहे हैं।

जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि 19 अप्रैल तक के सप्ताह में देश-भर में कोरोनावायरस संक्रमण के 3,14,370 नये मामले सामने आये। इसमें 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों की संख्या 47,659 यानि 15.2 प्रतिशत रही, जो समस्त आयु वर्गों में से सबसे अधिक थी।

महामारी आरम्भ होने के बाद से पिछले 2 वर्षों के दौरान 10 वर्ष से कम आयु के 9,59,662 बच्चे कोरोनावायरस से संक्रमित हुए और इनमें से 4 की मृत्यु हो गयी।

19 अप्रैल तक के एक सप्ताह के दौरान 4 बच्चों की हालत गंभीर थी।

अधिकांश बाल रोगियों में हल्के लक्षण पाये जाते हैं, हालाँकि कभी कभी तेज़ बुखार, उल्टी और गले में सूजन की वजह से साँस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण भी देखने को मिलते हैं।

बाल चिकित्सकों के एक समूह, जापान बाल-चिकित्सक संस्थान का कहना है कि हृदय या फेफड़े के रोग से ग्रस्त बच्चों में गंभीर लक्षण पैदा होने का ख़तरा अधिक होता है। बिना लक्षण वाले मामलों में भी बाद में खाँसी या साँस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएँ सामने आ सकती हैं।

उपरोक्त जानकारी 11 मई तक की है।

प्रश्न.426. बच्चों का टीकाकरण / (3) क्या बच्चों का टीकाकरण होना चाहिए?

उत्तर.426. प्रत्येक परिवार को अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और हर एक का अपना नज़रिया होता है। बच्चों को टीका लगाने का निर्णय लेते समय आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

टीकाकरण के अपेक्षित लाभों और संभावित जोख़िमों को जानना महत्त्वपूर्ण है।
टीका लगवाने के कई लाभ हैं, जैसे बच्चों को संक्रमित होने और गंभीर रूप से बीमार होने से बचाना, वायरस को दूसरों तक फैलने से रोकना तथा बिना किसी चिंता के विद्यालय और अन्य स्थानों पर जा सकना। जोख़िमों में टीके के दुष्प्रभाव शामिल हैं, जो टीकाकरण की अवांछित प्रतिक्रिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ध्यान देने योग्य बात यह है कि कोरोनावायरस संक्रमण बच्चों में व्यापक रूप से फैल रहा है, परंतु संक्रमित बच्चों में गंभीर लक्षण विकसित होने के मामले जापान में दुर्लभ हैं। उनका कहना है कि ध्यान देने योग्य एक बात यह भी है कि ओमिक्रोन प्रकार के खिलाफ़ संक्रमण को रोकने में टीके कम प्रभावकारी हो रहे हैं, जो जापान और दुनिया भर में प्रमुख प्रकार बन गया है।

अन्य आयु वर्गों की तरह, 5 से 11 वर्ष की आयु के बच्चे भी कोरोनावायरस टीकाकरण का निःशुल्क लाभ उठा सकते हैं। खसरा, छोटी चेचक और जापानी बुखार के लिए टीकाकरण क़ानूनी रूप से अनिवार्य हैं, जिनके लिए अभिभावकों को प्रयास करने होते हैं। परतुं कोरोनावायरस टीके के मामले में ऐसा नहीं है।

अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ मिलकर इस बारे में सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए। अपने अगले भाग में हम डाटा उपलब्ध करवाएँगे ताकि लोगों को निर्णय लेने में आसानी हो सके।

उपरोक्त जानकारी 10 मई तक की है।

प्रश्न.425. बच्चों का टीकाकरण / (2) टीके कैसे काम करते हैं?

उत्तर.425. जापान ने इस वर्ष फ़रवरी में 5 से 11 साल के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया है। इस शृंखला में हम नये आँकड़ों सहित जानकारी प्रदान कर रहे हैं ताकि बच्चों और उनके अभिभावकों को एक साथ यह तय करने में सहायता मिल सके कि टीके की ख़ुराक लेना है या नहीं। आज की कड़ी में हम टीके कैसे काम करते हैं इस पर एक नज़र डालते हैं।

टीके हमारे शरीर की "प्रतिरक्षा प्रणाली" में एक प्रतिक्रिया को सक्रिय कर वायरस से सुरक्षा प्रदान करते हैं जो वायरस और बैक्टीरिया जैसे बाहरी रोगाणुओं पर हमला करता है। कोरोनावायरस की सतह पर "स्पाइक प्रोटीन" होते हैं। कोरोनावायरस के टीकों में "मैसेन्जर आरएनए" होता है, जिसमें "स्पाइक प्रोटीन" का उत्पादन करने के निर्देश होते हैं। जब टीका लगाया जाता है तो इन्हीं निर्देशों के आधार पर हमारे शरीर के अंदर "स्पाइक प्रोटीन" बनते हैं। "स्पाइक प्रोटीन" कोरोनावायरस का भाग होते हैं और हमारा "प्रतिरक्षी तंत्र" उन्हें ऐसे तत्व के रूप में पहचानता है जो शरीर में नहीं होने चाहिए और "एंटीबॉडी" नामक प्रतिरोधक पदार्थ का उत्पादन करता है जो वायरस पर हमला करने के लिए एक हथियार के रूप में काम करते हैं। इस प्रकार हमारा शरीर सीख लेता है कि जब कोई वास्तविक वायरस हमारे शरीर में प्रवेश करेगा तो उसके संक्रमण से कैसे लड़ना है।

जब हम बिना टीके लगाये कोरोनावायरस से संक्रमित होते हैं तो हमारा "प्रतिरक्षा तंत्र" शरीर में प्रवेश करने वाले कोरोनावायरस के आकार से मेल खाने वाले एंटीबॉडी का उत्पादन कर उससे लड़ने का प्रयास करता है। लेकिन हमारा शरीर पर्याप्त गति से पर्याप्त मात्रा में "एंटीबॉडी" का उत्पादन करने में असमर्थ हो सकता है, या यह वायरस बहुत शक्तिशाली हो सकता है। तभी हमारे शरीर में खाँसी और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण विकसित होते हैं और कभी-कभी हम गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं। टीका लगवाने से हमारा शरीर पहले से ही वायरस से लड़ने वाली "एंटीबॉडी" पैदा कर सकता है। अपने शरीर को वायरस के भावी हमलों के प्रति तैयार कर हम संक्रमण, उसके लक्षणों और वायरस से गंभीर रूप से बीमार होने से बच सकते हैं।

उपरोक्त जानकारी 9 मई तक की है।

प्रश्न.424. बच्चों का टीकाकरण / (1) कितने बच्चों का टीकाकरण हो चुका है?

उत्तर.424. जापान ने दो महीने पहले 5 से 11 साल के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया था। इस आयु वर्ग के लगभग 9 प्रतिशत बच्चों को टीके की दो ख़ुराकें मिल चुकी हैं। बच्चों में वायरस के गंभीर लक्षण विकसित होने की संभावना नहीं है। लेकिन फिर भी बच्चों में संक्रमण मामलों की संख्या में कमी न आना, चिंताजनक है। क्या बच्चों के लिए भी टीकाकरण के लाभ उसके जोखिम से कहीं अधिक हैं? टीकाकरण संबंधी निर्णय, बच्चों और उनके अभिभावकों को मिलकर लेने में मदद करने हेतु हम नये आँकड़ों सहित जानकारी इस नयी शृंखला मे प्रदान करेंगे।

जापान में, 5 से 11 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण फ़रवरी 2022 में शुरू हुआ। उन्हें अमरीकी दवा कंपनी फ़ाइज़र द्वारा विकसित टीका दिया जा रहा है। बच्चों को तीन सप्ताह के अंतराल पर दो ख़ुराकें दी जा रही हैं। ख़ुराक की मात्रा, वयस्कों को दी जाने वाले ख़ुराक की मात्रा की एक तिहाई है।

2 मई 2022 तक, 5 से 11 वर्ष की आयु के 9,98,000 से अधिक बच्चों को कम से कम एक ख़ुराक मिल चुकी। यह संख्या, देश में उस आयु वर्ग के 74,10,000 बच्चों की लगभग 13.5 प्रतिशत है। लगभग 6,60,000 बच्चों यानि 8.9 प्रतिशत को दो ख़ुराकें दी जा चुकी हैं।

कुछ देशों ने जापान से पहले बच्चों का टीकाकरण शुरू किया था। अमरीका में, 20 अप्रैल तक 28.3 प्रतिशत बच्चों को और कनाडा में, 10 अप्रैल तक 40.7 प्रतिशत बच्चों को टीके की दो ख़ुराकें दी जा चुकी हैं।

यह जानकारी 6 मई तक की है।

प्रश्न.423. “बीए.2” और “एक्सई” प्रकार क्या हैं? / भाग-6 सामान्य संक्रमण-रोधी उपायों में कोई बदलाव नहीं

उत्तर.423. कोरोनावायरस के नये प्रकारों और उनके संक्रमण व प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक उपायों से जुड़ी शृंखला के इस अंतिम अंक में हम दैनिक संक्रमण-रोधी उपायों पर नज़र डालेंगे।

पिछले अंकों में चर्चित कोरोनावायरस के संयोजनों और उप-प्रकारों के अलावा, ओमिक्रोन के “बीए.4” और “बीए.5” उप-प्रकार भी मौजूद हैं जो दक्षिण अफ़्रीका और अन्य जगहों पर पाये गए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का उनकी मारक क्षमता का पता लगाना अभी बाकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि विभिन्न प्रकारों के संयोजन से उपजे कोरोनावायरस के नये प्रकारों के जोखिम का उच्च-स्तर अब भी बना हुआ है। डब्ल्यूएचओ अधिकारियों ने बताया कि इस कारण हमें कोरोनावायरस का आनुवांशिक विश्वलेषण जारी रखते हुए जानकारी साझा करना होगा।

तोक्यो चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक हामादा आत्सुरो का कहना है कि “बीए.4” और “बीए.5” भी “बीए.2” की तरह ओमिक्रोन के उप-प्रकार हैं। उनका कहा है कि उनकी उपज, कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार के संक्रमण और गुणन की प्रक्रिया के दौरान उत्परिवर्तित होने पर हुई थी।

उनका कहना है कि किसी भी उभरते प्रकार पर उसके बड़ा ख़तरा बनने से पहले ही निगरानी रखना महत्त्वपूर्ण है। हालाँकि विशेषज्ञों को संदेह है कि सभी संयोजनों की तुलना में “एक्सई” प्रकार कहीं अधिक संक्रामक है लेकिन उनका कहना है कि उससे संक्रमण की नयी बड़ी लहर पैदा होने की पुष्टि अभी नहीं की जा सकती। हामादा कहते हैं कि बिल्कुल भिन्न प्रकार के उभरने की संभावना पर नज़र रखनी होगी। उनका अनुसार यही कारण है कि हमें निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए वायरस का आनुवांशिक विश्लेषण जारी रखना होगा।

अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और देखभाल विश्वविद्यालय के प्राध्यापक वादा कोजि का कहना है कि कोरोनावायरस के अब तक के ज्ञात प्रकारों में पाया गया उत्परिवर्तन कल्पना से परे नहीं है। उन्होंने बताया कि हालाँकि वह नये घटनाक्रम पर नज़र रख रहे हैं, लेकिन संक्रमण से बचने के उपायों में किसी प्रमुख बदलाव की संभावना उन्हें नज़र नहीं आती।

वादा का कहना है कि वर्तमान में संक्रमण का मुख्य प्रकार “बीए.2” है जो भविष्य में “एक्सई” हो सकता है। उनका कहना है कि प्रकारों में बदलाव से न तो दैनिक जीवन में अपनाये जाने वाले संक्रमण-रोधी उपायों में बदलाव होगा और न ही कोविड-19 की बूस्टर ख़ुराकों की आवश्यकता घटेगी।

यह जानकारी 28 अप्रैल तक की है।

प्रश्न.422. “बीए.2” और “एक्सई” प्रकार क्या हैं? / भाग-5 कोविड-19 के प्रकारों के संयोजन

उत्तर.422. कोरोनावायरस के नये प्रकारों और आवश्यक उपायों शृंखला में एक नज़र उन प्रकारों पर जो कई प्रकारों के संयोजन हैं।

पिछले अंक में हमने “एक्सई” संयोजन पर एक नज़र डाली थी, जो ओमिक्रेन के उप-प्रकार “बीए.1” और “बीए.2” का एक संयोजन है। लेकिन एक्सई एकमात्र संयोजन नहीं है।

“एक्सडी” और “एक्सएफ़” उप-प्रकार, दोनों 2021 की गर्मियों में जापान में पाँचवीं लहर के लिए ज़िम्मेदार डेल्टा प्रकार और ओमिक्रेन बीए.1 उप-प्रकार के संयोजन हैं।

एक्सडी मुख्य रूप से डेल्टा ही है लेकिन बीए.1 के स्पाइक प्रोटीन के साथ। ब्रिटेन के स्वास्थ्य संस्थान के दस्तावेज़ बताते हैं कि एक्सडी सबसे पहले 13 दिसंबर, 2021 में मिला था। दस्तावेज़ों के अनुसार 1 अप्रैल 2022 तक, एक्सडी के 66 मामले फ़्राँस में, 8 डेनमार्क में और एक बेल्जियम में पाये गये।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक्सडी को निगरानी वाला प्रकार बताया है। निगरानी वाले प्रकारों को कोविड-19 के उन प्रकारों की संज्ञा दी गयी है जिनके दुष्प्रभाव, जैसे लक्षणों की गंभीरता और टीके के विरुद्ध प्रभावशीलता स्पष्ट नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि एक्सडी का प्रसार सीमित है।

एक्सएफ़, स्पाइक प्रोटीन सहित काफ़ी हद तक बीए.1 ही है और इसमें कुछ तत्व डेल्टा के हैं। ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष ब्रिटेन में 7 जनवरी से एक्सएफ़ के 39 मामले सामने आये, लेकिन 14 फ़रवरी के बाद से कोई भी मामला सामने नहीं आया है।

उपरोक्त जानकारी 27 अप्रैल तक की है।

प्रश्न.421. “बीए.2” और “एक्सई” प्रकार क्या हैं? / भाग-4 "एक्सई" प्रकार

उत्तर.421. कोरोनावायरस के नये प्रकारों और उनके संक्रमण व प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक उपायों से जुड़ी शृंखला के इस अंक में हम ओमिक्रोन के एक उप-प्रकार, "एक्सई" पर नज़र डालेंगे।

"एक्सई" प्रकार, वायरस के कई प्रकारों का संयोजन है, तथा ब्रिटेन और अन्य देशों में इसके मामले सामने आये हैं।

जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 11 अप्रैल को घोषणा की थी कि हवाईअड्डे पर एक संगरोध केंद्र में देश का पहला एक्सई प्रकार का मामला सामने आया था।

छोटे उत्परिवर्तनों की पुनरावृत्ति के कारण वायरस में नयी विशेषताएँ उत्पन्न होती हैं। परंतु जब वायरस के विभिन्न प्रकार एक ही व्यक्ति को संक्रमित करते हैं और उनके आनुवंशिक पदार्थ आपस में जुड़ते हैं, तब नये संयोजक रूपों का जन्म होता है।

"एक्सई" प्रकार ओमिक्रोन "बीए.1" और "बीए.2" का संयोजक है। मानव कोशिकाओं के संक्रमण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले, वायरस की सतह पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन सहित "एक्सई" का अधिकांश भाग "बीए.2" के समान होता है, जबकि शेष "बीए.1" के समान होता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार "एक्सई" एक तरह का ओमिक्रोन प्रकार है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक रिपोर्ट में बताया कि 19 जनवरी, 2022 को देश में पहली बार "एक्सई" प्रकार के मामले का पता चलने के बाद से, 5 अप्रैल तक इस संयोजक प्रकार के 1,179 मामले सामने दर्ज किये जा चुके थे।

ब्रिटेन में छोटे स्तर पर सामूहिक संक्रमण मामले सामने आये हैं, लेकिन जिन मामलों की जाँच की गयी, उनमें से 1 प्रतिशत से भी कम मामलों में "एक्सई" प्रकार की पुष्टि हुई है।

ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने 30 मार्च तक के आँकड़ों के आधार पर गणितीय मॉडल का उपयोग कर एक विश्लेषण किया, और अनुमान दिया कि एक्सई प्रकार की संक्रमण दर बीए.2 प्रकार की तुलना में 12.6 प्रतिशत तेज़ है।

उपरोक्त जानकारी 26 अप्रैल तक की है।

प्रश्न.420. “बीए.2” और “एक्सई” प्रकार क्या हैं? / भाग-3 क्या 7वीं लहर में “बीए2” प्रकार प्रमुख होगा?

उत्तर.420. कोरोनावायरस के नये प्रकारों और उनके संक्रमण व प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक उपायों से जुड़ी इस शृंखला के इस अंक में हम ओमिक्रोन के एक उप-प्रकार, “बीए.2” के संभावित प्रसार पर ध्यान देंगे।

सुज़ुकि मोतोइ राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान में निगरानी, टीकाकरण और महामारी विज्ञान अनुसंधान केंद्र के प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि संक्रमण की सातवीं लहर में "बीए2" प्रकार प्रमुख रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि "बीए2" को बीए1 की तुलना में थोड़ा अधिक संक्रामक माना जा रहा है इसलिए 7वीं लहर का पूर्ववर्ती लहरों की तुलना में अधिक बड़ा होने की संभावना को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा प्रणाली को और मज़बूत करने की आवश्यकता है। जब छठी लहर में बीए1 ओमीक्रोन प्रकार फैलना शुरू हुआ तो लोग कम सतर्क हो गये क्योंकि इसके बारे में कहा गया था कि इसमें डेल्टा प्रकार की तुलना में गंभीर बीमारी का ख़तरा कम होता है। लेकिन छठी लहर में संक्रमण की संख्या पिछली लहरों की तुलना में काफ़ी अधिक थी जिसके परिणामस्वरूप अधिक संख्या में मौतें हुईं। आशंका है कि "बीए 2" के साथ भी ऐसा ही हो सकता है।


तोक्यो चिकित्सा विश्वविद्यालय अस्पताल के प्राध्यापक हामादा आत्सुओ ने कहा कि माना जा रहा है कि "बीए 2" ने दुनिया भर के अधिकांश देशों में संक्रमण के प्रमुख स्रोत के रूप में अन्य प्रकारों का स्थान ले लिया है। उन्होंने कहा कि कुछ यूरोपीय देशों में 90 प्रतिशत से अधिक मामलों के लिए बीए2 ज़िम्मेदार है। उन्होंने बताया कि जापान के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि व्यक्ति से व्यक्ति के संपर्क को कम करने के साथ-साथ बूस्टर टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए संक्रमण-रोधी उपायों को और मज़बूत किया जाए। उन्होंने कहा कि नये मामलों की संख्या विशेष रूप से 20 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के बीच बढ़ रही है। इस आयु वर्ग को लक्षित करने वाले उपाय संक्रमण के नये उछाल को कम करने की कुंजी हो सकते हैं।

उपरोक्त जानकारी 25 अप्रैल तक की है।

प्रश्न.419. “बीए.2” और “एक्सई” प्रकार क्या हैं? / भाग-2 “बीए.2” के विशिष्ट लक्षण और टीकों की प्रभावकारिता

उत्तर.419. कोरोनावायरस के नये प्रकारों और उनके संक्रमण व प्रसार को रोकने के लिए आवश्यक उपायों से जुड़ी इस शृंखला के इस अंक में हम ओमिक्रोन के एक उप-प्रकार, “बीए.2” के विशेष लक्षणों और टीकों की प्रभावकारिता पर नज़र डालेंगे। ग़ौरतलब है कि “बीए.2”, ओमिक्रोन से कहीं अधिक संक्रामक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ का कहना है कि “बीए.2”, संक्रमण की छठी लहर के बीच वायरस के प्रमुख वैश्विक प्रकार बन चुके “बीए.1” की तुलना में कहीं अधिक संक्रामक है। डेनमार्क के आँकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि “बीए.1” की तुलना में “बीए.2” को फैलने में 15 प्रतिशत कम समय लगता है और एक व्यक्ति के माध्यम से संक्रमित होने वाले लोगों की औसत संख्या यानि प्रभावी गणनीय संख्या “बीए.1” की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है। हालाँकि गंभीर रोग होने का जोखिम कम प्रतीत होता है। डब्ल्यूएचओ ने ब्रिटेन में किये गए विश्लेषण के हवाले से कहा कि “बीए.1” और “बीए.2” से संक्रमित लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की दर में कोई अंतर नहीं है। उसने जोड़ा कि “बीए.1” से संक्रमित हो चुके लोगों का “बीए.2” से भी संक्रमित होने का ख़तरा बना हुआ है।

ब्रिटेन में हुए अनुसंधान में पता चला है कि बूस्टर ख़ुराक पाने के कम से कम एक सप्ताह बाद “बीए.1” से संक्रमित होने पर 71.3 प्रतिशत मामलों में कोई लक्षण विकसित नहीं हुए। “बीए.2” के लिए यह आँकड़ा थोड़ा बढ़ कर 72.2 प्रतिशत रहा। तीसरी ख़ुराक के कम से कम 15 सप्ताह बाद, “बीए.1” और “बीए.2” के ख़िलाफ़ टीके की प्रभावकारिता गिरकर क्रमशः 45.5 और 48.4 प्रतिशत पायी गई।

यह जानकारी 22 अप्रैल तक की है।

प्रश्न.418. “बीए.2” और “एक्सई” प्रकार क्या हैं? / भाग-1  “बीए.2” का वैश्विक प्रसार

उत्तर.418. “बीए.2”, कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार का एक उप-प्रकार है जो उससे कहीं अधिक संक्रामक है। 11 अप्रैल को, जापान में अमरीका से आयी एक महिला में “एक्सई” के पहले मामले की पुष्टि की गयी। यह ओमिक्रोन का एक अन्य उप-प्रकार है।

वैश्विक प्रसार के बीच, कोरोनावायरस बार-बार उत्परिवर्तित हो रहा है। वर्तमान में इसका प्रमुख वैश्विक प्रकार, ओमिक्रोन का उप-प्रकार “बीए.2” है जो उसके “बीए.1” उप-प्रकार से उत्परिवर्तित हुआ है। वायरस की सतह पर स्पाइक प्रोटीन की आनुवंशिक जानकारी से संबंधित हिस्से में उत्परिवर्तन पाया गया था। मानव कोशिकाओं में वायरस संक्रमण होने में स्पाइक प्रोटीन की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।

“बीए.2” से संक्रमित लोगों का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि 27 मार्च तक के सप्ताह में संक्रमित लोगों में से 93.9 प्रतिशत “बीए.2” से संक्रमित थे। अमरीका के रोग नियत्रंण एवं रोकथाम केन्द्र का अनुमान है कि 2 अप्रैल तक के सप्ताह में कोरोनावायरस के 72.2 मामले “बीए.2” से संबंधित थे।

निजी जाँच कंपनियों के आँकड़ों पर आधारित, जापान के राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान के एक अनुमान के अनुसार, मार्च-मध्य तक देश में संक्रमण के लगभग 30 प्रतिशत मामले "बीए.2" उप-प्रकार से संबंधित थे। हालाँकि, संस्थान का मानना है कि मई के पहले सप्ताह में इनका प्रतिशत बढ़कर 93 प्रतिशत और जून के पहले सप्ताह तक 100 प्रतिशत के क़रीब पहुँच जाएगा।

जापान में “बीए.1” के सामुदायिक प्रसार की पहली पुष्टि दिसंबर 2021 के अंत में की गयी थी। इस वर्ष कुछ सप्ताहों के भीतर ही, जनवर-मध्य तक, वह डेल्टा प्रकार को पीछे छोड़ते हुए संक्रमण का प्रमुख प्रकार बन गया था। “बीए.2” के सामुदायिक प्रसार की पहली पुष्टि फ़रवरी मध्य में तोक्यो में की गयी थी। संक्रमण के मुख्य प्रकार के रूप में, बीए.2 उतनी तेज़ी से नहीं उभर रहा है जितना कि डेल्टा प्रकार को पछाड़ते हुए बीए.1 उभरा था, लेकिन फिर भी यह बदलाव सतत रूप से हो रहा है।

यह जानकारी 21 अप्रैल तक की है।

प्रश्न.417. कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभाव से पीड़ित 422 रोगियों पर अध्ययन / अंक-5 अध्ययन परिणामों का भावी उपचारों में उपयोग।

उत्तर.417. कोरोनावायरस के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों की इस शृंखला की अंतिम कड़ी में एक नज़र रोगियों के भावी उपचार पर।

साइतामा प्रिफ़ैक्चर और साइतामा चिकित्सा संघ के अधिकारियों ने दीर्घकालिक दुष्प्रभावों से पीड़ित रोगियों पर अध्ययन किया है। इनमें से अधिकांश रोगी ओमिक्रोन मामलों में उछाल से पहले कोरोनावायरस से संक्रमित हुए थे। उन्होंने रोग-निदान और उपचार के लिए अध्ययन के नतीजों को चिकित्सा दिशानिर्देशों में शामिल किया। अधिकारियों की ओमिक्रोन से संक्रमित रोगियों में दीर्घकालिक लक्षणों पर अध्ययन की भी योजना है।

साइतामा के अधिकारी प्रिफ़ैक्चर में दीर्घकालिक लक्षणों से पीड़ित रोगियों का उपचार करने वाले चिकित्सा संस्थानों की संख्या 140 से बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। वे चाहते हैं कि ऐसे संस्थान पूरे प्रिफ़ैक्चर में बराबरी से फैले हों। साइतामा चिकित्सा संस्थान में वरिष्ठ अधिकारी मारुकि युइचि को आशंका है कि संक्रमण की अगली लहर में दीर्घकालिक लक्षणों वाले रोगियों की संख्या पाँचवीं लहर के स्तर से दुगनी या इससे अधिक होगी। उन्होंने कहा कि ऐसे रोगियों के इलाज के दौरान प्राप्त नयी जानकारी को दिशानिर्देशों में शामिल किया जाएगा। उन्हें उम्मीद है कि इससे चिकित्सकों को कोरोनावायरस रोगियों की अवस्था को बेहतर रूप से समझने और उनका उपचार करने में मदद मिलेगी।

उपरोक्त जानकारी 20 अप्रैल तक की है।

प्रश्न.416. कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभाव से पीड़ित 422 रोगियों पर अध्ययन / अंक-4 निरंतर प्रयास फलदायक होते हैं

उत्तर.416. कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभावों पर शृंखला की चौथी कड़ी में हम एक ऐसे रोगी के बारे में बात करेंगे जिसकी स्थिति में निरंतर प्रयासों के कारण सुधार आया।

रोगी एक 16 वर्षीय छात्रा है जो साइतामा प्रिफ़ैक्चर में रहती है। उच्च विद्यालय में प्रवेश के तुरंत बाद, मई 2021 में वह कोरोनावायरस से संक्रमित हो गयी थी। उसे तेज़ सिरदर्द, साँस लेने में तकलीफ़ और 39 डिग्री के क़रीब बुखार था। एक निर्दिष्ट संगरोध होटल में स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद उसने विद्यालय जाना पुनः आरंभ कर दिया। परंतु जल्द ही वह चक्कर आने, सिरदर्द, अत्यधिक थकान तथा स्वाद और गंध में बदलाव जैसी समस्याओं से पीड़ित रहने लगी। शरद ऋतु आते-आते, वह चक्कर आने की वजह से विद्यालय जाने में अक्षम हो गयी थी। उसे अपना अधिकतर समय बिस्तर में रह कर बिताना पड़ता था। उसने चार अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों में दिखाया लेकिन उसके लक्षणों में सुधार नहीं हुआ।

इसके बाद छात्रा ने कान, नाक एवं गले के क्लिनिक में दिखाया, जहाँ कोविड-उपरांत स्थिति के लिए एक विशेष विभाग था। वहाँ के एक चिकित्सक ने सुझाया कि छात्रा चक्कर आना कम करने और सूंघने की क्षमता को ठीक करने के लिए प्रशिक्षण ले।

छात्रा को उसके सिर या शरीर के अन्य हिस्सों को बिना हिलाये, अपनी आँखों को ऊपर, नीचे, बाएँ और दाएँ घुमाते हुए दीवार पर एक बिंदु को पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य उसके संतुलन बोध को बहाल करना था। एक अन्य प्रशिक्षण में गंध बोध को बहाल करने के लिए वह पौधों की छवियों को देखते हुए लैवेंडर या नींबू की ख़ुशबू वाले सुगंधित तेलों को सूंघती थी। गंध और चेतना के बीच संबंध को पुनः स्थापित करने के लिए ऐसा किया जाता है। वह प्रतिदिन घर पर यह प्रशिक्षण प्राप्त करती थी और उसकी स्थिति धीरे-धीरे सुधार होने लगा।

जिस चिकित्सा केंद्र में छात्रा ने दिखाया था, उसके निदेशक, साकाता हिदेआकि ने हमें बताया कि जिन रोगियों ने बिना देर किये चिकित्सक से परामर्श कर उचित उपचार प्राप्त किया, वे अपेक्षाकृत बेहतर रूप से स्वस्थ होते हैं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि ऐसे रोगी जिन्होंने चिकित्सा सहायता लेने से पहले तीन से छः महीने तक इंतज़ार किया, उनकी स्थिति में अधिक सुधार नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आगे भी आशा की कोई किरण नज़र नहीं आ रही है क्योंकि संक्रमण की छठी लहर के कारण ऐसे रोगियों की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है।

यह जानकारी 19 अप्रैल तक की है।

प्रश्न.415. कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभाव से पीड़ित 422 रोगियों पर अध्ययन / अंक-3 छः महीनों से अधिक समय के बाद

उत्तर.415. कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभावों पर शृंखला की तीसरी कड़ी में हम एक ऐसे रोगी की बात करते हैं जो बीमारी से उबरने के छः महीने बाद भी दीर्घकालिक प्रभावों से पीड़ित है।

रोगी एक साठ वर्षीय व्यक्ति है जो साइतामा प्रिफ़ैक्चर में रहता है। वह अगस्त 2021 में कोरोनावायरस से संक्रमित हो गया था। उसे थकान, निमोनिया और लगभग 39 डिग्री बुख़ार था। वह घर पर ठीक हो गया लेकिन उसे गंध और स्वाद का अनुभव नही हो रहा था तथा वह ज़्यादा कुछ खाने में भी असमर्थ था। उस व्यक्ति का 10 किलो से अधिक वज़न भी कम हो गया। ठीक होने के बाद वह निर्माण कार्य के अपने काम पर वापस गया। लेकिन उसे सुस्ती, थकान और सोने में कठिनाई की शिकायत होती रही। व्यक्ति ने उसी वर्ष दिसंबर में काम जारी रखने में असमर्थ होने के कारण अपनी नौकरी छोड़ दी।

उस व्यक्ति का कहना है कि जब वह बिस्तर पर जाता है तो वह केवल एक घंटे तक सो पाता है लेकिन उसके बाद वह सुबह होने तक सो नहीं पाता। वह कहता है कि काम के दौरान ऐसा लग रहा था कि उसमें सहनशक्ति नहीं है। उसका कहना है कि वह जानता था कि उसे क्या करना है लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उसके अंग काम करना बंद कर देते थे। उसके अनुसार वह जानता था कि वह ऐसी स्थिति में काम पर नहीं जा सकेगा।

कोविड उपरांत की स्थितियों के एक विशेषज्ञ ने व्यक्ति को बताया कि उसमें ब्रेन फ़ॉग यानी मतिभ्रम के लक्षण हैं जिसमें चक्कर आना तथा याददाश्त और एकाग्रता में कमी शामिल है। वह दवाओं और चिकित्सक के दैनिक जीवन मार्गदर्शन पर है, लेकिन 7 महीने बाद भी उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। वह अब भी थकान और चक्कर आने की शिकायत करता है। व्यक्ति का कहना है कि उसे यह उम्मीद नहीं थी कि इसके लक्षण इतने लंबे समय तक चलेंगें। उसका कहना है कि वह अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

उसके चिकित्सक कोदाएरा माकोतो ने हमें बताया कि कोविड के बाद थकान और ब्रेन फ़ॉग दो प्रमुख स्थितियाँ हैं जो कभी-कभी छः महीने या उससे अधिक समय तक बनी रहती हैं। उन्होंने कहा कि इन लक्षणों वाले रोगियों को निरंतर समर्थन की आवश्यकता होती है।

यह जानकारी 18 अप्रैल तक की है।

प्रश्न.414. कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभाव से पीड़ित 422 रोगियों रोगियों पर अध्ययन / अंक-2 चिकित्सकों के लिए दिशानिर्देश

उत्तर.414. कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभावों से जुड़ी इस नयी शृंखला के दूसरे अंक में हम रोगियों के उपचार में जुटे चिकित्सकों द्वारा कोरोनावायरस के निदान और उपचार हेतु संकलित दिशानिर्देशों पर नज़र डालेंगे।

साइतामा प्रिफ़ैक्चर और साइतामा चिकित्सकीय संघ ने कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभावों से पीड़ित रोगियों पर अक्तूबर 2021 और जनवरी 2022 के बीच एक अध्ययन किया। उसमें शामिल चिकित्सकों ने कोविड के बाद के प्रमुख लक्षणों के साथ-साथ यह भी बताया कि विशेषज्ञ, रोगियों की स्थिति में सुधार के लिए क्या क़दम उठा सकते हैं।

सबसे पहले, आंतरिक रोग चिकित्सकों द्वारा प्रदत्त निम्नलिखित दिशानिर्देशों पर एक नज़र।

1. मरीज़, थकान और ब्रेन फ़्रॉग यानि मतिभ्रम सहित कई लक्षणों से पीड़ित रहते हैं। ब्रेन फ़्रॉग एक ऐसी स्थिति है जिसमें रोगी में अस्पष्टता, स्मृति ह्रास व ध्यान केन्द्रित न कर पाने के लक्षण प्रकट होते हैं।
2. इससे ठीक होने में छः महीने या उससे अधिक का समय लग सकता है। ये लक्षण अक्सर रोगी के दैनिक जीवन पर अपना दुष्प्रभाव डाल सकते हैं।
3. चिकित्सकों को स्वास्थ्य लाभ ले रहे रोगियों को उनके दैनिक जीवन में कार्य व आराम में संतुलन बैठाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए।
4. चिकित्सकों को रोगियों को लक्षणों का प्रबंधन करने और उनके साथ जीने में सहायता प्रदान करनी चाहिए।

कान, नाक और गले के चिकित्सकों ने निम्नलिखित दिशा-निर्देश दिये हैं -

1. कोविड के बाद के लक्षण किशोरों के बीच आम होते हैं।
2. गंध और स्वाद की अनुभूति में हुए बदलाव के चलते रोगियों के जीवन की गुणवत्ता में कमी आती है। चिकित्सों द्वारा रोगियों को नैतिक और मनोवैज्ञानिक प्रोत्साहन दिया जाना, उनके स्वास्थ्य लाभ में एक महत्त्वपूर्ण कारक है।
3. चिकित्सक, नाना प्रकार की सुगंधों को सूंघकर गंधानुभूति में सुधार लाने के तरीके यानि घ्राण प्रशिक्षण को उपचार का विकल्प मानते हैं।

यह जानकारी 15 अप्रैल तक की है।

प्रश्न.413. कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभाव से पीड़ित 422 रोगियों पर अध्ययन / अंक-1 रोगियों में किस तरह के लक्षण पाये गये?

उत्तर.413. इस नयी शृंखला में, चर्चा कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभावों पर।

साइतामा प्रिफ़ैक्चर और साइतामा चिकित्सा संघ ने कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभावों से पीड़ित रोगियों पर अक्तूबर 2021 और जनवरी 2022 के बीच अध्ययन किया। इसमें प्रिफ़ैक्चर में स्थित 7 अस्पतालों में उपचार करवा रहे 422 बाह्य रोगियों के लक्षणों की जाँच का अध्ययन किया गया।

इस अध्ययन में पाया गया कि 25.6 प्रतिशत रोगियों ने गंधानुभूति में समस्या, 16.6 प्रतिशत रोगियों ने साँस फूलने समेत श्वशन समस्याओं, 15.6 प्रतिशत ने थकान और 14.7 प्रतिशत ने खाँसी व कफ की शिकायत की।

वहीं, 9.7 प्रतिशत रोगियों ने बाल झड़ने, 9 प्रतिशत ने ज़ुकाम, सरदर्द या सर के पीछे के हिस्से में तकलीफ़ और 7.1 प्रतिशत ने स्वादानुभूति में अनियमितताओं की शिकायत की।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि कोरोनावायरस के उपचार के लगभग एक साल बाद भी कुछ रोगी दीर्घकालिक लक्षणों से पीड़ित हैं।

शृंखला के अगले भाग में, जानें इस अध्ययन की रिपोर्ट में संक्षेपित चिकित्सा दिशानिर्देशों पर जानकारी।

यह जानकारी 14 अप्रैल तक की है।

प्रश्न.412. छठी लहर में संक्रमण मामलों की संख्या अब भी इतनी अधिक क्यों है और आगे की स्थिति कैसी रहेगी ? / अंक -5 क्या किया जा सकता है?

उत्तर. 412. जापान में छठी लहर में कोरोनावायरस मामलों की संख्या चरम पर पहुँचने के बाद अब कम हो रही है। लेकिन नये मामलों की गिरावट की गति बहुत धीमी है।

इस शृंखला में जानेंगे कि संक्रमण मामलों में तेज़ी से कमी क्यों नहीं आ रही है। हम इस पाँचवें और अगले छठे अंक में चर्चा करेंगे कि भावी स्थिति की संभावनाओं के आधार पर हम क्या तैयारियाँ कर सकते हैं।

जापान सरकार का कोरोनावायरस सलाहकार समिति के प्रमुख ओमि शिगेरु ने 17 मार्च को कहा कि अर्ध-आपातकालीन उपायों को हटाने के बाद नये मामलों की संख्या बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि यह महत्त्वपूर्ण है कि गंभीर रूप से बीमार रोगियों की संख्या कम रखते हुए चिकित्सा देखभाल प्रणाली पर बोझ डालने से बचा जाए।

ओमि ने कहा कि टीकाकरण ज़रूरी है लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि हमने संक्रमण-रोधी प्रक्रियाएँ अपनाना जारी नहीं रखा तो कुछ यूरोपीय देशों की तरह कोविड से होने वाली मौतों की संख्या बढ़ेगी। उन्होंने छोटी बूंदों और एरोसोल से संक्रमण मामले बढ़ने का हवाला देते हुए लोगों से अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए चेहरे के मास्क पहनना जारी रखने का आह्वान किया।

अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और देखभाल विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर वाडा कोजि ने स्वयँ की और परिजनों व मित्रगणों की सुरक्षा के लिए जल्द से जल्द बूस्टर ख़ुराक लेने के महत्त्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने युवाओं सहित सभी को पूरी तरह से टीका लगाने का आह्वान किया क्योंकि प्रतिबंधों में ढील के बाद उन्हें संक्रमण का ख़तरा अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अर्ध-आपातकालीन उपायों को हटा लिये जाने के बाद वह लोगों और व्यवसायों से क्या करने के लिए कहेगी।

ओकिनावा चुबू अस्पताल के ताकायामा योशिहिरो ने कहा कि संक्रमण की सातवीं लहर की संभावना काफ़ी अधिक है क्योंकि पिछले साल विद्यालयों की वसंत की छुट्टियों के बाद और वर्ष 2020 में संक्रमण मामले बढ़ गये थे। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि हम इसके लिए तैयार रहें।

उन्होंने समाज पर सख़्त प्रतिबंध लगाये बिना सातवीं लहर पर काबू पाने की उम्मीद जतायी। इसके लिए उन्होंने दो उपायों का उल्लेख किया। पहला, वृद्ध लोगों से जुड़े प्रतिष्ठान में किसी के भी संक्रमित पाये जाने पर तुरंत क़दम उठाये जाएँ ताकि संक्रमण का प्रकोप रोका जा सके। दूसरा, अधिकाधिक संख्या में बूस्टर ख़ुराक दी जाएँ।

उपरोक्त जानकारी 1 अप्रैल तक की है।

प्रश्न.411. छठी लहर में संक्रमण मामलों की संख्या अब भी इतनी अधिक क्यों है और आगे की स्थिति कैसी रहेगी ? / अंक- 4 क्या ओमिक्रोन का बीए.2 लघुप्रकार उसके मूल प्रकार का स्थान ले सकता है?

उत्तर. 411. जापान में छठी लहर में कोरोनावायरस मामलों की संख्या चरम पर पहुँचने के बाद अब कम हो रही है। लेकिन नये मामलों की गिरावट की गति बहुत धीमी है।

इस शृंखला में बात करेंगे कि संक्रमण मामलों में तेज़ी से कमी क्यों नहीं आ रही है और आगे की स्थिति कैसी होगी। आज इस शृंखला की चौथी कड़ी में हम नज़र डालेंगे कि क्या ओमिक्रोन का बीए.2 उपप्रकार उसके मूल उपप्रकार का स्थान ले सकता है?

ओमिक्रोन का बीए.2 उपप्रकार जापान में संक्रमण की हालिया लहर में चिंता का विषय बन कर उभरा है। स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञों की समिति ने 15 मार्च को बैठक कर, बीए.2 के देश में फैलने के तरीके पर अपना आकलन प्रस्तुत किया।

क्योतो विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर निशिउरा हिरोशि ने तोक्यो में परीक्षण आँकड़ों का विश्लेषण करते हुए अनुमान लगाया कि ओमिक्रोन के 82 प्रतिशत संक्रमण मामले बीए.2 से जुड़े होंगे और एक अप्रैल तक राजधानी में वह मूल उपप्रकार का स्थान ले लेगा।

सुज़ुकि मोतोई, राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान में निगरानी, प्रतिरक्षा और महामारी अनुसंधान केन्द्र के प्रमुख हैं। उन्होंने दो निजी परीक्षण संस्थानों के परीक्षण परिणामों के नमूनों का विश्लेषण करते हुए समूचे जापान में बीए.2 संक्रमणों के प्रतिशत का अनुमान लगाया। उनका अनुमान है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में सभी संक्रमण मामलों में इस उपप्रकार की भागीदारी 70 प्रतिशत और मई के पहले सप्ताह में 97 प्रतिशत होगी।

बीए.2 उपप्रकार को वर्तमान के मुख्य उपप्रकार बीए.1 की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक संक्रामक माना जाता है। यदि बीए.2, बीए.1 की जगह लेना शुरू कर देता है, तो संक्रमण पर नियंत्रण रखने के लिए वर्तमान उपाय पर्याप्त नहीं रहने की आशंका है।

उपरोक्त जानकारी 31 मार्च तक की है।

प्रश्न.410. छठी लहर में संक्रमण मामले अभी भी अधिक क्यों बने हुए हैं और आगे की स्थिति क्या होगी / भाग-3 बिना अधिक गिरावट आये संक्रमण मामलों में दुबारा उछाल की आशंकाएँ

उत्तर.410. जापान में छठी लहर में कोरोनावायरस मामलों की संख्या चरम पर पहुँचने के बाद अब कम हो रही है। लेकिन नये मामलों की गिरावट की गति बहुत धीमी है।

इस शृंखला में नज़र डाल रहे हैं संक्रमण मामलों में तेज़ी से कमी क्यों नहीं आ रही है और आगे क्या स्थिति रहने वाली है। शृंखला की तीसरी कड़ी में बिना किसी भारी गिरावट के संक्रमण मामलों में दुबारा उछाल की संभावना पर एक नज़र।

नागोया प्रौद्योगिकी संस्थान में प्राध्यापक हिराता आकिमासा के नेतृत्व वाले एक अनुसंधान दल ने कृत्रिम मेधा में विभिन्न प्रकार का डाटा डालकर तोक्यो की आभासी भावी स्थिति तैयार की। इस डाटा में लोगों का आवागमन, अतीत के संक्रमण रुझानों और टीकाकरण के प्रभाव जैसी जानकारी शामिल है।

एक परिकल्पना यह थी कि अर्ध-आपातकाल उपायों को हटाने के बाद लोगों का आवागमन पिछले वर्ष की इसी अवधि के बराबर लौट आयेगा। इस मामले में अनुमान है कि तोक्यो में अप्रैल के शुरू में दैनिक संक्रमण मामले लगभग 5,400 तक घटेंगे और उसके बाद इनमें हल्की सी वृद्धि होगी और फिर उसी स्तर पर बने रहेंगे। यानि अप्रैल के अंत में दैनिक आँकड़ा 5,600 से कुछ अधिक पर बना रहेगा।

दूसरी परिकल्पना यह थी कि लोगों का आवागमन पिछले साल के मुक़ाबले 20 प्रतिशत बढ़ेगा और ऐसे में दैनिक आँकड़ा अप्रैल के आरंभ से धीरे-धीरे बढ़ेगा और अप्रैल मध्य में यह 7,700 से अधिक पहुँच जाएगा।

अभ्यास यह मानकर भी किया गया कि लोगों का आवागमन बढ़ेगा और खाने-पीने के साथ लोगों के मिलने-जुलने के कार्यक्रम बढ़कर नव वर्ष के अवकाश के दौरान के स्तर तक पहुँच जाएँगे। इस स्थिति में नये दैनिक मामलों की संख्या मार्च के अंत से बढ़ने लगेगी और अप्रैल मध्य में यह 13,000 से भी अधिक हो जाएगी।

अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि बूस्टर टीके के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए ऐसी संभावना कम ही है कि गंभीर रूप से बीमार रोगियों की संख्या में नाटकीय बढ़ोतरी होगी। लेकिन उनका कहना है कि संक्रमण मामलों की वृद्धि रोकने के लिए एक साथ भोजन करने वाले लोगों की संख्या को सीमित करना आवश्यक हो सकता है।

प्राध्यापक हिराता के अनुसार साल के इस समय लोगों के आवागमन और बड़े समूहों में एक साथ भोजन करने के अवसर बढ़ जाते हैं जिससे संक्रमण मामलों को घटाना कठिन हो सकता है।

उपरोक्त जानकारी 30 मार्च तक की है।

प्रश्न.409. छठी लहर में संक्रमण मामले अभी भी अधिक क्यों बने हुए हैं और आगे की स्थिति क्या होगी / भाग-2 धीमी गिरावट, बच्चों के बीच बढ़ते संक्रमण के कारण

उत्तर.409. जापान में छठी लहर की चरम स्थिति गुज़र चुकी है। लेकिन नये मामलों में गिरावट की गति धीमी है और यह चिंता है कि संक्रमण की ऐसी स्थिति से सातवीं लहर आ सकती है। इस शृंखला में हम नज़र डाल रहे हैं कि मामलों में तेज़ कमी क्यों नहीं आ रही है और परिस्थितियों में क्या नये बदलाव आ रहे हैं। शृंखला के दूसरे भाग में बच्चों के बीच संक्रमण पर एक नज़र।

जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि 10 या उससे कम वर्ष की आयु के 65,000 से अधिक बच्चे 15 मार्च तक एक सप्ताह के भीतर संक्रमित हुए, हालाँकि, संक्रमण की छठी लहर का चरम पहले ही गुज़र चुका था।

यह संख्या पिछले वर्ष पाँचवीं लहर के दौरान 31 अगस्त तक एक सप्ताह के भीतर दर्ज 10,380 नये मामलों से अधिक है।

सभी नये मामलों में बच्चों का प्रतिशत भी बढ़ा है। यह जनवरी की शुरुआत में करीब पाँच प्रतिशत था लेकिन 15 मार्च तक एक सप्ताह के भीतर यह बढ़कर 21 प्रतिशत हो गया जो किसी भी आयु वर्ग में सर्वाधिक है। हालाँकि, संक्रमण के कुल मामलों की संख्या फ़रवरी मध्य से कम होना आरम्भ हो गयी।

शिशु विद्यालयों जैसे शिशु कल्याण प्रतिष्ठानों में बड़े स्तर पर संक्रमणों की संख्या 14 मार्च तक एक सप्ताह के भीतर रिकॉर्ड 229 तक पहुँच गयी जो उससे एक सप्ताह पहले की तुलना से 56 अधिक है। विद्यालयों में बड़े स्तर पर संक्रमण को मामले भी उसी दौरान 59 से बढ़कर 318 हो गये।

विशेषज्ञों का कहना है कि ओमिक्रॉन प्रकार डेल्टा प्रकार की अपेक्षा बच्चों में अधिक आसानी से ऐसे स्थानों पर फैलता है जहाँ वे एक साथ समय व्यतीत करते हैं, जैसे कि, विद्यालय और बालवाड़ियाँ। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य पीढ़ियों की तुलना में बच्चों में टीकाकरण दर कम है।

उपरोक्त जानकारी 29 मार्च तक की है।

प्रश्न.408. छठी लहर में संक्रमण मामले अभी भी अधिक क्यों बने हुए हैं और आगे की स्थिति क्या होगी / भाग-1 गिरावट की धीमी गति का एक कारण बूस्टर टीकाकरण में विलंब, बुज़ुर्गों में वायरस संक्रमण

उत्तर.408. जापान में संक्रमण की छठी लहर में ओमिक्रोन प्रकार का प्रसार अब कम होने लगा है। लेकिन संक्रमण मामलों में गिरावट की गति कम है और नये मामलों की संख्या अब भी काफ़ी अधिक बनी हुई है। डर है कि यह संक्रमण स्थिति सातवीं लहर में तब्दील न हो जाए। इस संबंध में हम एक नयी शृंखला लेकर आये हैं जो इस बात पर नज़र डालती है कि संक्रमण मामलों की संख्या में तीव्र गिरावट क्यों नहीं हो रही है और परिस्थितियों में क्या नये बदलाव आ रहे हैं।

विशेषज्ञ संक्रमण मामलों में गिरावट की धीमी गति के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डाल रहे हैं। उनके अनुसार पहला कारण है तीसरी ख़ुराक देने में होने वाला विलंब जिसके चलते बुज़ुर्गों में संक्रमण होना जारी रहा। विशेषज्ञ कहते हैं कि दूसरा कारण है बच्चों में अब तक का सबसे बड़े स्तर पर कोरोनावायरस प्रसार।

पाँचवीं लहर के दौरान बुज़ुर्गों में संक्रमण पर नज़र डालें तो पता चलता है कि 2021 में जुलाई अंत में जब संक्रमण तेज़ी से फैला तब तक 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के 70 प्रतिशत से अधिक लोगों को दूसरी ख़ुराक मिल चुकी थी। उस समय कोरोनावायरस युवा पीढ़ी में व्यापक स्तर पर फैल रहा था लेकिन बुज़ुर्गों में नहीं। विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार इसी कारण संक्रमण मामलों की संख्या में तीव्र गिरावट आयी।

वहीं दूसरी ओर, छठी लहर के दौरान, 2022 जनवरी के आरंभ तक दूसरी ख़ुराक के बाद बीते लंबे समय के कारण कोविड-19 के विरुद्ध टीकों की रक्षात्मक क्षमता कम हो चुकी थी। और साथ ही 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के 1 प्रतिशत से भी कम लोगों को बूस्टर ख़ुराक प्राप्त हुई थी।

5 फ़रवरी, जब सर्वाधिक मामले दर्ज हुए उस समय टीकाकरण दर मात्र 15 प्रतिशत थी। ऐसी परिस्थिति में युवा पीढ़ी में फैलने के बाद संक्रमण बुज़ुर्गों में भी फैलने लगा। बुज़ुर्गों में अब भी कोरोनावायरस फैल रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि 14 मार्च को समाप्त होने वाले सप्ताह में देश भर के वृद्ध देखभाल केंद्रों में 341 सामूहिक संक्रमण मामले दर्ज हो चुके थे।

उपरोक्त जानकारी 28 मार्च तक की है।

प्रश्न.407. यह प्रत्यूर्जा है या कोविड-19 / अंक-8 पराग कणों से एलर्जी होने पर चिकित्सक से परामर्श कब लिया जाए?

उत्तर.407. जापान में ओमिक्रोन प्रकार के व्यापक संक्रमण के बीच देवदार के पराग कणों से प्रत्यूर्जा का मौसम आ गया है। इस शृंखला के आठवें और अंतिम अंक में पराग प्रत्यूर्जा के संदेह पर जल्द से जल्द चिकित्सीय परामर्श लेने के महत्व पर चर्चा।

अगर किसी को गत वर्ष पराग प्रत्यूर्जा नहीं थी लेकिन इस वर्ष अचानक ही उसे एलर्जी से मिलते जुलते लक्षण परेशान करने लगें तो सचेत होना आवश्यक है और इसे महज एलर्जी के लक्षण नहीं मानना चाहिए।

पर्यावरण मंत्रालय की पराग सूचना वेबसाइट के अनुसार जापान में देवदार के पराग कण फैलने लग गये हैं।

जापान के मौसम विज्ञान संघ द्वारा इस मौसम के लिए जारी पूर्वानुमान के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कई स्थानों, विशेषकर पूर्वी जापान में पराग कणों का प्रसार हल्के से लेकर बहुत अधिक रहेगा।

घर से बाहर निकलने पर अगर आपको लगातार छींके आ रही हैं या फिर बहती नाक से परेशान हैं तो आसपास के लोग आशंकित हो सकते हैं कि यह एलर्जी के लक्षण हैं या कोविड -19 क्योंकि दोनों में भेद कर पाना मुश्किल है।

पराग प्रत्यूर्जा के लक्षण होने पर जल्द से जल्द इसका उपचार करवाना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 25 मार्च तक की है।

प्रश्न.406. यह प्रत्यूर्जा है या कोविड-19 / अंक‐7 जब समझ न आये कि आपके लक्षण कोविड-19 के हैं या पराग प्रत्यूर्जा के

उत्तर.406. ओमिक्रोन प्रकार के बढ़ते संक्रमण मामलों के बीच, जापान में पराग प्रत्यूर्जा का मौसम शुरू हो रहा है। इस शृंखला के सातवें अंक में हम चर्चा करेंगे कि अगर यह पहचानने में मुश्किल हो रही हो कि आपके लक्षण कोविड-19 के हैं या पराग प्रत्यूर्जा के, तो ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए।

किमुरा युरिका एक चिकित्सक हैं जो जापान कर्णनासाकंठ चिकित्सा संगठन में कोरोनावायरस उपायों के प्रभारी दल का नेतृत्व कर रही हैं।

उनका कहना है कि अगर प्रत्यूर्जा के आम लक्षण नज़र आ रहे हैं और तेज़ बुखार जैसे कोई अन्य स्पष्ट लक्षण नहीं हैं, और अगर आसपास कोई भी कोविड-19 से संक्रमित नहीं है, तो ऐसे में सामान्य प्रत्यूर्जा उपचार के लिए चिकित्सक के पास जाने में कोई समस्या नहीं है। उनके अनुसार आमतौर पर अगर आपको छींक आ रही है या नाक बह रही है, लेकिन इस वर्ष तेज़ बुखार, गले में दर्द या सिरदर्द भी है, तब आपको क्लिनिक जाने से पहले इस बात की जानकारी चिकित्सक को देनी चाहिए।

वह कहती हैं कि पराग प्रत्यूर्जा वाले लोगों को इस मौसम में उपचार जल्द शुरू कर देना चाहिए ताकि वे अपने आप की और आसपास के लोगों की रक्षा कर सकें।

उपरोक्त जानकारी 24 मार्च तक की है।

प्रश्न.405. यह प्रत्यूर्जा है या कोविड-19 / अंक-6 छींक आने और नाक बहने जैसे लक्षण विकसित होने पर क्या करें?

उत्तर.405. ओमिक्रोन के व्यापक संक्रमण के बीच जापान पराग प्रत्यूर्जा वाले मौसम में प्रवेश कर रहा है। हमारी शृंखला की छठी कड़ी में चर्चा करते हैं कि जब आपको छींक आने लगे या नाक बहने लगे तो क्या करना चाहिए।

जापान कर्णनासाकंठ चिकित्सा संगठन पराग प्रत्यूर्जता वाले लोगों को सामान्य अवधि से पहले ही चिकित्सक को दिखाने की सलाह दे रहा है।

चिकित्सकों का कहना है कि आरंभिक उपचार पराग प्रत्यूर्जा के लक्षणों को कम कर सकता है। अध्ययनों से पता चला है कि लक्षणों के प्रकट होने से पहले या लक्षण हल्के होने पर ही उपचार आरंभ करना बाद में लक्षणों को कम कर सकता है। पराग प्रत्यूर्जा के उपचार के लिए कई दवाएँ हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्यूर्जा पीड़ित यदि कान-नाक-गले के विशेषज्ञ के पास जाते हैं तो वे अपने लक्षणों और स्वास्थ्य स्थितियों के लिए सही उपचार प्राप्त करने में सक्षम होंगे।

यदि व्यक्ति को उपचार से प्रत्यूर्जता के लक्षणों को कम करने के बावजूद गले में ख़राश या अत्यधिक थकान जैसे लक्षण विकसित हो रहे हैं तो उसे कोरोनावायरस संक्रमण हो सकता है।

यदि आपको लगता है कि पराग प्रत्यूर्जा के उपचार के बाद भी लक्षणों में सुधार नही आता तो आपको कोरोनावायरस हो सकता है।

उपरोक्त जानकारी 23 मार्च तक की है।

प्रश्न.404. यह प्रत्यूर्जा है या कोविड-19 / अंक-5 अनजाने में संक्रमण के प्रसार का जोखिम

उत्तर.404. ओमिक्रोन प्रकार के बढ़ते संक्रमण मामलों के बीच, जापान में पराग प्रत्यूर्जा का मौसम शुरू हो रहा है। इस शृंखला के पाँचवें अंक में हम चर्चा करेंगे कि लोगों को स्वयँ के संक्रमित होने की जानकारी न होने पर वायरस किस तरह से फैल सकता है।

जापान कर्णनासाकंठ चिकित्सा संगठन द्वारा जारी परामर्श में उन समस्याओं को सूचीबद्ध किया गया है जो पराग प्रत्यूर्जा के मौसम के दौरान, ओमिक्रोन के प्रकोप के मद्देनज़र हो सकती हैं।

उसने बताया कि लोगों द्वारा आवश्यक निवारक उपाय यह मान कर नहीं करना कि उनके लक्षणों का कारण कोरोनावायरस संक्रमण नहीं बल्कि पराग प्रत्यूर्जा है, संक्रमण के प्रकोप का जोखिम को बरक़रार रखे हुए है। जो लोग पराग प्रत्यूर्जा और कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार के संक्रमण, दोनों से पीड़ित हैं, उन्हें छींकते समय विशेष रूप से सावधान रहना चाहिए। इस संगठन का कहना है खाँसने की तुलना में छींकने से दस गुणा अधिक द्रव्यकण पैदा हो सकते हैं।

संगठन ने यह चेतावनी भी दी है कि प्रत्यूर्जा का इलाज नहीं किये जाने पर संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि लोग प्रत्यूर्जा से पैदा खुजली से राहत पाने के लिए वायरस से दूषित हाथों से अपनी आँखें या नाक खुजला सकते हैं जिसके चलते श्लेष्म झिल्ली यानि म्यूकस मेंमब्रेन के माध्यम से संक्रमित होने की आशंका रहती है।

उपरोक्त जानकारी 22 मार्च तक की है।

प्रश्न.403. यह प्रत्यूर्जा है या कोविड-19 / अंक-4 दोनों में अंतर न कर पाने के कारण समस्याओं और मानसिक तनाव पर एक नज़र

उत्तर.403. ओमिक्रोन प्रकार के व्यापक संक्रमण के बीच जापान पराग प्रत्यूर्जा वाले मौसम में प्रवेश कर रहा है। हमारी शृंखला की चौथी कड़ी में ओमिक्रोन संक्रमण और पराग प्रत्यूर्जा के बीच अंतर न कर पाने के कारण उत्पन्न तनाव पर एक नज़र।

जापान जापान कर्णनासाकंठ संगठन ने ओमिक्रोन संक्रमण के बीच पराग कणों से होने वाली प्रत्यूर्जा के बारे में एक परामर्श विज्ञप्ति जारी की है।

संगठन ने कोविड -19 और पराग कणों से होने वाली एलर्जी के लक्षणों के बीच अंतर नहीं समझ पाने के कारण लोगों में तनाव का उल्लेख किया। विशेषज्ञ कहते हैं कि जब एलर्जी होती है तो यह समझ पाना कठिन है कि वे कहीं कोरोनावायरस से संक्रमित तो नहीं हुए हैं। निपुण चिकित्सकों के लिए भी यह बताना मुश्किल है कि रोगी की बीमारी का कारण पराग प्रत्यूर्जा है या फिर ओमिक्रोन संक्रमण है। ऐसे में रोगी के लिए यह समझना तो और भी मुश्किल है कि उसके लक्षणों की वजह आखिर है क्या।

पराग कणों से एलर्जी होने पर अगर नाक बहे तो कार्यालय या विद्यालय जा सकते हैं। लेकिन ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमित होने के संदेह पर घर में ही रुक कर चिकित्सक को दिखाना आवश्यक है। असंमजस की यह स्थिति लोगों में तनाव पैदा करती है।

उपरोक्त जानकारी 18 मार्च तक की है।

प्रश्न.402. यह प्रत्यूर्जा है या कोविड-19 / अंक-3 पराग प्रत्यूर्जा वाले सभी लोगों की कोविड-19 जाँच आवश्यक नहीं

उत्तर.402. ओमिक्रोन प्रकार के बढ़ते संक्रमण मामलों के बीच, जापान में पराग प्रत्यूर्जा का मौसम शुरू हो रहा है। इस शृंखला के तीसरे अंक में हम कान-नाक-गला चिकित्सकों के समूह द्वारा जारी सलाह पर एक नज़र डालेंगे।

जापान प्रतिरक्षा विज्ञान एवं कर्णनासाकंठ विज्ञान में प्रत्यूर्जा विज्ञान संगठन सहित एक समूह ने 2019 में जापान भर में एक सर्वेक्षण किया जिसमें भाग लेने वाले 42.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की पराग एलर्जी थी और 38.8 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें देवदार के पराण कणों से एलर्जी थी। सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि जापान में प्रत्येक 3 में से एकाधिक व्यक्तियों को पराग प्रत्यूर्जा होती है। लेकिन इन लोगों में छींक और नाक बहने जैसे लक्षण सामने आने पर इतनी बड़ी संख्या में सभी की कोविड-19 जाँच करवाना आसान नहीं।

इस तरह के भ्रम की अपेक्षा करते हुए जापान कर्णनासाकंठ-सिर व गर्दन शल्य चिकित्सा संगठन ने पराग प्रत्यूर्जा मौसम के आरम्भ से पहले 25 जनवरी को अपनी वेबसाइट पर सलाह जारी की।

इसमें कहा गया है कि पराग एलर्जी वाले लोगों में दिखायी देने वाले लक्षण जैसे बहती नाक, छींक, बंद नाक, गंध विकार और थकान कोविड-19 और विशेष रूप से ओमिक्रोन प्रकार के भी आम लक्षण हैं। संगठन का कहना है कि इस वजह से एलर्जी के लक्षण वाले लोग कोरोनावायरस से संक्रमित या है नहीं, यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

अगले अंक में संगठन की सलाह पर विस्तृत जानकारी।

उपरोक्त जानकारी 17 मार्च की है।

प्रश्न.401. यह प्रत्यूर्जा है या कोविड-19 / अंक-2 मौसमी एलर्जी और कोरोनावायरस के लक्षणों में अंतर करना चिकित्सकों के लिए भी कठिन

उत्तर.401. ओमिक्रोन प्रकार के व्यापक संक्रमण के बीच जापान पराग प्रत्यूर्जा वाले मौसम में प्रवेश कर रहा है। हमारी शृंखला की दूसरी कड़ी में हमने प्रत्यूर्जा लक्षणों वाले रोगियों को परामर्श देने वाली एक चिकित्सक से बात की।

सिर और गर्दन की शल्यक्रिया से संबंधित जापान सोसाइटी ऑफ़ ओटोराइनोलैरिंगोलॉजी या जापान कर्णनासाकंठ संगठन में कोरोनावायरस उपायों के लिए एक दल का नेतृत्व करने वाली डॉक्टर किमुरा यूरिका का कहना है कि चिकित्सा विशेषज्ञों को भी मौसमी पराग एलर्जी और ओमिक्रोन संक्रमण के बीच अंतर करने में कठिनाई होती है।

किमुरा ने एक ऐसे ही मामले का वर्णन किया जब एक मरीज़ छींकने और नाक बहने के लक्षणों का इलाज कराने के लिए पराग प्रत्यूर्जा की अपनी नियमित दवा लेने के लिए आया था। हालांकि दो दिन बाद रोगी गले में ख़राश के साथ वापस आया और उसे कोरोनावायरस से संक्रमित पाया गया।

किमुरा का कहना है कि इस मामले ने उन्हें एलर्जी के आरंभिक चरण को कोरोनावायरस से भिन्न पहचानने में होने वाली कठिनाई का एहसास कराया। उन्होंने कहा कि तकनीकी रूप से पराग एलर्जी की पहचान नाक की श्लेष्म झिल्ली का सफ़ेद हो जाना जैसे विशिष्ट लक्षण होते हैं लेकिन ऐसे कई मामले होते हैं जहाँ प्रत्यूर्जा के प्रारंभिक चरणों में यह लक्षण उत्पन्न नहीं होते। किमुरा ने कहा कि रोगियों की जाँच किये बिना चिकित्सकों के लिए भी पराग प्रत्यूर्जा और कोविड -19 के बीच अंतर करना कठिन है।

उपरोक्त जानकारी 16 मार्च तक की है।

प्रश्न.400. यह प्रत्यूर्जा है या कोविड-19 / अंक-1 ओमिक्रोन संक्रमण और पराग प्रत्यूर्जा के लक्षण समान हैं

उत्तर.400. ओमिक्रोन प्रकार के बढ़ते संक्रमण मामलों के बीच, जापान में पराग प्रत्यूर्जा का मौसम शुरू हो रहा है। जापान में व्यापक रूप से फैल चुके ओमिक्रोन प्रकार के मद्देनज़र, देवदार और हिनोकि सरो वृक्षों के पराग कणों से होने वाली प्रत्यूर्जा का मौसम आ रहा है। जब आप छींकते हैं या आपकी नाक बहती है, तो आपको शंका होती होगी कि यह कोविड-19 है या पराग प्रत्यूर्जा। इस नयी शृंखला में, हम जानेंगे कि लक्षणों का कारण ज्ञात न होने पर क्या किया जाना चाहिए, क्या पता होना चाहिए और किस स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।

कान, नाक और गले के चिकित्सकों ने पराग प्रत्यूर्जा के प्रमुख लक्षणों में छींक, बहती नाक, भरी हुई नाक, आँखों में खुजली, थकान, गंध विकार, बुखार, गले में दर्द और ख़राश, खाँसी, हल्का सरदर्द और कान में खुजली को सूचीबद्ध किया है।

इस बीच, जापान के राष्ट्रीय संक्रामक रोग संगठन द्वारा कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमित लोगों के लक्षणों की संकलित जानकारी में 66.6 प्रतिशत रोगियों में बुखार, 41.6 प्रतिशत में खाँसी, 22.5 प्रतिशत में सामान्य थकान और 21.1 प्रतिशत में सिरदर्द पाया गया। संस्थान का यह भी कहना है कि 12.9 प्रतिशत रोगियों में खाँसी से इतर श्वसन विकार संबंधी लक्षण देखे गये, 2.7 प्रतिशत में मतली या उल्टी, 2.3 प्रतिशत में दस्त और 0.8 प्रतिशत में गंध या स्वाद विकार पाया गया।

राष्ट्रीय संस्थान के एक अन्य सर्वेक्षण से पता चलता है कि 45.1 प्रतिशत रोगियों को खाँसी, 32.8 प्रतिशत को बुखार, 32.8 प्रतिशत को गले में खराश, 20.5 प्रतिशत की नाक बहना, 1.6 प्रतिशत को गंध विकार और 0.8 प्रतिशत को स्वाद विकार की समस्या हुई। फिर भी, ब्रिटेन में शोधकर्ताओं के एक समूह द्वारा किये गए एक अन्य सर्वेक्षण में पता चला है कि ओमिक्रोन से संक्रमित 60 प्रतिशत रोगियों को छींक आ रही थी।

हालाँकि लक्षण हर व्यक्ति में भिन्न होते हैं, पर पराग प्रत्यूर्जा और ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमित लोगों में छींक और नाक बहने जैसे लक्षण समान हैं।

यह जानकारी 15 मार्च तक की है।

प्रश्न.399. जापान में बच्चों का टीकाकरण आरंभ / भाग - 10 - बच्चों के टीकाकरण पर विशेषज्ञ के विचार

उत्तर.399. जापान में 5-11 वर्ष के बच्चों का कोविड-19 टीकाकरण आरंभ हो गया है। इस शृंखला में बच्चों के टीकाकरण से सम्बद्ध तथ्यों की जानकारी दी जा रही है। दसवें अंक में जानते हैं एक विशेषज्ञ से बच्चों के टीकाकरण के फ़ायदे और नुक़सान।

कितासातो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक नाकायामा तेत्सुओ बालरोग विशेषज्ञ हैं और टीकों के जानकार भी। वह कहते हैं कि सभी को टीकाकरण के फ़ायदे और नुक़सान समझने चाहिए। जैसे टीका लगवाने पर क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं या फिर बच्चे के संक्रमित होने पर क्या समस्यायें हो सकती हैं।

नाकायामा विभिन्न बातें ध्यान में रखने को कह रहे हैं। वह कहते हैं कि संक्रमित होने पर बच्चों को लम्बे समय तक घर में ही रहना पड़ेगा, फिर भले ही उनके लक्षण हल्के ही क्यों न हों। ऐसा होने पर बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत परेशानी होगी।

नाकायामा कहते हैं कि टीके से कोरोनावायरस संक्रमण की पूरी तरह से रोकथाम नहीं हो पाती है लेकिन बीमारी के लक्षण हल्के होते हैं। वह कहते हैं कि टीकाकरण के बाद बच्चे संक्रमण वाहक नहीं बनेंगे और संक्रमण घर तक नहीं लायेंगे जिससे साथ रह रहे अभिभावक या बुज़ुर्ग दादा-दादी के संक्रमित होने का ख़तरा नहीं रहेगा।

नाकायामा का कहना है कि कमज़ोर स्वास्थ्य वाले बालकों के लिए टीकाकरण प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि उन्हें गंभीर बीमारी से बचाया जा सके। वह कहते हैं कि हालाँकि विशेषज्ञों में इस बात को लेकर मतभेद है कि सभी के लिए टीकाकरण की अनुशंसा की जानी चाहिए या नहीं।

नाकायामा के अनुसार यह भी एक सोच है कि बच्चों में संक्रमण बढ़ तो रहा है लेकिन कई बच्चे गंभीर रूप से बीमार नहीं हो रहे हैं इसलिये उन्हें टीका लगवाने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन वह कहते हैं कि कौन गंभीर रूप से बीमार होगा इसका पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है।

नाकायामा ने आगे कहा कि लोगों का ज़बरदस्ती टीकाकरण नहीं करना चाहिए। वह कहते हैं कि लोगों को टीके का महत्त्व समझ कर स्वयं इसका निर्णय लेना चाहिए। वह चाहते हैं लोगों को टीकों के बारे में संपूर्ण जानकारी मिले और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए वे स्वेच्छा से टीका लगवाने का निर्णय लें।

उपरोक्त जानकारी 14 मार्च तक की है।

प्रश्न.398. जापान में बच्चों का टीकाकरण आरंभ / भाग - 9 - बच्चों के कोविड टीकाकरण पर अभिभावकों की राय

उत्तर.398. जापान में 5-11 वर्ष के बच्चों का कोविड-19 टीकाकरण आरंभ हो गया है। इस शृंखला में बच्चों के टीकाकरण से सम्बद्ध तथ्यों की जानकारी दी जा रही है। नौंवे अंक में जानते हैं टीकाकरण पर माता-पिता के विचार।

तोक्यो के कोतो वार्ड ने अपनी लाइन ऐप्लिकेशन में पंजीकृत 5-11 साल के बच्चों के माता-पिता का सर्वेक्षण किया। 10 से 13 फ़रवरी के बीच हुए सर्वेक्षण में कोतो वार्ड के 2,000 निवासियों ने हिस्सा लिया था।

जब अभिभावकों से प्रश्न किया गया कि वे अपने बच्चों का टीकाकरण करवाना चाहते हैं या नहीं तो उत्तरदाताओं में से 31.3 प्रतिशत ने कहा – “हाँ, जितनी जल्दी संभव हो वे टीका लगवायेंगे।” वहीं 48.7 प्रतिशत ने उत्तर दिया कि वे “कुछ समय प्रतीक्षा करके देखेंगे इनसे कोई समस्या तो नहीं, उसके बाद टीका लगवायेंगे।” इस बीच 20 प्रतिशत अभिभावकों ने कहा कि वे अपने बच्चों को टीके नहीं लगवाना चाहते हैं।

जब माता-पिता से पूछा गया कि वे अपने बच्चों के टीकाकरण को लेकर चिन्तित तो नहीं हैं तो 39.6 प्रतिशत का उत्तर था – “बहुत अधिक” और 49.7 प्रतिशत ने कहा वे “थोड़ा” चिंतित हैं। परिणाम दर्शाते हैं कि कई अभिभावक अपने बच्चों के टीकाकरण को लेकर चिन्तित हैं।

उपरोक्त जानकारी 11 मार्च तक की है।

प्रश्न.397. जापान में बच्चों का टीकाकरण आरंभ / भाग – 8 – अमरीकी सीडीसी ने बताया बच्चों, किशोरों को अस्पताल में भर्ती होने से रोकने में कारगर है टीका

उत्तर.397. जापान में 5-11 वर्ष के बच्चों का कोविड-19 टीकाकरण आरंभ हो गया है। इस शृंखला में बच्चों के टीकाकरण से सम्बद्ध तथ्यों की जानकारी दी जा रही है। आठवें भाग में एक नज़र टीकाकरण की प्रभावकारिता पर।

1 मार्च को अमरीका के रोग नियंत्रण एवं बचाव केन्द्र यानि सीडीसी ने 5 से 17 वर्ष के बच्चों और किशोरों पर फ़ाइज़र-बियोन्टेक टीके की प्रभावकारिता पर एक अध्ययन के परिणाम जारी किये। यह अध्ययन पिछले वर्ष अप्रैल के आरंम्भ से इस वर्ष जनवरी के अंत तक किया गया था। अध्ययन में ऐसे 40,000 बच्चे और किशोर शामिल थे जिन्होंने कोरोनावायरस संक्रमण के लिए आपात चिकित्सा देखभाल प्राप्त की या अमरीका में चिकित्सा संस्थानों में भर्ती हुए।

अध्ययन के अनुसार टीके की दोनों ख़ुराक लेने वाले 5 से 11 वर्ष के 74 प्रतिशत बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ी। 12 से 17 वर्ष के किशोरों में 73 से 94 प्रतिशत अस्पताल में भर्ती नहीं हुए और इनमें टीकाकरण के समय के आधार पर अंतर देखा गया।

सीडीसी इस आयु वर्ग के लिए टीकाकरण की सलाह दे रहा है। एजेंसी का कहना है कि टीके की प्रभावकारिता समय के साथ घट जाती है, पर यह अस्पताल में भर्ती होना रोकने में अभी भी काफ़ी कारगर है।

उपरोक्त जानकारी 10 मार्च तक की है।

प्रश्न.396. जापान में बच्चों का टीकाकरण आरंभ / भाग – 7 – विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को गंभीर रूप से बीमार होने से बचा सकता है टीकाकरण

उत्तर.396. जापान में 5-11 वर्ष के बच्चों का कोविड-19 टीकाकरण आरंभ हो गया है। इस शृंखला में बच्चों के टीकाकरण से सम्बद्ध तथ्यों की जानकारी दी जा रही है। सातवें अंक में एक नज़र डालते छोटे बच्चों के लिए टीकाकरण की महत्ता पर।

अमरीकी राज्य न्यूयॉर्क में स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक अध्ययन के परिणाम जारी किये जिनके अनुसार ओमिक्रोन प्रसार के समय संक्रमण को रोकने की फ़ाइज़र टीके की क्षमता 5 से 11 साल के बच्चों में काफ़ी कम हो गयी थी। कितासातो विश्वविद्यालय के बाल रोग विशेषज्ञ और टीकाकरण विशेषज्ञ प्राध्यापक नाकायामा तेत्सुओ का कहना है कि 5 से 11 साल के बच्चों को दी जाने वाली ख़ुराक 12 साल या उससे अधिक आयु के बच्चों की ख़ुराक का एक तिहाई है। उन्होंने कहा कि आम तौर पर 11 और 12 वर्ष के बच्चों के शरीर के आकार में बहुत अंतर नहीं होता है। उनके अनुसार ख़ुराक जितनी कम होगी टीके की प्रभावशीलता भी उतनी ही कम होगी। इसलिए यह आसानी से माना जा सकता है कि टीकों की प्रभावशीलता अवधि छोटे बच्चों के लिए कम होगी।

प्राध्यापक नाकायामा का कहना है कि टीकाकरण का मूल उद्देश्य संक्रमित लोगों को गंभीर रूप से बीमार होने से बचाना है। इस दृष्टिकोण से नाकायामा के अनुसार फ़ाइज़र टीके निश्चित रूप से कुछ प्रभावी है क्योंकि अस्पताल में भर्ती होने से रोकने में इसकी प्रभावशीलता कम से कम 50 प्रतिशत के आसपास पायी गई है। उनका कहना है कि बिना किसी सुरक्षा के संक्रमित होने से बेहतर है कि टीकाकरण के माध्यम से प्रतिरक्षी सुरक्षा प्राप्त की जाए।

वह कहते हैं कि बच्चों के लिए उचित ख़ुराक कैसे तय की जाए यह एक कठिन मुद्दा है। उनका कहना है कि इस बात पर सावधानीपूर्वक विचार करना आवश्यक है कि एक वयस्क की ख़ुराक से कितनी मात्रा कम की जानी चाहिए तथा यह कमी किस आधार पर की जानी चाहिए। उनके अनुसार न केवल आयु, बल्कि बच्चे के शरीर के आकार को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। वह यह भी कहते हैं कि कम ख़ुराक वाले टीकों के लिए योग्य बच्चों की आयु सीमा को कम करना भी एक विकल्प हो सकता है।

उपरोक्त जानकारी 9 मार्च तक की है।

प्रश्न.395. जापान में बच्चों का टीकाकरण आरम्भ / भाग 6 – समय के साथ कम हो सकती है संक्रमण से सुरक्षा

उत्तर.395. जापान में 5-11 वर्ष के बच्चों का कोविड-19 टीकाकरण आरंभ हो गया है। इस शृंखला में बच्चों के टीकाकरण से सम्बद्ध तथ्यों की जानकारी दी जा रही है। छठे अंक में समय के साथ संक्रमण से सुरक्षा में बदलाव पर नज़र।

अमरीका के न्यूयॉर्क में स्वास्थ्य अधिकारियों ने 5 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों को संक्रमण से बचाने और उन्हें अस्पताल में भर्ती होने से रोकने में फ़ाइज़र के टीकों की प्रभावकारिता पर हुए अध्ययन की रिपोर्ट 28 फ़रवरी को जारी की।

इस रिपोर्ट से पता चलता है कि 12 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों में संक्रमण के ख़िलाफ़ टीके की सुरक्षा जनवरी के अंत में गिरकर 51 प्रतिशत रह गयी थी। ग़ौरतलब है कि दिसंबर मध्य में जब ओमिक्रोन, कोरोनावायरस का मुख्य प्रकार बन गया था तब यह सुरक्षा 66 प्रतिशत थी।

लेकिन 5 से 11 साल के बच्चों में इसकी प्रभावकारिता में भारी गिरावट हुई और यह 68 प्रतिशत से गिरकर 12 प्रतिशत हो गयी।

शोधकर्ताओं का कहना है कि छोटे बच्चों में गिरावट का कारण यह हो सकता है कि उन्हें 12 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बच्चों की केवल एक तिहाई खुराक़ मिलती है।

अस्पताल में भर्ती होने से रोकने में फ़ाइज़र टीकों की प्रभावकारिता, 12 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए 73 प्रतिशत और 5 से 11 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए जनवरी के अंत तक, 48 प्रतिशत पायी गई थी।

शोधकर्ताओं का कहना है कि सटीक विश्लेषण प्रदान करने के लिए उनके पास पर्याप्त आँकड़े नहीं है क्योंकि बहुत से बच्चों में गंभीर लक्षण विकसित नहीं होते हैं।

हालाँकि इनका सत्यापन अभी तक किसी तीसरे पक्ष द्वारा नहीं किया गया है, विशेषज्ञों के अनुसार ये परिणाम बच्चों के लिए वैकल्पिक और बूस्टर ख़ुराक का अध्ययन करने की संभावित आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं।

यह जानकारी 8 मार्च तक की है।

प्रश्न.394. जापान में बच्चों का टीकाकरण आरंभ / भाग-5 अमरीकी सीडीसी के अनुसार टीके सुरक्षित, असरदार और गुणकारी

उत्तर.394. जापान में 5-11 वर्ष के बच्चों का कोविड-19 टीकाकरण आरंभ हो गया है। इस शृंखला में बच्चों के टीकाकरण से सम्बद्ध तथ्यों की जानकारी दी जा रही है। पाँचवे अंक में अमरीका के स्वास्थ अधिकारियों द्वारा इन टीकों के मूल्याँकन पर एक नज़र।

स्वास्थ्य अधिकारी टीकाकरण की अनुशंसा तभी करते हैं जब टीकों के दुष्प्रभावों जैसे संभावित नुक़सान की तुलना में टीकाकरण के लाभ बहुत अधिक रहें। अमरीका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केन्द्र ने 5-11 साल के बच्चों के टीकाकरण की अनुशंसा करते हुए टीकों को सुरक्षित, प्रभावशाली और गुणकारी बताया जिनके लाभ उनकी हानि से कहीं अधिक हैं।

कनाडा और फ़्राँस के अधिकारियों का भी यही मत है। वहीं ब्रिटेन और जर्मनी के अधिकारियों का कहना है कि केवल उच्च-जोखिम वाले बच्चों या फिर क्षीण रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले परिजनों के साथ रहने वाले बच्चों का टीकाकरण किया जाना चाहिए।

टीकाकरण कार्यप्रणाली पर सीडीसी की सलाहकार समिति ने नवम्बर 2021 में बच्चों में टीकाकरण के लाभ बताये थे।

सलाहकार समिति के अनुसार टीकाकरण बच्चों को संक्रमित होने या संक्रमित होने पर उनमें गंभीर लक्षण उत्पन्न होने से बचाता है। साथ ही बच्चों के माध्यम से अन्य लोगों में संक्रमण फैलने से भी रोकता है और बच्चे स्कूल जाने में सुरक्षित महसूस करते हैं। जहाँ तक इससे होने वाली हानि की बात है तो समिति ने कुछ दुष्प्रभाव बताये जिनका असर कुछ समय ही रहता है। कुछ विरले मामलों में मायोकार्डाइटिस यानि हृदय की माँसपेशियों में सूजन जैसे गंभीर दुष्प्रभाव भी देखे गये हैं।

उपरोक्त जानकारी 7 मार्च तक की है।

प्रश्न.393. जापान में बच्चों का टीकाकरण आरंभ / भाग-4 इसके दुष्प्रभाव

उत्तर.393. जापान में 5-11 वर्ष के बच्चों का कोविड-19 टीकाकरण आरंभ हो गया है। इस शृंखला में बच्चों के टीकाकरण से सम्बद्ध तथ्यों की जानकारी दी जा रही है। चौथे अंक में टीकों के दुष्प्रभावों पर अमरीकी रिपोर्ट पर एक नज़र।

अमरीका में नवम्बर 2021 से 5 से 11 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण आरंभ हुआ था। अमरीका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केन्द्र, यानि सीडीसी ने 19 दिसम्बर तक बच्चों के टीकाकरण के बाद दुष्प्रभावों की 4,249 शिकायतों का विश्लेषण जारी किया है। इस अवधि के दौरान 5-11 वर्ष के लगभग 87 लाख बच्चों का टीकाकरण किया गया था।

अमरीका में टीका लगने के बाद किसी भी तरह की शिकायत को संभावित दुष्प्रभाव के रूप में दर्ज करवाया जा सकता है। सीडीसी के विश्लेषण के अनुसार 4,149 यानि 97.6 प्रतिशत मामलों में किसी तरह की गंभीर समस्या नहीं देखी गयी। टीका लगने के बाद बच्चों में निम्नलिखित लक्षण देखे गये। सभी मामलों में से 316 यानि 7.6 प्रतिशत बच्चों को उल्टी हुई। 291 यानि 7 प्रतिशत बच्चों को बुखार आया, 255 यानि 6.2 प्रतिशत बच्चों को सिरदर्द की शिकायत हुई और कई बच्चे बेहोश भी हुए। 244 यानि 5.9 प्रतिशत बच्चों को चक्कर आये, और 201 यानि 4.8 प्रतिशत बच्चों को थकान महसूस हुई। सीडीसी ने 100 शिकायतों को गंभीर माना था, जिनमें से 29 यानि 29 प्रतिशत बुखार के मामले थे, 21 यानि 21 प्रतिशत मामले उल्टी के थे वहीं 12 यानि 12 प्रतिशत मामलों में बच्चों को दौरे पड़े।

टीका लगने के बाद 11 बच्चों में मायोकार्डाइटिस यानि हृदय की मांसपेशियों में सूजन की शिकायत देखी गयी। हालाँकि सभी बच्चे अब ठीक हो चुके हैं। विश्लेषकों के अनुसार 12 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग की तुलना में 5-11 साल के बच्चों में मायोकार्डाइटिस मामलों का अनुपात कम रहा।

टीका लगने के बाद दो बच्चों की मृत्यु हो गयी थी। लेकिन सीडीसी के अनुसार इन दोनों बच्चों को पहले से ही स्वास्थ्य सम्बन्धी जटिल समस्याएँ थीं। टीका लगने से पहले दोनों का स्वास्थ्य बहुत कमज़ोर था। विश्लेषकों ने आगे कहा टीकाकरण और मृत्यु के बीच किसी तरह के सम्बन्ध का कोई आँकड़ा नहीं मिलता है।

उपरोक्त जानकारी 4 मार्च तक की है।

प्रश्न.392. जापान में बच्चों का टीकाकरण आरम्भ / भाग-3  नैदानिक परीक्षणों में सुरक्षा

उत्तर.392. जापान में 5-11 वर्ष के बच्चों का कोविड-19 टीकाकरण फ़रवरी के अंत से आरम्भ हो गया है। इस शृंखला में बच्चों के टीकाकरण विषय पर तीसरी कड़ी में नैदानिक परीक्षणों में सुरक्षा पर एक नज़र डालेंगे।

फ़ाइजर और बियोन्टेक ने अमरीका, स्पेन और अन्य जगहों पर 5-11 वर्ष के 2,200 से अधिक बच्चों पर नैदानिक परीक्षण किये। टीकाकरण के दुष्प्रभाव जैसे टीका लगने वाले स्थान में दर्द और हरारत की ख़बरें मिलीं, लेकिन अधिकतर मामलों में यह लक्षण हल्के से लेकर मध्यम थे और 1-2 दिन में इनमें सुधार आ गया।

कुछ विशिष्ट लक्षणों पर आँकड़ों के अनुसार एक नज़र।

・टीके की पहली ख़ुराक के बाद 74 प्रतिशत और दूसरी ख़ुराक के बाद 71 प्रतिशत मामलों में टीके के स्थान पर दर्द की शिकायत मिली।
・ पहली ख़ुराक के बाद 34 प्रतिशत और दूसरी ख़ुराक के बाद 39 प्रतिशत मामलों में हरारत देखी गयी।
・ पहली ख़ुराक के बाद 22 प्रतिशत और दूसरी ख़ुराक के बाद 28 प्रतिशत मामलों में सिरदर्द की शिकायत सामने आयी।
・ पहली ख़ुराक के बाद 15 प्रतिशत और दूसरी ख़ुराक के बाद 19 प्रतिशत मामलों में सुई लगने वाली जगह के लाल होने की शिकायत सामने आयी।
・ पहली ख़ुराक के बाद 10 प्रतिशत और दूसरी ख़ुराक के बाद 15 प्रतिशत मामलों में टीके वाले स्थान पर सूजन देखी गयी।
・ पहली ख़ुराक के बाद 9 प्रतिशत और दूसरी ख़ुराक के बाद 12 प्रतिशत मामलों में माँसपेशियों में दर्द पाया गया।
・ पहली ख़ुराक के बाद 5 प्रतिशत और दूसरी ख़ुराक के बाद 10 प्रतिशत मामलों में कंपकंपी की शिकायत सामने आयी।
・ पहली ख़ुराक के बाद 3 प्रतिशत और दूसरी ख़ुराक के बाद 7 प्रतिशत मामलों में 38 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक का ज्वर देखा गया।
・ अनुमान है कि पहली ख़ुराक के बाद 14 प्रतिशत और दूसरी ख़ुराक के बाद 20 प्रतिशत मामलों में ज्वर-रोधी व दर्द निवारक दवा ली गयी।

उपरोक्त जानकारी 3 मार्च तक की है।

प्रश्न.391. जापान में बच्चों का टीकाकरण आरंभ / भाग-2 नैदानिक परीक्षण के अनुसार लक्षण विकसित होने से रोकने में टीकाकरण 90.7 प्रतिशत तक प्रभावी

उत्तर.391. जापान ने फ़रवरी के अंत से 5 से 11 वर्ष की आयु के बच्चों में टीकाकरण आरंभ कर दिया है। बच्चों के टीकाकरण पर हमारी दूसरी शृंखला में हम नज़र डालेंगे टीकाकरण की प्रभावशीलता पर।

फ़ाइज़र ने अमरीका और स्पेन जैसे देशों में 5 से 11 वर्ष की आयु के 2,200 बच्चों पर नैदानिक परीक्षण किये। कंपनी का कहना है कि इस परीक्षण के नतीजों ने पुष्टि की कि लक्षण युक्त संक्रमण रोकने में यह टीके 90.7 प्रतिशत प्रभावी हैं। फ़ाइज़र का यह भी कहना है कि टीका सुरक्षित है क्योंकि टीका लगवाने के बाद बच्चों में जो लक्षण विकसित हुए वे हल्के या मध्यम ही थे।

परीक्षण में 1,500 से अधिक बच्चों को तीन सप्ताह के अंतराल पर दो ख़ुराकें, प्रति ख़ुराक 10 माइक्रोग्राम या वयस्कों की एक तिहाई मात्रा दी गयी। 750 बच्चों को आभासी दवा दी गयी। शोधकर्ताओं ने पुष्टि की कि टीका लगवाने वाले बच्चों में प्रतिरोधक एंटीबॉडी का स्तर सामान्य टीका लगवाने वाले 16 से 25 वर्ष की आयु वाले लोगों के बराबर ही था। दूसरी ख़ुराक लेने के 7 दिन या उससे अधिक समय के बाद लक्षण युक्त कोविड संक्रमण विकसित होने वाले बच्चों की संख्या टीका लेने वाले समूह में 3 थी जबकि आभासी दवा वाले समूह में यह संख्या 16 थी। इस आधार पर शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला कि लक्षण रोकने में यह टीका 90.7 प्रतिशत प्रभावी है।

उपरोक्त जानकारी 2 मार्च तक की है।

प्रश्न.390. जापान में बच्चों का टीकाकरण आरंभ / भाग-1 बच्चों के टीकाकरण से जुड़ी सरकारी नीति

उत्तर.390. जापान में 5-11 वर्ष के बच्चों का कोविड-19 टीकाकरण फ़रवरी के अंत से आरम्भ हो गया है। इस शृंखला में हम बच्चों के टीकाकरण के संभावित दुष्प्रभावों और टीकाकरण कार्यक्रम पर चर्चा करेंगे। शृंखला के पहले अंक में इस विषय में सरकारी नीति पर एक नज़र।

जापान सरकार ने 21 फ़रवरी को आधिकारिक तौर पर 5-11 वर्ष की आयु के बच्चों के टीकाकरण को अनुमति दी। इस आयु वर्ग के लिए तय ख़ुराक की मात्रा, 12 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों को दी जाने वाली मात्रा की एक तिहाई है। बच्चों को तीन सप्ताह के अंतराल पर दो ख़ुराकें दी जा रही हैं। सरकार, स्कूलों में सामूहिक टीकाकरण की सिफ़ारिश नहीं कर रही है।

बच्चों को ये ख़ुराकें, नगर पालिकाओं या बाल चिकित्सालयों में बने टीकाकरण स्थल पर, व्यक्तिगत तौर पर दी जा रही हैं।

ओमिक्रोन प्रकार के ख़िलाफ़ टीके की प्रभावकारिता के पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण वर्तमान में, 5 से 11 वर्ष की आयु के बच्चों को कोविड टीकाकरण हेतु प्रयास करना ज़रूरी नहीं है। इस आयु वर्ग के बच्चे के टीकाकरण हेतु उनके माता-पिता या अभिभावकों की सहमति अनिवार्य है। स्वास्थ्य मंत्रालय उनसे अनुरोध कर रहा है कि अपने बच्चों को टीका लगवाने से पहले वे उसकी प्रभावकारिता और सुरक्षा के आँकड़ों के आधार पर उनसे अच्छी तरह से चर्चा कर लें। टीका लगवाने या न लगवाने का निर्णय लेने से पहले घरेलू चिकित्सक से परामर्श की भी सिफ़ारिश की गयी है।

मंत्रालय, श्वसन और अन्य अंतर्निहित समस्याओं से जूझ रहे बच्चों से टीका लगवाने का आग्रह कर रहा है, क्योंकि उनमें कोविड के गंभीर लक्षण विकसित होने का जोखिम अधिक है।

यह जानकारी 1 मार्च तक की है।

प्रश्न.389. शोध दल ने कोरोनावायरस की बूस्टर ख़ुराक के लिए एक अलग टीके के उपयोग पर क्या परिणाम प्रकाशित किए हैं / अंक-3 विशेषज्ञों की राय

उत्तर.389. जापान सरकार के एक शोध दल ने टीके की दो ख़ुराक ले चुके लोगों पर बूस्टर ख़ुराक के लिए अलग टीके के उपयोग पर टीके की प्रभावकारिता और सुरक्षा पर किये शोध के परिणाम पहली बार जारी किये हैं। इस शृंखला में एक ही कम्पनी का टीका लगवाने के बजाय भिन्न कम्पनियों के बूस्टर टीके से सम्बद्ध जानकारी दी जा रही है। शृंखला की तीसरी और अंतिम कड़ी में जानते हैं इस बारे में विशेषज्ञों की राय।

जुतेन्दो चिकित्सा विश्वविद्यालय में प्राध्यापक इतो सुमिनोबु इस शोध दल का नेतृत्व कर रहे हैं। उनका कहना है कि तीनों टीके एक ही कम्पनी फ़ाइज़र के लगवाने की तुलना में पहले दो टीके एक कम्पनी और तीसरा यानि बूस्टर टीका मॉडर्ना का लगवाने से शरीर में रोग प्रतिकारकों की मात्रा अधिक पायी गई। हालाँकि इस कारण अधिक अवांछित पक्षीय प्रभाव भी सामने आये हैं, फिर भी अस्वस्थता अवकाश लेने वाले लोगों की संख्या में अधिक अंतर नहीं देखा गया। इतो कहते हैं कि टीके का चयन करते समय लोगों को इनकी प्रभावशीलता और पक्षीय प्रभाव, दोनों का ही ध्यान रखना चाहिए।

तोक्यो चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक और संक्रामक रोग के विशेषज्ञ हामादा आत्सुओ कहते हैं कि अमरीका और यूरोपीय देशों की सरकारें अब दैनिक जीवन और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को पुनः महामारी से पूर्व के समय जैसा लाने की ओर ध्यान देने लगी हैं।

लेकिन उन्होंने माना कि हाल ही में जापान में कोरोनावायरस संक्रमण विस्फोटक स्तर पर पहुँच गया है और केवल 10 प्रतिशत से कुछ अधिक जनसंख्या को ही बूस्टर टीके लगे हैं। वह कहते हैं कि जिन जगहों पर नये मामले बहुतायत में नहीं बढ़ रहे हैं वहाँ पर सामाजिक-आर्थिक स्थिति बहाल की जा सकती है लेकिन तोक्यो और ओसाका जैसे महानगरों में जहाँ बड़ी संख्या में नये मामले देखे जा रहे हैं, वहाँ प्रशासन को अर्ध-आपातकाल हटाने से पहले चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति और विशेष रूप से बुज़ुर्गों का टीकाकरण बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 28 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.388. शोध दल ने कोरोनावायरस की बूस्टर ख़ुराक के लिए एक अलग टीके के उपयोग पर क्या परिणाम प्रकाशित किए हैं / अंक-2 पाक्षिक प्रभाव

उत्तर.388. जापान सरकार के एक शोध दल ने टीके की दो ख़ुराक ले चुके लोगों पर बूस्टर खुराक के लिए अलग टीके के उपयोग पर टीके की प्रभावकारिता और सुरक्षा पर किये शोध के परिणाम पहली बार जारी किये हैं। इस शृंखला में एक ही कम्पनी का टीका लगवाने के बजाय भिन्न कम्पनियों के बूस्टर टीके से सम्बद्ध जानकारी दी जा रही है। अंक 2 में देखते हैं इसके संभावित पाक्षिक प्रभाव।

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक शोध दल ने बूस्टर टीका लगवाने के बाद लोगों में देखे गये पाक्षिक प्रभावों पर एक रिपोर्ट जारी की है। जिन लोगों को तीनों टीके फ़ाइज़र कम्पनी के ही लगे थे उनमें से 21.4 प्रतिशत को 38 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक का ज्वर हुआ। 69.1 प्रतिशत को थकान महसूस हुई और 55 प्रतिशत को सिरदर्द की शिकायत रही।

जिन लोगों को आरंभिक दो टीके फ़ाइज़र के लगे लेकिन बूस्टर टीका मॉडर्ना कम्पनी का लगाया गया, उनमें से 49.2 प्रतिशत को 38 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक का बुखार हुआ। 78 प्रतिशत को थकान महसूस हुई और 69.6 प्रतिशत को सिरदर्द रहा। सभी मामलों में बूस्टर टीका लगवाने के अगले दिन दुष्प्रभाव सबसे गंभीर दिखाई दिया और यह अगले दो से तीन में चला भी गया।

तीनों टीके फ़ाइज़र कम्पनी का ही लगवाने वाले दो मामलों संदिग्ध रूप से हृदय की मांसपेशियों में सूजन देखी गयी। लेकिन इनके ये लक्षण बहुत गंभीर नहीं थे। पहले दो टीके फ़ाइज़र और बूस्टर टीका मॉडर्ना का लगवाने वाले लोगों में किसी तरह का गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखा गया।
उपरोक्त जानकारी 25 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न.387. शोध दल ने कोरोनावायरस की बूस्टर ख़ुराक के लिए एक अलग टीके के उपयोग पर क्या परिणाम प्रकाशित किए हैं / अंक-1 बूस्टर ख़ुराक की प्रभावकारिता

उत्तर.387. जापान सरकार के एक शोध दल ने टीके की दो ख़ुराक ले चुके लोगों पर बूस्टर खुराक के लिए अलग टीके के उपयोग पर टीके की प्रभावकारिता और सुरक्षा पर किये शोध के परिणाम पहली बार जारी किये हैं। इस शृंखला में एक ही कम्पनी का टीका लगवाने के बजाय भिन्न कम्पनियों के बूस्टर टीके से सम्बद्ध जानकारी दी जा रही है। पहली कड़ी में इस तरह के टीके की प्रभावकारिता पर रोशनी डाली जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय के शोध दल ने स्वास्थ्य कर्मियों के आँकड़ों का विश्लेषण किया जो देश में तीसरा टीका लगवाने वाले पहले व्यक्ति थे। सभी को पहले फ़ाइजर टीके की दो ख़ुराक मिली थीं।

28 जनवरी तक टीके की तीसरी ख़ुराक के लिए 2,826 लोगों को फ़ाइजर टीका लगाया गया और 773 को मॉडर्ना टीका लगाया गया।

शोधकर्ताओं ने जड़ तनाव के ख़िलाफ़ उनमें रोग-प्रतिकारकों या एंटीबॉडी के स्तर को मापा और उनके दुष्प्रभावों की जाँच की। दल ने 18 फ़रवरी को स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति की बैठक में परिणामों की जानकारी दी।

शोध दल ने तीसरा टीका लगाये जाने के एक महीने बाद लोगों में रोग-प्रतिकारकों या एंटीबॉडी के स्तर का अध्ययन किया। उनमें वायरस से संक्रमण की कोई एंटीबॉडी नहीं थी। फ़ाइजर की बूस्टर ख़ुराक लगवाने वाले लोगों का एंटीबॉडी स्तर उनकी बूस्टर ख़ुराक के ठीक पहले के स्तर से औसतन 54.1 गुणा अधिक था। इस बीच, मॉडर्ना बूस्टर पाने वाले लोगों का स्तर औसतन 67.9 गुणा बढ़ गया था।

शोधकर्ताओं का कहना है कि विदेशी अध्ययनों के परिणामों को ध्यान में रखते हुए यह प्रतीत होता है कि मॉडर्ना की बूस्टर ख़ुराक भी वायरस के ओमिक्रोन प्रकार पर बहुत प्रभावी है।

उपरोक्त जानकारी 24 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-22 कोचि

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की बाइसवीं कड़ी में जानते हैं कोचि प्रिफ़ैकचर में किये जा रहे उपायों के बारे में।

कोचि प्रिफ़ैक्चर अर्ध-आपातकालीन उपाय समूचे क्षेत्र में लागू कर रहा है। इसके तहत, सभी जलपान प्रतिष्ठान से अपनी संचालन अवधि कम करने के लिए कहा गया है। वारयस-रोधी उपाय करने के लिए प्रमाणित प्रतिष्ठानों को दो विकल्प प्रदान किये गए हैं जिनके अंतर्गत या तो वे रात्रि 9 बजे तक मदिरा परोसते हुए खुले रह सकते हैं या फिर वे रात्रि 8 बजे तक मदिरा परोसे बिना खुले रह सकते हैं।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से रात्रि 8 बजे तक कारोबार बंद करने और मदिरा न परोसने का अनुरोध किया गया है।

सभी प्रतिष्ठानों से कहा गया है कि वे एक मेज़ पर 4 ग्राहकों से अधिक न बैठाएँ।

मदिरा परोसते हुए रात्रि 9 बजे तक कारोबार बंद करने वाले छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों को 25 हज़ार से 75 हज़ार येन तक का दैनिक अनुदान दिया जा रहा है। रात्रि 8 बजे बंद होने वाले और मदिरा न परोसने वाले प्रतिष्ठानों को 30 हज़ार से 1 लाख येन तक का दैनिक अनुदान, उनके व्यापार के पैमाने के आधार पर दिया जा रहा है।

अधिकारी लोगों से आह्वान कर रहे हैं कि वे अनावश्यक कार्यों के लिए प्रिफ़ैक्चर से बाहर न जाएँ।

यह जानकारी 22 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-21 वाकायामा

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की इक्कीसवीं कड़ी में में वाकायामा प्रिफ़ैक्चर में उठाये जा रहे कदमों पर एक नज़र।

संपूर्ण वाकायामा प्रिफ़ैक्चर में अर्ध-आपातकाल उपाय लागू किये गए हैं। प्रिफ़ैक्चर सरकार ने सभी रेस्त्राँ से संचालन समय कम करने का आग्रह किया है।

वायरस-रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित रेस्त्राँ मदिरा परोसने या न परोसने का विकल्प चुन सकते हैं।

मदिरा परोसने का विकल्प चुनने वाले प्रतिष्ठानों से रात 8 बजे तक मदिरा परोसने और 9 बजे प्रतिष्ठान बन्द करने का आग्रह किया गया है। अन्य प्रमाणित प्रतिष्ठानों से रात 8 बजे संचालन बंद करने के लिए कहा गया है।

अप्रमाणित प्रतिष्ठान न मदिरा परोस सकते हैं और न ही रात 8 बजे बाद रेस्त्राँ खुला रख सकते हैं।

समूह में खाने-पीने का आनंद लेने वाले लोगों के लिए भी सीमा तय की गयी है। एक टेबल पर केवल चार लोग ही एक साथ बैठ सकते हैं।

वाकायामा अधिकारियों ने विभिन्न आयोजनों के आयोजकों से समस्त वायरस-रोधी उपाय अपनाने के निर्देश दिये हैं।

1000 से अधिक दर्शकों के आयोजन के लिए आयोजकों को प्रिफ़ैक्चर सरकार से पूर्व अनुमति लेनी आवश्यक है। दर्शकों की संख्या 5,000 से अधिक होने पर आयोजनकर्ताओं को दो सप्ताह पहले कार्यक्रम की विस्तृत सुरक्षा रिपोर्ट सरकार को देना आवश्यक है और आयोजन के बाद भी पूरी रिपोर्ट देनी होगी।

उपरोक्त जानकारी 21 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-20 कागोशिमा

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की बीसवीं कड़ी में कागोशिमा प्रिफ़ैक्चर में उठाये जा रहे कदमों पर एक नज़र।

संपूर्ण कागोशिमा प्रिफ़ैक्चर में अर्ध-आपातकाल उपाय लागू किये गए हैं। प्रिफ़ैक्चर सरकार ने खान-पान से सम्बद्ध सभी प्रतिष्ठानों से काम की अवधि कम करने को कहा है।

वायरस-रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित प्रतिष्ठानों को दो विकल्प दिये गए हैं। पहला, वह मदिरा परोस सकते हैं और रात 9 बजे काम कर सकते हैं या फिर मदिरा परोसे बग़ैर वह रात 8 बजे तक प्रतिष्ठान बन्द करें।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से रात बजे 8 तक काम बन्द करने का आग्रह किया गया है।

सरकारी आग्रह का पालन करने वाले संस्थानों को मुआवज़ा दिया जाएगा। लघु और मध्यम आकार के प्रत्येक प्रतिष्ठान को उनकी बिक्री के आधार पर प्रतिदिन 75,000 येन तक का मुआवज़ा दिया जाएगा। मदिरा न परोसने वाले प्रमाणित रेस्त्राँ 30,000 से 1,00,000 येन प्रतिदिन का मुआवज़ा दिया जा रहा है।

उपरोक्त जानकारी 18 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-19 सागा और ओइता

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की उन्नीसवीं कड़ी में बात हो रही है सागा और ओइता प्रिफ़ैक्चर की।

समूचे सागा प्रिफ़ैक्चर में अर्ध-आपातकालीन उपाय लागू हैं।

प्रिफ़ैक्चर सरकार ने सभी भोजनालयों से अपना संचालन समय कम करने के लिए कहा है।

वायरस-रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित रेस्त्राँ और मदिरालय मदिरा परोस सकते हैं और रात 9 बजे तक खुले रह सकते हैं। अप्रमाणित प्रतिष्ठानों को रात 8 बजे के बाद मदिरा परोसने और कार्य संचालन से परहेज़ करने की सलाह दी गयी है।

प्रमाणित हों या अप्रमाणित पर इन अनुरोधों का पालन करने वाले प्रतिष्ठानों को उनकी बिक्री के आधार पर प्रतिदिन 30,000 से 1,00,000 येन तक का अनुदान दिया जा रहा है।

प्रिफ़ैक्चर के अधिकारियों ने ग्राहकों से बड़े समूहों में लंबे समय तक भोजन करने से परहेज़ के लिए कहा है। उनका कहना है कि प्रत्येक मेज़ पर अधिकतम चार लोग होने चाहिए और ग्राहकों को दो घंटे के अंदर ही उस स्थान से हट जाना चाहिए।

प्रिफ़ैक्चर ने लोगों से वायरस-रोधी उपायों को पूरी तरह से न अपनाने वाले भोजनालयों में न जाने की सलाह भी दी है।

ओइता प्रिफ़ैक्चर सरकार ने पूरे क्षेत्र के रेस्त्राँ और मदिरालयों से संचालन समय कम करने के लिए कहा है।

वायरस-रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित प्रतिष्ठानों को दो विकल्प दिये गए हैं। वे मदिरा परोसने का विकल्प चुन सकते हैं और रात 9 बजे तक खुले रह सकते हैं या वे मदिरा परोसने से बचते हुए रात 8 बजे तक संचालन बंद कर सकते हैं।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से रात 8 बजे तक संचालन बंद करने और मदिरा न परोसने का आग्रह किया गया है।

इन अनुरोधों का पालन करने वाले लघु और मध्यम आकार के ऐसे प्रतिष्ठान जो मदिरा परोसने से परहेज़ कर रात 8 बजे तक संचालन कार्य समाप्त कर देते हैं उन्हें प्रतिदिन 30,000 येन या उससे अधिक का भुगतान किया जा रहा है। मदिरा परोसने और रात 9 बजे तक संचालन बंद करने वाले प्रमाणित प्रतिष्ठानों को प्रतिदिन 25,000 येन या उससे अधिक का भुगतान किया जा रहा है।

उपरोक्त जानकारी 17 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-18 शिमाने और ओकायामा

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की अठारहवीं कड़ी में एक नज़र शिमाने और ओकामा प्रिफ़ैक्चरों पर।

संपूर्ण शिमाने प्रिफ़ैक्चर में अर्ध-आपातकालीन उपाय किये जा रहे हैं।

प्रिफ़ैक्चर सरकार वायरस रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित मदिरालयों और रेस्त्राँ को दो विकल्पों में से एक चुनने की अनुमति देती है। या तो वे रात 8 बजे तक मदिरा परोस सकते हैं और अपना संचालन रात 9 बजे तक बंद करना होगा, या फिर मदिरा परोसे बिना रात 8 बजे तक संचालन बंद करने के लिए कहा गया है।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से बिना मदिरा परोसे रात 8 बजे तक संचालन बंद करने का आग्रह किया जा रहा है।

लघु एवं मध्यम आकार की कपंनियों द्वारा संचालित रेस्त्राँ और मदिरालयों को उनकी विक्रय के आधार पर प्रति दिन 30,000 से 1,00,000 येन तक का अनुदान दिया जाएगा। यह उन प्रतिष्ठानों पर लागू होता है जो बिना मदिरा परोसे रात 8 बजे तक बंद हो जाते हैं। प्रमाणित प्रतिष्ठान जो मदिरा परोसते हैं और रात 9 बजे बंद होते हैं उन्हे 25,000 से 75,000 येन प्रतिदिन तक के भुगतान का प्रावधान है।

प्रत्येक मेज़ पर अधिकतम 4 लोगों के बैठने की अनुमति है।

ओकामा प्रिफ़ैक्चर के सभी क्षेत्रों में अर्ध-आपातकालीन उपाय लागू हैं। अप्रमाणित भोजनालयों, कराओके केन्द्रों और विवाह सभागारों को रात 8 बजे तक संचालन बंद करने तथा मदिरा न परोसने के लिए कहा गया है।

प्रमाणित प्रतिष्ठानों को दो विकल्पों में से एक के चयन के लिए कहा गया है। रात 8 बजे तक मदिरा परोसने की अनुमति के साथ 9 बजे तक संचालन समाप्त करें अथवा मदिरा परोसे बग़ैर रात 8 बजे तक संचालन समाप्त करें।

सभी नियमों का अनुपालन करने वाले रेस्त्रा और मदिरालयों को ही मुआवज़े का प्रावधान है।

लघु या मध्यम आकार की कपंनियों द्वारा संचालित प्रतिष्ठान जो मदिरा परोसते हैं तथा रात 9 बजे बंद होते हैं उन्हें 75,000 येन प्रति दिन तक का अनुदान मिलेगा, जबकि मदिरा परोसे बग़ैर रात 8 बजे तक संचालन बंद करने वाले प्रमाणित और अप्रमाणित, दोनों प्रकार के प्रतिष्ठानों को 1 लाख येन प्रतिदिन तक का भुगतान किया जाएगा।

उपरोक्त जानकारी 16 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-17 नागानो और शिज़ुओका

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की सत्रहवीं कड़ी में जानते हैं नागानो और शिज़ुओका प्रिफ़ैकचरों में किये जा रहे उपायों के बारे में।

नागानो प्रिफ़ैक्चर अर्ध-आपातकालीन उपाय समूचे क्षेत्र में लागू कर चुका है। इसके तहत, जलपान प्रतिष्ठान और काराओके बार तथा विवाह सभागृहों समेत कारोबारों से अपनी संचालन अवधि कम करने के लिए कहा गया है। वारयस-रोधी उपाय अपनाने के प्रमाणित प्रतिष्ठानों को दो विकल्प प्रदान किये गए हैं जिनके अंतर्गत या तो वे रात्रि 9 बजे तक मदिरा परोसते हुए खुले रह सकते हैं या फिर वे रात्रि 8 बजे तक मदिरा परोसे बिना खुले रह सकते हैं।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से रात्रि 8 बजे तक कारोबार बंद करने और मदिरा न परोसने का अनुरोध किया गया है।

रात्रि 8 बजे बंद होने वाले और मदिरा न परोसने वाले प्रतिष्ठानों को 30 हज़ार से 1 लाख येन तक का दैनिक अनुदान, उनके व्यापार के पैमाने के आधार पर दिया जा रहा है। मदिरा परोसते हुए रात्रि 9 बजे तक कारोबार बंद करने वाले कारोबारों को तुलनात्मक रूप से कम, 25 हज़ार से 75 हज़ार येन तक का दैनिक अनुदान दिया जा रहा है।

सभी प्रतिष्ठानों से कहा गया है कि वे एक मेज़ पर 4 ग्राहकों से अधिक न बैठाएँ।

शिज़ुओका प्रिफ़ैक्चर अर्ध-आपातकालीन उपाय समूचे क्षेत्र में लागू कर चुका है। इसके तहत, सभी जलपान प्रतिष्ठानों से उनकी संचालन अवधि कम करने के लिए कहा गया है। वारयस-रोधी उपाय करने के लिए प्रमाणित प्रतिष्ठानों को दो विकल्प प्रदान किये गए हैं जिनके अंतर्गत या तो वे रात्रि 8 बजे तक मदिरा परोसते हुए 9 बजे तक खुले रह सकते हैं या फिर वे रात्रि 8 बजे तक मदिरा परोसे बिना खुले रह सकते हैं।

मदिरा परोसते हुए रात्रि 9 बजे तक कारोबार बंद करने वाले कारोबारों को उनके व्यापार के पैमाने के आधार पर 25 हज़ार से 75 हज़ार येन तक का जबकि रात्रि 8 बजे बंद होने वाले और मदिरा न परोसने वाले प्रतिष्ठानों को 30 हज़ार से 1 लाख येन तक का दैनिक अनुदान दिया जा रहा है।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से रात्रि 8 बजे तक कारोबार बंद करने और मदिरा न परोसने का अनुरोध किया गया है। इसका अनुपालन करने वालों को अनुदान दिया जा रहा है।

सभी प्रतिष्ठानों से कहा गया है कि वे एक मेज़ पर 4 ग्राहकों से अधिक न बैठाएँ।

उपरोक्त जानकारी 15 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस सम्बद्ध अर्ध-आपातकाल के तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-16 तोचिगि और इशिकावा

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की सोलहवीं कड़ी में तोचिगि और इशिकावा प्रिफ़ैक्चरों में लिये जा रहे क़दमों पर एक नज़र।

संपूर्ण तोचिगि प्रिफ़ैक्चर में अर्ध-आपातकाल उपाय लागू हैं।

वायरस-रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित रेस्त्राँ और मदिरालयों को दो विकल्प दिये गए हैं। वह मदिरा परोसे बग़ैर रात 8 बजे प्रतिष्ठान बन्द करें या फिर रात 8 बजे तक मदिरा परोसने के बाद रात 9 बजे संस्थान बन्द करें।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से आग्रह किया गया है कि वह न मदिरा परोसें और न ही रात 8 बजे बाद रेस्त्राँ संचालित करें। प्रिफ़ैक्चर सरकार के आग्रह का अनुपालन करने वाले प्रतिष्ठानों को 1,00,000 येन प्रतिदिन तक का मुआवज़ा दिया जाएगा।

संपूर्ण इशिकावा प्रिफ़ैक्चर में अर्ध-आपातकाल उपाय लागू हैं। वायरस-रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित मदिरालयों और रेस्त्राँ से मदिरा परोसे बग़ैर रात 8 बजे काम खत्म करने का आग्रह किया गया है, या फिर वे रात 8 बजे तक मदिरा परोसने के बाद रात 9 प्रतिष्ठान बन्द कर सकते हैं। अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से मदिरा परोसे बग़ैर रात 8 बजे तक संचालन बन्द करने के लिए कहा गया है।

सरकारी आग्रह का अनुपालन करने वाले प्रतिष्ठान मुआवज़े के पात्र हैं। मदिरा परोसने वाले प्रतिष्ठानों की तुलना में मदिरा नहीं परोसने वाले लघु और मध्यम आकार के प्रतिष्ठानों को अधिक मुआवज़ा दिया जाएगा। मदिरा परोसने वाले प्रमाणित प्रतिष्ठानों को 75,000 येन प्रतिदिन और मदिरा नहीं परोसने वाले प्रतिष्ठानों को 1,00,000 येन प्रतिदिन तक का मुआवज़ा दिया जा रहा है।

उपरोक्त जानकारी 14 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-15 आओमोरि और यामागाता

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की पंद्रहवीं कड़ी में आओमोरि और यामागाता प्रिफ़ैक्चरों में लिये जा रहे क़दमों पर एक नज़र।

आओमोरि प्रिफ़ैक्चर में पहली बार वायरस-रोधी अर्ध-आपातकालीन उपाय लागू किये गए हैं।

आओमोरि प्रिफ़ैक्चर की सरकार ने हिरोसाकि शहर के भोजनालयों से अपनी कार्यावधि को सुबह 5 बजे से रात 8 बजे के बीच सीमित करने के लिए कहा है। यह घर पहुँच सेवा यानि होम डिलीवरी या साथ ले जाने यानि टेकआउट जैसी व्यवस्था पर लागू नहीं है।

सैद्धान्तिक रूप से तो प्रतिष्ठानों को मदिरा न परोसने के लिए कहा गया है लेकिन वायरस-रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित प्रतिष्ठानों को सुबह 11 बजे से रात 8 बजे के बीच मदिरा परोसने की अनुमति है।

प्रत्येक मेज़ पर अधिकतम चार लोगों का समूह बैठ सकता है।

इन अनुरोधों का पालन करने वाले प्रतिष्ठानों को उनकी बिक्री, क्षमता और मदिरा परोसने की व्यवस्था के आधार पर प्रतिदिन 25,000 से 2,00,000 येन तक का मुआवज़ा दिया जा रहा है।

यामागाता प्रिफैक्चर के नौ शहरों और कस्बों में वायरस-रोधी अर्ध-आपातकालीन उपाय लागू किये गए हैं। इनमें यामागाता, तेंदो, योनेज़ावा, त्सुरुओका, साकाता शहर शामिल है और ताकाहाता, मिकावा, शोनाइ और युज़ा कस्बे शामिल हैं।

इन क्षेत्रों के लोगों से अनावश्यक बाहर निकलने से बचने के लिए कहा गया है। बाहर भोजन करते समय प्रत्येक मेज़ पर अधिकतम चार लोगों को बैठाने की अनुमति है और उन्हें दो घंटे के अन्दर ही वह स्थान छोड़ना के लिए कहा गया है।

प्रिफैक्चर ने भोजनालयों से अपना संचालन समय कम करने के लिए कहा है जो घर पहुँच सेवा यानि होम डिलीवरी या साथ ले जाने यानि टेकआउट जैसी व्यवस्था पर लागू नहीं है।

वायरस-रोधी उपाय अपनाने के प्रमाणित प्रतिष्ठानों को प्रातः 5 बजे से रात 9 बजे के बीच संचालन की अनुमति है और वे मदिरा परोस सकते हैं।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से प्रातः 5 बजे से रात 8 बजे के बीच मदिरा परोसे बिना कार्य संचालन का आग्रह किया गया है।

इन अनुरोधों का अनुपालन करने वाले व्यवसाय सब्सिडी के पात्र हैं। प्रमाणित प्रतिष्ठानों को प्रतिदिन 1,10,000 येन तक का भुगतान किया जा रहा है और अप्रमाणित व्यवसाय 1,00,000 येन तक प्राप्त करने में सक्षम हैं।

उपरोक्त जानकारी 10 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-14 फ़ुकुशिमा और इबाराकि

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की चौदहवीं कड़ी में बात हो रही है फ़ुकुशिमा और इबाराकि प्रिफ़ैक्चरों की।

संपूर्ण फ़ुकुशिमा प्रिफ़ैक्चर में अर्ध आपातकालीन उपाय लागू हैं। इन क्षेत्रों में रेस्त्राँ और मदिरालयों को अपना संचालन समय कम करने के लिए कहा गया है। ऐसे प्रतिष्ठान जो पूर्ण संक्रमण-रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित नहीं हैं, उनसे मदिरा परोसे बिना रात 8 बजे तक संचालन बंद करने का आग्रह किया गया है।

प्रमाणित प्रतिष्ठानों को दो विकल्प दिये गए हैं। वे सुबह 5 बजे से रात 9 बजे के बीच काम कर सकते हैं तथा रात 8 बजे तक मदिरा परोस सकते हैं, या वे मदिरा परोसे बिना सुबह 5 बजे से रात 8 बजे के बीच खुले रह सकते हैं। पहला विकल्प चुनने पर प्रतिदिन 25,000 येन या अधिक और दूसरे विकल्प में कम से कम 30,000 येन का अनुदान प्रतिदिन इन प्रतिष्ठानों को मिलता है।

प्रत्येक मेज़ पर अधिकतम चार लोगों को बैठने की अनुमति है।

इबाराकि प्रिफ़ैक्चर में पूरे क्षेत्र में अर्ध-आपातकाल लागू है। रेस्त्राँ और मदिरालय या तो मदिरा परोसने से परहेज़ कर रात 8 बजे तक संचालन बंद कर सकते हैं या मदिरा परोस सकते हैं और रात 9 बजे तक संचालन बंद कर सकते हैं।

लघु और मध्यम आकार की कंपनियों द्वारा संचालित भोजनालय जो रात 8 बजे तक बंद हो जाते हैं और मदिरा नहीं परोसते हैं उन्हें प्रतिदिन 30,000 से 1 लाख येन तक मिलते हैं। जो प्रतिष्ठान रात 9 बजे तक खुले रहने तथा मदिरा परोसने का विकल्प चुनते हैं, उन्हें प्रतिदिन 25,000 से 75,000 येन तक का भुगतान किया जाता है।

अनुदान के लिए पात्र होने हेतु प्रतिष्ठानों का प्रिफ़ैक्चर के संक्रमण जानकारी अधिसूचना प्रणाली के "इबाराकी के अमाबिए-चान" के साथ पंजीकृत होना आवश्यक है।

व्यापार संचालकों को कोरोनावायरस जाँच के नकारात्मक परिणामों तथा टीकाकरण की परवाह किए बिना अतिथियों को प्रति मेज़ चार तक सीमित करने के लिए कहा गया है।

उपरोक्त जानकारी 9 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-13 होक्काइदो

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की तेरहवीं कड़ी में जानते हैं होक्काइदो प्रिफ़ैकचर में किये जा रहे उपायों के बारे में।

होक्काइदो प्रिफ़ैक्चर अर्ध-आपातकालीन उपाय समूचे क्षेत्र में लागू कर रहा है। इसके तहत, वारयस-रोधी उपाय करने के लिए प्रमाणित, जलपान प्रतिष्ठान और काराओके तथा विवाह सभागृहों समेत कारोबारों को दो विकल्प प्रदान किये गए हैं जिनके अंतर्गत या तो वे रात्रि 9 बजे तक खुले रह सकते हैं लेकिन उन्हें मदिरा परोसना 8 बजे तक बंद करना होगा या फिर वे रात्रि 8 बजे तक मदिरा परोसे बिना खुले रह सकते हैं। अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से रात्रि 8 बजे तक कारोबार बंद करने और मदिरा न परोसने का अनुरोध किया गया है।

सभी प्रतिष्ठानों से कहा गया है कि वे एक मेज़ पर 4 ग्राहकों से अधिक न बैठाएँ।

काराओके सेवा प्रदान करने वाले कारोबारों को भीड़ न बढ़ाने और वायु-संचार सुनिश्चित करने जैसे संक्रमण-रोधी क़दम उठाने के लिए कहा गया है।

मदिरा परोसते हुए रात्रि 9 बजे तक कारोबार बंद करने वाले छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों को उनके व्यापार के पैमाने के आधार पर 25 हज़ार से 75 हज़ार येन तक का दैनिक अनुदान दिया जाएगा। रात्रि 8 बजे बंद होने वाले और मदिरा न परोसने वाले अप्रमाणित प्रतिष्ठानों को 30 हज़ार से 1 लाख येन तक का दैनिक अनुदान दिया जाएगा।

बड़े प्रतिष्ठान चाहे प्रमाणित हों या न हों, उन्हें उनकी बिक्री में गिरावट को देखते हुए 2 लाख येन तक का दैनिक भुगतान किया जाएगा।

दर्शकों द्वारा शोरगुल की संभावना वाले सम्मेलनों में प्रतिभागियों की अधिकतम संख्या 5,000 लोगों तक या स्थल की आधी क्षमता तक, दोनों में से जो भी कम हो, तय की गयी है। वहीं बिना शोरगुल वाले सम्मेलन में प्रतिभागिता स्थल की पूरी क्षमता तक या 5,000 लोगों तक, दोनों में से जो भी कम हो, तय की गयी है।

दर्शकों की उपस्थिति में आयोजित सम्मेलनों को रात्रि 9 बजे तक बंद करने के लिए कहा जा रहा है। आयोजकों से रात्रि 8 बजे के बाद मदिरा न परोसने का आह्वान भी किया जा रहा है।

यह जानकारी 8 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-12 फ़ुकुओका

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की बारहवीं कड़ी में फ़ुकुओका प्रिफ़ैक्चर में उठाये जा रहे क़दमों पर एक नज़र।

फ़ुकुओका प्रिफ़ैक्चर सरकार ने अर्ध-आपातकाल लागू होने के साथ ही पूरे क्षेत्र में 24 जनवरी से प्रभावी कड़े प्रतिबन्धों को भी जारी रखा है।

प्रिफ़ैक्चर सरकार ने भोजनालयों से एक टेबल पर केवल चार लोगों को बैठाने की व्यवस्था बरक़रार रखने का आग्रह किया है।

वायरस-रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित रेस्त्राँ और मदिरालयों को दो विकल्प दिये गए हैं, या तो वे मदिरा परोस सकते हैं और रात 9 बजे तक संचालन बन्द कर सकते हैं, अथवा बिना मदिरा परोसे रात 8 बजे तक अपना संचालन बंद करें।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से आग्रह किया गया है कि वह न ही मदिरा परोसें और न ही रात 8 बजे बाद रेस्त्राँ संचालित करें।

रात 9 बजे संचालन बन्द करने वाले लघु और मध्यम आकार के प्रमाणित प्रतिष्ठानों को उनकी बिक्री के आधार पर प्रत्येक रेस्त्राँ के लिए प्रतिदिन 25,000 से 75,000 येन तक का मुआवज़ा दिया जाएगा।

मदिरा नहीं परोसने और रात आठ बजे तक रेस्त्राँ बन्द करनेवाले प्रमाणित और अप्रमाणित प्रतिष्ठानों के संचालकों को प्रतिदिन 30,000 से 1,00,000 येन का मुआवज़ा दिया जाएगा।

बड़े प्रतिष्ठानों को उनकी बिक्री में हो रहे नुक़सान के आधार पर प्रतिदिन 2,00,000 येन तक दिये जाएँगें।


सैद्धान्तिक तौर पर बड़े आयोजनों में मेहमानों की अधिकतम सीमा 5,000 सीमित की गयी है। लेकिन यह सीमा 20,000 तक बढ़ायी जा सकती है बशर्ते आयोजक वायरस-रोधी योजना प्रिफ़ैक्चर सरकार को पेश कर उनसे कार्यक्रम आयोजन करने की पूर्व अनुमति लें।

नागरिकों से प्रिफ़ैक्चर के अंदर-बाहर अनावश्यक यात्रायें टालने के लिए आग्रह किया गया है।

उपरोक्त जानकारी 7 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-11 क्योतो

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की ग्यारहवीं कड़ी में क्योतो प्रिफ़ैक्चर में लिये जा रहे क़दमों पर एक नज़र।

संपूर्ण क्योतो प्रिफ़ैक्चर में अर्ध आपातकाल लागू है। प्रिफ़ैक्चर सरकार ने रेस्त्राँ और खान-पान के अन्य स्थलों से कार्यावधि कम करने का आग्रह किया है।

वायरस-रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित संस्थानों को दो विकल्प दिये गए हैं। पहला यह कि वे रात 8:30 बजे तक मदिरा परोस सकते हैं और रात 9 बजे प्रतिष्ठान बन्द करें, या फिर मदिरा नहीं बेचेंगे और रात 8 बजे तक रेस्त्राँ बन्द करें।

सरकारी अनुरोध का पालन कर रहे प्रतिष्ठानों को उनकी पिछली बिक्री के रिकार्ड और मदिरा परोसने या न परोसने के आधार पर मुआवज़ा दिया जाएगा।

रात्रि 9 बजे काम बन्द करनेवाले लघु या मध्यम आकार के प्रतिष्ठानों को 75,000 येन प्रतिदिन तक मुआवज़ा दिया जाएगा। मदिरा परोसे बग़ैर रात 8 बजे रेस्त्राँ बन्द करने वाले, साथ ही सरकारी आग्रह का पालन कर रहे अप्रमाणित रेस्त्राँ और मदिरालयों को भी उनकी बिक्री के आधार पर 1,00,000 येन प्रतिदिन तक का मुआवज़ा दिया जाएगा।

रेस्त्राँ में हर टेबल पर केवल चार लोग बैठ सकते हैं। वहीं वायरस रोधी उपाय प्रमाणित प्रतिष्ठानों में एक टेबल पर पाँच या उससे अधिक लोग एकसाथ बैठ सकते हैं। लेकिन सभी मेहमानों को कोरोनावायरस जाँच में वायरस रहित होने का प्रमाण दिखाना आवश्यक है।

उपरोक्त जानकारी 4 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किए जा रहे हैं? / भाग-10 ह्योगो

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की दसवीं कड़ी में ह्योगो प्रिफ़ैक्चर में लिये जा रहे क़दमों पर एक नज़र।

समूचे ह्योगो प्रिफ़ैक्चर में अर्ध-आपातकालीन उपाय लागू किये गए हैं। रेस्त्राँ और मदिरालयों से संचालन समय कम करने के लिए कहा गया है।

वायरस-रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित प्रतिष्ठानों को दो विकल्प दिये गए हैं। वे रात 8:30 बजे तक मदिरा परोसना जारी रख सकते हैं और रात 9:00 बजे अपना प्रतिष्ठान बंद कर सकते हैं या वे मदिरा परोसने से परहेज कर रात 8:00 बजे अपना प्रतिष्ठान बंद कर सकते हैं।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से रात 8:00 बजे तक अपना प्रतिष्ठान बंद करने और मदिरा न परोसने का आग्रह किया गया है।

अगर वे इस अनुरोध का पालन करते हैं तो मदिरा परोसने वाले और रात 9:00 बजे तक बंद कर दिये जाने वाले प्रमाणित प्रतिष्ठान अपनी बिक्री के आधार पर प्रतिदिन 25,000 से 75,000 येन प्राप्त कर सकते हैं।

मदिरा न परोसने वाले प्रमाणित या अप्रमाणित भोजनालय जो रात 8:00 बजे अपना प्रतिष्ठान बंद कर देते हैं वे प्रति प्रतिष्ठान प्रतिदिन 30,000 से 1,00,000 येन तक प्राप्त कर सकते हैं।

उपरोक्त जानकारी 3 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-9 ओसाका

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की नवीं कड़ी में बात हो रही है ओसाका की।

समूचे ओसाका प्रिफ़ैक्चर में अर्ध-आपातकाल उपाय लागू हैं। प्रिफ़ैक्चर सरकार वायरस-रोधी उपायों का पालन करने के प्रमाणित रेस्त्राँ और मदिरालयों को 2 विकल्पों में से एक चुनने की छूट देती है। ये प्रतिष्ठान रात 8:30 बजे तक मदिरा परोसना जारी रख कर 9:00 बजे तक खुले रह सकते हैं या फिर ये मदिरालय न परोसकर रात 8:00 बजे तक खुले रह सकते हैं। दूसरे विकल्प में अनुदान राशि अधिक है।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से मदिरा न परोसने तथा रात 8 बजे तक बंद करने का आह्वान किया गया है।

प्रमाणित प्रतिष्ठानों में एक मेज़ पर अधिकतम 4 लोगों के समूह को बैठने की अनुमति है। पाँच या उससे अधिक लोग भी एक मेज़ को साझा कर सकते हैं यदि वे सभी कोरोनावायरस मुक्त होने के जाँच प्रमाण उपलब्ध करवा सकें।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से पाँच या उससे अधिक लोगों के समूह को अस्वीकारने का आह्वान किया गया है।

बड़े स्तर के कार्यक्रमों के लिए वायरस-रोधी उपायों की योजना अग्रिम रूप से जमा करने वाले आयोजकों को प्रति कार्यक्रम अधिकतम 20,000 लोगों को बुलाने की अनुमति है। 20,000 से अधिक प्रतिभागियों की अनुमति हासिल करने के लिए सभी प्रतिभागियों के कोरोनावायरस मुक्त होने के जाँच परिणाम उपलब्ध करवाने होंगे।

उपरोक्त जानकारी 2 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-8 कुमामोतो और मियाज़ाकि

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की आठवीं कड़ी में जानते हैं कुमामोतो और मियाज़ाकि प्रिफ़ैक्चरों में किये जा रहे उपायों के बारे में।

कुमामोतो प्रिफ़ैक्चर अर्ध-आपातकालीन उपाय समूचे क्षेत्र में लागू कर रहा है। इसके तहत, जलपान के प्रमाणित प्रतिष्ठानों को दो विकल्प प्रदान किये गए हैं जिनके अंतर्गत या तो वे रात्रि 9 बजे तक खुले रह सकते हैं लेकिन उन्हें मदिरा परोसना 8 बजे तक बंद करना होगा या फिर वे रात्रि 8 बजे तक मदिरा परोसे बिना खुले रह सकते हैं। दूसरा विकल्प चुनने वाले व्यवसायों को अधिक वित्तीय सहायता प्राप्त होगी। अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से रात्रि 8 बजे तक कारोबार बंद करने और मदिरा न परोसने का अनुरोध किया गया है। उपरोक्त अनुरोधों का अनुपालन करने वाले सभी प्रतिष्ठानों को वित्तीय समर्थन दिया जा रहा है। सभी प्रतिष्ठानों से कहा गया है कि वे एक मेज़ पर 4 ग्राहकों से अधिक को न बैठाएँ।

इस बीच, प्रमाणित प्रतिष्ठानों में एक मेज़ पर बैठने वालों की कोई ऊपरी सीमा नहीं रहेगी बशर्ते सभी प्रतिभागी असंक्रमित पाये जाएँ।

समूचे मियाज़ाकि प्रिफ़ैक्चर में कोरोनावायरस-रोधी उपाय लागू हैं। जलपान के सभी प्रतिष्ठानों से रात्रि 8 बजे तक बंद करने और दिन भर मदिरा परोसने से परहेज़ करने का आह्वान किया गया है। इन अनुरोधों का अनुपालन करने वाले कारोबार, अपने व्यापार के पैमाने के आधार पर 30 हज़ार से 2 लाख येन तक का दैनिक अनुदान पा सकेंगे।

यह जानकारी 1 फ़रवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग-7 कागावा और नागासाकि

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की सातवीं कड़ी में कागावा और नागासाकि प्रिफ़ैक्चरों में लिये जा रहे क़दमों पर एक नज़र।

कागावा प्रिफ़ैक्चर ने नाओशिमा शहर के अलावा पूरे क्षेत्र यानि सभी 16 नगरपालिकाओं में वायरस-रोधी उपाय लागू कर दिये हैं।

अप्रमाणित रेस्त्राँ और मदिरालयों से मदिरा न परोसने और रात 8:00 बजे तक काम बन्द करने का आग्रह किया गया है। नगरपालिका द्वारा वायरस-रोधी उपाय प्रमाणित रेस्त्राँ और मदिरालयों को दो विकल्प दिये गए हैं। वे रात 8:00 बजे तक मदिरा परोसने के साथ रात 9:00 बजे तक खुले रह सकते हैं या फिर बगैर मदिरा परोसे रात 8:00 बजे तक खुले रह सकते हैं। इस आग्रह का पालन करने वाले कारोबारों को उनके आकार के आधार पर आर्थिक सहायता दी जाएगी।

नागासाकि प्रिफ़ैक्चर सरकार ने संपूर्ण क्षेत्र में अर्ध-आपातकाल लागू किया है।

नागासाकि प्रिफ़ैक्चर ने शहरों के रेस्त्राँ और मदिरालयों से अनुरोध किया है कि वे दिन भर मदिरा न परोसें और रात 8:00 बजे संस्थान बंद कर दें। आग्रह का पालन करने वाले लघु और मध्यम आकार के कारोबारों को उनकी आमदनी के आधार पर 30,000 से 1,00,000 येन प्रतिदिन मुआवज़ा दिया जाएगा। बड़े रेस्त्राँ और मदिरालयों को इस आग्रह का पालन करने से हुए नुक़सान की 40 प्रतिशत भरपाई की जाएगी। हालाँकि मुआवज़े की इस राशि की अधिकतम सीमा 2,00,000 येन प्रतिदिन रखी गयी है।

उपरोक्त जानकारी 31 जनवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग - 6 गिफ़ु और मिए

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की छठी कड़ी में गिफ़ु और मिए प्रिफ़ैक्चरों में लिये जा रहे क़दमों पर एक नज़र।

गिफ़ु प्रिफ़ैक्चर सरकार ने अपनी सभी 42 नगरपालिकाओं में वायरस-रोधी उपाय प्रमाणित तथा अप्रमाणित रेस्त्राँ और मदिरालयों से रात 8 बजे तक संस्थान बन्द करने और मदिरा नहीं परोसने का आग्रह किया है।

इस अनुरोध का पालन करने वाले रेस्त्राँ और मदिरालयों को प्रतिदिन 30,000 से 2,00,000 येन तक दिये जाएँगे।

सामाजिक आयोजनों में ढील देने के लिए कोविड-19 टीकाकरण रिकॉर्ड और जाँच में कोरोना मुक्त पाये जाने जैसे केन्द्र सरकार के उपायों का पालन नहीं किया जा रहा है।

मिए प्रिफ़ैक्चर के ओवासे और कुमानो शहर समेत दक्षिण की 5 नगरपालिकाओं को छोड़कर सभी नगरपालिकाओं में वायरस-रोधी उपाय लागू किये जाएँगे।

वायरस-रोधी उपाय प्रमाणित रेस्त्राँ और मदिरालयों को दो विकल्प दिये गए हैं। पहला, मदिरा परोस सकते हैं और रात 9 बजे तक संस्थान बन्द किये जाएँ। दूसरा, मदिरा परोसे बग़ैर रात 8 बजे तक संस्थान खुले रह सकते हैं। अप्रमाणित संस्थान न मदिरा परोस सकते हैं और न ही रात 8 बजे के बाद कार्य कर सकते हैं।

सरकारी आग्रह का पालन करने वाले संस्थानों को उनके आकार के आधार पर मुआवज़ा दिया जाएगा। मदिरा न परोसने और रात 8 बजे तक संस्थान बन्द करने वाले संस्थानों को अधिक मुआवज़ा दिया जाएगा।

उपरोक्त जानकारी 28 जनवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग - 5 आइचि

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की पाँचवी कड़ी में आइचि प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों के बारे में जानेंगे।

आइचि प्रिफ़ैक्चर में तोएइ कस्बा और तोयोने ग्राम को छोड़कर 52 नगर पालिकाओं में संक्रमण-रोधी उपाय लागू किये गए हैं।

यहाँ खाने-पीने के केवल ऐसे प्रतिष्ठान जो वायरस-रोधी उपाय अपनाने के लिए प्रमाणित हैं, रात 8 बजे तक मदिरा परोसे बिना या मदिरापान के लिए खुले रह सकते हैं और उन्हें रात्रि 9 बजे अपने प्रतिष्ठान बंद करने होंगे।

मदिरा न परोसने वाले प्रतिष्ठानों के लिए बड़ी अनुवृत्ति दी गयी है।

अप्रमाणित प्रतिष्ठान जो मदिरा नहीं परोस रहे हैं उन्हें रात्रि 8 बजे तक अपने प्रतिष्ठान बंद करने के लिए कहा गया है।

सभी प्रतिष्ठानों में साथ जलपान करने वाले लोगों के लिए प्रति समूह चार लोगों की संख्या सीमित कर दी गयी है।

खेल आयोजनों सहित बड़े पैमाने के अन्य आयोजनों के लिए यदि उनके आयोजकों की संक्रमण-रोधी उपायों की पुष्टि प्रिफ़ैक्चर सरकार द्वारा की गयी हो तो वहाँ 20,000 दर्शकों तक की अनुमति है। अन्य कार्यक्रमों के लिए उपस्थिति सीमा 5,000 निर्धारित की गई है। लेकिन उन आयोजनों में जहाँ दर्शकों से जयकारे लगाने की उम्मीद की जाती है, वहाँ यह सीमा उपस्थिति स्थल की क्षमता के 50 प्रतिशत तक ही सीमित है।

स्कूलों को अप्रत्याशित या आकस्मिक समयों पर विचार करने अथवा छात्रों को वैकल्पिक दिनों या घंटों में कक्षाओं में भाग लेने पर ध्यान देने के साथ-साथ ऑनलाइन कक्षाएँ प्रदान करने के लिए कहा गया है।

पाठ्येतर गतिविधियों के लिए विद्यालयों को अभ्यास मैच आयोजित करने से बचने के लिए कहा गया है।

उनसे स्कूल भ्रमण सहित विद्यालय के बाहर के अन्य कार्यक्रमों में सावधानी अपनाने का भी आग्रह किया गया है।

उपरोक्त जानकारी 27 जनवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग - 4 गुम्मा और नीगाता

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की चौथी कड़ी में हम गुम्मा और नीगाता प्रिफ़ैक्चर पर नज़र डालेंगे।

गुम्मा प्रिफ़ैक्चर ने पूरे क्षेत्र में अर्ध-आपातकालीन उपाय लागू किये हैं। यह खाने और पीने के प्रमाणित प्रतिष्ठानों को दो विकल्पों में से एक चुनने की अनुमति देता है। एक विकल्प सुबह 5 बजे से रात 8 बजे तक बिना मदिरा परोसे खुले रहना है। दूसरा रात 9 बजे तक प्रतिष्ठानों को बंद करना और रात 8 बजे तक मदिरा परोसना बंद करना है। अप्रमाणित प्रतिष्ठानों को बिना मदिरा परोसे रात 8 बजे तक बंद करने के लिए कहा गया है।

सभी प्रतिष्ठानों को ग्राहकों की संख्या को प्रति टेबल चार तक सीमित करने के लिए कहा गया है। इन निवेदनों का अनुपालन करने वाले सभी प्रतिष्ठानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी। छोटे प्रमाणित व्यवसायों को उनकी बिक्री के अनुसार प्रति दिन 25,000 से 100,000 येन का भुगतान किया जाएगा। छोटे और अप्रमाणित प्रतिष्ठानों को 30,000 से 100,000 येन तक दिया जाएगा। बड़े व्यवसायों को 200,000 येन तक का भुगतान किया जाएगा।

नीगाता प्रिफ़ैक्चर में जब तक अर्ध-आपातकालीन उपाय लागू हैं, प्रिफ़ैक्चर में सभी खाने-पीने के प्रतिष्ठानों को रात 8 बजे तक बंद करने तथा मदिरा परोसने से परहेज़ करने के लिए कहा गया है। प्रमाणित प्रतिष्ठानों को बंद होने से एक घंटा पहले यानि रात 8 बजे तक मदिरा परोसने की अनुमति है या बिना मदिरा परोसे रात 8 बजे तक खुले रहने की अनुमति है। सभी प्रतिष्ठानों को ग्राहकों की संख्या प्रति टेबल चार तक सीमित करने के लिए भी कहा गया है।

उपरोक्त जानकारी 26 जनवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग - 3 कानागावा

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला की तीसरी कड़ी में जानते हैं कानागावा प्रिफ़ैक्चर में किये जा रहे उपायों के बारे में।

समूचे कानागावा प्रिफ़ैक्चर में अर्ध-आपातकाल लागू है।

इसके तहत, जलपान के प्रमाणित प्रतिष्ठानों को दो विकल्प प्रदान किये गए हैं जिनके अंतर्गत या तो वे रात्रि 9 बजे तक खुले रह सकते हैं लेकिन उन्हें मदिरा परोसना 8 बजे तक बंद करना होगा या फिर वे रात्रि 8 बजे तक मदिरा परोसे बिना खुले रह सकते हैं।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों से रात्रि 8 बजे तक कारोबार बंद करने और मदिरा न परोसने का अनुरोध किया गया है।

सभी प्रतिष्ठानों से कहा गया है कि वे एक मेज़ पर 4 ग्राहकों से अधिक को न बैठाएँ।

उपरोक्त अनुरोधों का अनुपालन करने वाले सभी प्रतिष्ठानों को वित्तीय समर्थन दिया जा रहा है। अगर वे रात 9 बजे तक खुले रहते हैं, तो उन्हें उनकी बिक्री के अनुसार 25,000 से 75,000 येन का भुगतान किया जा रहा है। अगर वे रात 8 बजे तक खुले रहते हैं, तो उन्हें 30,000 से 1,00,000 येन तक दिये जा रहे हैं।

प्रमाणित प्रतिष्ठानों में विवाह के प्रीतिभोज में एक मेज़ पर बैठने वालों की कोई ऊपरी सीमा नहीं रहेगी बशर्ते समारोह के दिन सभी प्रतिभागी असंक्रमित पाये जाएँ।

बड़े पैमाने पर होने वाले आयोजनों की ऊपरी सीमा 20,000 निर्धारित की गयी है। लेकिन समारोह वाले दिन उपस्थित लोगों के असंक्रमित पाये जाने पर यह सीमा हटा ली जाएगी।

उपरोक्त जानकारी 25 जनवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग - 2 साइतामा और चिबा

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला के दूसरे अंक में साइतामा और चिबा प्रिफ़ैक्चरों में उठाये जा रहे कदमों पर एक नज़र।

समूचे साइतामा प्रिफ़ैक्चर में अर्ध-आपातकाल लागू किया गया है। वायरस-रोधी उपाय के प्रमाणित और अप्रमाणित, दोनों ही तरह के मदिरालयों और रेस्त्राँ से रात्रि 8 बजे प्रतिष्ठान बन्द करने और मदिरा नहीं परोसने का आग्रह किया गया है।

उन प्रतिष्ठानों को रात 9 बजे तक खुले रहने की अनुमति है जिन्होंने कोविड-19 टीकाकरण रिकॉर्ड और जाँच परिणाम की नेगेटिव रिपोर्ट के आधार पर सरकार के नियंत्रण में ढील कार्यक्रम के लिए पहले से पंजीयन करवाया था।

प्रतिष्ठान द्वारा ग्राहकों के टीकाकरण रिकार्ड और जाँच परिणाम में कोरोना-मुक्त रिपोर्ट की पुष्टि करने पर एक समूह में बैठने वाले लोगों की संख्या पर भी कोई सीमा नहीं रहेगी। साथ ही सुबह 11 से रात 8.30 बजे तक यहाँ मदिरा भी परोसी जा सकेगी।

चिबा प्रिफ़ैक्चर प्रशासन वायरस-रोधी नियमन प्रमाणित रेस्त्राँ और मदिरालयों को मदिरा परोसने से नहीं रोक रहा है। लेकिन उनसे रात 9 बजे तक प्रतिष्ठान बन्द करने का अनुरोध किया गया है। इस आग्रह का अनुपालन करने वाले प्रतिष्ठान आर्थिक सहायता के पात्र हैं।

अप्रमाणित प्रतिष्ठान न मदिरा परोस सकते हैं और न ही रात 8 बजे बाद खुले रह सकते हैं। यह आग्रह स्वीकार करने के बावजूद उन्हें किसी तरह का मुआवज़ा नहीं दिया जाएगा।

सभी प्रतिष्ठानों में ग्राहकों की संख्या प्रति समूह 4 ही सीमित रखी गयी है। लेकिन वैवाहिक समारोह के दौरान एक मेज़ पर 5 से अधिक मेहमान बैठ सकते हैं, परंतु सभी आगंतुकों का वायरस जाँच में नेगेटिव परिणाम मिलना अनिवार्य है। प्रिफ़ैक्चर इस तरह के आयोजनों के लिए पूर्व जानकारी देने का अनुरोध कर रहा है।

उपरोक्त जानकारी 24 जनवरी तक की है।

प्रश्न. कोरोनावायरस अर्ध-आपातकाल के अंतर्गत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में किस प्रकार के वायरस-रोधी उपाय किये जा रहे हैं? / भाग - 1 तोक्यो

उत्तर. जापान सरकार ने कोरोनावायरस संक्रमण में विस्फोटक वृद्धि को रोकने के लिए तोक्यो और पूरे जापान के कई अन्य प्रिफ़ैक्चरों में अर्ध-आपातकाल लगा दिया है। इसके तहत प्रत्येक प्रिफ़ैक्चर में लागू विशिष्ट उपायों से जुड़ी शृंखला के पहले अंक में तोक्यो में उठाये जा रहे क़दमों पर एक नज़र।

तोक्यो महानगर सरकार ने मदिरालयों और रेस्त्राँ से 13 फ़रवरी तक कार्यावधि में कटौती के लिए कहा है।

जिन रेस्त्राँ और मदिरालयों को वायरस-रोधी उपाय अपनाने का प्रमाण दिया गया है वे मदिरा परोसने या न परोसने के साथ अपना संचालन समय चुन सकते हैं। मदिरा परोसने वाले संस्थान सुबह 5 बजे से लेकर रात्रि 9 बजे तक खुले रह सकते हैं और रात 8 बजे तक 9 घंटों के लिए मदिरा परोस सकते हैं। जिन रेस्त्राँ में मदिरा नहीं परोसी जाती है, उनसे रात 8 बजे रेस्त्राँ बंद करने का आग्रह किया गया है।

रेस्त्राँ या मदिरालय में एक समूह में 4 से ज्यादा लोग नहीं बैठ सकते हैं। किसी समूह में 5 से ज्यादा लोग होने पर सभी को कोरोना जाँच में संक्रमित नहीं पाये जाने का प्रमाणपत्र देना होगा।

अप्रमाणित प्रतिष्ठानों को रात 8 बजे परिसर बन्द करने के लिए कहा गया है और वे मदिरा भी नहीं परोस सकते हैं। ग्राहकों की संख्या भी प्रति समूह 4 सीमित कर दी गयी है।

जिन प्रतिष्ठानों में मदिरा परोसी जा सकती है लेकिन केवल रात 9 बजे तक काम कर सकते हैं, उन्हें नुक़सान की भरपाई के लिए सरकार की ओर से प्रतिदिन 25,000 से 2,00,000 येन दिये जाएँगे।

वहीं मदिरा न परोसने और रात 8 बजे रेस्त्राँ बंद करने पर सरकार प्रतिदिन 30,000 से 2,00,000 येन देकर उनके क्षतिपूर्ति करेगी।

भोजनालयों के अलावा अन्य प्रतिष्ठानों को काम का समय कम करने के लिए नहीं कहा गया है, लेकिन प्रत्येक उद्योग के लिए निर्धारित विशेष दिशानिर्देशों के अनुपालन का अनुरोध किया गया है।

तोक्यो के निवासियों से अनावश्यक रूप से बाहर नहीं जाने का आग्रह किया जा रहा है। साथ ही लोगों से भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचने और भीड़ के समय बाहर नहीं निकलने के लिए भी कहा जा रहा है। लोगों से कहा जा रहा है कि जिन रेस्त्राँ ने संचालन अवधि नहीं घटायी है, लोग उन जगहों पर जाने से बचें।

उपरोक्त जानकारी 21 जनवरी तक की है।

प्रश्न.386. जापान के कोरोनावायरस संक्रमण के दैनिक मामलों की संख्या 20 हज़ार के ऊपर पहुँच गयी है। उसके ओमिक्रोन प्रकार के बारे में हमें क्या पता चला है? / अंक-4 टीकाकरण इस पर कितना प्रभावी है?

उत्तर.386. ओमिक्रोन का अप्रत्याशित दर से फैलना जारी है। इस शृंखला में, वायरस के इस प्रकार की संचरण क्षमता, उससे गंभीर बीमारी होने के जोखिम और चिकित्सा प्रणाली पर संभावित बोझ जैसी जानकारी प्रदान जी जाएगी। शृंखला की इस की चौथी कड़ी में जानेंगे कि ओमिक्रोन पर टीके कितने प्रभावी हैं।

कोरोनावायरस संक्रमण के ऐसे मामले सामने आये हैं जहाँ पूर्ण टीकाकृत लोग भी ओमिक्रोन से संक्रमित हो गये हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 जनवरी को जारी अपनी साप्ताहिक नवीनतम जानकारी में चेतावनी दी है कि संक्रमण दुबारा होने का ख़तरा बढ़ गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि ओमिक्रोन से संक्रमण के मामले में टीका, संक्रमण और रोगकारक बीमारी के साथ गंभीर लक्षणों से बचाव की कम सुरक्षा प्रदान करता है।

ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने 31 दिसम्बर को अपने विवरण में कहा था कि एमआरएनए टीकों की दो ख़ुराक जैसे कि फ़ाइज़र और मॉडर्ना द्वारा निर्मित टीकों की दो ख़ुराक, रोगकारक ओमिक्रोन संक्रमण को रोकने में 65 से 70 प्रतिशत प्रभावी हैं। टीके की दूसरी ख़ुराक के दो से चार सप्ताह बाद ऐसा देखा गया था तथा टीके की प्रभावशीलता 20 सप्ताह बाद लगभग 10 प्रतिशत तक ही रह जाती है।

आँकड़ों से यह भी पता चलता है कि फ़ाइज़र की दोनों ख़ुराक ले चुके लोगों पर फ़ाइज़र या मॉडर्ना की बूस्टर ख़ुराक दो से चार सप्ताह के बाद रोगकारक संक्रमण को रोकने में 65 से 75 प्रतिशत प्रभावी है। हालाँकि, प्रभावशीलता पाँच से नौ सप्ताह बाद घटकर 55 से 70 प्रतिशत और 10 सप्ताह बाद 40 से 50 प्रतिशत रह गयी।

इस बीच, यह पाया गया कि टीकाकरण गंभीर लक्षणों के विकास और अस्पताल में भर्ती होने के ख़तरे को कम करने में अधिक प्रभावी है। जिन लोगों को फ़ाइज़र, मॉडर्ना या एस्ट्राज़ेनेका के टीके लगे थे, उनके मामले में टीके की दूसरी ख़ुराक के बाद दो से 24 सप्ताह के बीच अस्पताल में भर्ती होने से बचाव में टीके 72 प्रतिशत प्रभावी रहे और 25 सप्ताह के बाद 52 प्रतिशत प्रभावी रह गये। आँकड़ों से पता चलता है कि टीके की दूसरी और बूस्टर ख़ुराक, टीके की आखिरी ख़ुराक के बाद दो सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती होने से बचाव में 88 प्रतिशत प्रभावी है।

उपरोक्त जानकारी 20 जनवरी तक की है।

प्रश्न.385. जापान के कोरोनावायरस संक्रमण के दैनिक मामलों की संख्या 20 हज़ार के ऊपर पहुँच गयी है। उसके ओमिक्रोन प्रकार के बारे में हमें क्या पता चला है? / अंक-3 गंभीर लक्षणों के कम जोखिम के बावजूद सावधान रहने की आवश्यकता (2)

उत्तर.385. कोरोनावायरस का ओमिक्रोन प्रकार अप्रत्याशित गति से फैल रहा है। इस शृंखला में, वायरस के इस प्रकार की संचरण क्षमता, उससे गंभीर बीमारी होने के जोखिम और चिकित्सा प्रणाली पर संभावित बोझ जैसी जानकारी प्रदान जी जाएगी। शृंखला की इस तीसरी कड़ी में हम इस बात पर जानेंगे कि क्या ओमिक्रोन गंभीर रोगों का कारण बनता है या नहीं।

ब्रिटेन में स्वास्थ्य अधिकारियों ने 31 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट में कहा कि ओमिक्रोन से संक्रमित लोगों में अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम डेल्टा प्रकार के मुक़ाबले लगभग एक तिहाई था। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों के दूसरे टीकाकरण के बाद 14 दिन या उससे अधिक समय हो चुका है उनके अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम टीका न लगवाने वाले लोगों से 65 प्रतिशत कम होता है। जिन लोगों ने 14 दिन से पहले अपनी तीसरी ख़ुराक ले ली थी उनमें अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम कथित रूप से 81 प्रतिशत कम था।

लेकिन हमें आँकड़ों की व्याख्या करने में सतर्कता बरतनी चाहिए। ब्रिटेन के अधिकारियों ने कहा कि ओमिक्रोन से संक्रमित रोगियों में गंभीर लक्षण विकसित होने से रोकने में बूस्टर ख़ुराक प्रभावी हैं। तथा ब्रिटेन में 10 जनवरी तक 62.3 प्रतिशत आबादी को तीसरी ख़ुराक मिल चुकी थी।

इस बीच जापान में 17 जनवरी तक केवल 1.1 प्रतिशत आबादी को ही बूस्टर ख़ुराक मिली थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संकेत दिया है कि अस्पताल में भर्ती होने के कम जोखिम के बावजूद यह प्रकार प्रत्येक देश की चिकित्सा देखभाल प्रणाली पर अधिक दबाव डाल रहा है। इसका कारण यह है कि मामलों की भारी संख्या गंभीर बीमारी और मृत्यु की संख्या को बढ़ा रही है।

उपरोक्त सूचना 19 जनवरी तक की है।

प्रश्न.384. जापान के कोरोनावायरस संक्रमण के दैनिक मामलों की संख्या 20 हज़ार के ऊपर पहुँच गयी है। उसके ओमिक्रोन प्रकार के बारे में हमें क्या पता चला है? / अंक-2 गंभीर रूप से बीमार होने के कम जोखिम के बावजूद हमें सचेत रहना होगा (1)

उत्तर.384. ओमिक्रोन का अप्रत्याशित दर से फैलना जारी है। इस शृंखला में, वायरस के इस प्रकार की संचरण क्षमता, उससे गंभीर बीमारी होने के जोखिम और चिकित्सा प्रणाली पर संभावित बोझ जैसी जानकारी प्रदान जी जाएगी। शृंखला के इस दूसरे अंक में हम जानेंगे की ओमिक्रोन गंभीर रोग को जन्म देता है या नहीं।

इस बात के प्रमाण बढ़ रहे हैं कि अन्य प्रकारों की तुलना में ओमिक्रोन प्रकार कम गंभीर है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ ने 11 जनवरी को प्रकाशित अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट में कहा कि ओमिक्रोन प्रकार की प्रमुखता वाली अवधि के दौरान, अस्पताल में भर्ती दर कम रही है और कम रोगी ही गंभीर रूप से बीमार हुए हैं। 4 जनवरी को, डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने कहा कि अन्य प्रकारों की तुलना में, ओमिक्रोन द्वारा नाक और गले सहित श्वसन के ऊपरी पथ को प्रभावित करने की संभावना अधिक है, लेकिन फेफड़ों तक पहुँचने और गंभीर स्थिति पैदा करने की संभावना कम है। लेकिन अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इन विचारों की पुष्टि करने के लिए और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।

जापान के ओकिनावा में संकलित प्रारंभिक डाटा कोरोनावायरस के विभिन्न प्रकारों के चलते होने वाली बीमारी की गंभीरता के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

अधिकारियों ने प्रिफ़ैक्चर में कोविड-19 रोगियों पर उक्त सर्वेक्षण तब किया था जब महामारी के दौरान अलग-अलग समय पर मामलों की संख्या 650 तक पहुँच गयी थी।

उन्होंने पाया कि कोरोनावायरस के मूल प्रकार की प्रमुखता के दौरान पिछले साल 1 अप्रैल तक 84.8 प्रतिशत रोगियों में हल्के या कोई लक्षण नहीं थे तथा 0.6 प्रतिशत में गंभीर लक्षण थे।

18 जुलाई तक, अल्फ़ा प्रभाव की प्रमुखता के दौरान, 72.8 प्रतिशत रोगियों में हल्के या कोई लक्षण दिखायी नहीं दिये जबकि 0.9 प्रतिशत गंभीर स्थिति में थे।

इस साल 4 जनवरी को, जब ओमिक्रोन प्रकार प्रमुख रहा है तब 92.3 प्रतिशत रोगी हल्के लक्षणों वाले या लक्षण रहित थे। उनमें से किसी की भी हालत गंभीर नहीं थी।

लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वर्तमान में, ओकिनावा में अधिकांश रोगी युवा हैं और यदि संक्रमण बुज़ुर्गों में फैलता है तो गंभीर मामलों की संख्या बढ़ सकती है।

उपरोक्त जानकारी 18 जनवरी तक की है।

प्रश्न.383. जापान के कोरोनावायरस संक्रमण के दैनिक मामलों की संख्या 20 हज़ार के ऊपर पहुँच गयी है। उसके ओमिक्रोन प्रकार के बारे में हमें क्या पता चला है? / अंक-1 में जानते हैं डब्ल्यूएचओ ने ओमिक्रोन प्रकार के बारे में क्या कहा है?

उत्तर.383. ओमिक्रोन का अप्रत्याशित दर से फैलना जारी है। इस नयी शृंखला में, वायरस के इस प्रकार की संचरण क्षमता, उससे गंभीर बीमारी होने के जोखिम और चिकित्सा प्रणाली पर संभावित बोझ जैसी जानकारी प्रदान जी जाएगी। शृंखला के पहले अंक में बता रहे हैं ओमिक्रोन की संक्रामक गति के बारे में।

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ ने 11 जनवरी को जारी साप्ताहिक रिपोर्ट में ओमिक्रोन प्रकार की बढ़ती संक्रामकता बारे में जानकारी दी है।

रिपोर्ट में दिसम्बर 2021 को डेनमार्क में हुए एक शोध का उल्लेख किया गया है जिसके अनुसार घर-परिवार में दूसरे क्रम की संक्रामक दर जहाँ डेल्टा प्रकार में 21 प्रतिशत थी उसकी तुलना में ओमिक्रोन में संक्रामक दर 31 प्रतिशत है।

अमरीका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र यानि सीडीसी के अनुसार डेल्टा प्रकार की तुलना में ओमिक्रोन की संक्रामकता दर तीन गुणा अधिक है।

अमरीका और यूरोपीय देशों में ओमिक्रोन प्रकार ने डेल्टा प्रकार की जगह ले ली है और अब कोरोनावायरस का यह प्रकार हावी हो रहा है।

ब्रिटेन में 30 दिसम्बर 2021 तक इंग्लैंड के विभिन्न हिस्सों में मिले कोरोनावायरस के नये मामलों में 95 प्रतिशत ओमिक्रोन प्रकार के थे।

सीडीसी ने बताया कि अमरीका में 8 जनवरी तक मिले नये मामलों में 98.3 प्रतिशत में ओमिक्रोन प्रकार के थे, जिससे स्पष्ट होता है कि अब यह मुख्य प्रकार बन चुका है और इसने कोरोनावायरस के सभी प्रकारों की जगह ले ली है।

उपरोक्त जानकारी 17 जनवरी तक की है।

प्रश्न.382. कोरोनावायरस संक्रमण का पता कैसे लगाएँ / भाग - 4 एंटीजन टेस्ट किट कैसे काम करता है?

उत्तर.382. जापान में कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है। शीत ऋतु में सर्दी ज़ुकाम अकसर होता रहता है। बुखार के लक्षण दिखायी देने पर लोग यह सोचकर चिंतित हो सकते हैं कि कहीं उन्हें कोविड-19 तो नहीं हो गया। इस शृंखला की चौथी कड़ी में जानते हैं कि संक्रमण के लक्षण उभरने पर एंटीजन टेस्ट किट का उपयोग कब और कैसे किया जाता है।

विशेषज्ञों कहते हैं कि रात्रि के समय जब संक्रमण के लक्षण दिखाई दें या फिर जब चिकित्स्कीय परामर्श लेने के विषय में मन में संशय हो तब दवाई की दुकान पर उपलब्ध एंटीजन टेस्ट किट से जाँच की जा सकती है। लेकिन किसी तरह के लक्षण दिखाई नहीं देने पर एंटीजन टेस्ट किट का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इस स्थिति में यह किट एकदम सही परिणाम नहीं देता है।

संक्रमण के लक्षण दिखाई देने के 9 दिन के भीतर एंटीजन टेस्ट किट से जाँच करने पर परिणाम सटीक मिलते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखा जाए कि यह टेस्ट किट ‘इन विटरो डाइगनोस्टिक’ यानि ‘आइवीडी’ होना चाहिए। विशेषज्ञ कहते हैं कि आकस्मिक आवश्यकता के प्रति तैयार रहने के लिए घर में एक टेस्ट किट अवश्य रखना चाहिए।

साथ ही इस बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि टेस्ट किट कभी-कभी संक्रमण नहीं दिखाता है यानि परिणाम नेगेटिव हो सकता है। लेकिन संक्रमण के लक्षण बने रहने पर डॉक्टर को दिखाना आवश्यक है भले ही टेस्ट किट ने संक्रमण-मुक्त परिणाम दिया हो। कामेदा चिकित्सा केन्द्र के ओत्सुका योशिहितो कहते हैं कि सरकार द्वारा स्वीकृत प्रत्येक टेस्ट किट की कीमत 2,000 जापानी येन से भी कम है यानि लगभग 20 डॉलर है और यह सुगमता से उपलब्ध हैं। वह कहते हैं कि इन्हें घर पर रखना चाहिए लेकिन साथ ही सचेत करते हैं कि वायरस संक्रमण के एक स्तर पर पहुँचने के बाद ही एंटीजन टेस्ट किट सटीक परिणाम देने में सक्षम हैं। शरीर में वायरस का उचित स्तर नहीं होने पर टेस्ट किट का परिणाम ग़लत हो सकता है। ओत्सुका कहते हैं कि लक्षण बने रहने पर या मन में आशंका होने पर चिकित्स्कीय परामर्श अवश्य लें।

उपरोक्त जानकारी 14 जनवरी तक की है।

प्रश्न.381. कोरोनावायरस संक्रमण का पता कैसे लगाएँ / भाग - 3 हल्के लक्षण या लक्षण रहित होने पर क्या करना चाहिए?

उत्तर.381. जापान में सामान्य सर्दी-ज़ुकाम वाले मौसम के बीच कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है। यदि हमें ठंड लगने के लक्षण दिखाई दें और यह जानना चाहते हों कि हम कोविड-19 से संक्रमित तो नहीं है तो ऐसी स्थिति में हमें क्या करना चाहिए? कोरोनावायरस से जुड़ी शृंखला की इस कड़ी में जानेंगे कि हल्के लक्षण या लक्षण विहीनता की स्थिति में क्या करना चाहिए।

केंद्र सरकार ने स्थानीय सरकारों को कुछ क्षेत्रों में “विशेष रूप से संक्रमण-रोधी उपायों की आवश्यकता” के बारे में सूचित किया है जहाँ एक व्यक्ति लक्षण न होने पर भी कोरोनावायरस की नि:शुल्क जाँच करा सकता है। इसके अतिरिक्त, स्थानीय सरकारें टीका न लगा पाने वाले लोगों को तो पहले से ही नि:शुल्क जाँच की सुविधा प्रदान कर रही हैं। हालाँकि ये जाँच उन लोगों के लिए हैं जिनमें कोरोनावायरस संक्रमण के कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं।

- ऐसे मामलों में क्या किया जाए जब किसी व्यक्ति में हल्के लक्षण दिखाई दे रहे हों?

स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने लोगों से आग्रह किया है कि अगर उन्हें हल्का बुख़ार, थकान है या वे किसी भी प्रकार की अस्वस्थता महसूस कर रहे हैं तो वे चिकित्सा सुविधाओं से समर्पक करें।

कामेदा चिकित्सा केन्द्र के ओत्सुका योशिहितो कोरोनावायरस की जाँच पर दिशानिर्देशों का एक प्रारूप तैयार करने वाली विशेषज्ञ समिति के सदस्य हैं। उनके अनुसार जिन लोगों में गले में ख़राश, नाक बहना, बुखार, सिरदर्द या सुस्ती जैसे सर्दी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं उन्हें अपनी जाँच करा लेनी चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 13 जनवरी तक की है।

प्रश्न.380. कोरोनावायरस संक्रमण का पता कैसे लगाएँ / भाग - 2 ओमिक्रोन प्रकार के लक्षण

उत्तर.380. सामान्य सर्दी-ज़ुकाम वाले मौसम के बीच जापान में कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है। यदि हमें सर्दी के हल्के लक्षण हों और हम यह जानना चाहतें हों कि हमें कोविड है या नहीं तो ऐसी स्थिति में हमें क्या करना चाहिए? हम चर्चा कर रहे हैं ओमिक्रोन प्रकार के संक्रमण लक्षणों पर।

स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञों की एक समिति ने 6 जनवरी को एक बैठक की और ओकिनावा प्रिफ़ैक्चर के 50 ऐसे रोगियों पर एक रिपोर्ट की सुनवाई की जिनमें 1 जनवरी तक ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमण मिला था।

रिपोर्ट से पता चलता है कि 72 प्रतिशत रोगियों को 37.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक का बुख़ार हुआ, जबकि 58 प्रतिशत को खाँसी और 50 प्रतिशत को थकान महसूस हुई। रिपोर्ट मे यह भी कहा गया कि 44 प्रतिशत को गले में ख़राश थी, 36 प्रतिशत को जकड़न थी या नाक बह रही थी, 32 प्रतिशत को सिरदर्द और 24 प्रतिशत को जोड़ों का दर्द था। पुष्ट मामलों में से 8 प्रतिशत को मतली या उल्टी हुई, 6 प्रतिशत को साँस लेने में कठिनाई और 2 प्रतिशत को स्वाद या गंध विकार का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार केवल 4 प्रतिशत लोग ही ऐसे थे जिनमें कोई लक्षण नहीं थे।

समिति के अध्यक्ष और राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान के महानिदेशक वाकिता ताकाजि कहते हैं कि ऐसा कहा जाता है कि कोविड -19 रोगियों में अक्सर पाचन संबंधी विकार विकसित होते हैं या स्वाद या गंध विहीनता होती है जबकि ओकिनावा की रिपोर्ट इंगित करती है कि ओमिक्रोन संक्रमण के मामले में ऐसा नहीं है। उनका कहना है कि ओमिक्रोन के लक्षण सामान्य सर्दी के लक्षणों के समान होते हैं।

उपरोक्त जानकारी 12 जनवरी तक की है।

प्रश्न.379. कोरोनावायरस संक्रमण का पता कैसे लगाएँ / भाग - 1 कोविड-19 के आम लक्षण

उत्तर.379. जापान में कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमण तेज़ी से फैल रहा है। शीत ऋतु में सर्दी ज़ुकाम अकसर होता रहता है। बुखार के लक्षण दिखायी देने पर लोग यह सोचकर चिंतित हो सकते हैं कि कहीं उन्हें कोविड-19 तो नहीं हो गया। ऐसी स्थिति में क्या किया जाना चाहिए?

कोविड-19 के लक्षण हर व्यक्ति में भिन्न-भिन्न होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्ल्यूएचओ के अनुसार कोरोनावायरस से संक्रमित होने पर लोगों में बुखार, सूखी खाँसी, थकान और स्वाद या गंध की हानि जैसे आम लक्षण दिखाई देते हैं। कुछ रोगियों को गले में ख़राश, सिरदर्द, दस्त, त्वचा पर लाल चकत्ते पड़ना या हाथ व पैर की उंगलियों में फीकापन आना तथा आँखें लाल होने जैसे लक्षण भी प्रकट हो सकते हैं।

अमरीका के रोग नियंत्रण व रोकथाम केन्द्र के अनुसार, श्वास की तकलीफ़ या श्वसन में कठिनाई, माँसपेशियों या शरीर में दर्द, नाक का जमना या बहना, मतली या उल्टी और ठंड लगना भी इसके लक्षण माने गये हैं।

अब प्रश्न यह है कि ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमण के भी क्या यही लक्षण हैं।

डब्ल्यूएचओ के एक अधिकारी ने 4 जनवरी को कहा कि बढ़ती संख्या में अध्ययनों से पता चला है कि ओमिक्रोन, फेफड़ों को प्रभावित करने वाले और गंभीर निमोनिया का कारण बनने वाले अन्य प्रकारों के विपरीत ऊपरी श्वसन पथ को संक्रमित कर रहा है। उन्होंने इंगित किया कि ओमिक्रोन के कारण होने वाली सूजन मुख्य रूप से नाक और गले में बनी रहती है। इससे पता चलता है कि प्रचलित लक्षण वायरस के भिन्न प्रकारों में भिन्न हो सकते हैं।

यह जानकारी 11 जनवरी तक की है।

प्रश्न.378. तोक्यो में वर्षांत से नववर्ष के आगमन के दौरान कोरोनावायरस संक्रमण का तीव्र प्रसार देखा गया, जिसमें ओमिक्रोन प्रकार का सामुदायिक प्रसार भी शामिल है / अंक 2 - ओमिक्रोन के बढ़ते संक्रमण पर एक रिपोर्ट

उत्तर.378. तोक्यो में वर्षांत से नववर्ष के आरंभ के साथ ही कोरोनावायरस संक्रमण का तीव्र प्रसार हुआ है। माना जा रहा है कि ओमिक्रोन प्रकार के सामुदायिक संक्रमण के मामले भी बढ़ रहे हैं। इस कड़ी में ओमिक्रोन प्रकार के सामुदायिक संक्रमण पर एक रिपोर्ट।

तोक्यो में 16 दिसम्बर को ओमिक्रोन संक्रमण के पहले मामले की पुष्टि हुई थी। इसके दो सप्ताह बाद, 28 दिसम्बर तक ओमिक्रोन के कुल 13 मामलों की पुष्टि हुई। 30 दिसम्बर को ओमिक्रोन मामलों की दैनिक संख्या 9 थी जो 3 जनवरी तक बढ़कर 25 हो गयी।

28 दिसम्बर तक सामुदायिक संक्रमण माना जाने वाला केवल एक मामला था, लेकिन 30 दिसम्बर और 3 जनवरी के कुल मामले मिलाकर इनकी संख्या 12 पहुँच गयी।

तोक्यो महानगर सरकार के अधिकारी ने बताया कि क्रिसमस के बाद ओमिक्रोन प्रकार के मामलों में तीव्र वृद्धि आयी। संभव है कि ओमिक्रोन प्रकार वर्षांत से नववर्ष के दौरान बहुत तेज़ी से फैला।

जहाँ तक चिकित्सा व्यवस्था का सवाल है तो सरकार ने कोरोनावायरस से संक्रमित रोगियों के लिए अस्पतालों में 6,919 बिस्तर सुरक्षित कर लिए हैं। 3 जनवरी तक इन बिस्तरों पर रोगियों की दर 3.5 प्रतिशत थी। महानगर सरकार के विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान स्थिति में अस्पतालों में कोरोनावायरस के मरीज़ों और अन्य सामान्य बीमारियों से पीड़ित रोगियों के उपचार के बीच संतुलन बना हुआ है। लेकिन उन्होंने सचेत किया है कि ओमिक्रोन प्रकार के तेज़ी से फैलने पर अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या कम पड़ सकती है।

उपरोक्त जानकारी 7 जनवरी तक की है।

प्रश्न.377. तोक्यो में वर्षांत से नववर्ष के आगमन के दौरान कोरोनावायरस संक्रमण का तीव्र प्रसार देखा गया, जिसमें ओमिक्रोन प्रकार का सामुदायिक प्रसार भी शामिल है / अंक 1 - संक्रमण प्रसार की गति कितनी तीव्र है?

उत्तर.377. तोक्यो में वर्षांत से नववर्ष के आरम्भ के साथ ही कोरोनावायरस संक्रमण का तीव्र प्रसार हुआ है। माना जा रहा है कि ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमण के सामुदायिक प्रसार के मामले भी बढ़ रहे हैं। इस कड़ी में 29 दिसम्बर से 5 जनवरी तक के समय में संक्रमण की बढ़ती संख्या पर एक नज़र।

तोक्यो में 29 दिसम्बर को संक्रमण के 76 नये मामलों की पुष्टि हुई जिसने लगातार 73 दिनों से मिल रहे नये मामलों की दैनिक संख्या 50 का आँकड़ा पार किया। 30 दिसम्बर को नये संक्रमण की संख्या 64 हुई और 31 दिसंबर को यह संख्या 78 पर पहुँच गयी, जो दिसंबर के लिए सर्वोच्च रही। हर दिन के दैनिक मामले एक सप्ताह पहले के उस दिन के आँकड़े से लगभग दोगुणा थे।

नववर्ष के आरम्भ में संक्रमण की दैनिक संख्या में और वृद्धि देखी गयी। 1 जनवरी को नये मामलों की पुष्ट संख्या 79 थी और 2 जनवरी को 84 हो गयी। 3 जनवरी को 103 मामलों के साथ 8 अक्टूबर, 2021 के बाद पहली बार 100 का आँकड़ा पार हो गया। 5 जनवरी को मामले 390 पर पहुँच गये। तोक्यो महानगर सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि वृद्धि की गति तेज़ होती जा रही है और अधिकारियों को इस संकट के प्रति तैयार किया गया है।

इस अवधि के दौरान, परिवार के सदस्यों में फैले संक्रमण की संख्या विशेष रूप से उल्लेखनीय है। तीन जनवरी तक के छः दिन में संक्रमित हुए 484 लोगों में से 175 यानि 36.2 प्रतिशत लोगों को संक्रमण कैसे हुआ, यह पता था। इनमें से सबसे बड़ी संख्या 101, यानि 57.7 प्रतिशत, परिवारों में फैले मामले थे। 12.0 प्रतिशत मामले कार्यस्थल पर फैले संक्रमण के थे। 9.1 प्रतिशत बाहर खाने वाले लोग थे और 7.4 प्रतिशत लोग विभिन्न सुविधाओं में संक्रमित हुए थे।

उपरोक्त जानकारी 6 जनवरी तक की है।

प्रश्न.376. कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार के बार में हम अब तक क्या जानते हैं / भाग 2 - ओमिक्रोन की गंभीरता के बारे में सचेत रहना होगा

उत्तर.376. इस शृंखला में हमने कोरोनावायरस के हालिया दौर के सबसे चिंताजनक प्रकार, ओमिक्रोन, के बारे में अब तक की प्राप्त जानकारी पर नज़र डाली। इस अंक में हम इसकी गंभीरता पर बात करेंगे।

ऐसा मत है कि ओमिक्रोन प्रकार से संक्रमण के लक्षण उसके पिछले प्रकारों के लक्षणों से कम गंभीर हैं। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ओमिक्रोन की गंभीरता को लेकर सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

यूरोप, अमरीका और दक्षिण कोरिया से प्राप्त ख़बरों के अनुसार ओमिक्रोन से संक्रमित अधिकांश रोगी लक्षण रहित या हल्के लक्षण वाले हैं।

अमरीका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केन्द्रों के अनुसार, “आरंभिक आँकड़े दर्शाते हैं कि ओमिक्रोन, कोरोनावायरस संक्रमण के पूर्व प्रकारों की तुलना में कम गंभीर हो सकता है, हालाँकि, नैदानिक गंभीरता पर विश्वसनीय डाटा सीमित है। भले ही गंभीर परिणामों से जुड़े संक्रमणों का अनुपात पूर्व प्रकारों की तुलना में कम हो लेकिन संक्रमणों की संख्या में संभावित वृद्धि को देखते हुए, गंभीर परिणामों वाले लोगों की संख्या काफ़ी अधिक हो सकती है।”

इसके अलावा, संक्रमण के मामले बढ़ने और गंभीर मामलों व मौतों की संख्या बढ़ने के समय में अंतर रहता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 21 दिसंबर को प्रकाशित अपने साप्ताहिकी में कहा कि ओमिक्रोन की नैदानिक गंभीरता पर मौजूद आँकड़े अब भी सीमित हैं। तत्पश्चात उसने कहा कि, “यूके और दक्षिण अफ़्रीका के अस्पतालों में भर्ती लोगों की संख्या और तेज़ी से बढ़ते मामलों को देखते हुए, स्वास्थ्य तंत्र का चरमरा जाना संभव है।”

यह जानकारी 28 दिसंबर तक की है।

प्रश्न.375. कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार के बारे में हम अब तक क्या जानते हैं / भाग 1 - यह अत्यधिक संक्रामक है

उत्तर.375. कोरोनावायरस का नया प्रकार ओमिक्रोन, हालिया दौर का सबसे चिंताजनक प्रकार है। विश्व भर से मिल रही सूचना के अनुसार कोरोनावायरस के पिछले सभी प्रकारों की तुलना में ओमिक्रोन अत्यधिक संक्रामक है। अमरीका और ब्रिटेन में तेज़ी से फैल रहा ओमिक्रोन प्रकार अब डेल्टा प्रकार की जगह संक्रमण का मुख्य कारण बन चुका है। जापान में भी ओमिक्रोन प्रकार के सामुदायिक संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। इस नयी शृंखला में अब तक ओमिक्रोन के बारे में उपलब्ध जानकारी दी जा रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जिन देशों में ओमिक्रोन प्रकार का सामुदायिक संक्रमण फैल रहा है, वहाँ संक्रमितों की संख्या डेढ़ से 3 दिन में दोगुणी हो रही है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रायसिस ने 20 दिसम्बर को एक समाचार सम्मेलन में कहा कि इसके लगातार प्रमाण मिल रहे हैं कि ओमिक्रोन प्रकार डेल्टा प्रकार से कहीं अधिक तेज़ी से संक्रमण फैला रहा है। उन्होंने इस बात की संभावना भी व्यक्त की कि जिन लोगों को टीके लग चुके हैं या जो कोविड-19 बीमारी से ठीक हुए, वे ठीक होने के बाद भी दुबारा संक्रमित हो सकते हैं।

उपरोक्त जानकारी 27 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न.374. बूस्टर ख़ुराक और ओमिक्रोन प्रकार / अंक 7 - बूस्टर टीकों पर हुए अध्ययन से वैज्ञानिकों को क्या जानकारी मिली?

उत्तर.374. इस नयी शृंखला में हम विशेषज्ञों से जानने का प्रयास कर रहे हैं कि बूस्टर टीका यानि टीके की तीसरी ख़ुराक कोरोनावायरस के नये प्रकार- ओमिक्रोन से बचाव में कितनी असरदार है।

अमरीकी औषधि निर्माता कम्पनी मॉडर्ना के अनुसार प्रयोगशाला में जाँच के दौरान उसके द्वारा निर्मित बूस्टर टीका ओमिक्रोन प्रकार के सामने बेहद असरदार दिखाई दिया है।

20 दिसम्बर को कम्पनी द्वारा जारी प्रारम्भिक आँकड़े बताते हैं कि जिन लोगों को टीके की दो खुराक़ लगायी गई थी उनमें ओमिक्रोन से निपटने के लिए रोग प्रतिकारक की मात्रा का स्तर बहुत कम था।

जापान और अमरीका में स्वीकृत 50 माइक्रोग्राम का बूस्टर टीका लगाने पर ओमिक्रोन के विरुद्ध प्रतिकारक स्तर बूस्टर से पहले की स्थिति की तुलना में 37 गुणा बढ़ गया।

वहीं, 100 माइक्रोग्राम का बूस्टर टीका लगाने पर प्रतिकारकों का स्तर बूस्टर टीके से पूर्व के स्तर की तुलना में 83 गुणा बढ़ गया था। शुरू में लगाए गये दो टीकों में प्रत्येक की मात्रा 100 माइक्रोग्राम ही थी।

मॉडर्ना का कहना है कि ओमिक्रोन के ख़िलाफ़ बचाव का पहला क़दम तो वर्तमान में लगाये जा रहे बूस्टर टीके लगवाने से ही हो सकेगा। कम्पनी ने कहा कि वह ओमिक्रोन के लिए खासतौर से टीके का विकासकार्य जारी रखेगी लेकिन फ़िलहाल इस प्रकार के लिए अलग से टीका बनाने की आवश्यकता नहीं है।

उपरोक्त जानकारी 24 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न.373. बूस्टर ख़ुराक और ओमिक्रोन प्रकार / अंक 6 - अध्ययनों के अनुसार तीन ख़ुराक देती हैं उच्च स्तरीय सुरक्षा - भाग 3

उत्तर.373. कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार पर टीके की तीसरी ख़ुराक से जुड़ी इस शृंखला की तीसरी कड़ी में इस विषय पर अमरीका के रुख पर रोशनी डाली जाएगी।

व्हाइट हाउस के मुख्य चिकित्सा सलाहकार एंथनी फ़ॉची ने 15 दिसम्बर को कहा था कि वर्तमान में उपलब्ध टीकों की बूस्टर ख़ुराक कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार के ख़िलाफ़ भी पर्याप्त कारगर है।

फ़ॉची ने कहा कि संक्रमण को रोकने और गंभीर बीमारी से बचाव, दोनों के संदर्भ में फ़ाइज़र-बियोन्टेक या मॉडर्ना के टीके का उपयोग करके पूर्ण टीकाकरण, ओमिक्रोन को रोकने में महत्त्वपूर्ण रूप से सहायक है।

उन्होंने कहा कि कई नवीनतम अध्ययनों से पता चलता है कि बूस्टर ख़ुराक काफी हद तक रोग-प्रतिकारकों के निष्क्रमणकारी स्तर में बढ़ोतरी करती हैं और वायरस के इस प्रकार के ख़िलाफ़ भी सुरक्षा देती हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में उन्हें नहीं लगता कि ओमिक्रोन से निपटने के लिए किसी विशेष प्रकार की बूस्टर ख़ुराक की आवश्यकता है। फ़ाइज़र और मॉडर्ना ने घोषणा की थी कि वे विशेष रूप से ओमिक्रोन को लक्षित एक नया टीका बनाने में लगे हैं। फ़ॉची ने अमरीकी जनता से टीकाकरण करवाने और उपलब्ध टीकों की बूस्टर ख़ुराक लगवाने का अपना आह्वान फिर से दुहराया है।

उपरोक्त जानकारी 23 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न.372. बूस्टर ख़ुराक और ओमिक्रोन प्रकार / अंक 5 - अध्ययनों के अनुसार तीन ख़ुराक देती हैं उच्च स्तरीय सुरक्षा - भाग 2

उत्तर.372. अफ़्रीका स्वास्थ्य शोध संस्थान के प्राध्यापक एलेक्स सीगल की प्रयोगशाला में किया गया अध्ययन दर्शाता है कि ओमिक्रोन फ़ाइज़र-बियोन्टेक टीके से प्रदत्त प्रतिरक्षा को काफ़ी कम कर देता है। 12 टीकाकृत लोगों के रक्त से लिये गए प्लाज़मा पर किये प्रयोगों में पता चला कि ओमिक्रोन प्रकार से लड़ने में टीके से प्राप्त एंटीबॉडी की क्षमता 40 गुणा कम है। संस्थान द्वारा किये हालिया आकलन दर्शाते हैं कि ओमिक्रोन प्रकार से लक्षण युक्त संक्रमण के विरुद्ध टीके केवल 22.5 प्रतिशत प्रभावी हो सकते हैं।

अध्ययन के नतीजे दिखाते हैं कि संक्रमित हो चुके और टीके की 2 ख़ुराक प्राप्त कर चुके 6 लोगों के रक्त के नमूनों में से 5 में वायरस को बेअसर करने वाली एंटीबॉडी अपेक्षाकृत उच्च मात्रा में मौजूद थीं। संस्थान के प्रवक्ता का कहना है कि इस बात की काफ़ी संभावना है कि लोग तीसरी ख़ुराक लेकर एंटीबॉडी का स्तर बढ़ा लें और गंभीर लक्षणों से बच जाएँ।

उपरोक्त जानकारी 22 दिसंबर तक की है।

प्रश्न.371. बूस्टर ख़ुराक और ओमिक्रोन प्रकार / अंक 4 - अध्ययनों के अनुसार तीन ख़ुराक देती हैं उच्च स्तरीय सुरक्षा - भाग 1

उत्तर.371. नवीनतम शृंखला में, हमनें विशेषज्ञों से नये उभरते ओमिक्रोन प्रकार के ख़िलाफ़ बूस्टर ख़ुराकों की प्रभावकारिता के बारे में जानना चाहा।

अमरीका की दिग्गज दवा कंपनी फ़ाइज़र और उसकी जर्मन साझेदार बियोन्टेक ने 8 दिसंबर को ओमिक्रोन प्रकार के ख़िलाफ़ अपने टीके की प्रभावकारिता पर प्रारंभिक अध्ययन के परिणाम जारी किये। परिणामों से पता चला कि टीके की तीसरी ख़ुराक, दो ख़ुराकों की तुलना में रोग-प्रतिकारक यानि एंटीबॉडी को 25 गुणा बढ़ाते हुए वायरस के मूल प्रकार से निपटने के समान स्तर की सुरक्षा प्रदान करती है। इन अध्ययनों में कंपनियों ने तीसरी ख़ुराक दिये जाने के एक महीने बाद लोगों के रक्त के नमूनों का परीक्षण किया ताकि ओमिक्रोन प्रकार को निष्क्रिय करने वाली एंटीबॉडी के स्तर का पता लगाया जा सके। उन्होंने पाया कि इस एंटीबॉडी का स्तर, वायरस के मूल प्रकार से निपटने हेतु दी गयीं दो ख़ुराकों के तीन सप्ताह बाद के एंटीबॉडी के स्तर से तुलनीय है। उन्होंने टीके की तीसरी ख़ुराक से ओमिक्रोन के ख़िलाफ़ उच्च स्तरीय सुरक्षा की उम्मीद जतायी।

कंपनियों का यह भी कहना है कि कि प्रतिरक्षा कोशिकाओं द्वारा पहचाने जाने वाले लक्षित स्पाइक प्रोटीन का 80 प्रतिशत हिस्सा ओमिक्रोन संस्करण में उत्परिवर्तन से प्रभावित नहीं होता है। उनका कहना है कि इसका मतलब है कि दो ख़ुराकें भी गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि तीसरी ख़ुराक प्रतिरक्षा-कोशिकाओं के स्तर को बढ़ाने और कोविड-19 रोगियों को गंभीर रूप से बीमार होने से रोकने में मदद करेगी।

यह जानकारी 21 दिसंबर तक की है।

प्रश्न.370. बूस्टर ख़ुराक और ओमिक्रोन प्रकार / अंक 3 – रोग प्रतिकारक कोशिकाएँ क्या रोगी को गंभीर रूप से बीमार होने से बचा सकते हैं?

उत्तर.370. इस शृंखला में हम विशेषज्ञों से जानने का प्रयास कर रहे हैं कि बूस्टर टीका यानि टीके की तीसरी ख़ुराक कोरोनावायरस के नये ओमिक्रोन प्रकार के विरुद्ध कितनी असरदार है। तीसरे अंक में हम जानेंगे कि रोग प्रतिकारक कोशिकाएँ कैसे काम करती हैं।

कितासातो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक नाकायामा तेत्सुओ वायरस और टीकाकरण के जानकार हैं। ओमिक्रोन प्रकार के बारे में वह कहते हैं कि हालाँकि मानव शरीर की कोशिकाओं से चिपककर उसे भेदने वाले स्पाइक प्रोटीन में 30 उत्परिवर्तन हुए हैं, लेकिन यह उत्परिवर्तन कुल स्पाइक प्रोटीन के केवल 3 प्रतिशत में हुए हैं। इसलिए उनका मानना है कि ओमिक्रोन के सामने टीके पूरी तरह से बेअसर नहीं रहेंगे। वह कहते हैं कि संक्रमण को पूरी तरह से रोकने में टीकों की प्रभावशीलता कम हो सकती है, लेकिन जो लोग संक्रमित होते हैं उन्हें गंभीर रूप से बीमार होने से बचाने में टीकों की प्रभावशीलता कम नहीं होगी।

नाकायामा कहते हैं कि बूस्टर टीके रोग प्रतिकारक क्षमता बढ़ाने में सक्षम हैं साथ ही वायरस से लड़ने के लिए प्रतिरक्षी तंत्र को भी सुदृढ़ कर सकते हैं। वह कहते हैं कि वायरस में हुए उत्परिवर्तन से वायरस रोग प्रतिकारकों से बच सकता है, लेकिन बूस्टर टीके प्रतिरक्षी कोशिकाओं में लड़ने की क्षमता बढ़ा देते हैं जिससे यह कोशिकाएँ विभिन्न तरह के उत्परिवर्तन से सामना कर सकती हैं और इस तरह गंभीर रूप से बीमार होने वाले रोगियों की संख्या कम रहेगी।

उपरोक्त जानकारी 20 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न.369. बूस्टर ख़ुराक और ओमिक्रोन प्रकार / अंक 2 - बूस्टर टीकाकरण की मुख्य योजना क्या है?

उत्तर.369. विश्व भर में कई देशों में कोरोनावायरस का बूस्टर टीका दिया जाने लगा है और इसी के बीच एक नया प्रकार, ओमिक्रोन, दुनिया भर में फैलने लगा है। इस शृंखला में विशेषज्ञों से जानेंगे कि यह अतिरिक्त टीका ओमिक्रोन प्रकार से निपटने में कितना कारगर रहेगा।

जापान सरकार की कोरोनावायरस विशेषज्ञ समिति के सदस्य और राष्ट्रीय मिए अस्पताल में नैदानिक अनुसंधान के प्रमुख तानिगुचि कियोसु कहते हैं कि टीके की तीसरी ख़ुराक न सिर्फ़ शरीर में रोग प्रतिकारकों की मात्रा बढ़ाती है बल्कि शरीर के रोग प्रतिरक्षी तंत्र में वायरस से लड़ने के लिए उसमें चेतना स्मृति स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका भी निभाएगी।

टीके की पहली ख़ुराक यानि जब प्राथमिक टीका लगाया जाता है तब रोग प्रतिरक्षी तंत्र वायरस को शरीर के दुश्मन की तरह पहचान कर उस पर हमला करने के लिए तैयार हो जाता है। इसके बाद टीके की दूसरी ख़ुराक शरीर के प्रतिरक्षी तंत्र में लक्षित दुश्मन की स्मृति स्थापित कर देती है। टीके की तीसरी ख़ुराक यानि बूस्टर टीका, इस स्मृति को सुदृढ़ कर उसे दीर्घकालिक कर देता है। “प्राइम और बूस्ट” यानि “प्राथमिक और बूस्टर” रणनीति प्रतिरक्षी तंत्र को शत्रु के बारे में जानकारी देती है और उनसे मुक़ाबला करने के लिए उसकी स्मृति को मज़बूत करती है।

तानिगुचि कहते हैं कि टीकाकरण के माध्यम से पर्याप्त प्रतिकारक क्षमता बढ़ाने की इस रणनीति का उद्देश्य बीमारी के गंभीर लक्षण को उत्पन्न होने से रोकना है। यह रणनीति वायरस के ओमिक्रोन जैसे नये प्रकारों से लड़ने में भी मदद करेगी। उन्होंने बूस्टर टीकाकरण बढ़ाने के उपायों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया

उपरोक्त जानकारी 17 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न.368. बूस्टर ख़ुराक और ओमिक्रोन प्रकार / अंक 1 - रोग-प्रतिकारकों में बढ़ोतरी वायरस के नये प्रकार से लड़ने में कैसे सहायक है?

उत्तर.368. दुनिया भर में यह चिंता बढ़ रही है कि वर्तमान में लगाया जा रहा कोरोनावायरस का टीका, कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार पर कम प्रभावी है। पूरी दुनिया में वायरस के इस नये प्रकार से जुड़े संक्रमण मामले बढ़ते जा रहे हैं। यह घबराहट उस समय और बढ़ गयी जब दुनिया में ऐसे लोगों को टीके की बूस्टर ख़ुराक दी जाने लगी जिन्हें पहले ही दो बार टीका लग चुका है। बूस्टर के लिए दिया जा रहा टीका, पहले लगाये गए दो टीकों जैसा ही है और ये टीके वायरस के पहले फैले प्रकारों के अनुरूप थे। विशेषज्ञों से जानते हैं कि अब भी टीके की तीसरी ख़ुराक क्यों आवश्यक है और वायरस के ओमिक्रोन प्रकार पर टीके की यह कितना प्रभावी होगा।

कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार के स्पाइक प्रोटीन में कई उत्परिवर्तन होते हैं। शरीर की कोशिकाओं को संक्रमित करने में ये स्पाइक प्रोटीन एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उत्परिवर्तन का मतलब है कि रोग-प्रतिकारकों यानि एंटीबॉडी को निष्क्रिय करना ताकि स्पाइक्स से बंधना और संक्रमण को रोकना अधिक कठिन हो सकता है।

राष्ट्रीय मिए अस्पताल में नैदानिक अनुसंधान के प्रमुख और जापान सरकार की कोरोनावायरस विशेषज्ञ समिति के सदस्य तानिगुचि कियोसु का कहना है कि भले ही वायरस के ओमिक्रोन प्रकार पर टीका कम प्रभावी हो पर टीके की बूस्टर ख़ुराक प्राप्त करना सार्थक होगा। तानिगुचि कहते हैं कि उदाहरण के लिए भले ही ओमिक्रोन में उत्परिवर्तन ने एंटीबॉडी की निष्क्रामकता को बहुत प्रभावित कर दिया हो फिर भी हम उसी स्तर की सुरक्षा प्राप्त करने में सक्षम होंगे यदि टीके की बूस्टर ख़ुराक के बाद एंटीबॉडी की मात्रा चौगुणी हो जाती है। इससे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली मज़बूत हो जाएगी। उनका कहना है कि टीके की तीसरी ख़ुराक लेकर और एंटीबॉडी की कुल मात्रा को बढ़ाकर हम ऐसी और अधिक एंटीबॉडी प्राप्त करने में सक्षम होंगे जो वायरस के ओमिक्रोन प्रकार से जुड़कर उन्हें निष्क्रिय करती हैं।

उपरोक्त जानकारी 16 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न.367. क्या कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार पर दवाएँ असरदार होंगी / अंक 4 - अत्यधिक प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया को दबाने वाली दवाएँ “ओमिक्रोन प्रकार के विरुद्ध प्रभावी हो सकती हैं।”

उत्तर.367. विश्व भर में कोरोनावायरस के नये प्रकार ओमिक्रोन से संक्रमण मामलों की पुष्टि हो रही है। इस नये प्रकार से निपटने में दवाएँ असरदार रहेंगी या नहीं, यह जानने के लिए हमने ओमिक्रोन संक्रमण के उपचार के लिए मौजूदा दवाओं और नयी विकसित की जा रही विभिन्न दवाओं की प्रभावशीलता के बारे में विशेषज्ञों से जानने का प्रयास किया।

डेक्सामिथासॉन और बैरिसिटिनिब वायरस की बढ़ी हुई संख्या के प्रति अत्यधिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को दबाती हैं इसलिए माना जाता है कि वे इसके किसी भी उत्परिवर्तन के विरुद्ध प्रभावी होंगी।

जापान के आइचि चिकित्सा विश्वविधालय के प्राध्यापक मोरिशिमा त्सुनेओ का कहना है कि यह संभव नहीं है कि एंटीबॉडी दवाएँ नये वायरस प्रकार के प्रति पूर्णतः अप्रभावी हों। लेकिन उनका कहना है कि औषधि की प्रभावशीलता किस हद तक कम होगी इसके लिए हमारे पास एक स्पष्ट तस्वीर तब तक नहीं हो सकती जब तक कि हम औषधि लेने वाले रोगियों में इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

वर्तमान में विकसित की जा रही खाने वाली दवाओं के बारे में उनका कहना है कि इन दवाओं के ओमिक्रोन प्रकार के विरुद्ध भी उसी तरह काम करने की भी आशा है जैसी वे पिछले प्रकारों के विरुद्ध प्रभावी थीं क्योंकि यह दवाएँ कोशिकाओं में वायरस की वृद्धि रोकती हैं।

मोरिशिमा का कहना है कि वर्तमान रणनीति को स्वीकृति मिलने के बाद खाने वाली दवाओं और एंटीबॉडी दवाओं को प्राथमिक चरणों में देने की व्यवस्था है। उनका कहना है कि ओमिक्रोन प्रकार के मामले में दवाओं के प्रभाव असमान रहने पर भी रणनीति नहीं बदलेगी।

उपरोक्त जानकारी 15 दिसंबर तक की है।

प्रश्न.366. क्या कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार पर दवाएँ असरदार होंगी / अंक 3 - अंतः कोषकीय वृद्धि को रोकने का उपचार क्या ओमिक्रोन प्रकार के ख़िलाफ़ भी उतना ही प्रभावी होगा?

उत्तर.366. विश्व भर में कोरोनावायरस के नये प्रकार ओमिक्रोन से संक्रमण मामलों की पुष्टि हो रही है। इस नये प्रकार से निपटने में दवाएँ असरदार रहेंगी या नहीं, यह जानने के लिए हमने ओमिक्रोन संक्रमण के उपचार के लिए मौजूदा दवाओं और नयी विकसित की जा रही विभिन्न दवाओं की प्रभावशीलता के बारे में विशेषज्ञों से जानने का प्रयास किया।

कोरोनावायरस रोगियों के उपचार हेतु विकसित दवाओं में से कुछ का उद्देश्य, वायरस के अंतः कोषकीय विकास हेतु आवश्यक किण्वक यानि एंज़ाइमों का निर्माण रोकना है। जापान के स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा अनुमोदित दवा रेमडेसिविर को मध्यम से गंभीर लक्षण वाले रोगियों के इलाज़ के लिए अंतःशिरा ड्रिप के माध्यम से दिया जाता है।

घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे, मुख्य रूप से हल्के लक्षणों वाले रोगियों के इलाज हेतु खाने वाली गोली का विकास भी चल रहा है। इनमें अमरीका की दवा कंपनी मर्क ने अपनी दवा, मोलनुपिराविर के लिए जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय को आवेदन दिया हुआ है। साथ ही अमरीकी दवा कंपनी फ़ाइज़र ने अपनी दवा पैक्सलोविड के आपातकालीन उपयोग हेतु अमरीकी नियामकों से अनुमति माँगी है और इसी तरह की गोली जापान की दवा कंपनी शिओनोगि भी विकसित कर रही है।

आइचि चिकित्सा विश्वविद्यालय के मोरिशिमा त्सुनेओ का कहना है कि ये उपचार मानव कोशिकाओं में प्रवेश कर चुके वायरस को लक्षित करते हैं इसलिये ये दवाएँ ओमिक्रोन प्रकार के ख़िलाफ़ भी उतनी ही प्रभावी होनी चाहिए।

यह जानकारी 14 दिसंबर तक की है।

प्रश्न.365. क्या कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार पर दवाएँ असरदार होंगी / अंक 2 - मानव कोशिकाओं में वायरस के प्रवेश को रोकनेवाली दवाएँ कितनी प्रभावशाली रहेंगी?

उत्तर.365. विश्व भर में कोरोनावायरस के नये प्रकार ओमिक्रोन से संक्रमण मामलों की पुष्टि हो रही है। इस नये प्रकार से निपटने में दवाएँ असरदार रहेंगी या नहीं, यह जानने के लिए हमने ओमिक्रोन संक्रमण के उपचार के लिए मौजूदा दवाओं और नयी विकसित की जा रही विभिन्न दवाओं की प्रभावशीलता के बारे में विशेषज्ञों से जानने का प्रयास किया।

जापान में स्वीकृत उपचार में रोग प्रतिरक्षी दवाओं का मिश्रण और सोत्रोविमाब दवा को रोग-प्रतिकारक दवा कहा जाता है। कोरोनावायरस की सतह पर मौजूद उभार यानि स्पाइक प्रोटीन मानव कोशिकाओं से चिपक जाते हैं और वायरस इस रास्ते से मानव कोशिका में प्रवेश करता है। यह दवा उन स्पाइक प्रोटीन को लक्षित करके शरीर में कोरोनावायरस आक्रमण रोकती है। हल्के लक्षण वाले रोगियों को अंतःशिरा माध्यम से यह दवा सीधे उनकी नसों में दी जाती है ताकि वे गंभीर रूप से बीमार न हों। विशेषज्ञों का मानना है कि ओमिक्रोन प्रकार के स्पाइक प्रोटीन में 30 परिवर्तन हुए हैं और ये मानव कोशिकाओं में वायरस को घुसने से रोकने वाले उपचार की प्रभावशीलता कम कर सकता है।

आइचि चिकित्सा विश्वविद्यालय के मोरिशिमा त्सुनेओ कहते हैं कि रोग प्रतिकारक दवाएँ स्पाइक प्रोटीन को लक्षित करती हैं इसलिए उनका मानना है वायरस में ये नये परिवर्तन उपचार की प्रभावशीलता पर भारी असर डालेंगे। वहीं वह कहते हैं कि दवाओं द्वारा लक्षित स्पाइक प्रोटीन अगर वायरस में हुए परिवर्तनों से अछूते रहते हैं तो उपचार की प्रभावशीलता में कोई कमी नहीं आएगी।

माना जा रहा है कि ओमिक्रोन प्रकार के उपचार में सोत्रोविमाब दवा प्रभावशाली रहेगी क्योंकि इस औषधि को विकसित करनेवाली ब्रिटेन की प्रमुख दवा निर्माता कम्पनी ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन ने वायरस के नये प्रकार से मिलते जुलते वायरस पर इस दवा का परीक्षण किया था।

उपरोक्त जानकारी 13 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न.364. क्या कोरोनावायरस के ओमिक्रोन प्रकार पर दवाएँ असरदार होंगी / अंक 1 - नसों में ड्रिप चढ़ाने और गोली में क्या अंतर है?

उत्तर.364. विश्व भर में कोरोनावायरस के नये प्रकार ओमिक्रोन से संक्रमण मामलों की पुष्टि हो रही है। इस नये प्रकार से निपटने में दवाएँ असरदार रहेंगी या नहीं, यह जानने के लिए हमने ओमिक्रोन संक्रमण के उपचार हेतु मौजूदा दवाओं और विकसित की जा रही विभिन्न दवाओं की प्रभावशीलता के बारे में विशेषज्ञों से जानने का प्रयास किया।

कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों को उपचार के लिए तीन तरह की दवाएँ दी जा रहीं हैं। कुछ दवाएँ वायरस को मानव शरीर में प्रवेश करने से रोकती हैं। फिर कुछ दवाएँ शरीर में प्रवेश कर चुके वायरस को द्विगुणित होने से रोकती हैं। तीसरे प्रकार की दवाएँ वायरस से लड़ने के लिए शरीर में अत्यधिक रूप से बढ़ चुकी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को दबाती हैं।

आइचि चिकित्सा विश्वविद्यालय के मोरिशिमा त्सुनेओ कोरोनावायरस उपचार विशेषज्ञ हैं। वह बताते हैं कि अंतःशिरा दी जानेवाली दवाएँ वायरस की सतह पर मौजूद स्पाइक प्रोटीन को लक्षित करती हैं। इस तरह की दवाओं की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वायरस का उभार कहाँ पर है। लेकिन वायरस को द्विगुणित होने से रोकने के लिए हल्के लक्षण वाले रोगियों को दी जानेवाली दवाएँ कारगर हो सकती हैं।

उपरोक्त जानकारी 10 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न.363. जापान ने आरम्भ किया कोविड-19 का बूस्टर टीकाकरण / भाग 3 - क्या नगर पालिकाएँ इसके लिए तैयार हैं?

उत्तर.363. समूचे जापान में स्वास्थ्य कर्मियों को 1 दिसंबर से कोरोनावायरस टीके की तीसरी ख़ुराक दी जाने लगी है। 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोग जनवरी 2022 में तीसरी ख़ुराक के लिए पात्र बनेंगे। इस शृंखला में जानेंगे कि नगरपालिकाओं ने टीके की तीसरी ख़ुराक के लिए किस प्रकार की तैयारियाँ की हैं।

देश भर के शहर, कस्बे और गाँव अपने स्थानों में निवासरत लोगों के टीकाकरण के लिए उत्तरदायी हैं। उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ा जब बहुत से लोगों को टीके की पहली ख़ुराक के पंजीयन में कठिनाई हुई क्योंकि फ़ोन लाइनें व्यस्त थीं और ऑनलाइन सुविधाओं के अत्यधिक प्रयोग के कारण वेबसाइट ठप हो गयी थीं।

26 नवम्बर को एनएचके ने तोक्यो के 23 वॉर्डों से पूछा कि टीके की तीसरी ख़ुराक पर निगरानी रखते समय वे इस मुद्दे से निपटने के लिए कैसी योजना बना रहे हैं। 19 वॉर्डों का कहना था कि वे इस प्रकार की भ्रम की स्थिति को रोकने के उपाय कर रहे हैं। इनमें से 6 ने कहा कि वे बूस्टर ख़ुराक की तारीख, समय और स्थान निर्धारित करेंगे और लोगों को यह सूचित करेंगे। 8 वॉर्डों ने कहा कि वे बुकिंग के लिए फ़ोन लाइनों की संख्या और उन स्थानों की संख्या बढ़ाएँगे जहाँ लोग आरक्षण के लिए सहायता प्राप्त करने जा सकते हैं।

तोक्यो के एदोगावा वॉर्ड की योजना है कि सामूहिक टीकाकरण स्थलों पर टीके की दूसरी ख़ुराक प्राप्त करने वाले बुज़ुर्गों को ठीक आठ महीने बाद उसी समय और तिथि पर टीके की बूस्टर ख़ुराक दी जाए। उन्हें उसी स्थान या उसके आस-पास के स्थान पर ही यह टीका लगाया जाए।

तिथी या स्थान बदलने के इच्छुक लोग दूरभाष के माध्यम से या वॉर्ड की वेबसाइट पर जाकर यह परिवर्तन कर सकते हैं। वॉर्ड के अधिकारियों का कहना है कि यदि बुज़ुर्ग लोगों के साथ किया गया उनका यह प्रयास अच्छी तरह से फलीभूत होता है तो वे अन्य आयु वर्ग के लोगों के लिए इसी तरह के उपायों को आरम्भ करने पर विचार कर रहे हैं।

उपरोक्त जानकारी 9 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न.362. जापान ने आरंभ किया कोविड-19 का बूस्टर टीकाकरण / भाग 2 - बूस्टर टीके के लिए कोविड-19 के किसी अन्य टीके का उपयोग किया जा सकता है?

उत्तर.362. समूचे जापान में स्वास्थ्य कर्मियों को 1 दिसंबर से कोरोनावायरस टीके की तीसरी ख़ुराक दी जाने लगी है। इस शृंखला में आज हम मूल टीकाकरण से भिन्न टीके के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

सरकार ने टीके की पिछली दो ख़ुराकों से अलग टीके के उपयोग की अनुमति देने का निर्णय किया है। अधिकारियों ने यह निर्णय इस कारण लिया है क्योंकि उन्हें संदेह है कि फ़ाइज़र टीके की पर्याप्त संख्या जल्द ही उन सभी लोगों के लिए उपलब्ध हो सकेगी जिन्हें फ़ाइज़र की दो ख़ुराकें मिल चुकी हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि उसने दिसंबर और जनवरी में तीसरी ख़ुराक के लिए योग्य लोगों के लिए लगभग 40 लाख फ़ाइज़र के टीके की ख़ुराकें पहले ही प्राप्त कर ली हैं। लेकिन संभावना है कि सरकार केवल दो करोड़ लोगों के लिए ही फ़ाइज़र के टीकों का प्रबंध करने में सक्षम है जबकि फ़रवरी और मार्च में लगभग 3 करोड़ 40 लाख लोग तीसरी ख़ुराक के लिए योग्य होंगे।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने मॉडर्ना टीके की सुरक्षा और प्रभावशीलता की पुष्टी होने और टीके को तीसरी ख़ुराक के लिए स्वीकृति मिलने की स्थिति में इसका उपयोग करने की अनुमति दी है।

मंत्रालय का कहना है कि अभी यह अनिश्चित है कि फ़ाइज़र के टीके उन सभी लोगों के लिए उपलब्ध होंगे जो अपने दूसरी ख़ुराक के 8 महीने बाद तीसरी ख़ुराक लेना चाहते हैं। मंत्रालय का कहना है कि ऐसी स्थिती में मॉडर्ना वैक्सीन के उपयोग पर विचार किया जाना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 8 दिसंबर तक की है।

प्रश्न.361. जापान ने आरंभ किया कोविड-19 का बूस्टर टीकाकरण / अंक 1 - बूस्टर ख़ुराक के लिए हमारी बारी कब आयेगी?

उत्तर.361. समूचे जापान में स्वास्थ्य कर्मियों को 1 दिसंबर से कोरोनावायरस टीके की तीसरी ख़ुराक दी जाने लगी है। 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोग जनवरी 2022 में तीसरी ख़ुराक के लिए पात्र बनेंगे।

जापान स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुरू में कहा था कि सैद्धांतिक तौर पर, कम से कम आठ महीने पहले दूसरा टीका लगवा चुके लोग बूस्टर ख़ुराक पाने के पात्र होंगे। लेकिन हाल ही में सरकार ने इंगित किया है कि वह दूसरे और तीसरे टीके के बीच का अंतर कम करना चाहती है। हर समूह के लोगों को बूस्टर ख़ुराक दिये जाने के समय का निर्धारण, उनकी नगरपालिकाओं की इस हेतु तैयारी और टीके की उपलब्धता के आधार पर किया जाएगा। तीसरी ख़ुराक पाने वाले लोगों को टीके के कूपन नगरपालिकाओं द्वारा भेजे जाएँगे।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले कहा था कि दिसंबर में, 10 लाख 40 हज़ार स्वास्थ्यकर्मी बूस्टर ख़ुराक पाने की पात्रता रखते हैं। जनवरी से, 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोग और अपने पहले दो टीके जल्दी प्राप्त कर लेने वाले 65 वर्ष से कम की आयु वाले कुछ लोग भी तीसरी ख़ुराक प्राप्त कर सकेंगे। मार्च में कार्यालयों और विश्वविद्यालयों में बूस्टर टीका दिया जाने लगेगा।

मंत्रालय ने कहा है कि बूस्टर टीकाकरण कम से कम सितंबर 2022 तक जारी रहेगा।

यह जानकारी 7 दिसंबर तक की है।

प्रश्न.360. होक्काइदो में कोरोनावायरस के धीरे-धीरे बढ़ते मामलों पर कड़ी नज़र रखना क्यों आवश्यक है / भाग 4 - वायरस-रोधी बुनियादी बचाव महत्त्वपूर्ण

उत्तर.360. जापान में नये मामले इस वर्ष के सबसे निचले स्तर पर हैं लेकिन तापमान कम होने पर देश के अन्य हिस्सों से पहले कोरोनावायरस जापान के धुर उत्तरी प्रिफ़ैक्चर होक्काइदो में फैलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमें उत्तरी प्रिफ़ैक्चर में संक्रमणों की बढ़ती संख्या पर कड़ी नज़र रखना चाहिए क्योंकि यह देश में संक्रमण की छठी लहर के आगमन का संकेत दे सकता है।

महामारी पर सरकार की विशेषज्ञ समिति के सदस्य, तोहो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक तातेदा काज़ुहिरो कहते हैं कि वर्ष 2020 में जापान में होक्काइदो पहला प्रिफ़ैक्चर था जहाँ नवम्बर और दिसम्बर में संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखी गयी थी।

वह कहते हैं कि सर्द मौसम में लोगों के श्वसन तंत्र से निकला वायरस हवा में देर तक बना रहता है। सर्द शुष्क मौसम में लोगों के श्वसन तंत्र की झिल्ली पर आसानी से चोट लग सकती है जिसकी वजह से वायरस संक्रमण के मामले बढ़ते हैं। इसके अलावा ठंड के दिनों में लोग अधिक देर तक बंद कमरों में रहते हैं। वह कहते हैं कि इससे भी संक्रमण का ख़तरा बढ़ता है।

तातेदा कहते हैं कि कोरोनावायरस अब भी सब जगह फैला हुआ है और वह बहुगुणित हो कर ऐसे में फैल सकता है जब हमें उसकी बिलकुल भी आशंका न हो। तातेदा कहते हैं सर्दियों के मौसम में संक्रमण सबसे अधिक होता है और इन दिनों मास्क पहनना, कमरों को हवादार रखना और बंद कमरों, भीड़भाड़ के इलाके तथा निकट सम्पर्क से बचना जैसे समुचित वायरस रोधी उपाय अपनाना बहुत आवश्यक है।

उपरोक्त जानकारी 6 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न.359. होक्काइदो में कोरोनावायरस के धीरे-धीरे बढ़ते मामलों पर कड़ी नज़र रखना क्यों आवश्यक है / भाग 3 - प्रिफ़ैक्चर की कार्यबल समिति के अनुसार संक्रमण विस्फोट के संकेत नहीं

उत्तर.359. जापान में नये मामले इस वर्ष के सबसे निचले स्तर पर हैं लेकिन जापान के धुर उत्तरी प्रिफ़ैक्चर होक्काइदो में दैनिक संख्या नवंबर में अस्थायी रूप से उछाल आया। तापमान कम होने पर देश के अन्य हिस्सों से पहले कोरोनावायरस होक्काइदो में फैलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमें उत्तरी प्रिफ़ैक्चर में संक्रमणों की बढ़ती संख्या पर कड़ी नज़र रखना चाहिए क्योंकि यह देश में संक्रमण की छठी लहर के आगमन का संकेत दे सकता है।

होक्काइदो में कोरोनावायरस कार्यबल के अनुसार सामूहिक संक्रमण के कारण नये मामले बढ़ रहे हैं। कार्यबल के अनुसार फ़िलहाल सामुदायिक संक्रमण के मामले नहीं हैं और न ही ऐसा कोई संकेत है कि संक्रमण तेज़ी से फैलेगा।

कार्यबल ने यह भी कहा कि संक्रमण के अधिकांश मामले उन लोगों में देखे गये हैं जिन्हें टीका नहीं लगा है।

होक्काइदो के जन स्वास्थ्य केन्द्रों के अधिकारी सामूहिक संक्रमण रोकने के उपायों के तहत रोगियों और उनके निकट संपर्क में आये लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। वे संक्रमण का स्रोत पता लगा कर, संक्रमण फैलने से रोकने में प्रयासरत हैं और लोगों से भी पूरी सावधानी बरतते हुए वायरस-रोधी उपाय अपनाने का आग्रह कर रहे हैं।

कार्यबल का कहना है कि अगर संक्रमण के मामले बढ़ते रहे तो यह संक्रमण की छठी लहर शुरू कर सकता है इसलिए वे स्थिति पर कड़ी नज़र बनाये हुए हैं।

उपरोक्त जानकारी 3 दिसम्बर तक की है।

प्रश्न.358. होक्काइदो में कोरोनावायरस के धीरे-धीरे बढ़ते मामलों पर कड़ी नज़र रखना क्यों आवश्यक है / भाग 2 - पर्याप्त वातायन की व्यवस्था और 3सी से परहेज की अनुशंसा का औचित्य

उत्तर.358. जापान में नये मामले इस वर्ष के सबसे निचले स्तर पर हैं लेकिन तापमान के कम होते ही जापान के धुर उत्तरी प्रिफ़ैक्चर होक्काइदो में संक्रमण देश के अन्य भागों से पहले ही फैल जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रिफ़ैक्चर के इस पहलू पर कड़ी नज़र रखी जानी चाहिए। होक्काइदो की स्थिति से जुड़ी इस शृंखला की दूसरी कड़ी में संक्रमण के प्रसार पर रोक में सहायतार्थ क़दमों पर नज़र डालते हैं।

यह सर्वविदित है कि कोरोनावायरस बंद स्थानों में, जहाँ हवा स्थिर हो वहाँ अधिक तीव्रता से फैलता है। अधिकतर देखा गया है कि सर्दियों में जब तापमान कम होता है और पर्याप्त वातायन के अवसर भी कम होते हैं तब संक्रमण का ख़तरा अधिक हो सकता है।

फ़रवरी 2020 में साप्पोरो हिमोत्सव के आंतरिक विश्राम स्थलों और इसी प्रकार के अन्य स्थानों पर लोगों में संक्रमण होने पर यह पहली बार ज्ञात हुआ कि यह वायरस बंद स्थानों में अधिक संक्रामक है। विशेषज्ञों के विश्लेषण से पता चलता है कि वायरस युक्त बहुत छोटी बूँदें बंद जगहों में एक निश्चित समय के लिए हवा में तैरती हैं और लोग ऐसे स्थानों में साँस लेने से संक्रमित हो सकते हैं।

यह ज्ञात होने के बाद लोगों को सलाह दी गयी कि वे हाथ धोएँ, कीटाणुनाशक का उपयोग करें, बिना मास्क के बात करने से बचें और 3सी यानि बंद स्थान, भीड़ और निकट संपर्कों से बचें। यह भी ज्ञात हुआ है कि पर्याप्त वातायन की व्यवस्था से संक्रमण का ख़तरा कम होता है।

लेकिन जब सर्दियों में तापमान कम होता है तो लोग घर के अंदर अधिक सक्रिय हो जाते हैं। वर्षांत में तथा नववर्ष की छुट्टियों के दौरान लोगों के एक-दूसरे के संपर्क में आने के अधिक अवसर होते हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति का कहना है कि इस दौरान संक्रमण का ख़तरा बढ़ सकता है। उन्होंने लोगों से पर्याप्त वातायन की व्यवस्था जैसे बुनियादी संक्रमण-रोधी उपायों का अच्छी तरह पालन करने का आह्वान किया है।

उपरोक्त जानकारी 2 दिसंबर तक की है।

प्रश्न.357. होक्काइदो में कोरोनावायरस के धीरे-धीरे बढ़ते मामलों पर कड़ी नज़र रखना क्यों आवश्यक है / भाग 1 - क्या होक्काइदो छठी लहर के आगमन का संकेत दे सकता है?

उत्तर.357. जापान में नये मामले इस वर्ष के सबसे निचले स्तर पर हैं लेकिन जापान के धुर उत्तरी प्रिफ़ैक्चर होक्काइदो में दैनिक संख्या नवंबर में अस्थायी रूप से उछाल आया। तापमान कम होने पर देश के अन्य हिस्सों से पहले कोरोनावायरस होक्काइदो में फैलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमें उत्तरी प्रिफ़ैक्चर में संक्रमणों की बढ़ती संख्या पर कड़ी नज़र रखना चाहिए क्योंकि यह देश में संक्रमण की छठी लहर के आगमन का संकेत दे सकता है।

फ़रवरी 2020 के अंत में कोरोनावायरस का प्रसार सर्वप्रथम होक्काइदो में हुआ था। फिर मार्च के मध्य में तोक्यो में नये मामले बढ़ने लगे। 2020 की सर्दियों में संक्रमण की तीसरी लहर के दौरान भी यह क्रम स्पष्ट था। तोक्यो सहित देश के अन्य हिस्सों में वायरस फैलने से दो सप्ताह पहले ही होक्काइदो में कोरोनावायरस संक्रमण फैला। पिछले वर्ष अक्तूबर के अंत में होक्काइदो में एक सप्ताह पूर्व की तुलना में नये मामलों के साप्ताहिक औसत में वृद्धि आरंभ हो गयी थी। लगभग एक महीने बाद यह क्रम फिर स्पष्ट हो गया जब तोक्यो में नवंबर के मध्य में संक्रमण बढ़ना शुरू हुआ।

नवंबर मध्य के बाद से देश भर में संक्रमण मामलों की औसत संख्या में तीव्र वृद्धि हुई। नवंबर के आरंभ तक नये दैनिक मामले 1,000 से नीचे रहे लेकिन नवंबर के अंत में यह आँकड़ा 2,000 हो गया था और दिसंबर के अंत में 4,000 तक पहुँच गया था। 8 जनवरी 2021 को यह आँकड़ा लगभग 8,000 तक पहुँच चुका था।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि टीकाकरण में प्रगति के कारण इस वर्ष सर्दियों में कोरोनावायरस कुछ हद तक नियंत्रित हो गया है। लेकिन वे चेतावनी दे रहे हैं कि लंबे समय तक बंद स्थानों में रहने से वायरस से संक्रमित होने का ख़तरा बढ़ जाता है। उनका कहना है कि हमें संक्रमण की छठी लहर के किसी भी संभावित संकेत का पता लगाने के लिए होक्काइदो में कोरोनावायरस की स्थिति पर कड़ी नज़र रखनी चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 1 दिसंबर तक की है।

प्रश्न.356. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की अगली लहर आने की संभावना और समय के बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है / भाग-9 शीत ऋतु में अगली लहर से बचने के उपाय

उत्तर.356. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की छठी लहर की संभावना और उसके समय पर विशेषज्ञों की राय से जुड़ी शृंखला की नवीं कड़ी में हमने पाया कि सभी विशेषज्ञ छठी लहर शीत ऋतु में आ सकने की चेतावनी दे रहे हैं। उनका कहना है कि लोगों के मेल-जोल में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारक होगी।

कोरोनावायरस उपायों की सरकारी सलाहकार समिति के प्रमुख ओमि शिगेरु और स्वास्थ्य मंत्रालय से संबद्ध विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष वाकिता ताकाजि, दोनों ही, लोगों से वर्ष के अंत और नववर्ष के अवकाश में सतर्कता बरतने को कह रहे हैं क्योंकि उस दौरान सामाजिक गतिविधियाँ बढ़ने की संभावना रहती है। वे सभी लोगों से चेहरे के मास्क पहनने जैसे मौलिक वायरस-रोधी उपाय अपनाने और उन परिस्थितयों से बचने का आह्वान कर रहे हैं जिनमें बंद, भीड़-भाड़ और निकट-संपर्क वाली जगहों में रहना पड़े।

अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और देखभाल विश्वविद्यालय के प्राध्यापक वादा कोजि ने बताया कि कई कारक एक-दूसरे को परस्पर प्रभावित करते हैं और इस प्रक्रिया की जटिलता के कारण अगली लहर की भविष्यवाणी करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि फिर भी, कोरोनावयरस के टीके और नये उपचारों के विकास से आशा बँधती है।

इस सर्दी में नयी लहर आने से रोकने हेतु, हर किसी के लिए संक्रमण की पाँचवीं लहर तक के अपने अनुभवों के आधार पर सतर्कता बरतते हुए विभिन्न संक्रमण-रोधी उपाय अपनाना जारी रखना महत्त्वपूर्ण है।

यह जानकारी 30 नवंबर तक की है।

प्रश्न.355. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की अगली लहर आने की संभावना और समय के बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है / भाग-8 तोक्यो नीति अनुसंधान संस्था की चिबा आसाको बताती हैं कि अनुरूपण प्रक्रिया से “मिनी तोक्यो” का नमूना बनाकर किस तरह संभावित छठी लहर बचाव किया जा सकता है

उत्तर.355. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की छठी लहर की संभावना और उसके समय पर विशेषज्ञों की राय से जुड़ी शृंखला की आठवीं कड़ी में तोक्यो नीति अनुसंधान संस्था में वाचस्पति उपाधि की शोधकर्ता चिबा आसाको के साथ बातचीत जारी है।

चिबा कहती हैं कि संक्रमण की छठी लहर की संभावना उस समय अधिक हो जाएगी जब टीकों का असर कम होगा और बाहर निकलने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी। हमने उनसे पूछा कि अगली लहर से बचाव के लिए क्या किया जा सकता है।

चिबा बताती हैं कि मुख्य रूप से सरकार द्वारा भेजे गये मेल - “टीकाकरण और पीसीआर जाँच” का सही उपयोग करना है।

सरकार कोरोनावायरस टीकाकरण के आँकड़े और पीसीआर जाँच में वायरस की पुष्टि नहीं होने पर ही सामाजिक गतिविधियों के लिए ढील देगी। चिबा ने कम्प्यूटर पर अपने “मिनी तोक्यो” नमूने पर प्रतिरूपण प्रयोग किए। उन्होंने देखा कि घरों से बाहर निकलने वाले लोगों में, टीकाकृत लोगों की संख्या या पीसीआर जाँच में कोरोनावायरस मुक्त पाये जानेवाले लोगों की संख्या, महामारी पूर्व के स्तर पर रहने के बावजूद कोविड-19 के नये मामले घटेंगे। लेकिन वहीं जिन लोगों को टीके नहीं लगे हैं और जिनकी जाँच नहीं हुई है, भीड़ में उनकी संख्या महामारी से पूर्व के स्तर से आधी रखना आवश्यक है।

चिबा कहती हैं कि लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करके संक्रमण को भी प्रभावशाली तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। वह आगे कहती हैं कि आर्थिक गतिविधियों और वायरस-रोधी उपायों के बीच संतुलन बनाने के लिए ज़रूरी है कि ऐसे लोगों का आवागमन कम किया जाये जिनमें संक्रमण का ख़तरा अधिक है, उदाहरण के लिए ऐसे लोग जिन्हें अभी तक टीका नहीं लगा है। वह कहती हैं कि सरकार को टीकाकरण और जाँच अभियान को प्रभावशाली तरीके से लागू करने के उपायों पर चर्चा करना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 29 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.354. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की अगली लहर आने की संभावना और समय के बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है / भाग - 7 तोक्यो नीति अनुसंधान संस्था की चिबा आसाको अनुरूपण प्रक्रिया से बने “मिनी तोक्यो” के नमूने द्वारा संभावित छठी लहर बचाव के तरीका बता रही हैं

उत्तर.354. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की छठी लहर की संभावना और उसके समय पर विशेषज्ञों की राय से जुड़ी शृंखला की सातवीं कड़ी में तोक्यो नीति अनुसंधान संस्था में वाचस्पति उपाधि की शोधकर्ता चिबा आसाको से जापान में छठी लहर की संभावना पर उनके विचार जानेंगे।

चिबा को आशंका है कि इस साल सर्दियों के मौसम में मामले बढ़ने की संभावना है। उनका मानना है कि टीकों का असर कम होने और लोगों की आवाजाही बढ़ने के कारण संक्रमण की छठी लहर आ सकती है। प्रतिरूपण प्रक्रिया की मदद से वह तोक्यो का छोटा रूप बनाकर शोध कर रही हैं कि इस संभावित लहर को किस तरह कम से कम रखा जा सके। उन्होंने कम्प्यूटर पर प्रतिरूपण से एक आभासी शहर बनाया जिसकी जनसंख्या 70,000 से थोड़ी अधिक है और यह जानने का प्रयास किया कि यहाँ संक्रमण कैसे फैलेगा। जनगणना और अन्य आँकड़ों की मदद से तोक्यो का लघुरूप बनाया गया जिसके आयु वर्ग का आकार, व्यवसाय और नागरिकों का पारिवारिक रूप जापान की वास्तविक राजधानी के जैसा है।

कम्प्यूटर प्रतिरूपण प्रक्रिया में उन्होंने अक्तूबर 2021 या उसके बाद दैनिक मामले 4 रखे, जो वास्तविक तोक्यो में क़रीब 800 मामले प्रतिदिन माने जाएँगे। इस स्थिति में अगर लोगों की आवाजाही महामारी से पूर्व के स्तर से 30 प्रतिशत कम रखी जाए तो गणना के अनुसार टीकों की प्रभावकारिता कम होने के बावजूद नये मामले की संख्या स्थिर बनी रहेगी। लोगों को टीके की तीसरी ख़ुराक लगाने के साथ ही नये मामलों की संख्या कम होने लगेगी।

लेकिन लोगों की आवाजाही का स्तर महामारी से पूर्व के समय से 20 प्रतिशत कम रखने पर नये मामले बढ़ते जाएँगे बावजूद इसके कि लोगों को टीके की तीसरी ख़ुराक लगायी जा रही है।

चिबा कहती हैं कि प्रतिरूपण प्रक्रिया में देखा गया कि लोगों के आवागमन में हल्की सी बढ़ोतरी से संक्रमण की स्थिति में भारी अंतर देखा जा सकता था। वह कहती हैं कि अगर लोग वर्ष के अंतिम दिनों में समारोह आयोजित करेंगे और एक-दूसरे से मिलेंगे तो मामले बढ़ने की संभावना है। लेकिन अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में विचार करें तो आखिर एक सीमा तक ही लोगों की आवाजाही कम रखी जा सकती है।

उपरोक्त जानकारी 26 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.353. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की अगली लहर आने की संभावना और समय के बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है / भाग - 6 शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण अंतर पर ओकिनावा चूबु अस्पताल के ताकायामा योशिहिरो के विचार

उत्तर.353. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की छठी लहर की संभावना और उसके समय पर विशेषज्ञों की राय से जुड़ी शृंखला की छठी कड़ी में जारी हैं ओकिनावा चूबु अस्पताल के ताकायामा योशिहिरो के विचार।

ताकायामा ने सचेत किया है कि वर्ष के अंत और नववर्ष की छुट्टियों के समय संक्रमण का पुनरुत्थान हो सकता है।

उनका कहना है कि हम कितने भी संक्रमण-रोधी क़दम उठायें पर छुट्टियों के समय में वायरस को प्रिफ़ैक्चर क्षेत्रों में आने से पूरी तरह से रोक पाना असंभव होगा। कुछ बुज़ुर्ग लंबे समय से अपने बच्चों और नाती-पोतों को न देख पाने के कारण नववर्ष की छुट्टियाँ उनके साथ व्यतीत करने के लिए अत्यंत व्याकुल हैं। बुज़ुर्गों और उनकी संतानों, दोनों के लिए इस बात की पुष्टि करना महत्त्वपूर्ण है कि उनको टीका लग चुका है और वे अन्य सावधानी उपाय अपना रहे हैं। तभी वे बिना किसी चिंता के एक साथ समय बिता सकेंगे।

ताकायामा संक्रमण की संभावित छठी लहर के लिए पूरी तरह से तैयार रहने के महत्त्व पर बल देते हैं।

उनका कहना है कि अमरीका और यूरोप में संक्रमण की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह मानकर तैयारी तेज़ करनी चाहिए कि इससे भी बड़ी लहर आ सकती है। उनका कहना है कि विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाना आसान नहीं है क्योंकि सर्दियों में ही अन्य बीमारियों के रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। अतः उनका सुझाव है कि उन सुविधाओं की संख्या में वृद्धि करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है जहाँ रोगी अस्पतालों से लौटने के बाद स्वास्थ्य लाभ ले सकें। इससे उनके अस्पताल में भर्ती होने की अवधि कम की जा सकती है। यदि अस्पताल में भर्ती होने की अवधि आधी भी की जा सके तो इसका असर अस्पताल के बिस्तरों की संख्या को दोगुणा करने के समान होगा। ताकायामा स्थानीय सरकारों और अस्पतालों से परस्पर परामर्श कर यह सुनिश्चित करने का आह्वान करते हैं कि वे संक्रमण की संभावित नयी लहर के लिए पूरी तरह से तैयार रहें।

उपरोक्त जानकारी 25 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.352. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की अगली लहर आने की संभावना और समय के बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है / भाग - 5 शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अंतर, ओकिनावा चूबु अस्पताल के ताकायामा योशिहिरो

उत्तर.352. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की छठी लहर की संभावना से जुड़ी शृंखला की पाँचवीं कड़ी में हम विशेषज्ञ जानेंगे कि संक्रमण की छठी लहर कब आयेगी। संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ और स्वास्थ्य मंत्रालय की कोरोनावायरस विशेषज्ञ समिति के सदस्य ओकिनावा चूबु अस्पताल के ताकायामा योशिहिरो बता रहे हैं कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वायरस कैसे फैलता है।

ताकायामा का मानना है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को वायरस के संक्रमण के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाने चाहिए। शहरी क्षेत्रों में कुछ ऐसे स्थान हैं जहाँ संक्रमण लगातार जारी रहता है। एक बार जब लोग एक-दूसरे के अधिक संपर्क में आना शुरू करते हैं तो ऐसी जगह पर संक्रमण एकदम से फैल सकता है जिस प्रकार फ़्यूज़ अचानक जलता है। दूसरी ओर ओकिनावा प्रिफ़ैक्चर सहित अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमणों को नियंत्रण में लाया गया है और कुछ क्षेत्रों में कोई मामला सामने नहीं आया। ऐसे क्षेत्रों के लोगों को शहरी क्षेत्रों से आने वाले संक्रमित लोगों पर नज़र रखनी चाहिए। इस स्थिति मे यह देखना चाहिए कि "वैक्सीन पीसीआर परीक्षण पैकेज" बाहर के आगंतुकों के लिए उपलब्ध हों और स्थानीय अधिकारियों में संक्रमण का प्रकोप होने पर लोगों से प्रिफ़ैक्चर की सीमाओं के पार यात्रा नहीं करने का अनुरोध करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग संक्रमण के बारे में अधिक चिंतित हैं और सावधानी भी बरत रहे हैं। लेकिन इन सबका कोई अर्थ नहीं यदि उनके संदेश शहरी क्षेत्रों के निवासियों तक नहीं पहुँचते। अब जबकि संक्रमण मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम है तो कम लोग इन संदेशों को गंभीरता से लेते हैं। शहरी क्षेत्रों के अधिकारियों के लिए यह महत्त्वपूर्ण है कि वे लोगों को यह याद दिलाते रहें कि उन्हें सतर्क रहना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 24 नंवबर तक की है।

प्रश्न.351. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की अगली लहर आने की संभावना और समय के बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है / भाग - 4 स्वास्थ्य और कल्याण के अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्राध्यापक वादा कोजि के विचार

उत्तर.351. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की छठी लहर की संभावना से जुड़ी शृंखला की चौथी कड़ी में जन-स्वास्थ्य विशेषज्ञ और संक्रामक रोग के जानकार स्वास्थ्य और कल्याण अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्राध्यापक वादा कोजि के विचार जानेंगे। वह स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के सदस्य भी हैं।

अन्य विशेषज्ञों की तरह प्राध्यापक वादा भी सचेत करते हैं कि वर्ष के अंत और नये वर्ष के आरंभ में जब लोगों का आवागमन बढ़ेगा तब अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

उन्होंने ज़ोर दिया कि ठंड और आर्द्रता जैसे मौसमी कारणों के साथ ही वर्ष के अंत और नववर्ष के उत्सव की धूमधाम के बीच जब लोगों की आवाजाही और सक्रियता बढ़ेगी तब वायरस का प्रसार भी तेज़ी से बढ़ सकता है। यही स्थिति मौसमी फ़्लू के समय भी देखी जा सकती है और इस दौरान विशेष सावधानी रखना आवश्यक है।

वादा ने कहा कि कोरोनावायरस संक्रमण की संभावित छठी लहर के बारे में एकदम सटीक भविष्यवाणी करना विशेषज्ञों के लिए भी कठिन है क्योंकि यह कई बातों पर निर्भर है जैसे टीकाकरण अभियान की प्रगति, सामाजिक गतिविधियों पर लगी रोक में ढील और समय के साथ टीकों का असर कितना बना रहेगा। इसके अलावा अभी बहुत सी बातें जिनसे सभी अनभिज्ञ हैं।

लेकिन वादा का मानना है कि टीकाकरण अभियान में तेज़ी के कारण पिछली लहर की तुलना में इस बार लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा कम हो सकता है।

उन्होंने कहा कि विदेशों में संक्रमण के मामलों का अध्ययन करने से इस बात में में कोई शंका नहीं है कि वायरस का प्रसार और कोविड के गंभीर लक्षण मुख्य रूप से उन लोगों में फैलने की आशंका अधिक है जिन्हें टीका नहीं लगा है। तोक्यो में 40 से 49 वर्ष आयु वर्ग में हर पाँच में एक व्यक्ति को टीका नहीं लगा है। उन्होंने कहा कि इन लोगों को जल्द से जल्द टीका लगाया जाए ताकि ये लोग और उनका क्षेत्र सुरक्षित महसूस कर सके।

उपरोक्त जानकारी 22 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.350. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की अगली लहर आने की संभावना और समय के बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है / भाग - 3 नागोया तकनीकी संस्थान के प्राध्यापक हिराता आकिमासा बता रहे हैं कि कृत्रिम मेधा के ज़रिये संक्रमण की छठी लहर संभावना का पूर्वानुमान कैसे लगाया जा सकता है?

उत्तर.350. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की छठी लहर की संभावना से जुड़ी शृंखला की तीसरी कड़ी में हमने विशेषज्ञों से पूछा कि संक्रमण लहर की छठी लहर के आने की कितनी संभावना है। विशषेज्ञ कृत्रिम मेधा के माध्यम से संक्रमण की लहर की संभावना का पूर्वानुमान लगा रहे हैं।

नागोया तकनीकी संस्थान के प्राध्यापक हिराता आकिमासा ने कृत्रिम मेधा प्रणाली में पिछले संक्रमण के आँकड़े डालकर, तोक्यो में भविष्य की आभासी परिस्थिति बनाने का प्रयास किया है। संक्रमित लोगों की संख्या में बढ़ोतरी, तापमान, आर्द्रता, लोगों की आवाजाही और क्या आपातकाल लागू था या नहीं समेत विस्तृत आँकड़े उपयोग किये गए।

यह अनुमान व्यक्त किया गया कि लोगों की आवाजाही धीरे-धीरे दुबारा शुरू होगी। कृत्रिम मेधा के माध्यम से 27 तरह की अलग-अलग परिस्थितियाँ बनायी गईं जैसे टीकों की दोनों ख़ुराक लगा चुके लोगों का अनुपात और बूस्टर टीका कब लगेगा। सभी नमूनों के परिणामों के अनुसार छठी लहर आने की संभावना जनवरी के आरंभ में बतायी गयी है।

हिराता ने कहा कि सभी परिस्थितियों में पाया गया कि छठी लहर का शिखर जनवरी की शुरूआत में आयेगा। क्रिस्मस से नववर्ष की छुट्टियों के दौरान लोगों का सैरसपाटा और मित्रों और परिजनों के साथ उत्सव मनाने के लिए लोगों की भीड़ के साथ ही वायरस के रोगोद्भव काल पर संक्रमण का प्रसार निर्भर करेगा।

वहीं, कृत्रिम मेधा से यह संभावना भी पता चली है कि अगर टीके की तीसरी ख़ुराक यानि बूस्टर टीका जल्द से जल्द लगाया जाए तो संक्रमित लोगों की संख्या शुरूआती दिनों में ही घटने लगेगी। और गंभीर रूप से बीमार होने वाले लोगों की संख्या भी सीमित रहेगी।

हिराता ने कहा कि अधिकांश जनसंख्या में टीके को प्रभावकारी बनाये रखने के लिये टीके की तीसरी ख़ुराक लगाना आवश्यक है। जापान में टीकाकरण काफ़ी तेज़ी से हुआ, इससे यह भी संभावना है कि टीके का असर भी जल्द कम होने लगेगा। उन्होने कहा कि बूस्टर टीका अभियान अगर शीघ्र आरंभ नहीं किया गया तो जापान के लिए टीके की प्रभावकारिता बनाये रखना कठिन हो जाएगा।

उपरोक्त जानकारी 19 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.349. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की अगली लहर आने की संभावना और समय के बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है / भाग - 2 महामारी वैज्ञानिक, फ़ुरुसे युकि

उत्तर.349. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की छठी लहर आने की कितनी संभावना है और यदि आती है तो इसका समय और यह आपदा हमें कितना प्रभावित करेगी, इस विषय से जुड़ी शृंखला की दूसरी कड़ी में भी महामारीविद् फ़ुरुसे युकि के विचार जानना जारी रखेंगे। फ़ुरुसे संक्रामक रोगों के महामारी विज्ञान विशेषज्ञ हैं।

फ़ुरुसे का कहना है कि अगर व्यक्ति-से-व्यक्ति संपर्क कम होता है तो संक्रमण की छठी लहर की शुरुआत में विलम्ब हो सकता है। हालाँकि, उनके आभासी नमूने के अनुसार संपर्क में भले ही 40 प्रतिशत की कमी की जाए या महामारी पूर्व संपर्क के स्तर को 60 प्रतिशत तक कम कर दिया जाए, संक्रमण की अगली लहर लगभग पाँच महीनों में आ सकती है। इस आभास में टीके की बूस्टर ख़ुराक के संभावित प्रभाव को शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि अधिक टीकाकरण से संक्रमण की छठी लहर के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

यह समझना आसान नहीं है कि व्यक्ति-से-व्यक्ति संपर्क में कितनी कमी आयी है। फ़ुरुसे का कहना है कि वर्ष अंत और नव वर्ष समारोहों के दौरान जागरुकता बढ़ाने की आवश्यकता है।

फ़ुरुसे का कहना है कि संक्रामक श्वसन रोगों का प्रसार सर्दियों के मौसम में अधिक होता है। उन्होंने कहा कि यह समारोहों का भी मौसम है और अगर लोग मेल मिलाप करते हैं, एकजुट हो शराब पीते हैं या यात्रा करते हैं जैसा कि वे महामारी से पहले करते थे, तो इससे संक्रमण और बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि कुछ लोग धीरे-धीरे संक्रमण-रोधी उपायों में ढील दे रहे हैं पर चिंतित होने के कारण अभी भी मास्क पहने रहे हैं, शराब पीने वाली पार्टियाँ कम हो रही हैं और व्यक्तिगत रूप से बैठक न कर के ऑनलाइन बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का एक बड़ा हिस्सा अब कम संपर्क के साथ कोरोनावायरस महामारी के तहत "नवीन सामान्य रूप" पर आधारित हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि हम इसी तरह से अपना व्यवहार जारी रखते हैं तो हम संक्रमण की अगली लहर के प्रभाव को कम करने में सक्षम हो सकते हैं। भले ही इसे पूरी तरह से टालने में सक्षम न हो, पर चिकित्सा देखभाल प्रणाली पर बहुत अधिक दबाव डालने से बच सकते हैं।

उपरोक्त जानकारी 18 नवंबर तक की है।

प्रश्न.348. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण की अगली लहर आने की संभावना और समय के बारे में विशेषज्ञों की क्या राय है / भाग - 1 महामारी वैज्ञानिक, फ़ुरुसे युकि

उत्तर.348. जापान में कोविड-19 के मामले इस वर्ष के सबसे निचले स्तर पर हैं। फिर भी सरकार ने 12 नवंबर को कोरोनावायरस संक्रमण की एक और संभावित लहर की तैयारी के लिए एक योजना जारी की है। संक्रमण की छठी लहर की हमें कब और कितना प्रभावित कर सकती है इसकी संभावना पर हम आपके लिए लाये हैं विशेषज्ञों की राय।

हमारे पहले विशेषज्ञ फ़ुरुसे युकि हैं जो संक्रामक रोगों के महामारी विज्ञान के विशेष जानकार और गणितीय मॉडल का उपयोग करके विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के सामुदायिक संक्रमण कार्यबल के सलाहकार फु़रुसे का कहना है कि इस शीत ऋतु में छठी लहर की संभावना है।

फ़ुरुसे स्वास्थ्य मंत्रालय के कोरोनावायरस विशेषज्ञ समिति के लिए संक्रमण स्थिति की नक़ल निर्मित करने के प्रभारी हैं। ऐसा करने के लिए वह वायरस फैलने के लिए उत्तरदायी विभिन्न कारकों को परिमाणित कर गणित के सूत्रों में बिठाते हैं जिससे उन्हें आगे की स्थिति का पूर्वानुमान मिलता है।

स्थिति की नक़ल निर्मित करने के लिए उन्होंने निम्नलिखित कल्पनाएँ कीं।

1. टीकाकरण की दर 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में 90 प्रतिशत है जबकि 40 से 60 वर्ष की आयु वाले लोगों में 80 प्रतिशत और 20 से 30 वर्ष की आयु वाले लोगों मे 75 प्रतिशत है।
2. पूर्ण टीकाकरण यानि कि दोनों ख़ुराकें संक्रमण को रोकने में 70 प्रतिशत तक प्रभावी है।
3. व्यक्ति से व्यक्ति का संपर्क महामारी से पहले के स्तर का लगभग 80 प्रतिशत होगा (पहले की तुलना में 20 प्रतिशत कम)।

आभासी नमूनों से पता चलता है कि आरंभ में नये संक्रमित लोगों की संख्या कम होगी जो एक महीने के बाद बढ़ने लगेगी और 2 महीने के बाद इसमे तेज़ी से वृद्धि होगी।

उपरोक्त जानकारी 17 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.347. कोविड-19 के दीर्घकालिक प्रभावों के आधार पर किस तरह की श्रमिक क्षतिपूर्ति की जा रही है / अंक 2 - क्षतिपूर्ति हासिल करने की पात्रता क्या है?

उत्तर.347. कार्यस्थल पर कोरोनावायरस से संक्रमित होने पर श्रमिक क्षतिपूर्ति के पात्र लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। साथ ही, कुछ मामलों में कोविड-19 के दीर्घकालिक प्रभावों के आधार पर मुआवज़ा हासिल किया जा सकता है। इस शृंखला के दूसरे भाग में “कोविड-19 के दीर्घकालिक प्रभावों के आधार पर श्रमिक क्षतिपूर्ति” के विषय पर चर्चा की जाएगी।

जापान में कर्मचारी के रूप में काम करने वाला हर विदेशी, देश के श्रमिक क्षतिपूर्ति बीमा से लाभान्वित होता है। इसके अंतर्गत कार्य अनुमति प्रदान करने वाला निवासी दर्जा प्राप्त लोगों के साथ-साथ अंशकालिक नौकरियों करने वाले छात्र भी इसमें शामिल हैं। जापान सरकार का कहना है कि श्रमिक क्षतिपूर्ति के पात्र वे लोग हैं जो या तो काम के दौरान कोरोनावायरस से संक्रमित हुए हैं या वे लोग जो वायरस के दीर्घकालिक प्रभावों के कारण गंभीर रूप से बीमार होने पर कार्य कर सकने में असमर्थ हो गये हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय लोगों से आग्रह कर रहा है कि वायरस से संक्रमित होने पर या उसके लक्षण बने रहने पर वे अपने स्थानीय श्रम मानक निरीक्षण कार्यालय से परामर्श लें।

मंत्रालय ने पाया है कि सितंबर के अंत तक, 14,567 लोगों को उनके कार्यस्थल पर वायरस से संक्रमित होने के बाद श्रमिक क्षतिपूर्ति के पात्र के रूप में मान्यता दी गयी है। इन लोगों में चिकित्सक, परिचारक और पंजीकृत देखभालकर्ता समेत चिकित्सा या देखभाल क्षेत्र से जुड़े 11,214 कर्मी शामिल हैं। श्रमिक क्षतिपूर्ति पाने वालों में इनकी प्रतिभागिता 70 प्रतिशत से अधिक है। लेकिन परिवहन या डाक सेवा के 376 कर्मचारी, विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े 315 और होटल व रेस्त्राँ सहित सेवा क्षेत्र के 245 कर्मचारी भी इसके पात्र माने गये हैं। संक्षेप में कहें तो व्यापक उद्योगों से जुड़े श्रमिकों को श्रमिक क्षतिपूर्ति के पात्र के रूप में मान्यता दी गयी है।

ह्योगो स्थित एक ग़ैर-लाभकारी संगठन कोविड-19 से प्रभावित श्रमिकों की सहायता करते हुए उनकी कार्यस्थिति में सुधार लाने हेतु कार्यरत है। संगठन के महासचिव निशियामा काज़ुहिरो का कहना है कि काम के दौरान संक्रमित होने के बाद वायरस के लक्षणों से पीड़ित लोग फिर से श्रमिक क्षतिपूर्ति के पात्र माने जाएँगे। उनका कहना है कि सरकार को इस विषय में जागरुकता बढ़ाने हेतु अधिक प्रयास करने चाहिए।

यह जानकारी 16 नवंबर तक की है।

प्रश्न.346. कोविड-19 के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों के आधार पर किस तरह की श्रमिक क्षतिपूर्ति की जा रही है / अंक - 1 पुरुष कर्मचारी मामले पर एक अध्ययन रिपोर्ट

उत्तर.346. कार्यस्थल पर कोरोनावायरस से संक्रमित होने पर श्रमिक क्षतिपूर्ति के पात्र लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। साथ ही, कुछ मामलों में कोविड-19 के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों के आधार पर मुआवज़ा हासिल किया जा सकता है। इस शृंखला के पहले भाग में “कोविड-19 के के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों के लिए कर्मचारियों को दिये जा रहे मुआवज़े” पर चर्चा कर रहे हैं।

ह्योगो प्रिफ़ैक्चर में एक वृद्धाश्रम में 40 वर्ष से अधिक आयु के एक फ़िज़िओथेरेपिस्ट को कोविड-19 के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों से पीड़ित होने के कारण श्रमिक क्षतिपूर्ति के योग्य माना गया है। इस चिकित्सक को नर्सिंग होम में वायरस से पीड़ितों की सेवा के दौरान कोविड-19 संक्रमण हो गया था। दिसम्बर 2020 में पीसीआर जाँच के बाद, इस व्यक्ति में कोरोनावायरस संक्रमण की पुष्टि हुई और उन्हें श्रमिक क्षतिपूर्ति के लिए पात्र माना गया। दो महीने के उपचार के बाद यह व्यक्ति दुबारा काम पर लौटा लेकिन गहरी थकान, साँस फूलना और स्वाद सम्बन्धी समस्या जैसे लक्षणों के कारण अप्रैल 2021 से उन्हें काम से दुबारा अवकाश लेना पड़ा। उनके डॉक्टर ने बताया कि वह कोविड-19 के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों पीड़ित हैं।

उसने दुबारा श्रमिक क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन किया और अगस्त में श्रम मानदंड निरीक्षक ने माना कि कार्यस्थल पर कोरोनावायरस से संक्रमित होने के कारण उनमें यह लक्षण उत्पन्न हुए हैं। वह अब भी काम पर जाने में असमर्थ है और फ़िलहाल घर पर ही अपनी पत्नी और पाँच वर्षीय बेटी की सहायता से पुनः स्वस्थ होने पर ध्यान दे रहा है।

उसका का कहना है दीर्घकालिक प्रभावों के कारण श्रमिक क्षतिपूर्ति के लिए पात्र माने जाने पर उसे काफी राहत महसूस हुई है। वह कहते हैं कि मुझे बहुत बुरा लगता है कि न मैं खड़ा हो पाता हूँ और न ही अपनी बेटी के साथ खेल सकता हूँ। वह दुबारा काम पर लौटने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

कोविड-19 के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों के लिए श्रमिक क्षतिपूर्ति दी जा रही है, ऐसे में सरकार इन लक्षणों से पीड़ित लोगों को श्रम कार्यालय से परामर्श के लिए कह रही है।


उपरोक्त जानकारी 15 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.345. जापान और अन्य देश कोरोनावायरस टीके की तीसरी ख़ुराक के बारे में क्या क़दम उठा रहे हैं / अंक - 9 पाँचवी लहर से क्या सबक मिले?

उत्तर.345. कोरोनावायरस की "तीसरी ख़ुराक" से जुड़ी शृंखला की नवीं कड़ी में संक्रमण की पाँचवीं लहर से मिले सबक पर जानकारी देंगे।

साइतामा चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक ओका हिदेआकि कहते हैं कि पाँचवीं लहर में अधिकतर वही लोग संक्रमित हुए जिन्हें टीका नहीं लगा था या टीके की केवल एक ख़ुराक ही लगी थी। लेकिन उन्होंने बताया कि 80 साल से अधिक आयु के एक रोगी को गंभीर लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती किया गया। हालाँकि इस वृद्ध को जुलाई में टीके की दूसरी ख़ुराक लगायी गई थी लेकिन इसके बावजूद उनमें संक्रमण के लक्षण जानलेवा सिद्ध हुए और अगस्त के मध्य तक उनकी मृत्यु हो गयी। कैंसर उपचार के कारण इस व्यक्ति का रोग प्रतिरक्षी तंत्र अत्यधिक दुर्बल हो गया था।

ओका कहते हैं कि टीके की दोनों ख़ुराक लगने के बावजूद दुर्भाग्यवश यह व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो गया था। विदेशों में हुए अध्ययनों से पता चलता है कि कमज़ोर रोग प्रतिकारक तंत्र वाले लोगों को टीके की दोनों ख़ुराक लगने पर भी कुछ लाभ नहीं मिल पाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि इन लोगों में टीके का प्रभाव कम हो जाता है।

ओका ने आगे कहा कि जिन लोगों को अन्य रोगों के उपचार दौरान प्रतिरक्षी तंत्र को दबाने की दवायें दी जाती हैं उनमें टीके की दोनों ख़ुराक लगने के बाद भी समुचित रोग प्रतिकारक क्षमता नहीं बन पाने का ख़तरा रहता है।

ओका ने कहा कि वह कोरोनावायरस टीकों के आँकड़े एकत्रित कर रहे हैं और उन्हें अब पता है कि कमज़ोर रोग प्रतिरक्षी तंत्र के लोगों की रक्षा हेतु टीकों की दो ख़ुराक पर्याप्त नहीं हैं। लेकिन टीके की तीसरी ख़ुराक लगने के बाद उनकी रोग प्रतिकारक क्षमता बढ़ जाती है। ओका कहते हैं टीकाकरण के प्रसार के साथ ही अब अगली लहर से निपटने की तैयारी में उन लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना होगा जो गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं, तथा सभी कमज़ोर पहलुओं को भी सुद्दढ़ करना होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह हम गंभीर रूप से बीमार होनेवाले रोगियों की संख्या कम कर सकेंगे और साथ ही चिकित्सा व्यवस्था पर दबाव भी नहीं बढ़ने देंगे।

उपरोक्त जानकारी 12 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.344. जापान और अन्य देश कोरोनावायरस टीके की तीसरी ख़ुराक के बारे में क्या क़दम उठा रहे हैं / अंक - 8 कुछ लोग बूस्टर ख़ुराक प्राप्त करने में असमर्थ हैं

उत्तर.344. कोरोनावायरस की "तीसरी ख़ुराक" से जुड़ी शृंखला की आठवीं कड़ी में ऐसे व्यक्तियों के बारे में जानेंगे जो टीका लगवाना तो चाहते हैं पर कुछ विशेष कारण से लगवा नहीं सकते।

49 वर्षीय इकेदा मासाहिरो एक मदिरालय संचालक हैं जो तोक्यो के मिनातो वार्ड के रोप्पोंगि इलाके में कार्यरत हैं। वह एटोपिक डर्मेटाइटिस (एक प्रकार के चर्म रोग) और एलर्जी के अन्य लक्षणों से ग्रस्त हैं।

नौ वर्ष पहले फ़्लू का टीका लगवाने के बाद वह बीमार हो गये थे। उनके डॉक्टर ने उन्हें बताया कि वह एक एनाफ़िलेक्टिक शॉक यानि घातक प्रत्यूर्जता का झटका था।

इकेदा उस समय के अपने भयानक अनुभव के बारे में बताते हुए कहते हैं कि टीका लगवाने के बाद जब वह घर जाने के लिए खड़े हुए तो वह सीधा नहीं चल पा रहे थे। वह कहते हैं कि जब उनका दिल ज़ोर से धड़कने लगा तो उन्हें लगा कि कुछ तो गड़बड़ है।

इकेदा ने अपने पारिवारिक डॉक्टर से जब कोरोनावायरस के टीके के बारे में पूछा तो डॉक्टर ने कहा कि शायद कोई समस्या नहीं होगी लेकिन टीका लगवाएँ या नहीं यह उन्हें तय करना होगा क्योंकि उन्हें पहले एक बार एनाफ़िलेक्टिक शॉक का अनुभव हो चुका है।

उन्हें अस्थमा भी है इसलिए अगर वह कोरोनावायरस से संक्रमित होते हैं तो इसके गंभीर लक्षण विकसित होने का ख़तरा है। उनका कहना है कि वह अपने लिए और अपने मदिरालय के ग्राहकों के लिए टीका लगवाना तो चाहते हैं लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

वह कहते हैं, “ईमानदारी से कहूँ तो मुझे ऐसे लोगों से ईर्ष्या होती है जो कोरोनावायरस के तीनों टीका लगवा सकते हैं।” उनका कहना है कि अगर वह स्वस्थ होते तो वह भी सारे टीके लगवाते। वह चिंतित और अलग-थलग महसूस करते हैं क्योंकि वह देखते हैं कि प्रतिबंधों को एक-एक कर हटाया जा रहा है और लोग यात्रा भी कर सकते हैं बशर्ते उनके पास टीकाकरण का प्रमाण हो। वह कहते हैं कि लोग यह समझें कि कुछ लोग उनकी तरह मजबूर भी हैं जो चाहते हुए भी टीका नहीं लगवा सकते। वह कहते हैं इस बात पर भी चर्चा होनी चाहिए कि ऐसे लोगों के लिए क्या किया जा सकता है।

उपरोक्त जानकारी 11 नवंबर तक की है।

प्रश्न.343. जापान और अन्य देश कोरोनावायरस टीके की तीसरी ख़ुराक के बारे में क्या क़दम उठा रहे हैं / अंक - 7 नर्सिंग गृहों को बूस्टर टीके से हैं बहुत आशाएँ

उत्तर.343. कोरोनावायरस की "तीसरी ख़ुराक" से जुड़ी शृंखला की सातवीं कड़ी में हम एक नर्सिंग देखभाल केन्द्र के बारे में बता रहे हैं।

ऐसा माना जाता है कि इस वर्ष कोरोनावायरस संक्रमण की तथाकथित पाँचवीं लहर के दौरान दो बार टीका लगवा चुके लोगों में "नये संक्रमणों" के तहत नर्सिंग देखभाल सुविधाओं में कई सामूहिक संक्रमण सामने आये।

पिछले साल नवंबर में तोक्यो के सेतागाया वार्ड के 90 निवासी और पारियों में काम करने वाले 100 से अधिक कर्मचारी वाले एक नर्सिंग देखभाल केन्द्र में से निवासियों और कर्मचारियों दोनों को मिलाकर 10 से अधिक लोगों में वायरस की पुष्टि हुई। हालाँकि किसी भी कर्मचारी या निवासी में कोई लक्षण नहीं दिखे।

इस केन्द्र ने टीकाकरण को प्रोत्साहन देते हुए इस वर्ष अप्रैल और मई के बीच अधिकांश निवासियों और कर्मचारियों को टीके की दो ख़ुराकें दीं। केंद्र ने संक्रमण फैलने से रोकने के प्रयासों को भी तेज़ किया जिसके परिणामस्वरूप नर्सिंग होम में संक्रमण के नये मामले सामने नहीं आये। हाल के समय तक केंद्र ने या तो खिड़की या फिर ऑनलाइन मुलाक़ात के माध्यम से आगंतुकों के साथ संपर्क को सीमित कर रखा है।

अक्तूबर से निवारक उपाय किये जाने के बाद निवासी नर्सिंग होम में आगंतुकों को स्वीकार कर रहे हैं।

नर्सिंग देखभाल केन्द्र का कहना है कि गंभीर रूप से बीमार होने के उच्च जोखिम वाले वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित रखने में बूस्टर ख़ुराकों की प्रभावशीलता से उसे बहुत आशा है। केंद्र के अनुसार आगंतुकों की संख्या को सामान्य परिस्थिति के निकट बनाये रखने के लिए तीसरी ख़ुराक भी आवश्यक है।

हाकुसुइ-नो सातो सुविधा केन्द्र की प्रमुख तानाका मीसा के अनुसार उनका मानना है कि टीकाकरण वृद्ध लोगों की सुरक्षा में प्रभावी है। परिवार के सदस्य बूस्टर ख़ुराक के लिए अनुरोध कर रहे हैं ताकि वे सुविधा केन्द्र में उनसे मिलना जारी रख सकें। तानाका का कहना है कि जनवरी तक दूसरे टीकाकरण को हुए 8 महीने बीत चुके होंगे और उन्हें आशा है कि स्थानीय सरकारें टीके की तीसरी ख़ुराक लगाने के लिए त्वरित क़दम उठाएँगी।

उपरोक्त जानकारी 10 नवंबर तक की है।

प्रश्न.342. जापान और अन्य देश कोरोनावायरस टीके की तीसरी ख़ुराक के बारे में क्या क़दम उठा रहे हैं / अंक - 6 किन लोगों को और किस क्रम में तीसरी ख़ुराक की पात्रता हासिल होगी?

उत्तर.342. कोरोनावायरस की "तीसरी ख़ुराक" से जुड़ी शृंखला की छठी कड़ी में हम जापान की स्थिति पर नज़र डालेंगे और जानेंगे कि तीसरी ख़ुराक की पात्रता किन लोगों को किस क्रम में हासिल होगी।

जापान का स्वास्थ्य मंत्रालय उन लोगों को कोरोनावायरस टीके की तीसरी ख़ुराक देने की योजना रखता है जिन्हें दो टीके लग चुके हैं और जो तीसरी ख़ुराक पाना चाहते हैं।

जापान में इस साल फ़रवरी में सर्वप्रथम स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों का टीकाकरण किया गया था। इसके बाद, अप्रैल से वरिष्ठ नागरिकों को और तदोपरान्त कुछ ख़ास बीमारियों से पीड़ित लोगों को टीका लगाया गया था।

तीसरी ख़ुराक के लिए प्राथमिकताएँ निर्धारित करने की मंत्रालय की योजना नहीं है। लेकिन दूसरा टीका लग जाने के लगभग 8 महीने बाद वह उन लोगों को बूस्टर ख़ुराक की पेशकश करेगा।

इसका मतलब यह है कि तीसरी ख़ुराक की पात्रता, स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों को दिसंबर से और वरिष्ठ नागरिकों को अगले साल जनवरी से मिल जाएगी।

इसके बाद उन लोगों को पात्रता हासिल होगी जो इन दोनों श्रेणियों से बाहर हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय, स्थानीय सरकारों से बूस्टर टीके लगाने की तैयारी करने का आह्वान कर रहा है। इन तैयारियों में आरक्षण स्वीकार करने के तरीकों पर चर्चा, टीकाकरण हेतु स्थल सुनिश्चित करना और दूसरी ख़ुराक के आठ महीने बाद लोगों को कूपन भेजना शामिल है।

उपरोक्त जानकारी 9 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.341. जापान और अन्य देश कोरोनावायरस टीके की “तीसरी ख़ुराक” के बारे में क्या क़दम उठा रहे हैं / अंक - 5 किन लोगों को सबसे पहले बूस्टर टीका लगवाना चाहिए?

उत्तर.341. कोरोनावायरस टीके की "तीसरी ख़ुराक" से जुड़ी इस शृंखला की पाँचवी कड़ी में विशेषज्ञ बता रहे हैं कि सर्वप्रथम स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित और अन्य ख़तरों की आशंका के लोगों को टीके की तीसरी ख़ुराक देनी चाहिए।

तोहो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक तातेदा काज़ुहिरो सरकारी कोरोनावायरस उपाय समिति के सदस्य हैं। तातेदा ने कहा कि गंभीर लक्षण उत्पन्न होने की आशंका वाले लोगों को टीके की तीसरी ख़ुराक देने में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं समेत जिन लोगों में गंभीर लक्षण होने का ख़तरा कम है, उन्हें अन्य शोध के परिणाम आने के पश्चात बूस्टर टीका लगाने का निर्णय लिया जा सकता है।

प्राध्यापक ने कहा कि टीकाकरण के बाद कुछ समय बीतने के बाद संक्रमण के समाचार भी मिल रहे हैं। लेकिन जाँच में पता चला है कि संक्रमण के कारण लोगों में गंभीर लक्षणों की उत्पत्ति और मृत्यु रोकने में टीकाकरण बेहद कारगर है। उन्होंने आगे जोड़ा कि वृद्धों और कमज़ोर प्रतिरक्षी तंत्र के लोगों में बीमारी के गंभीर लक्षण हो सकते हैं जिसके कारण कुछ लोगों की मृत्यु भी हो सकती है।

तातेदा ने कहा कि हालाँकि चिकित्सा कर्मी उच्च जोखिम श्रेणी में नहीं आते हैं लेकिन उन्हें तीसरा टीका लगाना आवश्यक है ताकि वे उच्च-जोखिम वाले रोगियों को संक्रमित न कर दें। उन्होंने कहा कि सरकार को प्राथमिकता निर्धारित करना होगी और जापान की टीकाकरण नीति निर्धारित करते समय टीकाकरण अभियान की प्रगति पर नज़र रखने के साथ ही विश्व भर में जारी शोध के परिणामों का अध्ययन भी करना आवश्यक है।

उपरोक्त जानकारी 8 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.340. जापान और अन्य देश कोरोनावायरस टीके की “तीसरी ख़ुराक” के बारे में क्या क़दम उठा रहे हैं / अंक - 4 कौन सा टीका लगवाना चाहिए?

उत्तर.340. कोरोनावायरस टीके की "तीसरी ख़ुराक" से जुड़ी इस शृंखला की चौथी कड़ी में समझते हैं कि बूस्टर टीका उसी कम्पनी का लगवाना चाहिये जिसके पहले दो टीके लगे हैं या फिर किसी अन्य कम्पनी का भी लगवाया जा सकता है।

फ़िलहाल यह तय नहीं किया जा सका है कि बूस्टर टीका और पहले दो टीके एक ही कम्पनी के होने चाहिए या फिर अलग-अलग कम्पनी के भी लगवाये जा सकते हैं। अमरीका और ब्रिटेन में नैदानिक परीक्षण किये जा रहे हैं जिसमें लोगों को अलग-अलग कम्पनियों के कोरोनावायरस टीके लगाकर जाँच की जा रही कि किस कम्पनी का बूस्टर टीका लगाने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

अमरीका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान ने फ़ाइज़र-बियोन्टेक, मॉडर्ना या जॉनसन एंड जॉनसन टीकों की पूरी ख़ुराक ले चुके 458 व्यस्कों पर किये जा रहे नैदानिक परीक्षण के मध्यावधि परिणाम अक्तूबर के आरंभ में जारी किये थे। शोधकर्ताओं ने परीक्षण के दौरान उन्हें पिछले टीकों वाली कम्पनी या अलग कम्पनी की तीसरी ख़ुराक का टीका लगाया और रोग प्रतिरक्षी स्तर के अंतर की जाँच की। शोधकर्ताओं ने बताया कि लोगों को पूर्व में लगे टीकों की दोनों ख़ुराक जिस भी कम्पनी की रही हों, लेकिन जब उन्हें फ़ाइज़र या मॉडर्ना का बूस्टर टीका लगाया तो कोरोनावायरस को प्रभावहीन करने वाली रोग प्रतिरक्षकों की क्षमता दो सप्ताह में 10 से 30 गुणा बढ़ गयी। इससे यह संकेत मिलता है कि इन दो कम्पनियों के बूस्टर टीकों से रोग प्रतिरोधक क्षमता काफ़ी बढ़ जाती है भले ही पहले दो टीके किसी अन्य कम्पनी के लगे हों।

एनआइएच का कहना है कि हालाँकि परीक्षण एक छोटे समूह पर किया गया था लेकिन सुरक्षा संबंधी को लेकर कोई आशंका नहीं मिली। संस्थान का कहना है वह डेल्टा प्रकार को प्रभावहीन करने वाली रोगप्रतिकारकों की क्षमता के स्तर की जानकारी भी उजागर करेगी।

उपरोक्त जानकारी 5 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.339. जापान और अन्य देश कोरोनावायरस टीके की “तीसरी ख़ुराक” के बारे में क्या क़दम उठा रहे हैं / अंक - 3 क्या कोरोनावायरस के टीके रोग-प्रतिकारक या एंटीबॉडी कम होने पर भी लम्बे समय तक प्रभावी रहते हैं?

उत्तर.339. कोरोनावायरस टीके की "तीसरी ख़ुराक" से जुड़ी इस शृंखला की तीसरी कड़ी में जानेंगे कि "तीसरी ख़ुराक" के बिना टीके लम्बे समय तक प्रभावी रहते हैं या नहीं।

कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि टीकों द्वारा प्रदान की जाने वाली सुरक्षा टीके की दूसरी ख़ुराक के बाद समय के साथ कम हो जाती है क्योंकि रोग-प्रतिकारक या एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने के स्तर में कमी आ जाती है। हालाँकि, अन्य अध्ययनों से पता चलता है कि रोग-प्रतिकारक में कमी के बावजूद, टीके संक्रमित लोगों को अस्पताल में भर्ती होने या गंभीर रूप से बीमार होने से रोकने में उस समय भी पर्याप्त प्रभावी होते हैं।

अमरीकी विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं के एक समूह ने रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केन्द्र की एक साप्ताहिक रिपोर्ट में टीकों की प्रभावशीलता पर किये गए अपने शोध के निष्कर्ष सितंबर में जारी किये। यह शोध अमरीका के 18 राज्यों के 21 अस्पतालों में किया गया था।

शोध में पाया गया कि कोरोनावायरस का फ़ाइज़र-बियोन्टेक टीका दूसरी ख़ुराक के बाद दो सप्ताह से 120 दिनों तक 91 प्रतिशत प्रभावी था और 121वें दिन से 77 प्रतिशत ही प्रभावी था। इस शोध से यह भी पता चला कि मॉडर्ना का टीका दूसरी ख़ुराक के बाद दो सप्ताह से 120 दिनों के बीच 93 प्रतिशत प्रभावी था और 121वें दिन से 92 प्रतिशत प्रभावी था।

जापान में और साथ ही दुनिया के अन्य स्थानों पर भी तथाकथित "संक्रमण में कमी" के दौरान पूरी तरह से टीकाकरण के बाद दो सप्ताह या उससे अधिक समय में लोगों के संक्रमित हो जाने की सूचना मिली है। हालाँकि, ऐसे लोगों का गंभीर रूप से बीमार होने का अनुपात कथित तौर पर कम रहा।

जापान के विश्व स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राष्ट्रीय केंद्र ने देश भर के 600 से अधिक चिकित्सा संस्थानों में कोविड-19 के उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती 3,400 से अधिक लोगों के डाटा की जाँच की। शोध में पाया गया कि गहन चिकित्सा केन्द्र में उपचार की आवश्यकता वाले लोगों में पूरी तरह से टीकाकरण वाले लोगों का अनुपात टीका नहीं लगावाने वाले लोगों की तुलना का आठवाँ भाग ही था और इसमें बुज़ुर्ग रोगी भी शामिल थे। शोध में यह भी पाया गया कि पूरी तरह से टीकाकृत बुज़ुर्ग रोगियों का मृत्यु दर बिना टीकाकरण वाले लोगों का एक तिहाई ही था। इन निष्कर्षों से यह संकेत मिलता है कि टीके रोग के गंभीर लक्षणों को बढ़ाने का ख़तरा कम करने में प्रभावी हैं।

उपरोक्त जानकारी 4 नवंबर तक की है।

प्रश्न.338. जापान और अन्य देश कोरोनावायरस टीके की “तीसरी ख़ुराक” के बारे में क्या क़दम उठा रहे हैं / अंक - 2 वायरस को निष्क्रय करने वाले रोग-प्रतिकारकों के स्तर में बढ़त

उत्तर.338. कोरोनावायरस टीके की “बूस्टर ख़ुराक” से जुड़ी शृंखला के दूसरे अंक में, वायरस को निष्क्रय करने वाले रोग-प्रतिकारकों के स्तर के बारे में हम टीका निर्माता कंपनियों द्वारा दी गयी जानकारी पर नज़र डालेंगे।

ख़बरों के अनुसार, कोरोनावायरस से बचाव हेतु पूर्ण टीकाकरण करवा चुके लोगों में टीके की प्रभावकारिता संभवतः समय के साथ कम होती जाती है। इसका कारण यह है कि वायरस को निष्क्रय कर संक्रमण से लोगों को बचाने वाले रोग-प्रतिकारकों का स्तर उत्तरोत्तर गिरता चला जाता है। इन ख़बरों के आधार पर, जहाँ कुछ देश कोरोनावायरस टीके की अतिरिक्त ख़ुराक प्रदान कर रहे हैं वहीं कुछ अन्य उन्हें प्रदान करने पर विचार कर रहे हैं।

फ़ाइज़र, मॉडर्ना और एस्ट्राज़ेनेका कंपनियों का कहना है कि बूस्टर ख़ुराक के कारण वारयस को निष्क्रिय करने वाले रोग-प्रतिकारकों का स्तर बढ़ने से टीके की प्रभावकारिता में वृद्धि होती है।

टीके की तीन ख़ुराक पाने वाले लोगों के समूह और दो ख़ुराक पाने वालों के समूह के बीच, कोरोनावायरस के डेल्टा प्रकार से निपटने में प्रभावी रोग-प्रतिकारकों के स्तर की तुलना करने हेतु फ़ाइज़र कंपनी ने एक परीक्षण किया था। उसके परिणाम दर्शाते हैं कि बूस्टर ख़ुराक के उपरान्त, 55 वर्ष या उससे कम आयु वाले लोगों में इन रोग-प्रतिकारकों का स्तर पाँच गुणा से अधिक बढ़ गया और 65 से 85 वर्ष की आयु वाले लोगों में यह स्तर 11 गुणा से अधिक पाया गया। उक्त दोनों समूह, टीकाकरण के एक महीने बाद इस परीक्षण में शामिल हुए थे।

मॉडर्ना कंपनी ने यह भी बताया कि 6 से 8 माह पूर्व पूर्ण टीकाकरण करवा चुके लोगों की तुलना में पूर्ण टीकाकरण के दो सप्ताह बाद ही बूस्टर ख़ुराक पाने वालों में वायरस के डेल्टा प्रकार से निपटने में प्रभावी रोग-प्रतिकारकों का स्तर 42 गुणा अधिक पाया गया।

एस्ट्राज़ेनेका ने भी अतिरिक्त ख़ुराक के बाद रोग-प्रतिकारकों के स्तर में बढ़ोतरी की सूचना दी।

उपरोक्त जानकारी 2 नवंबर तक की है।

प्रश्न.337. जापान और अन्य देश कोरोनावायरस टीके की “तीसरी ख़ुराक” के बारे में क्या क़दम उठा रहे हैं / अंक - 1 क्या बूस्टर टीकों को अनिवार्य करना चाहिए?

उत्तर.337. अमरीका सहित जिन अन्य देशों ने आरम्भिक दिनों में ही टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया था उन्होंने टीकों की तीसरी ख़ुराक यानि बूस्टर टीका लगाना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि समय के साथ टीकों की प्रभावशीलता कम हो जाती है। “बूस्टर टीका” यानि तीसरी ख़ुराक पर इस नवीन शृंखला का यह प्रथम अंक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के सलाहकारों ने 11 अक्तूबर को कमज़ोर रोग प्रतिरक्षातंत्र के लोगों को फ़ाइज़र-बियोन्टेक, मॉडर्ना और एस्ट्राज़ेनेका का कोरोनावायरस बूस्टर टीका लगाने की अनुशंसा की थी।

विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य या गंभीर रूप से क्षीण प्रतिरक्षी तंत्र के लोगों में टीकों की दोनों ख़ुराक लेने के बावजूद गंभीर रूप से बीमार होने का बड़ा ख़तरा रहता है क्योंकि यह उन्हें समुचित सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थ हो सकती है।

अमरीका सरकार ने कोरोनावायरस टीके की दूसरी ख़ुराक लगाने के थोड़ा समय पश्चात बूस्टर टीका लगाने का योजना की घोषणा की है। सरकार का कहना है कि कोरोनावायरस टीकों का प्रभाव समय के साथ कम हो जाता है।

अमरीकी खाद्य और औषधि प्रशासन यानि एफ़डीए ने सितम्बर में फ़ाइज़र-बियोन्टेक कोरोनावायरस बूस्टर टीकों के आपात उपयोग को स्वीकृति दे दी थी। 65 वर्ष या उससे अधिक आयुवर्ग, गंभीर रूप से बीमार होने की आशंका वाले 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग तथा चिकित्सा कर्मी और संक्रमित होने की अधिक संभावना वाले लोग बूस्टर टीका लगवाने के पात्र रहेंगे।

एफ़डीए ने कहा कि टीके की दूसरी ख़ुराक लगाने के छः महीने पश्चात बूस्टर टीका यानि तीसरी ख़ुराक दी जाएगी। बूस्टर टीका अभियान आरम्भ हो चुका है।

एफ़डीए की सलाहकार समिति ने 14 अक्तूबर को मॉडर्ना टीकों के लिए भी समान अनुशंसा करते हुए 65 साल या उससे अधिक आयु या गंभीर बीमारी की आशंका वाले 18 साल या उससे अधिक आयु के लोगों को तीसरा टीका लगवाने का प्रस्ताव दिया।

उपरोक्त जानकारी 1 नवम्बर तक की है।

प्रश्न.336. कोविड-19 के दीर्घकालिक प्रभाव / अंक 4 - टीकाकरण से क्या बचाव होगा?

उत्तर.336. जापान में कोरोनावायरस संक्रमण के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों के बारे में सर्वेक्षण के परिणामों पर शृंखला की यह चौथी और अंतिम कड़ी है।

वैश्विक स्वास्थ्य और औषधि के राष्ट्रीय केन्द्र और अन्य संस्थानों ने फ़रवरी 2020 के बाद कोविड-19 से स्वस्थ हुए लोगों का सर्वेक्षण किया। सर्वेक्षणकर्ता दल ने 20 से 69 की आयुवर्ग के 457 लोगों के उत्तरों का विश्लेषण किया।

सर्वेक्षण में हिस्सा लेनेवाले केन्द्र के एक शोधकर्ता, मोरिओका शिनइचिरो ने कहा कि महिलाओं में दुष्प्रभावों की संभावना अधिक मानी जा रही थी। शोध के अनुसार महिलाओं में बालों का झड़ना, थकान और गंध तथा स्वाद के पहचान जैसी समस्यायें वास्तव में अधिक देखी गयीं। गंभीर स्थिति में अधिक वज़न वाले वृद्ध पुरुषों में कोरोनावायरस के कारण गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा भी अधिक है। मोरिओका कहते हैं कि यह स्पष्ट नहीं है कि महिलाओं में स्वाद और गंध को प्रभावित करने वाले दुष्प्रभाव अधिक क्यों देखे जा रहे हैं।

उन्होंने जोड़ा कि छरहरी युवतियों को भी दुष्प्रभावों की संभावनाओं को हल्के में नहीं लेना चाहिये। वास्तव में, उन्हें सर्वेक्षण के परिणामों को गंभीरता से लेना चाहिए जिनके अनुसार ऐसे लोगों में गंध और स्वाद की दुष्क्रिया की संभावना अधिक हो सकती है। मोरिओका कहते हैं कि युवाओं में गंध और स्वाद सम्बन्धी समस्या अधिक देखी जा रही है। कोविड-19 के दुष्प्रभाव केवल युवा ही नहीं बल्कि हल्के लक्षण से पीड़ित लोगों, दोनों में ही बड़ी समस्या है।

साथ ही, जिन लोगों को टीके नहीं लगे हैं उनकी तुलना में टीके की दोनों ख़ुराक ले चुके लोगों में 28 दिन से ज़्यादा समय तक दुष्प्रभाव नहीं देखे गये। यानि टीके दुष्प्रभावों से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं और युवाओं को टीकों की दोनों ख़ुराक लगवाना अति आवश्यक है। इसके अलावा, दोनों टीके लगवाने के बाद भी बचाव के समुचित उपाय अपनाते रहना आवश्यक है क्योंकि कोरोनावायरस संक्रमण और उसके दुष्प्रभावों का ख़तरा बना हुआ रहता है।

उपरोक्त जानकारी 29 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.335. कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभाव / अंक 3 - वायरस रोधी दवाओं का प्रभाव और स्त्री-पुरुषों में इन प्रभावों का अंतर

उत्तर.335. कोरोनावायरस संक्रमण के दीर्घकालिक प्रभावों से जुड़ी इस शृंखला की तीसरी कड़ी में प्रयोग की जा रही वायरस रोधी दवाओं के प्रभाव और स्त्री-पुरुषों में इन प्रभावों में अंतर पर प्रकाश डाला गया है।

वैश्विक स्वास्थ्य एवं औषधि के राष्ट्रीय केंद्र और अन्य संगठनों ने कोविड-19 से ठीक हुए लोगों पर फरवरी 2020 से एक सर्वेक्षण किया। 20 से 79 वर्ष की आयु के 457 लोगों की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया गया।

शोधकर्ताओं ने जानना चाहा कि कोविड-19 के लक्षणों से पीड़ित होने के दौरान उन्हें किस प्रकार का उपचार मिला, जैसे कि उन्हें कौन सी वायरस रोधी दवा या स्टेरॉयड दिया गया था और क्या वे लंबे समय तक कोविड को प्रभावित करते हैं। वे कोई स्पष्ट संबंध प्राप्त करने में सफल तो नहीं हुए पर वे लोगों को टीका लगवाने और संक्रमण-रोधी उपाय करने की सलाह देते हैं क्योंकि यदि आप संक्रमित ही नहीं होते हैं तो आपको कोई दीर्घकालिक प्रभाव नहीं झेलना पड़ेगा।

कोविड से संक्रमित होने पर स्त्री-पुरुषों में दीर्घकालिक परिणाम में अंतरों पर किये गए सर्वेक्षण के आँकड़े -

डाटा से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में गंधानुभूति में विकार होने की संभावना लगभग 1.9 गुणा अधिक है, स्वादानुभूति में विकार होने की संभावना लगभग 1.6 गुणा अधिक है, थकान महसूस होने की संभावना लगभग दोगुणी है और बाल गिरने की संभावना लगभग तीन गुणा अधिक है।

सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि व्यक्ति जितना युवा और पतला होता है, उसमें गंधानुभूति या स्वादानुभूति में विकार होने की अधिक संभावना तो होती ही है और उसके दीर्घकालिक पीड़ित होने की संभावना भी अधिक होती है, भले ही उसमें कोविड-19 के हल्के लक्षण ही क्यों न हो।

उपरोक्त जानकारी 28 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.334. कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभाव / अंक 2 - साँस फूलना, बाल झड़ना, विस्मृति

उत्तर.334. कोरोनावायरस अथवा कोविड के दीर्घकालिक प्रभावों के विषय पर जापान में हुए एक सर्वेक्षण के परिणामों की इस नयी शृंखला की दूसरी कड़ी।

वैश्विक स्वास्थ्य एवं औषधि के राष्ट्रीय केंद्र तथा अन्य संस्थानों ने फ़रवरी 2020 से कोविड-19 से ठीक हुए लोगों का सर्वेक्षण किया। समूह ने 20 से लेकर 80 वर्ष की आयु तक के 457 प्रतिभागियों के उत्तरों का विश्लेषण किया।

लक्षणों के आधार पर सर्वेक्षण के और आँकड़े निम्नलिखित हैं-

4. साँस फूलना
लगभग 20 प्रतिशत प्रतिभागियों को लक्षण विकसित होने के बाद एक माह तक यह समस्या हुई। लगभग 5 प्रतिशत को 100 दिन बाद तक, 3.9 प्रतिशत को 6 माह बाद तक और 1.5 प्रतिशत को 1 वर्ष बाद तक भी यह समस्या है।

5. बाल झड़ना
कुछ लोगों ने पाया कि संक्रमण के बाद उनके बाल झड़ रहे हैं। कुछ महीनों के बाद लगभग 10 प्रतिशत लोगों ने इसकी शिकायत की। लगभग 8 प्रतिशत को 100 दिन बाद, 3.1 प्रतिशत को 6 महीनों बाद और 0.4 प्रतिशत को एक वर्ष बाद तक यह समस्या रही।

6. स्मरणशक्ति कम होना और अन्य समस्याएँ
भूलने और स्मरणशक्ति कम होने के बारे में 11.4 प्रतिशत ने 6 महीने बाद और 5.5 प्रतिशत ने 1 वर्ष बाद शिकायत की। एकाग्रता में कमी आने को लेकर 9.8 प्रतिशत को 6 महीने बाद तक और 4.8 प्रतिशत को 1 वर्ष बाद तक यह समस्या रही। इसके अतिरिक्त कुछ लोगों ने विषाद की शिकायत भी की। इनमें से 8.1 प्रतिशत को 6 महीने और 3.3 प्रतिशत को 1 वर्ष बाद तक यह समस्या रही।

यह जानकारी 27 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.333. कोरोनावायरस के दीर्घकालिक प्रभाव / अंक 1 - गंधानुभूति, स्वादानुभूति और थकान

उत्तर.333. इस नयी शृंखला में, हम कोरोनावायरस अथवा कोविड के दीर्घकालिक प्रभावों के विषय पर जापान में हुए एक सर्वेक्षण के परिणामों पर नज़र डालेंगे।

राष्ट्रीय वैश्विक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा केन्द्र यानि नेशनल सेंटर फ़ॉर ग्लोबल हेल्थ एण्ड मेडिसिन ने अन्य संगठनों के साथ मिलकर उन लोगों का सर्वेक्षण किया है जो फ़रवरी 2020 के बाद से कोविड-19 से उबर चुके हैं। उन्होंने 20 से 79 वर्ष की आयु के 457 लोगों के जवाबों का विश्लेषण किया।

इसके नतीजे दर्शाते हैं कि संक्रमण की शुरुआत या निदान के 6 महीने बाद 26.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं में और 12 महीने बाद 8.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं में संक्रमण से जुड़े कुछ लक्षण पाये गए। लक्षणों के आधार पर आँकड़े निम्ललिखित हैं-

1. गंधानुभूति की समस्या
संक्रमण की शुरुआत या निदान के लगभग 100 दिनों के बाद 10 प्रतिशत उत्तरदाताओं को इस समस्या का सामना करना पड़ा था। छः महीने के बाद यह आँकड़ा 7.7 प्रतिशत, 200 दिनों के बाद 5 प्रतिशत से कुछ अधिक, और एक वर्ष के बाद 1.1 प्रतिशत रहा।

2. स्वादानुभूति की समस्या
100 दिनों के बाद लगभग 5 प्रतिशत उत्तरदाताओं को इस समस्या का सामना करना पड़ा था। छः माह के बाद यह आँकड़ा 3.5 प्रतिशत और एक वर्ष के बाद 0.4 प्रतिशत रहा।

3. थकान
संक्रमण के तुरंत बाद 50 प्रतिशत उत्तरदाताओं को इस समस्या का सामना करना पड़ा था। 100 दिनों के बाद यह आँकड़ा 10 प्रतिशत, छः महीने के बाद 6.6 प्रतिशत, और एक वर्ष के बाद 3.1 प्रतिशत रहा।

यह जानकारी 26 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.332. क्या बच्चों का कोविड-19 का टीकाकरण होना चाहिये / भाग-6 इसके लाभ और ख़तरे क्या हैं?

उत्तर.332. जापान सरकार कोरोनावायरस टीकाकरण अभियान का विस्तार कर इसमें प्राथमिक स्कूल के छात्रों को भी शामिल करने पर विचार कर रही है। बच्चों और टीकाकरण शृंखला की छठी और अंतिम कड़ी में टीकों के लाभ और ख़तरे पर चर्चा करेंगे।

अमरीकी औषधि निर्माता कम्पनी फ़ाइज़र और उसकी जर्मन साझेदार बियोन्टेक ने 5 से 11 वर्ष के बच्चों के लिए अपने टीके सुरक्षित और प्रभावशाली होने का दावा किया है। उन्होंने इन टीकों के आपात उपयोग की स्वीकृति के लिए अमरीकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन में आवेदन किया है। अमरीका में यह स्वीकृति मिलने पर जापान भी इस आयु वर्ग के बच्चों को टीकाकरण अभियान में शामिल करने पर अध्ययन कर सकता है।

कितासातो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक नाकायामा तेत्सुओ कहते हैं भविष्य में टीकाकरण अभियान पर बहस के दौरान अमरीका और जापान के बीच अलग अलग परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

नाकायामा कहते हैं कि अमरीकी सरकार प्राथमिक स्कूल के बच्चों को टीका लगवाने पर विचार कर रही है क्योंकि टीकाकरण अभियान की धीमी होती गति के बीच वहाँ स्कूलों में सामूहिक संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। वह आगे कहते हैं लेकिन यहाँ जापान में उम्र के दूसरे, तीसरे दशक के युवाओं तथा प्राथमिक स्कूल के बच्चों के अभिभावकों में टीकाकरण दर बढ़ सकती है, अतः अधिकारी अभी थोड़ा इंतज़ार कर सकते हैं।

संक्रमण के लगातार प्रसार के बीच लोगों की सुरक्षा के लिए टीका एक असरदार बचाव है। इस वजह से टीकाकरण के लिए पात्र लोगों के आयु वर्ग को विस्तृत करने में रुचि बढ़ रही है ताकि बच्चों में संक्रमण रोका जा सके। अधिकारियों को किसी भी तरह का निर्णय लेने से पूर्व टीकाकरण के प्रभावशाली होने और अन्य लाभ तथा गंभीर दुष्प्रभाव के बीच संतुलन बनाना आवश्यक होगा। साथ ही इस बात पर भी गौर करना होगा कि क्या अभिभावक और बच्चे टीका लगवाना चाहते हैं या नहीं।

उपरोक्त जानकारी 25 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.331. क्या बच्चों को कोविड-19 टीकाकरण होना चाहिए / भाग-5 बच्चों में उसके क्या दुष्प्रभाव देखे जा सकते हैं?

उत्तर.331. जापान सरकार कोरोनावायरस टीकाकरण अभियान का विस्तार कर इसमें प्राथमिक स्कूल के छात्रों को भी शामिल करने पर विचार कर सकती है। बच्चों और टीकाकरण शृंखला के इस अंक में टीकों के दुष्प्रभावों पर चर्चा की जा रही है।

अमरीकी औषधि निर्माता कम्पनी फ़ाइज़र ने 29 सितम्बर को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि 5 से 11 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों पर हुए नैदानिक परीक्षण में देखे गये दुष्प्रभाव 16 से 25 साल की आयुवर्ग में पाये गए दुष्प्रभावों के समरूप ही थे। 16 से 25 साल के युवाओं को सामान्य मात्रा में टीके की ख़ुराक दी गयी थी।

कितासातो विश्वविद्यालय में प्राध्यापक और बालरोग विशेषज्ञ नाकायामा तेत्सुओ का मानना है कि टीका बच्चों के लिए ख़तरनाक नहीं है लेकिन इसके कारण कुछ दुष्प्रभाव देखे जा सकते हैं। वह कहते हैं कि दुष्प्रभाव स्वरूप बच्चों में बुखार की संभावना हो सकती है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कुछ बच्चे बुखार के प्रति संवेदनशील होते हैं जिसके कारण उनमें ऐंठन और कंपन देखा जा सकता है। नाकायामा ने ज़ोर दिया कि बच्चों को टीका लगवाने से पूर्व अभिभावकों को यह बात अच्छी तरह से समझनी होगी। साथ ही उन्होंने पारिवारिक चिकित्सक द्वारा ही टीका लगवाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया क्योंकि पारिवारिक चिकित्सक बच्चों की शारीरिक स्थिति से अवगत होते हैं।

फ़ुकुओका नर्सिंग कॉलेज के प्राध्यापक और जापान टीकाकरण संस्था के अध्यक्ष ओकादा केन्जि कहते हैं कि टीका उन्हीं बच्चों को लगवाया जाये जिन्हें किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या है या जो किसी तरह की प्रवेश परीक्षा देने वाले हैं या जो टीका लगवाना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि 12 साल से कम आयु के बच्चों का टीकाकरण उच्च प्राथमिकता नहीं रहेगी।।

ओकादा कहते हैं कि टीकों के परिणामस्वरूप बच्चों में गंभीर दुष्प्रभाव देखे जाने पर भविष्य में समस्या खड़ी हो जायेगी। स्वस्थ बच्चों को टीका लगवाते समय संक्रमण के गंभीर लक्षण, टीकों की प्रभावकारिता और बच्चों की सुरक्षा जैसे सभी मुद्दों के बीच संतुलन बनाना महत्त्वपूर्ण है।

उपरोक्त जानकारी 22 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.330. क्या बच्चों को कोविड-19 टीकाकरण होना चाहिए / भाग-4 बच्चों के टीकाकरण से लाभ

उत्तर.330. जापान सरकार कोविड-19 टीकाकरण का दायरा बढ़ाते हुए प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के टीकाकरण पर विचार कर सकती है। बच्चों और टीकाकरण से जुड़ी इस शृंखला की चौथी कड़ी में बच्चों के टीकाकरण से होने वाले लाभों के विषय पर रोशनी डाली जाएगी।

कोविड-19 टीकों के कुछ स्तर के दुष्प्रभावों को देखते हुए बच्चों में टीकाकरण के लाभ वयस्कों की तुलना में कम दिखाई देते हैं क्योंकि युवा वर्ग शायद ही कभी इस वायरस से गंभीर रूप से बीमार होता है।

तो प्रश्न उठता है कि इस टीकीकरण के क्या लाभ हैं?
- संक्रमण और गंभीर बीमारी से बचाव
वर्तमान में प्रयोग किए जा रहे कोविड-19 के टीके संक्रमण और गंभीर बीमारियों को रोकने में वायरस के डेल्टा संस्करण पर भी अत्यंत प्रभावी रहे हैं।


- विद्यालयों तथा निजी कक्षाओं में वायरस के प्रकोप पर रोक
संक्रमण की पाँचवीं लहर के दौरान कोरोनावायरस संक्रमण के कई मामले विद्यालय के बच्चों में और विशेष उद्देश्य के लिए बने निजी विद्यालयों में जाने वाले बच्चों में देखे गये थे। ऐसे समूहों में संक्रमण को कम करने में टीकाकरण को प्रभावी बताया गया है।

-घरों में संक्रमण के ख़तरे को कम करना
बच्चों को टीका लगाने से उन लोगों के घरों में संक्रमण फैलने के ख़तरे को कम करने में सहायता मिलती है जिन्हें टीका नहीं लगाया गया है या जो टीका नहीं लगवा सकते हैं।

उपरोक्त जानकारी 21 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.329. क्या बच्चों का कोविड-19 टीकाकरण होना चाहिए / भाग-3 बच्चों में गंभीर मामले बहुत कम

उत्तर.329. जापान सरकार टीकाकरण कार्यक्रम को प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों तक विस्तार देने पर विचार कर सकती है। बच्चे और टीकाकरण पर इस शृंखला की तीसरी कड़ी में हम गंभीर रूप से बीमार पड़ने वाले बच्चों के अनुपात को देखेंगे।

यह पहले से ही ज्ञात है कि कोरोनावायरस से संक्रमित होने के बावजूद अधिकतर बच्चों में हल्के लक्षण विकसित होते हैं और कम बच्चे ही गंभीर रूप से बीमार होते हैं। जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा संकलित आँकड़े दर्शाते हैं कि 15 सितंबर 2021 तक जापान में लगभग 16,25,000 कोरोनावायरस मामलों की पुष्टि हो चुकी थी जिनमें से 14,229 लोगों की मौत हो गयी। इसका अर्थ है कि मृत्यु दर लगभग 0.9 प्रतिशत रही। कुल मामलों में से लगभग 84,000 मामले 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों से जुड़े थे जबकि किशोरावस्था वाले रोगियों की संख्या लगभग 1,63,000 थी। इनमें से 11 से 19 वर्ष की आयु के 1 मरीज़ की मौत हुई। स्वास्थ्य मंत्रालय का एक और आँकड़ा दर्शाता है कि पिछले वर्ष जून से अगस्त के बीच कोविड-19 रोगियों में से 10 वर्ष से कम आयु वाले बच्चों में गंभीर मामले 0.09 प्रतिशत रहे और किशोरावस्था वाले रोगियों में कोई गंभीर मामला सामने नहीं आया। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले से बीमार बच्चों में गंभीर लक्षण विकसित हो सकते हैं हालाँकि अब तक बच्चों में गंभीर मामले बहुत कम रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति का कहना है कि अधिकतर मामलों में संक्रमण घरों के अंदर बड़ों से बच्चों में हुआ है और ऐसे मामले अपेक्षाकृत कम हैं जिनमें वायरस बच्चों से बड़ों में पहुँचा हो। समिति का कहना है कि यह स्थिति इन्फ़्लुएंज़ा वायरस से विपरीत लगती है जो अक्सर विद्यालयों में संक्रमित हुए बच्चों से उनके घर के सदस्यों में फैलता है।

उपरोक्त जानकारी 20 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.328. क्या बच्चों का कोविड-19 टीकाकरण होना चाहिए / भाग-2 जापान में इस विषय पर चर्चा शुरू

उत्तर.328. जापान सरकार, प्राथमिक विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों का टीकाकरण शुरू करने पर विचार कर सकती है। बच्चों और टीकाकरण से जुड़ी इस शृंखला के दूसरे अंक में, हम जापान में बच्चों के टीकाकरण पर जानेंगे।

अमरीकी दवा कंपनी फ़ाइज़र और उसकी जर्मन साझेदार कंपनी बियोन्टेक द्वारा 12 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के कोरोनावायरस टीकाकरण हेतु आवेदन किये जाने के बाद 28 मई को, जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की कि वह इस आयु वर्ग का टीकाकरण शुरू करेगा। 31 मई को, 12 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों का जापान के औपचारिक टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल होने के साथ ही उनका टीकाकरण शुरू हो गया।

5 से 11 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए टीके की सुरक्षा और प्रभावकारिता का पता लगाने के लिए फ़ाइज़र और बियोन्टेक द्वारा किये गए नैदानिक परीक्षण के परिणामों की घोषणा के बाद, जापान इस बात का मूल्यांकन कर सकता है कि इस आयु वर्ग के बच्चों को देश के टीकाकरण कार्यक्रम में जोड़ा जा सकता है या नहीं।

बाल रोग विशेषज्ञ और कितासातो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक नाकायामा तेत्सुओ से हमने प्राथमिक विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के टीकाकरण पर उनके विचार जानने चाहे। जवाब में नाकायामा ने कहा कि विद्यालयों में, विद्यालय से छुट्टी के बाद के बाल-देखभाल कार्यक्रमों में और निजी स्तर पर आयोजित कक्षाओं में संक्रमण फैलने की ख़बरों तथा बच्चों के लिए किसी भी टीके की अनुपलब्धता के मद्देनज़र, कोरोनावायरस का प्रसार रोकने का कोई तरीका होना महत्त्वपूर्ण है।

यह जानकारी 19 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.327. क्या बच्चों को कोविड-19 टीकाकरण होना चाहिए / भाग-1 अमरीका बच्चों के लिए टीकाकरण की आयु घटाकर 5 वर्ष कर रहा है

उत्तर.327. प्राथमिक स्कूल के बच्चों को कोविड-19 का टीका लगवाने के लिए स्वीकृति देने पर अमरीका विचार कर रहा है। इस नयी शृंखला के पहले अंक में जानेंगे कि अमरीका में बच्चों के टीकाकरण पर क्या हो रहा है।

20 सितम्बर को, अमरीकी दवा निर्माता कम्पनी फ़ाइज़र और उसकी जर्मन साझेदार बियोन्टेक ने अमरीका और अन्य देशों में 5 से 11 साल की आयु के 2,268 बच्चों पर कोरोनावायरस टीकों के नैदानिक परीक्षण के परिणाम जारी किये। इन बच्चों को व्यस्कों के टीकों की एक तिहाई मात्रा में दो ख़ुराक दी गयी। एक महीने बाद शोधकर्ताओं द्वारा बच्चों में वायरस को खत्म करने के लिए रोग प्रतिकारक क्षमता की जाँच करने पर पाया कि उनमें हृष्ट-पुष्ट प्रतिरोधक क्षमता पायी गयी है। प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया और उसके दुष्प्रभाव 16 से 25 वर्ष की आयु वर्ग को लगाये गये सामान्य टीकों के समरूप ही थी। औषधि निर्माता कम्पनियों ने 7 अक्तूबर को घोषणा की कि उन्होंने 5 से 11 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों में टीकों के आपात प्रयोग की स्वीकृति के लिए खाद्य और औषधि सुरक्षा प्रशासन (एफ़डीए) में औपचारिक आवेदन कर दिया है।

शुरुआत में फ़ाइज़र का टीका 16 वर्ष से अधिक आयु के किशोरों को लगाया गया था। मई में, यह आयु घटा कर इसमें 12 से 15 वर्ष के किशोरों को भी शामिल किया गया। कम्पनी ने 31 मार्च को किये गए नैदानिक परीक्षण में इस आयु वर्ग के लिए टीकों के सुरक्षित और प्रभावशाली होने की पुष्टि की थी। इसके बाद, 9 अप्रैल को इस आयु वर्ग के टीकाकरण के लिए आवेदन किया गया और एफ़डीए ने 10 मई को आपात प्रयोग के लिए स्वीकृति प्रदान की। तत्पश्चात, 13 मई से 12 साल से अधिक आयु के किशोरों के लिए कोविड-19 टीकाकरण अभियान शुरू हो गया।

उपरोक्त जानकारी 18 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.326. कोविड-19 के नये मामलों में अचानक आयी गिरावट पर विशेषज्ञों की राय / अंक-5 राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान के महानिदेशक वाकिता ताकाजि इस बारे में क्या कहते हैं?

उत्तर.326. अगस्त के अंत से जापान में कोरोनावायरस के दैनिक नये मामले लगातार घट रहे हैं। इस शृंखला की पाँचवे और अंतिम अंक में जापान में राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान के महानिदेशक वाकिता ताकाजि बताते हैं कि कोरोनावायरस के नये मामलों में आयी इस अचानक और तीव्र गिरावट की क्या वजह है।

वाकिता ताकाजि कोरोनावायरस संक्रमण के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष भी हैं। वे कहते हैं कि कई विशेषज्ञ इस तीव्र गिरावट का श्रेय शाम के समय मनोरंजन के स्थलों पर जाने वाले लोगों की संख्या में कमी और टीकाकरण अभियान को देते हैं लेकिन यह तथ्य तीव्र गिरावट को पूरी तरह से नहीं समझा पाते हैं।

वाकिता कहते हैं कि संक्रमण की इस नयी लहर में संक्रमित युवा वृद्धों में संक्रमण नहीं फैला सके। इसका एक कारण टीकाकरण भी रहा। वह कहते हैं कि अक़्सर देखा गया है, युवाओं में संक्रमण हमेशा तेज़ी से फैलता है और उतनी ही तेज़ी से घटता भी है। संभव है कि युवाओं के बीच संक्रमण प्रसार की यह प्रवृति का असर इस नयी लहर पर भी देखा गया। लेकिन अभी इस पर अध्ययन और विश्लेषण आवश्यक है क्योंकि अभी यह नहीं पता चल सका है कि इन विभिन्न कारणों में से प्रत्येक का कितना असर रहा है।

उनसे पूछा गया कि वायरस में उत्परिवर्तन हुआ है या नहीं। इसके उत्तर में उन्होंने कहा कि उनके विचार में ऐसा नहीं है क्योंकि संक्रमण में उफान के दौर और अभी के वायरस के जीनोम के विश्लेषण में कुछ अंतर नहीं मिला। वह कहते हैं कि वायरस पहले की तुलना में ज़रा भी कमज़ोर नहीं हुआ है।

वाकिता से पूछा गया कि अब क्या उपाय करने चाहिए? वह कहते हैं कि देश के कुछ हिस्सों में विदेशियों के बीच संक्रमण फैल रहा है क्योंकि उनमें टीकाकरण की दर कम है। सरकार को ऐसे लोगों के बीच टीकाकरण प्रोत्साहित करना आवश्यक है जिन्हें जन स्वास्थ्य सेवाएँ आसानी नहीं मिल पाती हैं। साथ ही उन क्षेत्रों और समुदायों के बीच टीकाकरण अभियान ले जाना चाहिए जिन्हें टीके प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है।

उपरोक्त जानकारी 15 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.325. कोविड-19 के नए मामलों में अचानक आयी गिरावट पर विशेषज्ञों की राय / अंक-4 क्योतो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक निशिउरा हिरोशि के इस बारे में क्या विचार हैं?

उत्तर.325. जापान में अगस्त के अंत से कोविड-19 के नये संक्रमण मामलों की दैनिक संख्या में गिरावट देखी जा रही है और इस गिरावट के कारणों पर विशेषज्ञों की राय से जुड़ी इस शृंखला की चौथी कड़ी में प्रस्तुत है क्योतो विश्वविद्यालय के प्राध्यापक निशिउरा हिरोशि के विचार।

प्राध्यापक निशिउरा स्वास्थ्य मंत्रालय के कोरोनावायरस संक्रमण की विशेषज्ञ समिति के सदस्य हैं। उनका कहना है कि अभी किये जा रहे विश्लेषण के परिणाम मिलने के बाद वह गिरावट के कारणों को पूरी तरह से स्पष्ट करना चाहेंगे।

निशिउरा कहते हैं यह तो निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि वायरस की प्रजनन दर, जो इंगित करती है कि एक संक्रमित व्यक्ति कितने लोगों में वायरस फैलाएगा, छुट्टियों या लंबे सप्ताहांत के बाद बढ़ने लगती है। उनका कहना है कि देश के कुछ हिस्सों में कोरोनावायरस आपातकाल की स्थिति के होते हुए भी इस दर से वायरस की वृद्धि छुट्टियों के बाद भी देखी गयी थी। उनका कहना है कि अवकाश के दौरान प्रत्येक व्यक्ति का व्यवहार, जैसे कि ऐसे लोगों से मिलना, जिन्हें वे शायद ही कभी देखते हों या दूर की यात्रा करना और बाहर भोजन करना, द्वितीयक संक्रमण मामलों को बढ़ावा देने में योगदान करता है।

उनका अनुसार जापान में टीकाकरण में और प्रगति होने के बाद भी व्यक्ति-से-व्यक्ति संपर्क में अनियंत्रित वृद्धि निश्चित रूप से संक्रमण की एक और बड़ी लहर को जन्म देगी। उनका कहना है कि सर्दियों में इस वायरस के संभावित प्रकोप के लिए हमें तैयार रहना ही होगा।

उपरोक्त जानकारी 14 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.324. कोविड-19 के नये मामलों में अचानक आयी गिरावट पर विशेषज्ञों की राय / अंक-3 उष्णदेशीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नागासाकि विश्वविद्यालय के प्राध्यापक यामामोतो तारो इस बारे में क्या कहते हैं?

उत्तर.324. अगस्त माह के अंत से संक्रमण के दैनिक मामलों में गिरावट दर्ज की गयी है। इस शृंखला के तीसरे अंक में विशेषज्ञों से जानेंगे इस तीव्र गिरावट का कारण।

नागासाकि विश्वविद्यालय के उष्णदेशीय आयुर्विज्ञान संस्थान के प्राध्यापक यामामोतो तारो का कहना है कि जब तक वह इस बात की जाँच न कर लें कि स्थानीय नगरपालिकाओं द्वारा प्रतिदिन दर्ज किये गए मामलों की वास्तविक स्थिति से तुलना कितनी सही है वह गिरावट के पीछे के कारकों का सटीक आकलन नहीं कर सकते।

हालाँकि यामामोतो कहते हैं कि उनके अनुसार अधिकतर लोगों में टीकाकरण या वास्तव में वायरस से संक्रमित होने के बाद प्रतिरक्षा विकसित हो गयी है। उनका कहना है कि यदि वायरस लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाता है और यदि एक ऐसे समाज का लक्ष्य रखा जाए जहाँ मानवीय, सामाजिक और आर्थिक पहलुओं के संदर्भ में एक निश्चित स्तर पर बीमारी स्वीकार्य हो तो इसकी सहनशीलता के स्तर पर चर्चा होनी चाहिए। उनका मानना है कि अब जापान एक नये चरण में प्रवेश कर रहा है जहाँ संक्रमण की स्थिति निर्धारित करने के मानदंड संक्रमण मामलों की संख्या से हटकर गंभीर रूप से बीमार रोगियों या मौतों की संख्या पर केंद्रित हो रहे हैं।

भविष्य की प्रतिक्रिया पर यामामोतो का कहना है कि यदि वायरस को नष्ट करने के सभी उपाय और प्रतिबंध जारी रहने के बावजूद वायरस में अनुवांशिक परिवर्तन होने पर यह और अधिक संक्रामक हो जाता है तो ऐसे में लोग वर्तमान की अपेक्षा और भी जटिल स्थिति में आ सकते हैं। वह कहते हैं कि व्यापक दृष्टिकोण से कोरोनावायरस के साथ सह-अस्तित्व के बारे में सोचना आवश्यक है लेकिन व्यक्तिगत दृष्टिकोण से इसमें स्वयं या परिवार के सदस्यों के गंभीर रूप से बीमार होने या मरने का जोखिम होगा। इसलिए यामामोतो का कहना है कि उपचार की व्यवस्था और स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को एक सुरक्षा जाल के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए जो कम से कम मृत्यु को रोक सके।

उपरोक्त जानकारी 13 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.323. कोविड-19 के नये मामलों में अचानक आयी गिरावट पर विशेषज्ञों की राय / अंक-2 स्वास्थ्य एवं कल्याण अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्राध्यापक वादा कोजि इस बारे में क्या कहते हैं?

उत्तर.323. अगस्त माह के अंत से संक्रमण के दैनिक मामलों में गिरावट दर्ज की गयी है। इस शृंखला के दूसरे अंक में भी विशेषज्ञों से जानेंगे इस तीव्र गिरावट का कारण।

अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं कल्याण विश्वविद्यालय के प्राध्यापक वादा कोजि, स्वास्थ्य मंत्रालय की कोरोनावायरस प्रतिक्रिया संबंधी विशेषज्ञ समिति के सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि टीकाकरण में प्रगति और मौसमी कारक, मामलों में गिरावट के संभावित कारणों में शामिल हैं। उनका आशय यह है कि कम तापमान के कारण वातानुकूलित भीतरी स्थानों में कम गतिविधि होने के चलते, लोग आसानी से एक-दूसरे दूरी बना कर रख सके।

लेकिन उन्होंने कहा कि यह निर्धारित करना मुश्किल है कि किस कारक का कितना योगदान है। आगामी महीनों में संक्रमण मामलों के रुख के बारे में पूछे जाने पर वादा ने कहा कि सर्दियों में तापमान गिरने की स्थिति में संक्रमण फिर से बढ़ सकता है। उनका कहना है कि संक्रमण, मुख्य रूप से किशोरावस्था के अंत में मौजूद युवा और उम्र के दूसरे दशक में चल रहे लोगों में फैलने की संभावना है। इसका कारण पूछे जाने पर उन्होनें कहा कि इस समूह के बहुत ही कम लोग संक्रमण या टीकाकरण के माध्यम से वायरस के खिलाफ़ प्रतिरक्षी क्षमता हासिल कर पाये हैं। वादा का कहना है कि इसके पश्चात, यह संक्रमण युवा पीढ़ी से मध्यम आयु वर्ग के और वृद्धावस्था में मौजूद उन लोगों तक फैल सकता है जिन्होनें टीका नहीं लगवाया है और जो वायरस से गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं।

उनका कहना है कि टीकाकरण की प्रभाकारिता समय के साथ कम हो जाने के कारण जिन वृद्धजनों में रोग-प्रतिकारकों का स्तर कम हो गया है, उनके भी संक्रमित होने का ख़तरा है।

निवारक उपायों के बारे में वादा ने बताया कि सर्दी बढ़ने के साथ-साथ अधिकाधिक लोगों का टीकाकरण, चिकित्सा प्रणाली पर बोझ को कम कर सकता है। उन्होंने अभी तक टीका नहीं लगवाने वाले लोगों से अक्तूबर के अंत तक ख़ुराक लेने का आह्वान किया है। लेकिन उनका यह भी कहना है कि टीकाकरण में प्रगति के चलते संक्रमण मामलों की संख्या एक निश्चित स्तर तक बढ़ने की स्थिति में भी चिकित्सा प्रणाली पर पहले जितना बोझ नहीं पड़ेगा।

उन्होंने इस बात पर चर्चा की आवश्यकता प्रकट की कि कोरोनावायरस को किस तरह से देखा जाना चाहिए और उससे निपटने हेतु किस स्तर तक क़दम उठाये जाने चाहिए।

यह जानकारी 12 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.322. कोविड-19 के नये मामलों में अचानक आयी गिरावट पर विशेषज्ञों की राय / अंक-1 सरकार की सलाहकार समिति के प्रमुख ओमि शिगेरु इस बारे में क्या कहते हैं?

उत्तर.322. जापान में इस वर्ष गर्मियों में कोरोनावायरस संक्रमण की पाँचवी लहर के दौरान नये मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गयी। अगस्त मध्य तक देश भर में नये दैनिक मामलों की संख्या 25,000 से अधिक रही। लेकिन महीने के अंत तक यह उफान थम सा गया और दैनिक मामलों की संख्या में तीव्र गिरावट आयी। अक्तूबर 5 तक के लगातार तीन दिन तक देश भर में दैनिक मामलों की संख्या 1,000 से नीचे रही। जो उच्चतम स्तर का 25वाँ हिस्सा है। विशेषज्ञों से जानते हैं कि इस तीव्र गिरावट का कारण।

सरकार ने 28 सितम्बर को देश के कई प्रिफ़ैक्चरों में लागू आपातकाल हटाने का निर्णय लिया। सरकार की सलाहकार समिति के प्रमुख ओमि शिगेरु ने उस दिन आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आपातकाल हटाने के कई कारण बताये।

सर्वप्रथम, आगामी दिनों में लम्बे सप्ताहंत या ग्रीष्मकालीन अवकाश जैसी छुट्टियाँ नहीं होंगी। इस दौरान लोगों का आवागमन बढ़ जाता है। इसके चलते लोगों के बीच संक्रमण प्रसार के अवसर भी कम हो जायेंगे।

दूसरा कारण है कि लोगों ने जब नये मामलों के उफान के दौर में चिकित्सा व्यवस्था की चरमराती स्थिति देखी, जहाँ कई रोगियों को अस्पतालों में बिस्तर की कमी की वजह से घर भेजा गया और उन्हें उपचार के लिए घर में ही रखा गया तब लोगों को सही मायने में इस संकट का अहसास हुआ।

तीसरा, मनोरंजन स्थलों पर रात्रि में लोगों की आवाजाही कम हो गयी, जिससे संक्रमण प्रसार का अंदेशा भी घट गया है।

चौथा कारण टीकाकरण अभियान में प्रगति है। टीकाकरण से न केवल वृद्धों में बल्कि युवा पीढ़ी में भी संक्रमण के नये मामले घट गये हैं।

अंत में, अब मौसम बदल रहा है। उच्च तापमान और वर्षा में संक्रमण का ख़तरा रहता है।

ओमि का मानना है कि तापमान में गिरावट के साथ ही, लोग सुहावने मौसम का आनंद लेने के लिए घरों के बाहर खुले में जाएँगे और बंद कमरों में आपसी संपर्क कम हो जायेगा जहाँ संक्रमण का ख़तरा अधिक रहता है। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ओमि ने कहा कि वह संक्रमण के नये मामलों में आयी गिरावट के अन्य कारणों को जानने की कोशिश जारी रखेंगे।

उपरोक्त जानकारी 11 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.321. कोविड-19 से किन लोगों में गंभीर बीमारी होने की संभावना अधिक है / भाग-2 भिन्न आयु वर्ग के अनुसार ख़तरे की संभावना।

उत्तर.321. जापान के वैश्विक स्वास्थ्य और औषधि के राष्ट्रीय केन्द्र और अन्य अनुसंधान केन्द्रों के शोधकर्ताओं ने विभिन्न बिंदुओं की मदद से एक मापदंड तैयार किया है। इस मापदंड से पता लगाया जा सकता है कि किन लोगों में कोरोनावायरस से गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा अधिक है।

इस मापदंड के अनुसार लोगों को तीन आयु वर्गों में वर्गीकृत किया गया है। यह आयु वर्ग हैं - 18 से 39, 40 से 64, तथा 65 और उससे अधिक।

इस मापदंड के अनुसार 18 से 39 आयु वर्ग के पुरुषों को एक अंक दिया जाता है। 30 साल से अधिक आयु के महिला व पुरुष को भी एक अंक दिया गया। जिनका शरीर द्रव्यमान सूचकांक यानि बीएमआई 23 से 29.9 है, उन्हें एक अंक और जिनका बीएमआई 30 से अधिक है उन्हें दो अंक। बीएमआई नापने के लिए व्यक्ति के किलोग्राम में वज़न को उसकी मीटर में लम्बाई के वर्ग से भाग दिया जाता है।

कैंसर के रोगियों के लिए दिये जाते हैं तीन अंक।

मापदंड के अनुसार 37.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बुखार के कोविड-19के रोगियों को दो अंक दिये गए। जिनकी श्वास में घरघराहट की ध्वनि आती है उन्हें भी दो अंक दिये गए। साँस फूलने में समस्या पर एक अंक दिया गया।

इस मापदंड के अनुसार कोरोनावायरस के मामलों में तेज़ उछाल के समय में इस आयु वर्ग में जिन लोगों को छः से अधिक कुल अंक मिले, उनमें कोरोनावायरस के गंभीर लक्षण विकसित होने की संभावना अधिक है और उन्हें उचित उपचार देना आवश्यक है।

मापदंड के अनुसार 40 से 64 वर्ष के आयु वर्ग के पुरुषों को एक अंक दिया गया। 50 से 59 साल के लोगों को भी एक अंक मिला वहीं 60 से 64 साल के लोगों को दिये गए तीन अंक।

25 या उससे अधिक बीएमआई के लोगों को मिले दो अंक। मधुमेह के रोगी को मिला एक अंक।

इस आयु वर्ग के कोविड-19 के जिन रोगियों का तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा उसके लिए दिये गए दो अंक। साँस फूलने की तकलीफ़ पर भी दो अंक दिये गए। खाँसी के लिए दिया गया एक अंक और थकान के लिए भी दिया गया एक अंक।

इस मापदंड के अनुसार कोरोनावायरस के नये मामलों की लहर के दौरान जिन लोगों को पाँच या उससे अधिक कुल अंक मिले, उनमें कोविड-19 के गंभीर लक्षण होने की संभावना बहुत प्रबल थी। ऐसे लोगों को कोविड-19 के लिए समुचित उपचार दिया जाना चाहिये।

तीसरे वर्ग की यानि 65 साल या उससे अधिक आयु वर्ग में 75 साल या उससे बड़ी उम्र के लोगों के लिये इस मापदंड में दिये गए दो अंक। जिनकी बीएमआई 25 या अधिक है उसके भी दिये गए दो अंक।

हृदय सम्बन्धी विकार के लिए दो अंक दिये गए। वहीं मधुमेह और उच्च रक्तचाप के रोगियों को दो अंक दिये गए। मस्तिष्क में रक्त वाहिका विकार के रोगियों को दिया गया एक अंक।

मापदंड के अनुसार इस आयु वर्ग में 37.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान के कोविड-19 के रोगियों को चार अंक दिये गये। साँस फूलने की समस्या के लिए दिये गये चार अंक। रोगी को अगर खाँसी भी है तो उसके कुल अंक में एक अंक और जुड़ जाता है।

मापदंड के अनुसार इस आयु वर्ग में तीन या उससे अधिक कुल अंक वाले लोगों में कोविड-19 के गंभीर लक्षण विकसित होने का ख़तरा अत्यधिक है। इन लोगों को समय रहते उचित उपचार देना आवश्यक है। स्वास्थ्य अधिकारियों को ऐसे रोगियों को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 8 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.320. कोविड-19 से किन लोगों में गंभीर बीमारी होने की संभावना अधिक है / भाग-1 वैश्विक स्वास्थ्य और चिकित्सा राष्ट्रीय केंद्र के नये मापदंड संबंधित नवीनतम जानकारी।

उत्तर.320. जापान के वैश्विक स्वास्थ्य और औषधि के राष्ट्रीय केंद्र ने अन्य संस्थानों के साथ मिलकर एक मापदंड का निर्माण किया है जो किसी कोरोनावायरस रोगी के गंभीर रूप से बीमार पड़ने के ख़तरे को मापने के लिए अंकों का प्रयोग करता है। उच्च अंक वाले मरीज़ों के गंभीर रूप से बीमार होने की संभावना अधिक होती है। इस प्रकार यह मापदंड, उन रोगियों को प्राथमिकता देने के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है।

शोधकर्ताओं ने पूरे जापान के लगभग 4,500 ऐसे रोगियों का अध्ययन किया जिन्हें जून से सितंबर 2020 के बीच अस्पताल ले जाया गया था। उन्होंने मध्यम या गंभीर रूप से बीमार उन रोगियों के लक्षणों का विश्लेषण किया जिन्हें ऑक्सीजन की आवश्यकता थी और एक बिंदु-आधारित मापदंड बनाया जिससे बीमारी की गंभीरता के स्तर को मापा जा सके।

मापदंड ने रोगियों को आयु वर्ग में विभाजित किया। उदाहरण के लिए 40 से 64 आयु वर्ग में यदि रोगी एक पुरुष है तो उसे 1 अंक दिया जाता है। 25 से अधिक शरीर द्रव्यमान सूचकांक यानि बीएमआई वाले पुरुष और महिला, दोनों को मोटापे से ग्रस्त माना जाता है और उन्हें 2 अंक दिये जाते हैं। बीएमआई एक व्यक्ति के शरीर का माप है। मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति को 1 अतिरिक्त अंक दिया जाता है। 37.5 सेल्सियस से अधिक का बुखार 2 और अंक जोड़ता है। साँस लेने में तकलीफ 2 अतिरिक्त अंक जोड़ती है और खाँसी 1 अंक और थकान 1 अंक जोड़ता है।

जब संक्रमण की तीसरी लहर के आँकड़ों से जुड़े मापदंड का अध्ययन किया गया तो पाया गया कि 40 से 64 आयु वर्ग के बीच 5 के संयुक्त अंकों के साथ 23 प्रतिशत रोगी वायरस से गंभीर रूप से बीमार हुए थे। 10 के संयुक्त अंक वाले रोगियों के लिए यह आँकड़ा बढ़कर 76 प्रतिशत हो गया था।

शोधकर्ताओं का कहना है कि 5 से अधिक अंक वाले रोगी उस समय अत्यधिक ख़तरे वाले समूह में आ रहे थे जब वायरस तेजी से फैल रहा था। ऐसे रोगियों की बारीकी से निगरानी की जानी चाहिए और यथाशीघ्र उन्हें चिकित्सा सुविधा प्रदान की जानी चाहिए।

वैश्विक स्वास्थ्य और औषधि के राष्ट्रीय केंद्र के एक सदस्य यामादा गेन का कहना है कि अगर वायरस का एक और बड़ा प्रकोप होता है और घर पर ही संगरोध में रहने वालों की संख्या बढ़ती है तो वे आशा करते हैं कि गंभीर रूप से बीमार होने के अधिक ख़तरे वाले रोगियों तथा आवश्यकतानुसार उन्हें अस्पताल का उपचार उपलब्ध करवाने में इस मापदंड का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया जाएगा। उनका यह भी कहना है कि मापदंड सभी संभावित ख़तरों को नहीं माप सकता परन्तु यह निश्चय करने के लिए कि कोई व्यक्ति ख़तरे की स्थिति में आ सकता है या नहीं, इसका प्रयोग किया जा सकता है।

उपरोक्त जानकारी 7 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.319. कोविड-19 के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार पर एनएचके का सर्वेक्षण / भाग-8 आगे बढ़ते हुए कोरोनावायरस से कैसे निपटना है?

उत्तर.319. कोरोनावायरस के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार का पता लगाने के लिए सितंबर की शुरुआत में एनएचके द्वारा समूचे जापान में 15 से 69 आयु वर्ग के 1,200 लोगों का सर्वेक्षण किया गया था। सर्वेक्षण के परिणामों से जुड़ी शृंखला की अंतिम कड़ी में भविष्य में कोरोनावायरस से निपटने के तरीकों के बारे में लोगों के विचार जानेंगे।

उत्तरदाताओं के सबसे बड़े अनुपात या 63.6 प्रतिशत ने कहा कि लोगों की गतिविधियों पर प्रतिबंध जारी रखते हुए महामारी को समाप्त करने को प्राथमिकता देनी चाहिए जबकि 7.5 प्रतिशत ने कहा कि लोगों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देकर सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इसका अर्थ है कि प्रतिबंधों में ढील का समर्थन करने वाले लोगों की तुलना में 8 गुणा अधिक उत्तरदाताओं ने कहा कि सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों का त्याग करने के बावजूद भी महामारी को समाप्त करने को प्राथमिकता देनी चाहिए।

विभिन्न पदों और आयु वर्ग के लोगों में उनके दैनिक जीवन पर लगाए गए प्रतिबंधों, महामारी और टीकाकरण के बारे में विभिन्न विचारों और चिंताओं के बावजूद उन पर किया गया सर्वेक्षण दर्शाता है कि लोगों में अपने शांतिपूर्ण दैनिक जीवन को फिर से हासिल करने की प्रबल इच्छा है।

उपरोक्त जानकारी 6 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.318. कोविड-19 के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार पर एनएचके का सर्वेक्षण / भाग-7 लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए क्या किया जाना आवश्यक है?

उत्तर.318. कोरोनावायरस के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार का पता लगाने के लिए सितंबर की शुरुआत में एनएचके द्वारा समूचे जापान में 15 से 69 आयु वर्ग के 1,200 लोगों का सर्वेक्षण किया गया था। सर्वेक्षण के परिणामों से जुड़ी शृंखला की इस कड़ी में, जनता का व्यवहार बदलने के लिए आवश्यक तरीकों के बारे में लोगों की अवधारणा जानेंगे।

वायरस का प्रसार रोकने हेतु टीकाकरण के अलावा लोगों के व्यवहार में परिवर्तन भी महत्त्वपूर्ण माना जाता है। सर्वेक्षण में लोगों से अपने व्यवहार में बदलाव लाने के लिए आवश्यक रूपरेखाओं या प्रणालियों के बारे में बहुविकल्पी प्रश्न पूछे गये।

69.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं के सबसे बड़े वर्ग ने वित्तीय मुआवज़े को आवश्यक बताया वहीं 45 प्रतिशत ने वायरस-रोधी उपायों की अनिवार्यता और उनका उल्लंघन करने वालों को दंडित करने की बात कही। 43.7 फ़ीसदी ने कहा कि घर से काम को बढ़ावा देना होगा वहीं 43.2 प्रतिशत ने कहा कि व्यवहार बदलने के लिए सरकार और विशेषज्ञों की ओर से ठोस स्पष्टीकरण और संदेश आवश्यक है। साथ ही, 34.9 फ़ीसदी ने स्कूली शिक्षा ऑनलाइन मुहैया कराने की बात कही है।

सर्वेक्षण में यह भी पूछा गया कि वे ऐसे किस तरह के अनिवार्य उपायों को स्वीकार कर सकते हैं जिनके साथ दंण्डात्मक कार्रवाई का प्रावधान भी हो।

66.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अनिवार्य रूप से चेहरे के मास्क पहनने को, 54.4 प्रतिशत ने सम्मेलनों और अवकाश गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू करने को, 40.3 प्रतिशत ने टीकाकरण की अनिवार्यता को, 34.8 प्रतिशत ने जल-पान प्रतिष्ठानों के खुलने के समय पर प्रतिबंध लागू करने को, 24.1 प्रतिशत ने बिना अनुमति लोगों को बाहर न जाने दिये जाने को आवश्यक उपाय माना है, वहीं 6.8 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे किसी भी तरह के अनिवार्य उपाय स्वीकार नहीं करना चाहते हैं।

उपरोक्त जानकारी 5 अक्टूबर तक की है।

प्रश्न.317. कोविड-19 के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार पर एनएचके का सर्वेक्षण / भाग–6 कोरोनावायरस टीकाकरण के बारे में लोगों की क्या राय है?

उत्तर.317. कोरोनावायरस के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार का पता लगाने के लिए सितंबर की शुरुआत में एनएचके द्वारा समूचे जापान में 15 से 69 आयु वर्ग के 1,200 लोगों का सर्वेक्षण किया गया था। सर्वेक्षण के परिणामों से जुड़ी शृंखला की इस कड़ी में कोरोनावायरस टीकाकरण के बारे में लोगों की अवधारणा जानेंगे।

वायरस-रोधी प्रतिबन्धों और संगरोध जैसे उपायों को समाप्त करने की दिशा में कोरोनावायरस टीका एक निर्णायक क़दम है जिससे लोगों को अपार आशाएँ हैं।

सर्वेक्षण में लोगों से टीकाकरण अभियान के बारे में प्रश्न पूछा गया जिसके उत्तर में 78.0 प्रतिशत ने कहा कि टीका लगवाना आवश्यक है। 19.4 प्रतिशत ने कहा कि इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है, वहीं 2.6 प्रतिशत ने कहा कि उनके विचार में टीका लगवाना सही नहीं है।

टीकों के बारे में सकारात्मक विचार रखने वाले सभी आयु वर्ग के लगभग 70 प्रतिशत ने माना कि टीका लगवाना सही है। बड़ी आयु वर्ग के लोगों में टीकों के प्रति सकारात्मक रवैया अधिक स्पष्ट रूप से देखा गया।

टीकों के बारे में निराशावादी विचार रखने वाले 7.1 प्रतिशत किशोरों का मानना था कि टीका नहीं लगवाना ही बेहतर है। यही विचार 20 से 29 वर्ष के 4.6 प्रतिशत युवाओं और 30 से 39 वर्ष के 4.0 प्रतिशत लोगों में भी देखा गया। इससे पता चलता है कि बड़ी आयु वर्ग के लोगों की तुलना में अधिकांश युवा टीका नहीं लगवाना चाहते हैं।

टीकों के बारे में नकारात्मक सोच रखने की वजह पूछे जाने पर इन युवाओं ने टीकों की सुरक्षा और संभावित दुष्प्रभाव को लेकर आशंका व्यक्त की है।

एक बड़ी कम्पनी में कार्यरत उम्र के दूसरे दशक की एक युवती ने कहा कि टीकों की सुरक्षा और अगले कुछ साल में दिखाई देने वाले टीकों के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है। एक किशोर छात्र ने कहा कि उसे टीकों में किसी बाहरी वस्तु के होने और दुष्प्रभाव की संभावना से डर लगता है।

सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले कई लोगों ने कहा कि टीका लगवाने को लेकर अब भी उनके मन में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक कम्पनी में कार्यरत 20 से 29 साल की आयुवर्ग के पुरुष ने कहा टीकाकरण कार्यक्रम हाल ही में शुरू हुआ है इसलिए इनके बारे में समुचित जानकारी उपलब्ध नहीं है। क़रीब 50 साल की आयु की महिला ने कहा कि टीका लगवाने के बारे में किसी भी तरह का समावेशी वक्तव्य देना कठिन है।

उपरोक्त जानकारी 4 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.316. कोविड-19 के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार पर एनएचके का सर्वेक्षण / भाग–5 लोग और कितने समय तक कोरोनावायरस प्रतिबन्धों के साथ रह सकते हैं?

उत्तर.316. कोरोनावायरस के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार का पता लगाने के लिए सितंबर की शुरुआत में एनएचके द्वारा समूचे जापान में 15 से 69 आयु वर्ग के 1,200 लोगों का सर्वेक्षण किया गया था। सर्वेक्षण के परिणामों से जुड़ी शृंखला की इस कड़ी में जानेंगे कि लोग कोरोनावायरस-रोधी प्रतिबन्धों के बीच कब तक अपनी दैनिक जीवनचर्या का निर्वाह कर सकते हैं।

उत्तरदाताओं में से 42.5 प्रतिशत का कहना था जब तक संक्रमण पूर्ण रूप से नियंत्रित नहीं होता, वहीं 18.6 प्रतिशत ने कहा कि साल के अंत तक, जबकि 18.1 प्रतिशत का जवाब था कि उन्हें नहीं पता। 10.7 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने जवाब दिया कि वह प्रतिबंधों को अब और सहन नहीं कर सकते, जबकि 5.9 प्रतिशत ने कहा कि अगले छः महीने तक और 4.3 प्रतिशत ने जवाब दिया कि वह अगले 12 महीने तक प्रतिबंधों के बीच रह सकते हैं।

उत्तरदाताओं की लगभग आधी संख्या ने जवाब दिया कि वह कोरोनावायरस महामारी पूर्ण रूप से नियंत्रित होने तक प्रतिबन्धों का पालन करेगी, वहीं एक चौथाई उत्तरदाताओं ने कहा कि वे अब और इस तरह नहीं जी सकते हैं और न ही चार महीने बाद साल के अंत तक ही इसे सहन कर सकते हैं।

उपरोक्त जानकारी 1 अक्तूबर तक की है।

प्रश्न.315. कोविड-19 के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार पर एनएचके सर्वेक्षण / भाग-4 लोगों में आत्म-संयम की कमी क्यों हैं?

उत्तर.315. कोरोनावायरस महामारी के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार के बारे में एनएचके द्वारा सितम्बर के आरम्भ में किए गए एक सर्वेक्षण के परिणामों से जुड़ी शृंखला की इस कड़ी में जानेंगे कि लोग उतना आत्म-संयम क्यों नहीं अपना पा रहे हैं जितना वे पहले अपना रहें थे।

सर्वेक्षण से जुड़ी प्रश्नावली में पूरे जापान से 15 से 69 आयु वर्ग के 1,200 लोगों को शामिल किया गया था।

यह पूछे जाने पर कि क्या वे उतना ही संयम अपना पा रहे हैं जितना उन्होंने पिछले वर्ष अप्रैल में पहली बार आपातकाल की घोषणा के समय अपनाया था तो लगभग 20 प्रतिशत का उत्तर था कि वे ऐसा नहीं कर रहे हैं। तब उनसे इसका कारण पूछा गया और इसके लिए उन्हें कई उत्तर चुनने के लिए कहा गया था।

इसके उत्तर में सबसे अधिक 42.6 प्रतिशत का कहना था कि वे आत्म-संयम बरतते हुए थक चुके हैं जबकि 33.6 प्रतिशत ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि अब अधिक लोगों को टीका लगाया जा चुका है। 32.6 प्रतिशत का कहना था कि ऐसा इसलिए है क्योंकि वे पर्याप्त संक्रमण-रोधी उपाय अपना रहे हैं जबकि 31.1 प्रतिशत ने कहा कि किसी अन्य रूप में वे अपना जीवन यापन नहीं सकते।

उपरोक्त जानकारी 30 सितंबर तक की है।

प्रश्न.314. कोविड-19 के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार पर एनएचके का सर्वेक्षण / भाग-3 लोगों के आत्म-संयम में किस प्रकार परिवर्तन आ रहा है।

उत्तर.314. कोरोनावायरस के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार का पता लगाने के लिए सितंबर की शुरुआत में एनएचके द्वारा समूचे जापान में 15 से 69 आयु वर्ग के 1,200 लोगों का सर्वेक्षण किया गया था। इस शृंखला में हम जानेंगे इस सर्वेक्षण के परिणाम। इस अंक में जानेंगे कि लोगों के आत्म संयम में कितना परिवर्तन आ गया है।

अप्रैल 2020 में जब आपातकाल की घोषणा की गई थी तब की तुलना में इस वर्ष प्रतिबंधात्मक उपायों का लोगों ने कितना पालन किया पूछे जाने पर 80 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इसके जवाब में कहा कि उन्होंने उपायों का 2020 के समय के बराबर तथा उससे भी अधिक पालन किया।

सर्वाधिक 54 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अनुपालन यथावत रहा, जबकि 26.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे उस समय की तुलना में अधिक आत्म-संयम का पालन कर रहे थे, वहीं 19.4 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वे उस समय की तुलना में प्रतिबंधात्मक उपायों का कम पालन कर रहे थे।

इसमें यह भी स्पष्ट हुआ कि युवा उत्तरदाताओं के बड़े हिस्से ने कहा कि वे पिछले वर्ष जितना संयम नहीं बरत रहे थे। जहाँ आयु के छठे दशक में चल रहे 12.5 प्रतिशत, पाँचवें दशक के 15.5 प्रतिशत और चौथे दशक में चल रहे 17.4 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे प्रतिबंधों का उतना पालन नहीं कर रहे थे। दूसरी ओर युवा वर्ग में आयु के तीसरे दशक के 22 प्रतिशत, दूसरे दशक के 28.5 प्रतिशत और किशोरावस्था के 28.9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे उतने संयमित नहीं थे।

उपरोक्त जानकारी 29 सितंबर तक की है।

प्रश्न.313. कोविड-19 के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार पर एनएचके का सर्वेक्षण / भाग-2 वर्तमान चिंता

उत्तर.313. कोरोनावायरस के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार का पता लगाने के लिए सितंबर की शुरुआत में एनएचके द्वारा समूचे जापान में 15 से 69 आयु वर्ग के 1,200 लोगों का सर्वेक्षण किया गया था। इस शृंखला में हम जानेंगे इस सर्वेक्षण के परिणाम। इस अंक में जानेंगे लोग के बीच चिंता के सबसे बड़े कारण।

उत्तरदाताओं को इस प्रश्न के कई उत्तर चुनने के लिए कहा गया था।

सर्वाधिक 61.4 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे स्वास्थ्य प्रणाली के बारे में चिंतित हैं वहीं 49.5 प्रतिशत ने घर में ही संक्रमण फैलने या उनके बच्चों के संक्रमित होने को चिंता का सबसे बड़ा कारण बताया। 33.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने राष्ट्रीय और स्थानीय सरकारों द्वारा आपातकाल की घोषणा समेत आत्म-संयम बरतने से जुड़े उपायों के और लंबे खिंचने के विषय में चिंता व्यक्त की।

इस प्रश्न में अतिरिक्त टिप्पणी अनुभाग में कई लोगों ने कहा कि वे विशेष रूप से स्वयं के संक्रमित होने को लेकर चिंतित थे।

उम्र के चौथे दशक में चल रहे एक पुरुष कर्मी ने कहा कि उसे इस बात की चिंता है कि उसके संक्रमित होने की स्थिति में स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली उसका इलाज कर सकेगी या नहीं। उम्र के पाँचवें दशक में चल रही एक अंशकालिक कामकाजी महिला ने कहा कि कोरोनावायरस से संक्रमित कई रोगियों को अस्पताल में भर्ती नहीं किये जा सकने के कारण घर पर ही एकांतवास में रहना पड़ रहा है इसलिए वह घर में संक्रमण फैलने या लक्षणों के तेज़ी से बढ़ने के बारे में चिंतित है।

अन्य लोगों ने अपनी नौकरी और आय के बारे में चिंता व्यक्त की, या आत्म-संयम बरतने से जुड़े के उपायों के लंबे खिंचने पर भावनात्मक रूप से तनाव महसूस करने की बात कही।

उम्र के चौथे दशक में चल रहे एक स्व-नियोजित व्यक्ति ने कहा कि वह काम की कमी के कारण अपनी मासिक आय घटने के चलते वित्तीय संकट का सामना कर रहा है।

उपरोक्त जानकारी 28 सितंबर तक की है।

प्रश्न.312. कोविड-19 के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार पर एनएचके का सर्वेक्षण / भाग-1 कोरोनावायरस से लोग कितना डरते हैं?

उत्तर.312. कोरोनावायरस के प्रति लोगों की मानसिकता और व्यवहार का पता लगाने के लिए सितंबर की शुरुआत में एनएचके द्वारा समूचे जापान में 15 से 69 आयु वर्ग के 1,200 लोगों का सर्वेक्षण किया गया था। इस शृंखला में जानेंगे इस सर्वेक्षण के परिणाम। सर्वेक्षण से लोगों के विभिन्न मत और उत्कंठाओं का पता चलता है, साथ ही लम्बे समय तक सार्वजनिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबन्धों और टीकाकरण पर अलग-अलग पीढ़ियों की सोच में भी अंतर स्पष्ट होता है।

कोरोनावायरस से भय के बारे में पूछे जाने पर 50.4 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें इससे बहुत भय लगता है, 42.4 ने कहा थोड़ा बहुत, जबकि 6.1 प्रतिशत ने कहा कि वे इससे इतने भयभीत नहीं। परिणाम से ज्ञात हुआ कि लगभग 93 प्रतिशत लोग कोरोनावायरस से भयभीत हैं।

उपरोक्त जानकारी 27 सितम्बर तक की है।

प्रश्न.311 कोरोनावायरस के दीर्घ-कालिक प्रभाव / भाग-2 अधिकांश लोगों ने गंध के इंद्रियबोध में असामान्यता की शिकायत क्यों की?

उत्तर.311. तोक्यो के सेतागाया वार्ड ने अपने यहाँ कोविड-19 के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों से पीड़ित लोगों का सर्वेक्षण किया जिसमें करीब आधी संख्या ने थकान की शिकायत की।

जवाब देने वाले लोगों में से आधे से अधिक यानि क़रीब 54 प्रतिशत ने गंध के इंद्रियबोध में समस्या की शिकायत की, लगभग 50 प्रतिशत ने पूरे समय शरीर में थकावट, 45 प्रतिशत ने स्वाद के इंद्रियबोध में समस्या और लगभग 34 प्रतिशत ने लगातार खाँसी बने रहने की शिकायत की।

सर्वेक्षण में पता चला कि लोगों के आयु वर्ग के अनुसार लोगों में दीर्घकालिक दुष्प्रभावों की शिकायतें भी भिन्न रहीं।

किशोरावस्था से 30 साल तक के आयु वर्ग में सर्वाधिक संख्या में लोगों ने गंध पहचानने में समस्या बतायी। वहीं 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में थकावट की समस्या अधिक देखी गयी।

कुछ लोगों ने कहा कि इस बीमारी के दीर्घकालिक दुष्परिणाम छः महीने से अधिक समय तक बने रहे जिसमें भूलने की समस्या और बाल झड़ने की शिकायत भी थी।

सेतागाया वार्ड दीर्घकालिक दुष्प्रभाव का असर और भविष्य में इन समस्याओं से निपटने के उपायों का विश्लेषण करेगा।

सेतागाया वार्ड के महापौर होसाका नोबुतो ने कहा कि अनेक लोग अपने कामकाज और दैनिक जीवन में कोरोनावायरस के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों की पीड़ा झेल रहे हैं लेकिन इन लोगों की सहायता के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है। महापौर ने आशा व्यक्त की है कि इन आँकड़ों के जारी होने के बाद सरकार कोरोनावायरस उपचार के लिए तकनीकी विकास करने के साथ ही कोविड-19 के दीर्घकालिक दुष्प्रभावों से पीड़ित लोगों की देखभाल के लिए भी व्यवस्था स्थापित करेगी।

उपरोक्त जानकारी 24 सितम्बर तक की है।

प्रश्न.310. कोरोनावायरस के दीर्घ-कालिक प्रभाव / भाग-1 कोरोनावायरस से स्वस्थ होने वाले कितने प्रतिशत लोगों में दीर्घ-कालिक प्रभाव देखने को मिलते हैं?

उत्तर.310. अप्रैल 2021 तक तोक्यो के सेतागाया वार्ड ने क्षेत्र के लोगों का सर्वेक्षण किया जो अस्पतालों में या घर पर कोविड-19 से स्वस्थ हुए थे।

उत्तर देने वाले 3,710 लोगों में से 1,800 लोगों या लगभग 50 प्रतिशत ने कहा कि उनके लक्षण दीर्घ-कालिक थे। यह प्रतिशत आयु के तीसरे से पाँचवे दशक में चल रहे उत्तरदाताओं में विशेष रूप से अधिक है जिनमें से आधे से अधिक ने दीर्घकालिक प्रभावों की शिकायत की।

उपरोक्त जानकारी 22 सितंबर तक की है।

प्रश्न.309. कोरोनावायरस के लिए औषधि भाग-11 / कोरोनावायरस के निदान हेतु उपयोगी मौजूदा दवाएँ

उत्तर.309. कोरोनावायरस से निपटने में उपयोगी दवाओं से जुड़ी इस शृंखला की ग्यारहवीं कड़ी में जानेंगे कि ऐसी कौन सी दवाएँ हैं जिन्हें पहले ही अन्य बीमारियों के इलाज के लिए अनुमोदित किया जा चुका है।

जापान सरकार ने अब तक नये कोरोनावायरस के इलाज के लिए चार प्रकार की दवाओं के उपयोग को मंज़ूरी दी है। इनके अलावा, अन्य बीमारियों के उपचार में प्रयोग की जाने वाली दवाओं पर नैदानिक अध्ययन चल रहे हैं ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि वे कोरोनावायरस के विरुद्ध भी प्रभावी हैं या नहीं।

विशेष रूप से, एक्टेमरा, एविगन, अल्वेस्को, फ़ुथान और आइवरमेक्टिन जैसी मौजूदा दवाओं की समीक्षा की जा रही है। एक्टेमरा से रूमेटोइड अर्थराइटिस यानि संधिवात गठिया का इलाज किया जाता है और एविगन, इन्फ़्लूएंज़ा के नये प्रकार के लिए उपयोगी है। अल्वेस्को, क्षय रोग के लक्षणों को दबाती है जबकि फ़ुथान का उपयोग उन बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है जिनके चलते तीव्र अग्नाशयशोथ या रक्त के थक्कों का गठन होता है। इवरमेक्टिन, परजीवी-जन्य संक्रामक रोगों के विरुद्ध अपनी प्रभावकारिता के लिए जानी जाती है।

आइवरमेक्टिन की ख़रीद ऑनलाइन की जा सकती है। यह कोविड-19 के विरुद्ध प्रभावी दवा के रूप में प्रचलित हो रही है।

आम ग्राहक स्वेच्छा से इसे ख़रीद रहे हैं।

लेकिन कई देशों और विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ-साथ दवा कंपनियों का भी यही कहना है कि कोरोनावायरस के विरुद्ध इस दवा की प्रभावकारिता को अभी तक नैदानिक परीक्षणों के माध्यम से सत्यापित नहीं किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आम रोगियों को स्वेच्छा से दवा नहीं लेना चाहिए।

उपरोक्त जानकारी 21 सितम्बर तक की है।

प्रश्न.308. कोरोनावायरस के लिए औषधि भाग-10 / दवा कम्पनी रोशे और शिओनोगि किन नयी दवाओं का विकास कर रही हैं?

उत्तर.308. विश्व भर के अनुसंधान केन्द्र और दवा कम्पनियाँ कोरोनावायरस के उपचार के लिए प्रभावी दवाओं के नैदानिक परिक्षण कर रही हैं। आशा है कि इससे एक नये उपचार की खोज की जा सकेगी। इस शृंखला की दसवीं कड़ी में जानेंगे कि कोविड -19 के उपचार के लिए कौन सी नयी दवाएँ विकसित की जा रही हैं।

स्विट्ज़रलैंड की प्रमुख दवा निर्माता कम्पनी रोशे ने हेपेटाइटिस-सी से पीड़ित रोगियों के उपचार के लिए वायरस-रोधी दवा एटी-527 विकसित की है। अब कम्पनी इस बात पर शोध कर रही है कि यह दवा कोविड-19 के उपचार में भी असरदार हो सकती है या नहीं। इस बारे में कम्पनी का जापान और अन्य देशों में रोगियों पर नैदानिक परीक्षण का अंतिम चरण चल रहा है। इस दवा का जापान में उत्पादन करने वाली कम्पनी चूगाइ फार्मास्युटिकल को आशा है कि वह अगले साल स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वीकृति के लिए आवेदन कर सकेगी।

जापान की एक प्रमुख दवा निर्माता कम्पनी शिओनोगि कोरोनावायरस के उपचार के लिए एक नयी वायरस-रोधी दवा विकसित कर रही है। कम्पनी ने जुलाई में घोषणा की थी कि दवा की सुरक्षा की पुष्टि करने के लिए उसने नैदानिक परीक्षण का पहला चरण शुरू कर दिया है।

उपरोक्त जानकारी 17 सितम्बर तक की है।

प्रश्न.307. कोरोनावायरस के लिए औषधि भाग-9 / मर्क, फ़ाइज़र से जुड़ी नवीनतम जानकारी क्या है?

उत्तर.307. विश्व भर के अनुसंधान केन्द्र और दवा कम्पनियाँ कोरोनावायरस के उपचार के लिए प्रभावी दवाओं के नैदानिक परिक्षण कर रही हैं। आशा है कि इससे एक नये उपचार की खोज की जा सकेगी। इस शृंखला की नौवीं कड़ी में वायरस के उपचार के लिए मर्क और फ़ाइज़र द्वारा विकसित की जा रही दवा के बारे में जानेंगे।

दुनिया भर में कई लोग कोरोनावायरस से संक्रमित होने के बाद घर में ही स्वरोपित संगरोध में रह रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि ऐसी दवाओं की माँग बहुत अधिक है जो घर पर ही रहकर बीमारी के हल्के लक्षणों के बाद स्वयं ली जा सकती हैं जिससे गंभीर रूप से बीमार होने से बचा जा सके। विदेशी और जापानी दवा कम्पनियाँ इस प्रकार की दवा बनाने में जुटी हुई हैं।

अमरीका की एक प्रमुख दवा निर्माता मर्क एंड कंपनी अब मोलनुपिराविर नामक एक वायरस-रोधी दवा बना रही है। यह दवा नैदानिक परीक्षणों के अंतिम चरण में है जिसमें जापान और अन्य देशों के रोगियों को भी शामिल किया गया है। दवा निर्माता की एक जापानी सहायक कंपनी का कहना है कि परीक्षण परिणाम जल्द से जल्द इस महीने के अंत में या अगले महीने में आ जाएँगे। कम्पनी का कहना है कि यदि परिणाम आशाजनक दिखते हैं तो इस वर्ष के अंत तक इस दवा के आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण के लिए वह अमरीकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन से अनुमति लेने की योजना बना रही है।

अमरीका की ही एक अन्य प्रमुख दवा कम्पनी, फ़ाइज़र, अब विदेश में भी एक ऐसे उपचार तरीके के नैदानिक परीक्षणों के अंतिम चरण में है जिसमें वायरस-रोधी दो दवाओं को एक साथ लेने की आवश्यकता होती है। कंपनी का कहना है कि संभावित परिणाम अक्तूबर से दिसंबर के बीच सामने आ सकते हैं। उनका कहना है कि वह जल्द से जल्द इस वर्ष के अंत तक आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण के लिए अमरीकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन में आवेदन देने की योजना बना रही हैं। फ़ाइज़र का यह भी कहना है कि जापान के रोगियों के भी नैदानिक परीक्षणों में भाग ले सकने के लिए तैयारी चल रही है।

उपरोक्त जानकारी 16 सितंबर तक की है।

प्रश्न.306. कोरोनावायरस के लिए औषधि भाग-8 / तीसरे प्रकार की दवा - अत्यधिक प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया को रोकना क्या है?

उत्तर.306. विश्व भर के अनुसंधान केन्द्र और दवा कम्पनियाँ कोरोनावायरस के उपचार के लिए प्रभावी दवाओं के नैदानिक परिक्षण कर रही हैं। आशा है कि इससे एक नये उपचार की खोज की जा सकेगी। इस शृंखला की आठवीं कड़ी उपचार की नयी औषधियों पर केंद्रित है।

जापान सरकार द्वारा अधिकृत कोरोनावायरस उपचारों को उनकी प्रभावशीलता की क्रियाविधि के आधार पर 3 प्रकारों में बाँटा गया है-

1. वायरस को कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकने वाली औषधियाँ
2. कोशिकाओं को पहले ही संक्रमित कर चुके वायरस को गुणन करने से रोकने वाली औषधियाँ
3. पहले ही गुणन कर चुके वायरस के प्रति अत्यधिक प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया को रोकने वाली औषधियाँ

डेक्सामिथासोन और बैरिसिटिनिब तीसरे प्रकार की औषधियाँ हैं जिन्हें अत्यधिक प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है। वायरस से संक्रमित होने पर कोशिकाएँ प्रतिरक्षी कोशिकाओं को जगाने के लिए विभिन्न कारक पदार्थ स्त्रावित करती हैं। लेकिन जैसे-जैसे वायरस गुणन करता है इन पदार्थों की अत्यधिक मात्रा शरीर के प्रतिरक्षी तंत्र को अनियंत्रित रूप से बढ़ा देती है। इस कारण फेफड़े तथा शरीर के अन्य अंगों को गंभीर क्षति पहुँच सकती है जिससे रोगी गंभीर रूप से बीमार हो सकता है। इस चरण पर प्रतिरक्षी तंत्र को दबाने और प्रज्वलन को रोकने के लिए अधिकतर स्टेरॉयड औषधियाँ दी जाती हैं। डेक्सामिथासोन तथा बैरिसिटिनिब मुख्यतः गंभीर लक्षणों वाले रोगियों पर प्रभावी होती हैं।

उक्त जानकारी 15 सितंबर तक की है।

प्रश्न.305. कोरोनावायरस के लिए औषधि भाग-7 / दूसरे प्रकार की दवा - कैसे संभव है वायरस अनुकरण से बचाव?

उत्तर.305. विश्व भर के अनुसंधान केन्द्र और दवा कम्पनियाँ कोरोनावायरस के उपचार के लिए प्रभावी दवाओं के नैदानिक परिक्षण कर रही हैं। आशा है कि इससे एक नये उपचार की खोज की जा सकेगी। इस शृंखला की सातवीं कड़ी में वायरस अनुकरण से बचाव के संबंध में जानेंगे।

जापान सरकार द्वारा अधिकृत कोरोनावायरस उपचारों को उनके प्रभावकारिता तंत्र के अनुसार मुख्यतः तीन वर्गों में बाँटा गया है।
1. कोशिकाओं पर वायरस हमले से बचाव की औषधि।
2. कोशिकाओं में प्रवेश कर चुके वायरस का बहुलीकरण रोकने की औषधि।
3. बहुलीकृत वायरस पर अत्यधिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया रोकने की औषधि।

रेमडेसिवीर दूसरे वर्ग की औषधि है, जो वायरस को कोशिकाओं में उसके प्रतिरूप बनाने से रोकती है। कोशिका में प्रवेश करने के बाद वायरस अपनी मेज़बान कोशिका की ऊर्जा का उपयोग कर अपने प्रतिरूप बनाते हुए अपनी संख्या बढ़ाते हैं। रेमडेसिवीर सहित दूसरे वर्ग की औषधियाँ, वायरल अनुकरण में शामिल किण्वक की क्रिया को नियंत्रित करते हुए वायरस को उसके प्रतिरूप बनाने से रोकती हैं।

कोविड-19 के मध्यम लक्षणों वाले मरीज़ों के लिए गोली रूपी औषधियों का विकास भी किया जा रहा है। इनमें से अधिकांश दूसरे वर्ग से संबंधित हैं। वायरस के विभिन्न प्रकारों में अनुकरण तंत्र एक समान होता है। इसके चलते बहुत-सी औषध कंपनियाँ वायरस के अन्य प्रकारों के लिए विकसित दवाओं के आधार पर कोरोनावायरस औषधियों का विकास कर पायी हैं। संभावना है कि स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमण के शुरुआती चरणों में इन दवाओं के उपयोग की अनुशंसा करेंगे।

उपरोक्त जानकारी 14 सितंबर तक की है।

प्रश्न.304. कोरोनावायरस के लिए औषधि भाग-6 / विभिन्न दवाएँ किस तरह काम करती हैं? पहले प्रकार की दवा - कोशिकाओं में वायरस का आक्रमण कैसे रोकती है?

उत्तर.304. विश्व भर के अनुसंधान केन्द्र और दवा कम्पनियाँ कोरोनावायरस के उपचार के लिए प्रभावी दवाओं के नैदानिक परिक्षण कर रही हैं। आशा है कि इससे एक नये उपचार की खोज की जा सकेगी। इस शृंखला के छठे अंक में जानेंगे कि कोविड -19 के उपचार के पहले तरीके में दवाओं का मिश्रण कोशिकाओं में वायरस का आक्रमण कैसे रोकता है।

जापान सरकार ने कोरोनावायरस के उपचार के लिए जिन तरीकों को स्वीकृति दी है उन्हें उनके काम करने के तरीके के आधार पर मुख्यरूप से तीन वर्गों में बाँटा गया है।
1. कोशिकाओं में वायरस का आक्रमण रोकने में सक्षम दवाएँ।
2. कोशिकाओं में प्रवेश कर चुके वायरस की वृद्धि रोकने वाली दवाएँ।
3. शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को द्विगुणित वायरस से लड़ने के लिए अत्यधिक रूप से सक्रिय होने से रोकने वाली दवाएँ।

उपचार के पहले वर्ग में रोग-प्रतिकारक दवाओं का मिश्रण कोरोनावायरस को कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकता है। कोरोनावायरस की सतह पर मौजूद काँटेदार स्पाइक प्रोटीन मानव कोशिकाओं पर आक्रमण करने से पहले उससे चिपक जाता है। रोग-प्रतिकारक दवाओं का मिश्रण एक कृत्रिम प्रतिरक्षी बनाता है जो वायरस के नुकीले स्पाइक प्रोटीन से चिपक कर उसे मानव कोशिका से चिपकने से रोक देता है। रोग के आरम्भिक स्तर पर इस तरह के उपचार की सलाह दी जाती है। उपचार का यह तरीका बहुत असरदार माना जाता है क्योंकि रोग प्रतिरक्षी दवा को वायरस को लक्षित करने के लिए ही बनाया गया है। इसके दुष्प्रभाव भी बहुत कम हैं।

उपरोक्त जानकारी 13 सितम्बर तक की है।

प्रश्न.303. कोरोनावायरस के लिए औषधि भाग - 5 / सोत्रोविमैब क्या है?

उत्तर.303. विश्व भर के अनुसंधान केन्द्र और दवा कम्पनियाँ कोरोनावायरस के उपचार के लिए प्रभावी दवाओं के नैदानिक परिक्षण कर रही हैं। आशा है कि इससे एक नये उपचार की खोज की जा सकेगी। इस शृंखला की पाँचवी कड़ी में सोत्रोविमैब के संबंध में जानेंगे।

जापान सरकार ने कोरोनावायरस के उपचार के लिए चार दवाओं को स्वीकृति दी है।

जापान सरकार ब्रिटेन की ग्लैक्सो-स्मिथ-क्लाइन समेत कुछ दवा निर्माताओं द्वारा विकसित एक नयी दवा की समीक्षा कर रही है।

यह नयी रोग-प्रतिकारक दवा, सोत्रोविमैब वायरस को निष्प्रभावी करती है। इसे ड्रिप के माध्यम से रोगी की नसों में दिया जाता है। यह दवा वायरस को शरीर में बढ़ने से रोकती है। यह दवा हल्के से मध्यम लक्षण वाले उन रोगियों को दी जाती है जो ऑक्सिजन पर आश्रित नहीं हैं, लेकिन जिनमें रोग के गंभीर लक्षण बनने के ख़तरे की संभावना है। विदेशों में हुए नैदानिक परीक्षण से पता चला है कि इस उपचार से अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु की आशंका 79 प्रतिशत घट जाती है।

6 सितम्बर को ग्लैक्सो-स्मिथ-क्लाइन ने जापान में इस दवा के उपयोग के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय में आवेदन किया था।

अमरीका ने मई महीने में ही सोत्रोविमैब दवा को आपात इस्तेमाल की स्वीकृति दे दी थी।

अनुमान है कि स्वास्थ्य मंत्रालय सितम्बर के अंत तक सोत्रोविमैब दवा को स्वीकृति प्रदान कर देगा। रोग-प्रतिकारक मिश्रण दवा - रोनाप्रिव सहित यह दूसरी दवा होगी जिसे हल्के लक्षण वाले मरीज़ों के उपचार के लिए जापान में स्वीकृती मिलेगी।

उपरोक्त जानकारी 10 सितम्बर तक की है।

प्रश्न.302. कोरोनावायरस के लिए औषधि भाग - 4 / "एंटीबॉडी कॉकटेल" यानि रोगप्रतिकारक मिश्रण द्वारा उपचार क्या है?

उत्तर.302. विश्व भर के अनुसंधान केन्द्र और दवा कम्पनियाँ कोरोनावायरस के उपचार में प्रभावी दवाओं के नैदानिक परिक्षण कर रही हैं। आशा है कि वे एक नये उपचार की खोज कर सकेंगी। इस शृंखला में हम जानेंगे "एंटीबॉडी कॉकटेल" यानि रोगप्रतिकारक मिश्रण के संबंध में।

जापान सरकार ने नये कोरोनावायरस के इलाज के लिए चार दवाओं को स्वीकृति दी है। तथाकथित "एंटीबॉडी कॉकटेल उपचार" को जुलाई 2021 में स्वीकृत किया गया था।

इसमें एक रोगी को अंतःशिरा द्वारा दो रोगप्रतिकारक - कैसिरिविमैब और इमदेविमैब से बने मिश्रण को एक साथ दिया जाता है। यह जापान में कोरोनावायरस के हल्के लक्षणों वाले रोगियों के लिए स्वीकृत पहला उपचार है जो वायरस को रोकने के लिए जाना जाता है। विदेशों में किये गए नैदानिक परीक्षणों के परिणाम बताते हैं कि यदि रोगी को बीमारी के प्रारंभिक चरण में यह रोगप्रतिकारक दवा दी जाती है तो यह उपचार अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु के जोखिम को लगभग 70 प्रतिशत तक कम कर देता है।

अमरीका के खाद्य और औषधि विभाग ने नवंबर 2020 में उपचार के आपातकालीन उपयोग को अधिकृत करते हुए कहा था कि यह कुछ हद तक प्रभावी है जिससे रोगियों को गंभीर रूप से बीमार होने से रोका जा सकता है। अक्तूबर 2020 में अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जब कोरोना संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती हुए थे तब उनके इलाज के लिए एंटीबॉडी कॉकटेल का प्रयोग किया गया था।

पहले तो जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों में रोगियों का एंटीबॉडी कॉकटेल द्वारा उपचार को सीमित करते हुए कहा था कि इस विधि से उपचार के दौरान और बाद में चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा रोगियों को निगरानी में रखना चाहिए। लेकिन संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते कई रोगी अस्पतालों में भर्ती नहीं हो पाये। तब मंत्रालय ने 13 अगस्त को अपने दिशानिर्देश संशोधित किये ताकि होटल और अस्थायी चिकित्सा सुविधाओं में संगरोध में रह रहे रोगियों को एंटीबॉडी कॉकटेल इस शर्त पर दी जा सके कि उनकी पर्याप्त निगरानी की जा रही है।


जापान के प्रधानमंत्री सुगा योशिहिदे ने 25 अगस्त को एक संवाददाता सम्मेलन संबोधित करते हुए कहा था कि वह एंटीबॉडी कॉकटेल से नये रोगियों के उपचार की भी अनुमति देंगे।

उपरोक्त जानकारी 9 सितंबर तक की है।

प्रश्न.301. कोरोनावायरस के लिए औषधि भाग - 3 / बैरिसिटिनिब क्या है?

उत्तर.301. विश्व भर के अनुसंधान केन्द्र और दवा कम्पनियाँ कोरोनावायरस के उपचार में प्रभावी दवाओं के नैदानिक परिक्षण कर रही हैं। आशा है कि वे एक नये उपचार की खोज कर सकेंगी। इस शृंखला में हम जानेंगे बैरिसिटिनिब के बारे में।

जापान सरकार ने कोरोनावायरस के उपचार के लिए 4 औषधियों को स्वीकृति दी है। इनमें संधिवात गठिया यानि रुमेटॉइड अर्थराइटिस के इलाज में उपयोग होने वाली सूजन-रोधी दवा बैरिसिटिनिब को अप्रैल 2021 में स्वीकृति मिली। यह दवा गोली के रूप में उपलब्ध है और यह केवल मध्यम या तीव्र लक्षण वाले रोगियों को रेमडेसिविर के साथ दी जा सकती है।

एक अंतरराष्ट्रीय नैदानिक परीक्षण में पाया गया कि जब बैरिसिटिनिब को रेमडेसिवीर के साथ रोगियों को दिया गया तो वे अकेले बैरिसिटिनिब दिये जाने वाले रोगियों की तुलना में औसतन एक दिन पूर्व ठीक हो गये।

यह जानकारी 8 सितंबर तक की है।

प्रश्न.300. कोरोनावायरस के लिए औषधि भाग - 2 / डेक्सामिथासोन क्या है?

उत्तर.300. विश्व भर के अनुसंधान केन्द्र और दवा कम्पनियाँ कोरोनावायरस के उपचार में प्रभावी दवाओं के नैदानिक परिक्षण कर रही हैं। आशा है कि इससे एक नये उपचार की खोज की जा सकेगी। कोरोनावायरस की दवाओं से संबद्ध इस शृंखला की दूसरी कड़ी में डेक्सामिथासोन पर चर्चा की जा रही है।

जापान सरकार ने कोरोनावायरस के उपचार के लिए चार दवाओं को स्वीकृति दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जुलाई 2020 में वायरस के इलाज के विकल्प के रूप में डेक्सामिथासोन की अनुशंसा की थी। डेक्सामिथासोन, एक स्टेरॉयड है जो सूजन और एलर्जी यानि प्रत्यूर्जता को कम करने में प्रभावी है। इसका उपयोग संधिवात गठिया यानि रूमेटॉइड अर्थराइटिस और निमोनिया के गंभीर मामलों के इलाज के लिए किया जाता है।

ब्रिटेन में हुए नैदानिक परीक्षण से पता चला है कि यह दवा, कोविड-19 के गंभीर लक्षण वाले रोगियों में मृत्यु के जोखिम को कम करती है। जापान में रेमेडेसिविर के साथ डेक्सामिथासोन का उपयोग व्यापक रूप से हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस उपचार के चलते 2020 के वसंत में वायरस की पहली लहर के बाद मृत्यु दर में बड़ी गिरावट देखी गयी।

उपरोक्त जानकारी 7 सितम्बर तक की है।

प्रश्न.299. कोरोनावायरस के लिए औषधि भाग - 1 / रेमडेसिविर क्या है?

उत्तर.299. विश्व भर के अनुसंधान केन्द्र और दवा कम्पनियाँ कोरोनावायरस के उपचार में प्रभावी दवाओं के नैदानिक परिक्षण कर रही हैं। आशा है कि इससे एक नये उपचार की खोज की जा सकेगी। इस नयी शृंखला की पहली कड़ी में जानेंगे रेमडेसिविर के संबंध में।

जापान सरकार ने कोरोनावायरस के उपचार के लिए चार दवाओं को स्वीकृति दी है। मई 2020 में वायरस-रोधी दवा रेमडेसिविर को आपात स्थिति में उपयोग के लिए विशेष अनुमति दी गयी थी। सरकार द्वारा स्वीकृत चार दवाओं में सर्वप्रथम स्वीकृति इसे मिली थी।

रेमडेसिविर को मूल रूप से इबोला वायरस से संक्रमित लोगों के उपचार के लिए विकसित किया गया था। यह दवा नसों में ड्रिप के माध्यम से दी जाती है। इस दवा का उपयोग कृत्रिम श्वसन यंत्र और हृदय-फेफड़े मशीन जैसे यंत्रों पर आश्रित गंभीर रूप से बीमार रोगियों के लिए ही सीमित है। लेकिन जनवरी 2021 में सरकार ने उन रोगियों के उपचार में भी इसके उपयोग की अनुमति दी जिनमें मध्यम स्तर के लक्षण उभर रहे हों या निमोनिया हो गया हो।

उपरोक्त जानकारी 6 सितम्बर तक की है।

प्रश्न.298. बच्चों में तेज़ी से बढ़ता संक्रमण भाग-5 / सरकार ने कक्षाएँ बंद करने के संबंध में क्या दिशानिर्देश जारी किये हैं?

उत्तर.298. अब तक, जब किसी बच्चे या स्कूल कर्मचारी में कोरोनावायरस संक्रमण की पुष्टि होती थी तब जन स्वास्थ्य केन्द्र स्थिति की जाँच कर और संक्रमित लोगों के निकट संपर्क में आने वाले लोगों की पहचान कर शिक्षा मंडल को सुझाव देता था कि कक्षाएँ बन्द की जानी चाहिए या नहीं। जन स्वास्थ्य केन्द्र के सुझाव पर कक्षा बन्द करने या जारी रखने का निर्णय शिक्षा मंडल पर निर्भर करता था। लेकिन इन स्वास्थ्य केन्द्रों पर काम का अत्यधिक दबाव है, विशेषकर आपातकाल वाले इलाकों में, जिस वजह से जन स्वास्थ्य केन्द्र के जाँच कार्य में हो रहे विलम्ब को लेकर चिन्ता जतायी जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय ने मामले पर विचार किया और जाँच के लिए विशेष मानदंड निर्धारित किये।

इन मानदंडों के अनुसार संक्रमित व्यक्ति के बारे में जानकारी मिलने पर स्कूल द्वारा उठाये जाने वाले क़दमों की स्पष्ट और विस्तृत जानकारी दी गयी है। स्कूल उन सभी लोगों की सूची तैयार करेगा जो संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में आये हैं या जिन लोगों की जाँच की जानी चाहिए।

दिशानिर्देशों में कहा गया है कि जब जाँच करवाने वाले के लिए किसी विशिष्ट व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो तब कक्षा के सभी बच्चों की जाँच करनी चाहिए।

दिशानिर्देश के अनुसार एक ही कक्षा में बहुत सारे बच्चे संक्रमित पाये जाने पर कक्षा को बन्द करना चाहिए।

अगर एक ही छात्र में संक्रमण की पुष्टि होती है, लेकिन अन्य कई बच्चों में सामान्य सर्दी ज़ुकाम के लक्षण दिखाई दें, या फिर कुछ बच्चे संक्रमित छात्र के निकट सम्पर्क में पाये गए हों और संक्रमण फैलने की आशंका हो तो स्कूल पाँच से सात दिनों के लिए बन्द करना चाहिेए।

इसके अलावा, दिशानिर्देशों के अनुसार एक ही वर्ग की कई कक्षायें बन्द होने पर उस वर्ग की सभी कक्षायें बन्द करना होंगी क्योंकि प्रबल संभावना है कि संक्रमण उक्त कक्षा वर्ग में फैल चुका है। अगर किसी स्कूल में अलग अलग-अलग वर्ग की बहुत सारी कक्षायें बन्द की गयी हैं तो स्कूल को अस्थायी तौर पर बन्द करना आवश्यक है।

उपरोक्त जानकारी 3 सितम्बर तक है।

प्रश्न.297. बच्चों में तेज़ी से बढ़ता संक्रमण भाग-4 / कोरोनावायरस के डेल्टा प्रकार से क्या बच्चों के प्रभावित होने की अधिक संभावना है?

उत्तर.297. जापान के राष्ट्रीय संक्रामक रोग संस्थान के शोधकर्ताओं ने अप्रैल के बाद जापान में कोरोनावायरस से संक्रमित हुए सभी लोगों को आयु वर्ग में वर्गीकृत कर डाटा का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि जुलाई तक 18 या उससे कम आयु के युवाओं के अनुपात में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। जुलाई में वायरस का डेल्टा प्रकार काफी फैल चुका था। इस अध्ययन में 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को शामिल नहीं किया गया क्योंकि टीकाकरण के कारण इस आयु वर्ग में संक्रमण कम हो गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार परिणामों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि यह प्रकार बच्चों के लिए अधिक हानिकारक है।

राष्ट्रीय संस्थान के प्रमुख और कोरोनावायरस संक्रमण पर स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञों की समिति के अध्यक्ष वाकिता ताकाजि का इस प्रश्न पर कहना था कि वायरस से संक्रमित बच्चों की संख्या बढ़ रही है क्योंकि संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़ रही है और वयस्क, जो बाहर संक्रमित हो जाते हैं उनसे घर में बच्चे संक्रमित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं है कि फ़्लू होने के मौसम में भी स्थिति ऐसी ही होगी क्योंकि बच्चों में ऐसे समय में फ़्लू वायरस फैलने के कारण संक्रमण ख़तरा बढ़ जाता है।

उपरोक्त जानकारी 2 सितंबर तक की है।

प्रश्न.296. बच्चों में तेज़ी से बढ़ता संक्रमण भाग-3 / क्या बड़ी उम्र के बच्चों में विद्यालय में संक्रमण होने की संभावना अधिक है?

उत्तर.296. स्वास्थ्य मंत्रालय की एक हालिया रिपोर्ट दर्शाती है कि विद्यालयों में अधिक आयु के बच्चों में संक्रमण दर अधिक है।

मंत्रालय के अधिकारियों ने अप्रैल से जुलाई के अंत तक संक्रमित होने वाले 3 से 18 वर्ष की आयु वाले उन 6,600 बच्चों का विश्लेषण किया जिनके संक्रमण मार्ग का पता करने में वे सक्षम थे। संक्रमण की पुष्टि होने वाले सभी लोगों का डाटा रखने वाले मंत्रालय के डाटा कोष के आँकड़ों के आधार पर उन्होंने यह विश्लेषण किया। इसके नतीजों को 25 अगस्त को मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति की बैठक के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

रिपोर्ट दर्शाती है कि 3 से 5 वर्ष की आयु के बच्चों में 59.8 प्रतिशत को घर पर, 19.8 प्रतिशत को आँगनवाड़ी या बाल कल्याण केंद्रों और 15.9 प्रतिशत को बालवाड़ी या बाल विद्यालयों में संक्रमण हुआ। 6 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों में 76.6 प्रतिशत घर पर तथा 14.6 प्रतिशत विद्यालय में संक्रमित हुए। रिपोर्ट के अनुसार 13 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में 60 प्रतिशत घर पर और 33 प्रतिशत विद्यालय में संक्रमित हुए और 16 से 18 वर्ष के सर्वाधिक आयु वाले बच्चों में से 45.7 प्रतिशत को विद्यालय में तथा 39.4 प्रतिशत को घर पर संक्रमण हुआ।

लेकिन रिपोर्ट कहती है कि विश्लेषक कुल मामलों के 20 प्रतिशत से भी कम में यह सुनिश्चित करने में सक्षम थे कि बच्चों को संक्रमण कैसे हुआ। इसके बावजूद रिपोर्ट कहती है कि विश्लेषण से एक चलन स्पष्ट रूप से दिखता है कि जितनी अधिक बच्चों की आयु है उतना ही अधिक उनके विद्यालय में संक्रमित होने का अनुपात है।

यह जानकारी 1 सितंबर तक की है।

प्रश्न.295. बच्चों में तेज़ी से बढ़ता संक्रमण भाग-2 / विद्यालय बंद किये जाने के लिए किन परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए?

उत्तर.295. जापान में बच्चों में कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जापान शिशुरोग संस्था और जापान शिशुरोग संघ ने बृहस्पतिवार को ऑनलाइन बैठक कर विद्यालयीन गतिविधियों पर अपने विचार दिये।

उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस का अत्यधिक संक्रामक डेल्टा प्रकार तेज़ी से फैल रहा है और अधिक संख्या में बच्चे संक्रमित हो रहे हैं। विद्यालयों में संक्रमण मामलों की बढ़ती संख्या के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कोचिंग केंद्रों सहित अन्य प्रतिष्ठानों में व्यापक संक्रमण-रोधी उपायों की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि नया सत्र शुरू होने पर, देशभर में सभी विद्यालयों को एक ही समय में बंद करने की आवश्यकता नहीं है और प्रत्येक क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाना चाहिए या बच्चों को अलग-अलग समय में विद्यालय में प्रवेश दिया जाना चाहिए। शिशु रोग विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारियों से निर्धारित समय-सीमा और अन्य मानकों को प्रस्तुत करने के लिए कह रहे हैं।

प्राथमिक विद्यालय बंद होने की स्थिति में कुछ अभिभावकों को काम से अवकाश लेना पड़ सकता है। चिकित्सकों ने कहा कि ऐसी स्थिति में कार्यस्थलों से सहयोग और हमदर्दी ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में संक्रमण की प्रकृति वयस्कों जैसी ही है इसलिए विशेष तौर पर उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में दूरस्थ शिक्षा का सक्रिय रूप से उपयोग किया जाना चाहिए।

बिना बुने कपड़े से बने, उपयोग करके फेंकने लायक यानि डिस्पोज़ेबल मास्क, वायरस के संचरण को रोकने में महत्त्वपूर्ण हैं। लेकिन बड़ी मात्रा में इनका उपयोग किया जाएगा, अतः बाल रोग विशेषज्ञों के दोनों समूहों ने कहा कि बच्चों को ये मास्क निःशुल्क उपलब्ध करवाने पर विचार किया जाना चाहिए, ताकि परिवारो